Friday, September 11, 2009

"शहीद सरदार भगत सिहं आतंकवादी थे"-----????

सरदार भगत सिंह भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे । इन्होने केन्द्रीय असेम्बली की बैठक में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया । जिसके फलस्वरूप भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को इनके साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फांसी पर लटका दिया गया । सारे देश ने उनकी शहादत को याद किया। उनके जीवन ने कई हिन्दी फ़िल्मों के चरित्रों को प्रेरित किया । कई सारी फ़िल्में तो उनके नाम से बनाई गई जैसे -शहीद, द लेज़ेंड ऑफ़ भगत सिंह, भगत सिंह इत्यादि।


अब आप लोग सोच रहे होगें कि भगत सिंह आतंकवादी कैसे हो सकते है। जिन्होनें अपने देश के लिए जान तक दे दी वह भला आतंकवादी कैसे हो सकता है। लेकिन देश में गद्दारो की कमी नही होती। अब भी हमारे देश में कुछ लोग है जो खाते तो है हमारा और गाते है किसी और का। अगर आप भारतीय है भारत से प्रेम करंते और हमारे आजादी के लिए शहीद हुए जवानो की इज्जत करतें है, और आप के सामने कोई यह कहे की आजादी के लिए शहीद हुए लोग आतंकवादी जैसे थे तब आपको कैसा लगेगा।

यह सवाल मेरा केवल उनसे है जो भारतीय हो तथा देश से प्रेम करते हो, न की देश के गद्दारो के लिए। अब मै आपको बताने वाला हूँ कि वह है कौन। वह कोई और नहीं हमारे ब्लोग जगत का ही है। उसका नाम सलीम खान है हा आपने सही सुना सलीम खान जिनके ब्लोग का नाम स्वच्छ संदेश-हिन्दोस्तान की आवाज है। अभी तक इनके द्वारा लिखे गये लेखो से ये बात तो साफ थी कि ये हिन्दु विरोधी व कट्टर मुस्लिम वादी हैं। इनके लेखो से ये भी पता चलता है कि इन्होने अपना ब्लोग इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए बनाया है। अच्छी बात है आप अपने धर्म के लिए कुछ कर रहें है। लेकिन आप अपने धर्म प्रचार के लिए किसी और धर्म को गलत ठहराना और उसमे गलतियाँ निकालना ये कहाँ का नियम है।

मै किसी धर्म का विरोधी नही हूँ । बहुत दिनो से देख रहाँ हूँ कि सलीम खान जो मन में आता है लिख देते है। तब तक मै कुछ न बोला क्योकि मै किसी प्रकार का विवाद नही चाहता। लेकिन जब देश के लिए शहीद हुए वीर जवांनो पे ऊंगली उठी तो रहा नही गया।क्योकिं मै एक भारतीय हूँ और अपने देश से प्रेम करता हूँ। सलीम खान की हाल ही की पोस्ट 9/11: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का गिराया जाना, अमेरिका का 'Inside Job' था, ये तो मीडिया क्रियेशन है जो मुसलमानों को बदनाम करता है" थी। तो सबसे पहले मुझे तो नही पता कि ये किसने कहा की सारे मुसलमान आतंकवादी है, अगर आप लोगो मे से किसी को पता हो तो जरुर सूचित करियेगा। इन्होने इस पोस्ट मे कहा है कि अमरिका में हुआ हमला आतंकवादीयों ने नही किया बल्की वहाँ की सरकार ने करवाया अब इस बात में कितनी साच्चाई है ये तो सबको पता है। अब आप ही उनके द्वारा लिखे गये व्यक्तव्य को देखिये और आकलन किजिये कि इनके कहने का मतलब क्या है "पश्चिमी मीडिया कहती है कि प्रमुख संदिग्ध ओसामा बिन लादेन है. वही पश्चिम के लोग जो शहीदे-आज़म भगत सिंह को भी आतंकवादी कहते थे. ओसामा बिन लादेन ने अगर ऐसा किया है तो यह ग़लत है, लेकिन आज तक यह सिद्ध नहीं हो पाया केवल प्राइम सस्पेक्ट ओसामा बिन लादेन, प्राइम सस्पेक्ट ओसामा बिन लादेन..""

सलीम का कहना है कि भगत सिहं और ओसामा बिन लादेन के कार्य समान है, तो बस ओसामा बिन लादेन को ही आतंकवादी क्यों कहा जा रहा है । इस तरह से इनके बातो पे गौर किया जाये तो इनका मतलब साफ है कि शहीद भगत सिंह को भी आतंकवादी कहा जाना चाहिए, आखिर ओसामा बिन लादेन से तुलना करने का मतलबा क्या। इन्होनें ने जिहाद से हवाला दिया है कि "जिहाद एक अरबी भाषा का शब्द है जो 'जहादा' 'jahada' शब्द से बना है जिसका मायने होता है 'मेहनत करना' 'जद्दोजहद करना' 'संघर्ष करना' अंग्रेजी में इस कहेंगे to strive or to struggle. मिसाल के तौर पर 'अगर एक छात्र उत्तीर्ण होने के लिए मेहनत करता है, तो वह जिहाद कर रहा है.' अरबी भाषा के शब्द जिहाद का एक अर्थ 'अपनी नफ़्स से संघर्ष करना' भी है. अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करने को भी जिहाद कहते हैं और यह अपने अंतर एक अर्थ और समेटे है जिसका अर्थ होता है कि 'आत्म रक्षा के लिए संघर्ष' या चढाई हो जाने या अत्याचार होने पर रण-भूमि में चढाई करने वाले या अत्याचार के विरुद्ध लड़ना." इन्होने जिहाद के दो रुप को भी बताया है"एक "फ़ी-सबिलिल्लाह" अर्थात अल्लाह की राह में (अच्छाई की राह में) और दूसरा "फ़ी-सबीशैतान" अर्थात शैतान की राह में (बुराई की राह में)." इनका साफ कहना है कि अगर कोई व्यक्ति मार काट अथवा हत्या करता है तो उसे जिहाद में "फ़ी-सबीशैतान" कहा जायेगा यानी शैतान की राह।


अब जरा सलीम को कोई बताये कि ज्यादा हत्यायें कहाँ होती है। अरे जनाब ये तो आपको भी दिखता होगा बाजार में मुर्गे और बकरे की हत्या करने वाले कौन होते है, लगता है कि सलीम इस बात से अंजान है।सलीम कहतें है कि "कुरआन में कहीं भी ऐसा नहीं लिखा है कि मासूमों को मारो...वहां लिखा है कि अत्याचारियों को मारो ... ठीक वैसे जैसे गीता में लिखा है"मतलब कि बेचारे ये बेजुबां जानवर अत्याचारी होते है।
अब बात है इनके ब्लोग की, ये जनाब अपने ब्लोग के माध्यम से अपने धर्म को सबसे अच्छा धर्म बनाने में लगे हुए हैं। अच्छी बात है लगे रहो। अब मुझे ब्लोगर बन्धुओं से पुछना है कि क्या हिन्दी ब्लोग की स्थापना इसी लिए की गयी है धर्म प्रचार के लिए। अगर नहीं तो इस प्रकार के ब्लोग पर प्रतिबंध लगना चाहिए। क्योकिं जहाँ तक मुझे पता है कि हिन्दी ब्लोग हिन्दी और हिन्दी साहित्य के विकास के लिए बना है न की धर्म प्रचार के लिए तो फिर इस प्रकार के ब्लोग का चलने का क्या मतलब। मेरा मानना है कि इस मुद्दे पर एक सार्थक बहस होनी चाहिए की हिन्दी ब्लोग किस दिशा में अग्रसित है, और कहीं ये अपने बनाये गयें रास्तो से भटक तो नही गया। इस प्रकार के ब्लोग के खिलाफ कार्यवाई की जानी चाहिए ।

20 comments:

  1. अजी इन नराधमों को हम समझाना भी चाहें तो संभव नहीं है आखिर अक्ल जैसी नायब चीज़ भगवान् ने इनको दी ही नहीं है |

    :) :( :P :D :$ ;)

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  2. आप भी कहाँ इनके चक्कर में पढ़कर अपना समय बर्बाद कर रहे हैं, अजी छोड़िये इनको और हिन्दी को समृद्ध बनाने चलिये। इनका तो वैसे भी बहिष्कार हो चुका है। इन्हें ब्लॉग समाज से बहिष्कृत ही मानिये।

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  3. भाई जी
    सादर वन्दे !
    आपने बड़ा ही अच्छा प्रश्न उठाया है, ये एक मछली पुरे तालाब (हिंदी ब्लॉग जगत ) को गन्दा कर रही है, इसपर बहस होनी चाहिए और इसका निष्कर्ष भी निकाला जाना चाहिए, क्योंकि ये जानता कम है और बोलता बहुत है,
    रत्नेश त्रिपाठी

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  4. वैसे तो जरूर सार्थक बहस होनी चाहिये खुद ही पता चल जायेगा कि कौन कितने पानी मे है । मगर अरुण जी ने जो बात कही है वो भी सही है ऐसे लोग बहस भी कहां सार्थक कर सकते हैं । मगर उनको भगवान थोडी सी बुद्धी दे यही प्रार्थना कर सकते हैं ये लोग जहाँखाते हैं वहीं छेद करते हैं ।िनका हाल भी उस लकडहारे जैसा होगा जो उसी डाल को काटता है जिस पर बैठा है बहुत अच्छा सवाल उठाया है ।अभार और शुभकामनायें

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  5. सलीम खान सिर्फ आइने के सामने खड़ा होकर खुद से एक सवाल करे कि भगत सिंह ने किसी भारतीय मारा, तो उसका जवाब होगा, नहीं..क्या भगत सिंह ओबामा की तरह छुपाकर हमला करता था, क्या वो केवल हिंदुओं या खास समुदाय के लिए लड़ा। एक और सवाल अगर सलीम आपके ब्लॉग पर आया तो वो जट्ट सिख फैमिली से था, तो भी उसने देश के लिए अपने केस कटवाए। लेकिन ओसामा बिन लादेन जैसे केवल मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए आने वालों पर ही हमला कर सकते हैं। वो सीना ठोककर देश हित में काम नहीं कर सकते।

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  6. ...ap unki charcha na karne we khud hi mit jayenge.

    "शब्द सृजन की ओर" पर क्रमवार देखें- "हिंदी का सफरनामा"

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  7. BLOG PAR AANE KA AABHAR. SAMAJH MEN NAHIN AAYA THA TABHI TO WO PAAGAL HO GAYAA.
    -------------------
    AAPNE AAJ KE SAMAY MEN BHAGAT SINGH KO SAMNE LAANE KA KAAM KIYA HAI. YE BHI KISII AITAHISIK KAAM SE KAM NAIN HAI. HAM LOG TO IN MAHAPURUSHON KO BHOOLATE JA RAHE HAIN.
    BADHAI

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  8. आपकी लेखनी को मेरा नमन स्वीकार करें.

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  9. आपको जिनके तौर तरीकों पर आपत्ति है, उनके नाम अपने ब्लॉग पर ज़ाहिर कर आप उनके ब्लॉग को और भी ज्यादा मशहूर कर रहे हैं. इससे तो वे सुधरेंगे क्या.......पर अपने बारे में चर्चा होती देख उन्हें बढ़ावा और मिलेगा. आप नाम लिए बिना भी अपनी बात कह सकते थे. ये लोग भड़काऊ बातें करते ही ध्यान खींचने और कमेन्ट पाने के लिए हैं, लोग इनपर ध्यान देते हैं, कमेन्ट करते हैं और इनपर लिखते हैं तो इन्हें और बढ़ावा मिलता है. कहावत भी है की ' No publicity is bad publicity.' इसीलिए अच्छा होगा की इन्हें उपेक्षित कर दिया जाए.

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  10. मित्रवर, गन्दगी को वहीँ पड़े रहने दें और प्रकृति को अपना कार्य करने दें. उसे फैलाने से ज्यादा नुकसान होगा. सभी उसकी ओछी और देशद्रोही हरकतों से खिन्न हैं. उसे प्रचार (उसके शब्दों में TRP) की भूख है. आप उसका नाम लेकर उसकी इस भूख को निवाला दे रहें है. उसकी उपेक्षा करें वह स्वयं ही मिट जायेगा.

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  11. आपने कई प्वाइंट अच्छे उठाए हैं और साथ ही कई बातों को सामने भी रखा पर मैं यहां पर बहस के मूड में बिल्लकुल नहीं हूं इन लोगों के साथ क्योंकि बहस भी सार्थक करने की कूबत इन लोगों में नहीं ही होगी। दूसरा ऐसे लोगों के साथ तो सोशल बॉयकॉट करना चाहिए मतलब कि ब्लॉगवाणी को भी इसके लिंक हटा देने चाहिए साथ ही सभी एग्रीगेटर को। चलाओ जो चलाना है लिखते रहो जो लिखना है।

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  12. भगत सिंह साम्प्रदायिकता,जातिवाद और शोषण से मुक्त समाज का स्वपन देखेने वाले क्रांतिकारी थे।

    उनकी तुलना किसी धर्मांध व्यक्ति से नहीं की जा सकती।

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  13. Dubey jee,
    वह एक निहायत बेशर्म और घटिया किस्म का इन्सान है, उसे ज्यादा भावः न दे !

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  14. jinhone desh ke liye jaan de di.....unke jaisee himmat kon kar sakta hai...

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  15. BAHISHKAR-BAHISHKAR-BAHISHKAR!!!
    saleem khan katuwe ka bahishkar hona chahiye.
    waise bhi bahishkar ki baat sunkar eski hawa tight ho jati hai.
    Mohalle par bann huwa to kaise pagla gaya tha, wo to ap sabne dekha hi hoga.

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  16. Sardaar Bhagat singh aur atankwaadi???
    deemag kharab hai inka..
    kahawat suni hai na tumne Mithilesh:
    haathi chale bazaar kutta bhoonke hazar
    ya fir
    kasaai ke shraap dene se gaay marti hai kya ??

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  17. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! आपकी लेखनी को सलाम!

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  18. जिसे पूरी दुनिया मान रही है, और जिस कलंक को धोने के लिए उदारवादी मुस्लिम दिलोजान से लगे हुए हैं, उनके बीच किसी सलीम खान के कम्प्यूटर काला करने से क्या होता है? बेहतर तो यह है कि धर्म को संकीर्णता से दूर रखे और इसे एक व्यक्तिगत मसला मानें। आप अपना ध्यान अपनी रचनात्मकता पर ही लगाए रखें।

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  19. ऐसे लोग देशद्रोही होते है। और क्या कहूँ

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  20. ACHCHHI PRATIKRIYA THI AAJ DEKHA !!!!!!!!!!!!!!

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