Monday, August 31, 2009

"तेरी याद में"

तुझसे मिलने को बेकरार रहता है कोई
हर पल मेरे ख्वाबो मे रहता है कोई
मरना तो है एक-न-एक दिन
लेकिन याद में तेरे हर पल मरता है कोई।।


हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
हम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।


आवाज नही निकलती खफा होने के डर से
हम इजहार नही करते है रुसवा होने के डर से
बङी मुश्किल से पाया है तुमको
हम मिलने की बात नही करते जुदा होने के डर से।।

18 comments:

  1. हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
    हम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
    दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
    याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।

    कमाल है भाई ......बेहद खुबसूरत रचना

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  2. बेहतरीन रचना!!

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  3. वाह दुबे जी बहुत सुन्दर............

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  4. बहुत खूब दुबे जी अति सुंदर.....

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  5. बहुत खूब दुबे जी अति सुंदर.....

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  6. behtarin bhai ...bahut khub accha likha hai aapne

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  7. वल्लाह! दुबे जी .............जवानी याद आ गयी वैसे मैं अभी जवान हूँ बस आपसे थोडा छोटा हूँ .............कायल हुए हम आपके या ज़रा ऐसे कह लू हम दिल दे चुके दुबे जी ................

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  8. हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
    हम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
    दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
    याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है

    UMDAA ....... LAJAWAAB, SACHMUCH SACCHE DIL SE YAAD KARNE PAR AISAA HI HOTA HAI ..... LAJAWAAB LIKKHA HAI...

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  9. Wah... bahut barhia... aise hee likhte rahiye


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  10. बहुत खुब , लाजवाब रचना दुबे जी.......

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  11. रचना पढ़कर आनंद आ गया. एक विनती है- "टंकन त्रुटियों" (जिसमें वर्तनी संबधी गलतियां भी शामिल हैं) के कारण रचना की प्रवाहमानता बाधित हो जाती है. यदि इनसे बचा जाए तो रसास्वादन और अधिक हो जाता है.

    मेरे ब्लॉग पर आने हेतु धन्यवाद आपका....

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  12. आवाज नही निकलती खफा होने के डर से
    हम इजहार नही करते है रुसवा होने के डर से
    बङी मुश्किल से पाया है तुमको
    हम मिलने की बात नही करते जुदा होने के डर से..aap baht achha likhte ho...

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  13. हम वो नही जो धोखे दिया करते हैं
    हम उनमे से हैं जो वफा किया करते है
    दूर रहकर मिल ना शंकू शायद पर
    याद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।

    बेहतरीन अशआरो के लिए,
    बधाई!

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  14. हम वो नही जो धोखे दिया करते हैंहम उनमे से हैं जो वफा किया करते हैदूर रहकर मिल ना शंकू शायद परयाद बनकर साँसो मे बस जाया करते है।।

    मिथिलेश,
    सुन्दर भावः से पूर्ण रचना है....
    दिल से लिखते हो...
    लिखते रहो..
    दीदी

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  15. आवाज नही निकलती खफा होने के डर से
    हम इजहार नही करते है रुसवा होने के डर से
    बङी मुश्किल से पाया है तुमको
    हम मिलने की बात नही करते जुदा होने के डर से।

    bahut khoob bhai..... dil ko choo gayi.......

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  16. अच्छी प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई....

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