Tuesday, June 16, 2009

धुरंधर ढेर

खिलाडीयो को थोडा विनम्र
और क्रिकेट प्रमियों को थोडा
सयंत होना सीखना चाहिए







जब आँस्ट्रेलिया की टीम ट्वेंटी - ट्वेंटी विश्व कप से बाहर हो गई तब यह कहा गया कि चूंकी उसके खिलाडी आईपीएल नही खेले थे, इसका खामियाजा उन्हे भुगतना पडा। अब पूर्व चैंपियन भारत की टीम बाहर हो गई, जो एकमात्र टीम है, जिसके सारे के सारे खिलाडी आईपीएल मे खेले तो क्या उसका दोष आईपीएल की थकान पर डाला जाए। अधिकतर पुर्व खिलाडी ने कहा भी था कि ट्वेंटी विश्व कप मे आईपीएल के अनुभव से फायदा होगा , मगर यहां तो सारे दाव उल्टे पड गये। हार के कारण तो अभी गिनाये जाएगें उनमे कई सही भी होंगे लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हम भारतीयो को सिखना चाहिए कि जीत के बाद विजय जुलूस न निकाले और हार के बाद गगनभेदी चीख पुकार न मचाएं। खिलाडी खेलते है तो कभी जितते है तो कभी हारते है। ऐसे मे न उन्हे सिर पर बैठाना चहिए और न ही , हारने के बाद जमीन पर पटक देना चाहिए कि खिलाडीयो को हारने के बाद अपने और अपने परिवार वाले की सुरक्षा बढवानी पडे। एक और सबक जो बीसीसीआई वालो को सीखना चाहिए, हालाकीं सीखने मे उनका रिकार्ड बहुत खराब है, वह यूं है कि पैसा और ग्लैमर खेल मे सर्वश्रेष्ठ विकल्प नही हो सकते।

पैसा खेल के लिए जरुरी है, और ग्लैमर भी बुरा नही है लेकिन लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए इसे थोडा पिछे छोडना चाहिए। कप्तान महेन्द्र सिहं धोनी का अब तक शानदार वक्त चल रहा था, भारतिय क्रिकेट प्रेमी उन्हे सिर आखों पे बिठाए हुए थे, अब जब उन्होने क्रिकेट प्रेमीयों का दूसरा रुप भी देख लिया है ।।संभव है उन्हे और दूसरे युवा खिलाडीयो को यह थोडा विनम्र बनाए, शायद यह सबक ही इस विश्व कप की उपलब्धि हो। यह थोडा विनम्र बनाए, शायद यह सबक ही इस विश्व कप की उपलब्धि हो।।

No comments:

Post a Comment

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।