Saturday, August 15, 2009

"जरा याद इन्हे भी कर लें"

आजादी की सालगिरह में आजादी के परवानों को तो याद किया ही जा रहा है, लेकिन उन गुमनाम हीरोज़ को भी याद करने की जरूरत है, जिन्होंने अपने तरीके से आजादी की मशाल जलाई।
हम आजादी के अवसर पर बङे लोगो को याद तो करते हैं, लेकिन इनके बिच कुछ नाम ऐसे भी है जिनको बहुत कम ही लोग जानते है। वहीं देखा जाये तो हमारे आजादी मे इनका योगदान कम नही है। इनका नाम आज भी गुमनाम है, लेकीन इन्होने जो किया वह काबिले तारीफ है। ये वे लोग जिन्होने आजादी के लिए बिगूल फुकंने का काम किया और ये लोग अपने काम मे सफल भी हुये। तो आईये इस आजादी के शुभ अवसर पे इनको याद करें और श्रद्धाजंली अर्पित करें।
ऊधम सिंह- ऊधम सिंह ने मार्च 1940 में मिशेल ओ डायर को मारकर जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लिया। इस बाग में 4,000 मासूम, अंग्रेजों की क्रूरता का शिकार हुए थे। ऊधम सिंह इससे इतने विचलित हुए कि उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया और एक देश से दूसरे देश भटकते रहे। अंत में वह लंदन में इस क्रूरता के लिए जिम्मेदार गवर्नर डायर तक पहुंच गए और जलियांवाला हत्याकांड का बदला लिया। ऊधम सिंह को राम मोहम्मद सिंह आजाद के नाम से भी पुकारते थे। जो हिंदू, मुस्लिम और सिख एकता का प्रतीक है।

जतिन दास - जतिन को 16 जून 1929 को लाहौर जेल लाया गया। जेल में स्वतंत्रता सेनानियों के साथ बहुत बुरा सुलूक किया जाता था। जतिन ने कैदियों के साथ मानवीय व्यवहार करने की मांग पर भूख हड़ताल शुरू कर दी। जेल के कर्मचारियों ने पहले तो इसे अनदेखा किया, लेकिन जब भूख हड़ताल के 10 दिन हो गए तो जेल प्रशासन ने बल प्रयोग करना शुरू किया। उन्होंने जतिन की नाक में पाइप लगाकर उन्हें फीड करने की कोशिश की। लेकिन जतिन ने उलटी कर सब बाहर निकाल दिया और अपने मिशन से पीछे नहीं हटे। जेल प्रशासन ने जबरदस्ती दवाई देने की कोशिश की। लेकिन जतिन ने अपनी तपस्या जारी रखी। जतिन की हालत बिगड़ती गई और 13 सितंबर 1929 को अंग्रेजों के काले कानून से लड़ते हुए जतिन शहीद हो गए।

हिंदुस्तानी लाल सेना- एक ग्रुप नागपुर के जंगलों में गुरिल्ला वॉर के लिए खुद को तैयार कर रहा था। ब्रिटिश शासन के खिलाफ गुरिल्ला वॉर छेड़ने वाला यह शायद उस वक्त इकलौता ग्रुप था।



11 comments:

  1. बहुत ही बढिया और क्या कहे आपने जो याद किया है ..............वह कबिले तारिफ है ..........बधाई

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  2. भूले शहीदों की कुर्बानी को फिर याद करा दी ....काश हम उन्हें सिर्फ आज ही नहीं हमेशा याद रखें तो उनकी शहादत हमें गलत रास्ते पर जाने से बचायेगी ....स्वतंत्रता दिवस की बधाईयाँ

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  3. भूले शहीदों की कुर्बानी को फिर याद करा दी ....काश हम उन्हें सिर्फ आज ही नहीं हमेशा याद रखें तो उनकी शहादत हमें गलत रास्ते पर जाने से बचायेगी ....स्वतंत्रता दिवस की बधाईयाँ

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  4. मित्र कभी कभी दिल को छूने बाले मुद्दे उठा देते हो ,,,,हम जिन्हें याद करते है उनके कितने कथन पर चलते है ,,
    बधाई हो इस पोस्ट के लिए
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  5. अच्छी पोस्ट. शुक्रिया.

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  6. सभी जाने और अनजाने शहीदों को श्रद्धाँजलि. बधाई हो इस पोस्ट के लिए

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  7. वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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  8. Ssach kaha hai..........yadi aise veer aur aneko anaam log apni kurbani na dete to ye swatantrata hamko naseeb na hoti...shaandaar post hai aapki.....aapke jajbe ko salaam....

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  9. Bahut Barhia... isi tarah likhte rahiye


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  10. "ऊधमसिंह" के नाम पर
    नैनीताल से अलग किए गए
    उत्तराखंड (भारत) के एक जनपद का नाम
    "ऊधमसिंहनगर" रखा गया है,
    जहाँ इस समय मैं रहता हूँ!

    वे सभी मार्मिक अनुभूतियाँ भी ताज़ा हो गईं,
    जो जलियाँवाला बाग़ में जाने पर हुई थीं!

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  11. वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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