Thursday, August 20, 2009

"एक बार और जिन्ना बने अलगाव का कारण"

मोहम्मद अली जिन्ना (जन्म- 25 दिसंबर, 1876 मृत्यु 11 सितंबर 1948) बीसवीं सदी के जाने-माने राजनीतिज्ञ थे। उन्हें पाकिस्तान के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। वे मुस्लिम लीग के नेता थे और पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने। पाकिस्तान में, उन्हें आधिकारिक रूप से कायद-ए-आज़म यानि महान नेता और बाबा-ए-कॉ़म यानि राष्ट्रपिता के नाम से जाना जाता है। उनके जन्म दिन को पाकिस्तान में अवकाश रहता है। भारतीय राजनीति में जिन्ना का उदय 1916 में कांग्रेस के एक नेता के रूप में हुआ था, जिन्होने हिंदू-मुस्लिम एकता पर जोर देते हुए मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौता करवाया था। वे अखिल भारतीय होम रूल लीग के मुख्य नेताओं में गिने जाते थे। भारतीय मुसलमानों के प्रति कांग्रेस के उदासीन रवैये को देखते हुए जिन्ना ने कांग्रेस छोड़ दी। उन्होंने देश में मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा और स्वशासन के लिए चौदह सूत्रीय संवैधानिक सुधार का प्रस्ताव रखा। लाहौर प्रस्ताव के तहत उन्होंने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र का लक्ष्य निर्धारित किया. 1946 में ज्यादातर मुस्लिम सीटों पर मुस्लिम लीग की जीत हुई और जिन्ना ने पाकिस्तान की आजादी के लिए तत्वरित कार्रवाई का अभियान शुरू किया. कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया के कारण भारत में व्यापक पैमाने पर हिंसा हुई. मुस्लिम लीग और कांग्रेस पार्टी, गठबंधन की सरकार बनाने में असफल रहे, इसलिए अंग्रेजों ने भारत विभाजन को मंजूरी दी. पाकिस्तान के गवर्नर जनरल के रूप में जिन्ना ने लाखों शरणार्थियो के पुनर्वास के लिए प्रयास किया. साथ ही, उन्होंने देश की विदेशनीति, सुरक्षा नीति और आर्थिक विकास की नीति बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

और इस तरह से मोहम्मद अली जिन्ना को भारत बंटवारे का सबसे बङा कारण माना जाता है। लेकिन उस समय किसी को ये न मालुम था कि मोहम्मद अली जिन्ना मरने के बाद भी अपने काम को करते रहेगें, जी हाँ काम से मेरा तातर्पय है अलगाव का इसका ताजा उदाहरण आपको मिल जायेगां जसवंत सिंह की किताब को लेकर भारतिय जनता पार्टी और जसवंत सिहं के बिच हुए अलगाव का, मतलब मोहम्मद अली आज भी अलगाव का कारण बन रहें हैं।। जसवंत सिंह को अपनी पुस्तक- 'जिन्ना : इंडिया, पार्टिशन, इंडिपेंडेंस' में जिन्ना की तारीफ करने और देश के विभा जन के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल पर उंगली उठाए जाने के लिए बीजेपी ने बुधवार को पार्टी से निष्कासन का दंड दिया। इससे पहले बीजेपी ने खुद को जसवंत सिंह के विचारों से अलग कर लिया था। अपने सीनियर नेता की सदस्यता खत्म करने का फैसला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने शिमला में लिया संसदीय बोर्ड का सदस्य होने के बावजूद जसवंत सिंह को फोन पर यह सूचना दी गई कि वह चिंतन बैठक में न आएं।


भारत का बंटवारा कराने के लिए नेहरू दोषी थे या फिर जिन्ना? जिन्ना हिंदू विरोधी थे या नहीं? सारे मुसलमानों को पाकिस्तान न भेजने का फैसला सही था या गलत? इस बात को अब 62 साल हो चुके हैं। नई पीढ़ी के लिए अब इस बहस का क्या मतलब है? इतिहास में जो हुआ सो हुआ, वह अब बदलने वाला नहीं है। तो फिर क्यों गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं? क्या अब हमें अतीत की बजाय भविष्य पर ध्यान नहीं देना चाहिए?

3 comments:

  1. Bahut Barhia... isi tarah likhte rahiye...

    http://hellomithilaa.blogspot.com
    Mithilak Gap... Maithili Me

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    Aapke Bheje Photo

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    Manpasand Gaane

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  2. जिन्ना के जिन्न से रूबरू कराने के लिए धन्यवाद।

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  3. दुबे जी काफी विचार कर और संयम पूर्ण लिखा है जिन्ना के बारे में ,,,, मै इस बात से सहमत हूँ की इतिहास को इतिहास की तरह से ही लेना चाहिए और ख़ास कर बुरे इतिहास को
    धन्यबाद
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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