Friday, September 4, 2009

"न जानें क्यों याद आ रही है"

बैठे-बैठे किसी को याद कर रहा था,



न जानें किसके लिए दिल बार-बार रो रहा था,


समझा तो देर हो चुकी थी


फिर भी दिल है की इंतजार कर रहा था ।।



न जानें क्यों दिल बार-बार याद कर रहा है,


दिल टुटा फिर भी एक आस कर रहा है,


समझाता हूँ ना कर याद उसे ,


फिर भी दिल है कि एतबार कर रहा है।।


जिसे भुल चुका था एक जमानें पहले


वो आज फिर याद आ रही है न जानें क्यों,
जिसने पहले हँसी और फिर खुन के आँसु दिये थे,
आज फिर उसका बिछङ जाना याद आ रहा है न जांने क्यों।।

15 comments:

  1. भावपूर्ण रचना किसी की याद में बहुत खूब

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  2. भाई मिथिलेश ... ये प्यार बड़ी जालिम रोग है | इस रोग का कोई निश्चित गुण नहीं, व्यक्ती से के साथ साथ ये अपना रूप बदल लेता है पर इसकी तासीर कम नहीं होती |

    बढ़िया लिखा है | लगे रहो |

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  3. thanks for commenting on my blog...

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  4. बहुत बढ़िया रचना!

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  5. "जिसने पहले हँसी और फिर खुन के आँसु दिये थे"

    आख़िर हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है?!

    बहुत अच्छे !

    और मेरे ब्लॉग पर आकर हौसला बढ़ाने के लिए बहुत धन्यवाद !

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  6. यही तो जीवन है ।आँसू देने वाले ही हमेशा याद आते हैं बहुत बडिया रचना है शुभकामनायें।

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  7. रूमानी भाव की सुंदर रचना।
    { Treasurer-S, T }

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  8. भावपूर्ण रचना,शुभकामनायें

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  9. आख़िर हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यों है?!

    बहुत खूब, क्या करे कटु सत्य यही है !

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  10. फिर भी दिल है कि एतबार कर रहा है।।


    जिसे भुल चुका था एक जमानें पहले

    baht hi bhaavpoorna rachna hai......

    yaaden hoti hi hain..... aisi...

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  11. इसने झिंझोड़कर रख दिया था, जब मैं इसको पढ़ रहा था दोपहर के समय...सच में ही...

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  12. ऐसा ही होता है .. बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति !!

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  13. yaad ko kaid kar liya aapne kuch kagaz ke panne per aap bhi kamal ke ho ye yaad hi to jindgi ki anmol kamai hai jo sukh aur dukh me kaam aati hai "

    " bahut hi accha likha hai bhai aapki kis alfaz me tarif karain "

    ----- eksacchai {AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    http://hindimasti4u.blogspot.com

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  14. लाजवाब व उम्दा रचना बहुत-बहुत बधाई।

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