Sunday, August 9, 2009

"मैं तन्हा"

अपनाने से पहले ठुकरा दिया होता
जैसा हूँ मेरे हाल पे छोङ दिया होता
मुझे कर के तन्हा हँसती हो मुझपे
काश तुने ये इकरार से पहले किया होता।।



आँखे नम हो जाती हैं मेरी उसके लिए
काश तुने मुझे तन्हाई ना दि होती
ना होता तन्हा, होता जिन्दगीं का पल खूशनुमा
अगर मोहब्बत् को उसने रुसवा ना किया होता।।



मैं अब भी जिता हूँ उसके इन्तजार मे
मैं बैठा रहता हूँ अब भी उसके ही आश मे
हे भगवान तुने मुझे तन्हाई ना दि होती है
काश तन्हाई की जगह मौत का पैगाम दिया होता है।।



तु क्या जाने ये दर्द क्या होता है
जमाना क्या जाने ये मोहब्बत् क्या होती है
तु छोङ जाती है मुझे हर रोज हि इस हाल मे
कभी मुङ के देखना, ये गमे जुदाई क्या होती है।।

14 comments:

  1. bhai waah...........
    bahut achhe vichaar !
    achhi shabdaavali aur khoob urja nazar aati hai

    jiyo...........badhaai !

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  2. क्या बात है, बहुत ही ख़ूबसूरत........जवाब नहीं, सारी संजीदगी भर दी है

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  3. बहुत बढ़िया और शानदार रचना! इस बेहतरीन रचना के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

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  4. शाबाश!
    बढ़िया लिख रहे हो।
    लिखते रहो।

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  5. तु क्या जाने ये दर्द क्या होता है
    जमाना क्या जाने ये मोहब्बत् क्या होती है
    तु छोङ जाती है मुझे हर रोज हि इस हाल मे
    कभी मुङ के देखना, ये गमे जुदाई क्या होती है

    shaandaar rachn है............. सच में game judaai हर कोई नहीं समझ सकता......... bichudne के गम को लाजवाब utaara है इस रचना में.........

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. bhuut khub mitr kaafi prem me page ho tftis-ae-mohabbat bhut achhi tarah se kiya hai
    मुझे कर के तन्हा हँसती हो मुझपे
    काश तुने ये इकरार से पहले किया होता।।
    hahah hahahah nahaha dhnybaad
    saadar
    praveen pathik
    9971969084

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  8. ऐसे बेवफ़ाओं को याद करना छोड़ो भी !

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  9. क्या करूं भाई दिल है की भुलने को तैयार हि नही ।

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  10. भई वाह! विवेक की बात में आना।

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  11. ज़िन्दगी आपके करीब हैं ,ज़ी कर देखों तुम्हारे अन्दर हैं ,वेबफाओ को तो याद करना नहीं पड़ता ,ये ज़ालिम रूह तलक उतर जाते है कम्बखत .................पर याद रहे जिंदगी हर हाल में खुबसूरत और निहायत ज़रूरी हैं .......आपके पास तो कलम का इश्क हैं ................और इश्क ही मालिक हैं

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  12. तु क्या जाने ये दर्द क्या होता है
    जमाना क्या जाने ये मोहब्बत् क्या होती है
    तु छोङ जाती है मुझे हर रोज हि इस हाल मे
    कभी मुङ के देखना, ये गमे जुदाई क्या होती है।।

    क्या बात है, बहुत ही ख़ूबसूरत

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  13. बहुत बढिया दिल को छु गयी आपकी ये रचना।

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