Monday, June 29, 2009

कॉलेजो मे ड्रेस कोड का विरोध कितना जायज ?

डिग्री कॉलेजो मे क्षात्राओ के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर रोक के प्राचार्यो के फैसले का विरोध शुरु हो गया है। विरोध करने वाले लोग कहते है कि यह कॉलेजो मे तानाशाही है। जबकि कॉलेज प्राचार्यो का कहना है कि ड्रेस कोड से लङकियो के साथ होने वाले अपराध को कम किया जा सकता है।
बच्चे कालेजो मे लिए जाते है। आजकल जिस तरह के कपङे लङकिया पहनकर कॉलेजो मे आती है, उससे देखकर नहीं लगता कि वे पढने आई है। देखकर लगता है कि वे कपङो के माध्यम से अश्लील प्रदर्शन करने आई है। आजादी का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि जो मन आए पहन लिया जाए।कपङे पहनने के लिए माहौल का भी ध्यान रखना चाहिए। कॉलेजो मे ड्रेस कोड होना चाहिए इससे बच्चो मे हीन भावना भी नही पनपती कि ये गरीब है और ये अमीर है। ड्रेस अनुशासन के दायरे मे रखने मे भी सहायाक होता है। जहां अनुशासन नहीं होता वहां कभी व्वयस्था ठीक हो ही नही सकती है। इसलिए कॉलेजो मे ड्रेस कोड लागु होना चाहिए, और जो लोग विरोध कर रहे है उन्हे केवल करना है, इसलिए वह इस तरह की बाते कर अपने को लाइम लाइट रखना चाहते है ।।

8 comments:

  1. mithilesh ji bahut accha likha hai aise to college mein ladkiya jense pehen karke aati hai jis se ladko ka atraction ladkiyo ke taraf bana rehta hai aap ke kahna bilkul sahi hai , aur agar dekha jaye to ye hamare smaj ko bhi dusit kar raha hai.upyogi lekh.

    ReplyDelete
  2. आपके समाज में अदूषित बचा क्या है जिसे कोई दूषित कर सकेगी?
    घुघूती बासूती

    ReplyDelete
  3. मिथिलेश जी आपकी सोच बहुत अच्छी है। अब वह समय आ गया है जब प्रत्येक अभिवावाक को अपनी सभ्यता को ध्यान मे रखते हुये ड्रेस कोड का समर्थन करना चाहिये जिससे हमारी सभ्यता और मर्यादा ढकी रहे।

    ReplyDelete
  4. bahut khoob !
    aap sahi kah rahe hai . pahnave ka logo par bahut asar padta hai. agar koi ladki salike ke kapde pahan kar nikalti hai to uspe log shayad utne fitre n kase jitne ek jeans wali par . isi tarah likhte rahiye janab achchha likhte hai .

    ReplyDelete
  5. bahut accha likha hai mithilesh tumne ekdam sahi aur satik, bas aise hi likhte raho..

    aasheerwaad

    didi

    ReplyDelete
  6. सांगत से गुण होत है , सांगत से गुण जात | अब जब बच्चे ४-५ घंटे उल-जलूल टीवी पे देखते रहेंगे तो उनके लिए टीवी का उल-जलूल ही फैशन बन जाता है | और हम अभिवावकों का क्या कहना अपने बच्चे से अंग्रेजी मैं ही बात करेंगे, कभी अपनी सभ्यता-संस्कृति का सही अर्थ नहीं समझायेंगे और समझायेंगे कैसे अपने को खुद ही नहीं पता |

    ReplyDelete
  7. BAHUT ACHHA LAGA YEH PADHKAR. KI AAP JAISE YUVA KI ITNI SUNDAR VICHAARDHARA HAI.

    ReplyDelete
  8. bahut khub dubey ji, aap ne ek sashkat mudde ko uthaya hai hai, aap bahut accha likhte ho. abhar

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।