Sunday, July 19, 2009

।।ऐ मोहब्बत् अगर तु ना होती।।

।।ऐ मोहब्बत् अगर तु ना होती
तो मेरी जिन्दगी मे विरानिया ना होती
ना होता खुशियो का इन्तजार मुझे
क्यो कि मेरी जिन्दगी में उदासी ना होती।

ना होता तुझसे बिछङने का डर
क्यो किं मै तेरे इन्तजार मे ना होता
ना बहते मेरे आंखो से अश्क के धारे
अगर मुझे तेरे जाने का गम ना होता।
ऐसा भी क्या हुआ कि तुमने मुझे ठुकरा दिया
जब पुछा मैने तो तुमने मुझे बेवफा ठहरा दिया।

ऐ मोहब्बत अगर तु ना होती
शरारत ना होती, शिकायत ना होती
नैनो मे किसी की नजाकत ना होती
ना होती बेकारी ना होते हम तन्हा
किसी को चाहने की तमन्ना ना होती
दिल भी ना होता तन्हा ना रोता दिवानो सा
अपनी ये हालत ना होती
ऐ मोहब्बत् अगर तु ना होती।।

10 comments:

  1. बहुत खूब मिठिलेश जी,, मुहब्बत के इर्द गिर्द सारी कायनात की कल्पना कर दी है आपने ..लिखते रहे

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  2. bahut khub dubey ji .
    dil ko chune wali rachna hai. badhai

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  3. ना होती बेकारी ना होते हम तन्हा
    किसी को चाहने की तमन्ना ना होती
    दिल भी ना होता तन्हा ना रोता दिवानो सा
    अपनी ये हालत ना होती
    ऐ मोहब्बत् अगर तु ना होती।।

    bahut khub dubey ji. sundar rachna hai .

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  4. मोहब्बत के दर्द ने इतना घायल कर दिया,
    वफ़ा को, बेवफ़ाई के काँटों का ताज पहना दिया,

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  5. vah dost aapne dil ka dard jo apne kavita me bya kiya hai wo dil ko chhu lene wali hai achha laga aapki kavita padh kar.

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  6. aye mhubat agar tu na hoti lawjo pe aa ke ruk jaye aur baat puri ho jaye,
    koi ankho me bat kar leta hai, koi ankho me hi mulakat kar leta hai... bada muskil hota javab dena, jab koi khamosh reh kar swal kar leta hai...

    likhne wale ko salam , aur khamosh mohabat ka hamar ye paigam, wah...

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  7. Behad sundar rachna..!

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