Saturday, August 22, 2009

"फलक तक तुम साथ चलो "

फलक तक तुम साथ चलो
दिल के अरमां कह देगें
जो बात जुबा से ना कह पाये
वो नजरो से कह देगें।।

सभी से मोहब्बत की नही जाती
सभी से हाले दिल बयां की नही जाती
जब मिलते है मोहब्बत करने वाले
तो बात लफ्जो से की नही जाती।।

मोहब्बत होगी तो आँखो से दिखाई देगी
सपनो मे हमारी परछाई दिखाई देगी
कदम रखना संभल के मोहब्बत मे
दिल टुटा तो दरारें दिखाई देगीं।।

17 comments:

  1. दिल को छूने वाली अभिव्यक्ति

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  2. baat to sahi hai....kuchh baatein kahi nahi jatee.....khoobsurat kavita...

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  3. मिथिलेश जी सही में कहूं तो ये मेरे हिसाब से आपकी अभी तक की मैं बेहतरीन रचना पढ़ रहा हूं, कोई लाग लपेट नहीं शब्द ऐसे पिड़ोए गए हैं मानों वो अभी बोल पड़ेगें, क्या बेहतरीन थीम, विषय पुराना अंदाज नया साथ में फीलींग्स की परख सबकुछ लाजवाब

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  4. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!!

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  5. मिथिलेश जी...सुन्दर अभिव्यक्ति ...लिखते रहें...

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  6. कदम रखना संभल के मोहब्बत में
    दिल टुटा तो दरारें दिखाई देगीं।।...बिल्कुल सही..दिल टूटने पर दरारें ही दरारें नजर आती हैं...
    दर्द-ए-दिल कमबख्त चीज ही ऐसी,
    कि कर दे ऐसी की तैसी

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  7. बहुत सुन्दर कविता है मगर अपनी कही को याद रखना
    कदम रखना संभल के मोहब्बत मे
    दिल टुटा तो दरारें दिखाई देगीं।।
    हा हा हा आशीर्वाद्

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  8. दिल को छू गया गीत.

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  9. adbhoot !!

    मोहब्बत होगी तो आँखो से दिखाई देगीसपनो मे हमारी परछाई दिखाई देगीकदम रखना संभल के मोहब्बत मेदिल टुटा तो दरारें दिखाई देगीं।

    Lage hai sarhedein darshan gharon ke beech ki doori,
    mila tu haath haato se gira diwar chutki main.

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  10. सुन्दर रचना । बेहतर अभिव्यक्ति । आभार ।

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  11. बहुत ख़ूबसूरत और दिल को छू लेने वाली रचना लिखा है आपने!

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  12. वाह भाई ... बेहतरीन रचा है |

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  13. सीधी बात नो बकवास ,,,,,...........लिखते रहो

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  14. वाह मिथिलेश जी बहुत खुब , आपकी ये रचना तो दिल को छू गयी।

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  15. लाजवाब बहुत खुब लिखा है।

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