Tuesday, September 22, 2009

" कितना कारगर साबित होगा यौन शिक्षा "

एचआईवी, यौन शोषण आदि से बच्चे कैसे बचें? जागरुकता लाने के प्रयास के तहत संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने यौन शिक्षा पर नए दिश-निर्देश जारी किए हैं। यौन शिक्षा पर बनाए गए अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश के तहत शिक्षक छात्रों को बताएंगे कि वे कैसे यौन शोषण, अनचाहे गर्भधारण और एचआईवी तथा यौन संचालित संक्रमण से बचें।इससे छात्रों में सेक्स संबंधी किसी तरह की भ्रांति नहीं रहेगी। हाँ जी ये कहना है भारत सरकार का जो की पश्चिम देशो के तर्ज पर भारत मे भी लागु करना चाहती है "यौन शिक्षा"।


देश की अधिकांश आबादी गांवों में निवास करती है और जिसका सामाजिक-सांस्कृतिक ताना-बाना कुछ विशेष तरह का होता है। इस कारण जहां खुलेआम सेक्स का नाम भी लेना गुनाह समझा जाता है। ऐसे में भारत में यौन शिक्षा कितना कारगर साबित होगा सोचने वाली बात होगी। अब अगर ऐसे जगहों पर इस शिक्षा की बात होगी तो विवाद तो होना ही है।

यौन शिक्षा के नमूने, खासकर सचित्र किताबों ने तूफान खड़ा कर रखा है। कई राज्यों की सरकारें, सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाएं और राजनीतिक व गैर राजनीतिक संगठन इस पर आपत्ति उठा रही हैं। परंतु दूसरी ओर इसके समर्थकों का मानना है कि इस विषय को प्रतिबंधित न किया जाए। हां, यौन शिक्षा संबंधी सामग्री संतुलित होनी चाहिए। न तो इसमे एकदम खुलापन हो और न ही इसे बिल्कुल खत्म कर दिया जाए। यह कहना कि बच्चों को यौन शिक्षा देने की आवश्यकता नहीं है एकदम बेहूदा तर्क है। सर्वेक्षण से पता चला है कि किशोर उम्र के लड़के कभी-कभी यौन संबंध कायम कर ही लेते हैं। भारत में प्रसूति के कुल मामलों में 15 प्रतिशत किशोर उम्र की लड़कियां शामिल होती हैं।
देश में इस समय 52 लाख लोग एचआईवी से पीडि़त हैं, जिनमे 57 फीसदी मामले ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। एड्स नियंत्रण का दायित्व संभालने वाला राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) कई राज्यों की आपत्ति के चलते स्कूलों में उपलब्ध कराई जाने वाली यौन शिक्षा सामग्री की समीक्षा करने को तैयार है। नाको का मानना है कि सेक्स की शिक्षा के लिए सचित्र किताबे वरिष्‍ठ शिक्षकों के लिए हैं। वह इनसे जानकारी हासिल कर बच्चों को समझाएंगे। उसका मानना है कि इस सामग्री से किशोरो को शरीर और शारीरिक परिवर्तनों के बारे में आधारभूत सूचना मिलती है। यदि बच्चों को यौन शिक्षा नहीं दी जाए तो वे गलत फैसला ले सकते हैं जिससे उनके भविष्य और स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ सकता है। इसके विपरीत स्कूली बच्चों को यौन शिक्षा के विचार के विरोधियों का तर्क है कि इससे लोगों की सांस्कृतिक संवेदना को चोट पहुंचती है। इस सरकारी फैसले के पीछे विदेशी हाथ है। उनका मानना है कि इससे उल्‍टे अनैतिक सेक्स को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी कंपनियों के सूत्र वाक्य 'कुछ भी करो, कंडोम का इस्तेमाल करो' से उनकी मंशा स्पष्ट है। सुरक्षित सेक्स का ज्ञान देकर कोमल व किशोर वय के लड़के-लड़कियों को देह-व्यापार के पेशे में उतारे जाने की आशंका जताई जा रही है। बैकाक और थाईलैड की तरह भारत को भी सेक्स टूरिज्म के बड़े बाजार के रूप में विकसित करने की विदेशी चाल के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। एक संगठन ने तो इसके खिलाफ एक किताब 'रेड एलर्ट' छापी है। कुल मिलाकर स्कूलों में बच्चों को यौन शिक्षा की नहीं बल्कि अच्छी जीवनशैली से अवगत कराने की जरूरत है। दूसरी ओर अब सवाल उठता है कि स्कूली बच्चों के लिए, जिसका कि दिमाग एक कोरे कागज के समान होता है, यौन शिक्षा एक गंभीर विषय है। ऐसे में जल्दबाजी में उठाया गया कोई भी कदम समाज और राष्ट्र के लिए घातक साबित हो सकता है। क्या इसके बदले में किशोरो को एचआईवी एड्स, नशीले पदार्थ की लत आदि के बारे में समुचित जानकारी देकर उनको मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए तैयार करना ज्यादा उचित नहीं होगा?


लेकिन अब भी हमारे यहाँ के प्रगतिवादी लोग इस शिक्षा के पक्ष में हैं न जानें क्यों। उनका कहना है कि इस शिक्षा से सेक्स अपराध रुकेगें तथा बच्चे सेक्स के प्रति जागरुक होगें। जहाँ तक मुझे लगता ऐसे लोग जो भी कहते है वह बेबुनियाद है। पश्चिमी देशों मे लगभग हर जगह यह शिक्षा मान्य है, तो वहाँ क्या होता है, यह किसी से छिपा नहीं है। अगर अकेले ब्रिटेन को ही देखा जाये तो वहाँ की हालत क्या है इस शिक्षा के बावजुद बेहद शर्मसार करने वाली जो की हमारे समाज में बहुत बडा अपराध माना जाता है। वहाँ की लडकियाँ शादि से पहले ही किशोरावस्था मे माँ बन जाती है। कम उम्र में मां बनने वाली लड़कियों के मामले में ब्रिटेन, पश्चिमी यूरोप में सबसे आगे है। संडे टेलिग्राफ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में गर्भपात के बावजूद स्कूल जाने वाली लड़कियों में गर्भधारण की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट के हवाले से अखबार ने लिखा है कि हर साल 18 साल से कम उम्र की लगभग 50,000 लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं।अगर यौन शिक्षा से ये सब होता है तो क्या इसे हमें मान्यता देनी चाहिए।
इस तरह ब्रिटिश सरकार ने पहली बार यह माना है कि यौन शिक्षा कम उम्र की लड़कियों में गर्भधारण पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। अब बताईये ऐसी शिक्षा की क्या जरुरत है हमारे समाज को। हमारी सरकार हमेशा से पश्चिमी देशो के परिवेश को अपनाना चाहती है लेकिन क्यों। वहाँ के बच्चो को शुरु से ही यौन शिक्षा दि जाती है तो परिणाम क्या है हम सब जानते है।

8 comments:

  1. पूरी तरह तो आपसे सहमत नही हूँ मगर कई विचारयोग्य बातें कही हैं आपने..आभार

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  2. मुझे लगता है कि सब से पहले स्कूलों मे नैतिक और चारित्रिक शिक्षा की जरूरत है जब तक बच्चों को ये शिक्षा नहीं देदी जाती तब तक सेक्स एजुकेशन बच्चों का भविश्य खराब करेगी। अमएरिका मे देखो क्या हाल है बच्चों का अभी दूध के दाँत भी नही टूटे होते वो सेक्स की बातें करने लगते हैं और उनके बच्चे भारतिय बच्चों से नालायक हैं भारतिय लोग भी वहां आपने बच्चों को स्कूल तक की शिक्षा भारत मे देना पसंद करते हैं क्यों कि वहाँ स्कूलों का महौल अच्छा नहीं है । जब हम अपनी आँखों से इस आधूनिक्ता और पश्चिम्वाद का हाल देख रहे हैं तो अपने देश मे क्यों इसे लागू करना चाहते हैं । बस जो लोग इन बुराईयों के आदी होते जा रहे हैं उन्हें इन मे क्यों बुराई नज़र आयेगी। पश्चिमवाद किस तरह हमारे समाज और देश को खोखला कर रहा है और ऐसे फैसले लागू करवाने के लिये भी ये आधूनिक लोग अपनी रोटियाँ सेकने के लिये ऐर अपने विदेशी टूर बनाने के लिये ऐसे फैसले लेते हैं\ उन्हें देश या समाज से कुछ लेना देना नहीं ये मेरे अपने निज़ी विचार हैं किसी बहस या विवाद के लिये नही हैं। स्कूलों मे लडकियों के शोशण के कितने मामले आ रहे हैं अगर यौन शिक्षा लागू होगी तो क्या होगा फिर तो आप किसी शिक्षक को कुछ कह नहीं सकेंगे वो चाहे कुछ भी करे । इस पर समाज मे बहस होनी चाहिये ब्लाग्ज़ पर नहीं सार्व्जनिक स्थानों पर जहाँ लोगों की भागी दारी भी हो हर गाँव शहर मे धन्यवाद्

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  3. मै भी निर्मला जी के बातो से सहमत हूँ,और मै भी आपसे पुर्ण सहमत नही हूँ..........क्योकि नैतिक शिक्षा के बाद ही यौन शिक्षा सही मायने मे कारगर होगा.........

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  4. आपने सही मुद्दे को लेकर बहुत ही सुंदर रूप से प्रस्तुत किया है! हमारे देश में हर एक बच्चों को शिक्षा मिलनी चाहिए पर यौन शिक्षा छोटे उम्र में ही नहीं बल्कि समझदार होने पर ही देनी चाहिए!

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  5. यहा ओम जी ने शायद पूरा आलेख नहीं पढा मिथिलेश जे ने भी इसे पूरा समर्थन नहीं दिया है। उन्हें भी यही लगता है कि यौन शिक्षा बच्चोंके भविश्य के लिये सही नहीं है मै मिथिलेश जी से सहमत हूँ मेरी टिप्पनी सिर्फ उम लोगों के लिये है जो इसका जम कर पक्ष लेते हैं आभार्

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  6. प्रिय मिथिलेश,

    आपकी प्रोफाईल से पता चली उम्र में इस कामयाब तरीके से अपनी बात कह लेना आपके उज्जवल भविष्य को इंगित करता है।

    जहाँ तक बात रही यौन शिक्षा की तो मैं भी व्यक्तीगत तौर पर पहले नैतिक और सदाचार की शिक्षा को अहम और जरूरी समझता हूँ। नही तो यौन शिक्षा बच्चों का विषय बनके नही रह जाये जहाँ वह तो समझता है कि सेक्स क्या है लेकिन उसके परिणामों / दूरगामी परिणामों से अनभिज्ञ है।

    बहुत ही अच्छा तार्किक आलेख।

    मेरी बधाई एक सार्थक लेख के लिये और आपके उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनायें।

    मुकेश कुमार तिवारी

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  7. मैं भी इसके पक्ष मे नहीं हूँ।

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  8. प्रिय मित्र वन्धु मिथिलेश जी
    सादर प्रणाम
    मत भटको मृग तृष्णा में सब कुछ छीना जा सकता है |
    इस बिंदु पर कई संगठन व् कई लोगो का लेख भी आया दिल्ली की अध्यापक परिषद् के विचार आने के बाद मै भी इस बिंदु पर काफी अध्यन किया जिसका परिणाम यह निकला की कोई भी अध्यापक इस पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए तैयार नहीं हुए . क्योकि एक अध्यापक ने यहाँ तक कहा कि जो लोग इस शिक्षा को भारत ऐसे देश पढाने कि बात करतें हैं | क्या वह अपने घर पर ही अपने बच्चों को सेक्स के बारें में बता पायेगें ? और जो लोग इसका समर्थन करतें है उन्हें यह नहीं पता है कि इंग्लैण्ड के आठवीं के ऊपर के सभी विद्यालयों में गर्भपात सेंटर खोल दियें गएँ हैं
    बहुत ही अच्छा लेख है | विषय जीतना गंभीर आपने बड़ी ही सहजता के साथ सब बिन्दुओं को स्पर्श किया है मै आप के लिए तो इतना ही कह सकुगां कि................
    दाता पुकार मेरी संदीप्ति को जीला दें
    बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दें
    सफलता आप का चरण चूमें
    यही आशा है, यही अभिलाषा है
    आपका शुभाकांक्षी
    अश्वनी मिश्र "राजन"

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