Wednesday, September 23, 2009

भगवान राम के जन्म को लेकर विवाद क्यों??

कुछ दिंनो पहले मैंने एक लेख लिखा "रामसेतु" जिसमें मैने पुष्कर भटनागर (भारतीय राजस्व सेवा में कार्यरत ) जी के राम जन्म को लेकर बताये गये आकड़े मैने प्रस्तुत किया था । जिसका काफी विरोध हुआ कोई मुझे ये बता रहा है कि आप हिन्दु हैं और इस तरह के गलत आकड़े को समर्थन दे रहें हैं, तो कोई मुझे रामायण पढ़ने की सलाह दे रहा है, वहीं कुछ लोगो का कहना है कि कुछ लिखने से पहले थोडा़ पढ लिया करिये। आप सभी लोगो का आभार व्यक्त करता हूँ राय देने के लिए।


अब बात है भगवान राम के जन्म को लेकर विवाद का तो सबसे पहले मैं ये बताना चाहूँगा कि मैंने भटनागर जी के पक्ष मे हामी नहीं भरी और नां ही उनके बतायें गये आकडो़ का विरोध किया, मैंने वहाँ सिर्फ उनके बताये गये आकड़े प्रस्तुत किये। जहाँ तक मुझे मालुम है भगवान राम जी के जन्म को लेकर यह कोई नया विवाद नहीं है।

भगवान राम जी के अस्तित्व की बात लाखों वर्ष पुरानी है। हजारो वर्षो से शास्त्रो तथा धार्मिक ग्रन्थो के माध्याम से राम कथा के बारे में न केवल भारतवर्ष बल्कि पूरे विश्व में चर्चा होती रही है। दीपावली, दशहरा, व रामनवमी जैसे मानये जाने वाले त्योहार भगवान राम से ही जुड़े है। इसलिए मुझे लगता है भगवान राम के जन्म को लेकर किसी भी प्रकार वौज्ञानिक दृष्टिकोण या विवाद नही होना चाहिए। रही बात विवाद की तो डि एम के प्रमुख करुनानिधी तो कहते हैं कि भगवान राम तो थे ही नहीं क्या उन्हे रामायन के बारे पता नहीं है या उन्हे ये मालुम नहीं की हिन्दु धर्म के सबसे बडे भगवान राम जी है, लेकिन वे इस बात को नहीं मानते तो क्या हब उन्हे जबरदस्ति मनावें सकते है नही ना, बात यहाँ मानने या न मानने की है।

मुझे पता नहीं भगवान राम को लेकर इस तरह का बेबुनियाद बहस क्यों हो रहा है। कोई कह रहा है कि तुम हिन्दु हो तुम्हे भगवान राम का जन्म समय मालुम होना चाहिये, अरे तो क्या जिन्हे ये मालुम है वे हिन्दु ही है, या भगवान राम के जन्म समय को जानने से कोई हिन्दु हो जायेगा। मै ये नहीं कह रहा कि आप अपने धर्म या ग्रन्थ के बारे ना जानिये बिल्कुल जानिये। इस विवाद में मुसलमान बन्धु भी हाथ सिकने से पिछे नही रहे एक बन्धु कह रहे थे कि तुम हिन्दुओ मे अपनो भगवान को लेकर विवाद चल रहा है, वे बन्धु ऐसे कह रहे थे कि जैसे उन्हे अपने धर्म के बारे में या उसकी उतपत्ति के बारे में बहुत मालुम है।


मै ये सब किसी धर्म विषेश को लेकर नहीं कह रहा। जिस तरह हम अपने भगवान या अल्लाह के अस्तित्व और जन्म को लेकर विवाद करते हैं वह किसी भी नजरिये से ठीक नहीं है। हमे जन्म विवाद को परे रखकर ये सोचना चाहिए कि जिनके बारे में हम विवाद कर रहें है आखिर वह था कौन ?? सवाल यह है कि जन्म को लेकर विवाद से क्या हो जायेगा, क्या भगवान राम ने कहा था कि मेरे जन्म तिथी या जन्म वर्ष याद रखना। ये तो नहीं कहा था भगवान राम ने, हम उन्हे पूजते हैं इसलिए कोशिश करते हैं कि उनके बारे में जांने, लेकिन क्या बस उनके जन्म को जानना ही सबकुछ है। ये सब जानने से ज्यादा जरुरी यह होना चाहिए कि भगवान राम जी के द्वरा बताये गये नैतिक सिद्धान्तों का पालन करें तथा उनके बताये गये मार्गो पर चलने कि कोशिश करें। राम नाम कि सर्वव्यापकता उनके जन्म या अस्तित्व का प्रमाण है। भगवान राम आदर्श पुत्र, पति और प्रजापालक थे, वे जितेंद्रिय तेजस्वी बुद्धिमान पराक्रमी, विद्वान, नीति-निपुण और मर्याद पुरुषोत्म थे। सीता माता उनकी महान पतिव्रता पत्नी थी। उनके शत्रुध्न भरत और लक्षमण जैसे भाई थे जो उनपर जान छिड़कते थे। ईशा मसीह ने कहा है" माँगो,वह तुम्हे मिलेगा, खटकटाओ वह तुम्हारे लिए खुल जायेगा, ढ़ुढो वह मिल जायेगा। तो अच्छा यह होगा कि हम उनके जन्म विवाद को छोड़कर उनके बतायें गये मार्गो पर चलने कि कोशिश करें। भगवान राम कल थे, आज हैं, और आगे भी रहेंगे। उनके नाम पर और जन्म को लेकर विवाद करने की जरुरत नहीं है।

14 comments:

  1. आप की बात में दम है -राम के जन्म दिन को याद करने (जो की विवादित है ) से ज्यादा जरूरी है उनके आदर्शों का अनुकरण !

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  2. दुखी क्यों होते हैं दुबे जी? यहाँ तो कुछ लोग सिर्फ हाथ तापने के लिए दूसरों के घर जला देते हैं| राम के जन्म दिन तो अविवादित रूप से हर वर्ष हजारों साल से मनाया जाता रहा है|

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  3. क्या विवाद! यहाँ सब अपनी रोटी सेंक रहे हैं.. फिर क्या फर्क पड़ता है नीचे आग किसी की भावनाओं का जलने की है चिता के

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  4. देखिये भाई विवाद का जन्म तो वो लोग दे रहे हैं जो ये कह रहे हैं की भगवन राम का जन्म ७७०० वर्ष पहले हुआ | अब भटनागर और उनको समर्थन देने वाले लोग ही बताएं की ऐसी भ्रामक बातें क्यों की जा रही है?

    अब यदि कोई भ्रामक बात फैलाए तो उसका विरोध तो होना ही चाहिए | और इसी भ्रामकता (भगवन राम का जन्म ७७०० वर्ष) का विरोध मैंने किया http://raksingh.blogspot.com/2009/09/blog-post_21.html

    क्या भगवान् को मानने का ये मतलब है की भ्रामक चीजों का विरोध मत मत करो?

    ऐसा कैसे हो गया की .. जो भ्रामक चीजों फैला रहे हैं वो भक्त हो गया और जो भ्रामकता का विरोध कर रहा है वो अभक्त ?

    भगवान् राम को सही अर्थों मैं मानने का मतलब है सत्य की राह पकडो ... उस राह मैं जो भी बाधा आये उसका डट कर मुकाबला करो |

    दुर्भाग्यवस् लोग सच से मुह मोड़ कर भ्रामक चीजों को सच साबित करने मैं लगे है ....

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  5. भाई कही ओशो मे भी पढ़ा था कि जब कोई उंगली हमें सच का रास्ता दिखाती है..हम उस रास्ते को छोड़ के उंगली की पूज़ा करने लग जाते हैं..अब आदर्शों को याद रखना कितना मुश्किल है आज के जमाने मे..उन पर चलना और भी मुश्किल..सो जन्मदिन याद रख कर काम चला लेते हैं..और रोटी भी.

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  6. मिथिलेश ने सिर्फ आंकड़े प्रस्तुत किये हैं..
    उसने न तो इन आंकडों को सत्यापित किया है (जो कोई नहीं कर सकता है ) न ही उसका पक्ष लिया है..एक जानकारी हमसबके समक्ष रखी है इसलिए यह मान लेना की वह इन आंकडों से सहमत है ठीक नहीं होगा...और जहाँ तक मैं समझती हूँ कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा सोचेगा भी नहीं
    मिथिलेश तुम निश्चिंत रहो और इन बातों पर ध्यान भी मत दो....आज कल ब्लाग जगत में माहौल कुछ कम दोस्ताना हो गया है.....लेकिन वास्तविकता यह है की हर कोई इस तरह की बातों से बचना ही चाहता है...
    तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो ...बस ऐसे ही करते रहो...
    आर्शीवाद...
    दीदी

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  7. वाह दुबे जी इसे कहते हैं मार्केटिंग tactics. आपने खुद ही पिछले पोस्ट मैं पुष्कर के हवाले राम जी का गलत जन्म दिन बताया | अब किसी ने आपको ये याद दिलिया की आप जो जन्म का दिन बता रहे हो वो गलत है, तो अब आप और एक पोस्ट लेकर आ गये हो और अब कुछ और साबित कर रहे हो | वाह भाई वाह ... बढिया है आप बड़े अच्छे राम भक्त हैं ...

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  8. shukria,

    kya kahoon tumhari post padh kar?siway iske ke

    mazhab ki hai ,na zaat ki ,naa haisiyat ki hai
    sabse badi biradari insaaniyat ki hai.

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  9. वैसे तो मिथिलेश को इस मुद्दे पर अपना स्पश्टैएकरण देने की जरूरत भी नहीं थी भगवान राम का जन्म दिन सदियों से एक निश्चित दिन मनाया जा रहा है तो वो कम से कम उनके अस्तित्व को तो स्वीकारता है । बकी इतने बडे देश मे सभी हर बात मे एक मत नहीं हो सकते फिर हमारी संस्कृति और धर्म पर हमेशा ही विवाद खडा करने के लिये कुछ ताकतें काम कर रही हैं हमारे लिये इतना ही काफी है कि राम जी हमारे भगवान हैं। बहुत बदिया काम कर रहे हो ऐर इसी तरह लिखते रहो धुभकामनायें आशीर्वाद्

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  10. भाई, जब कुछ लोग राम को मरा उच्चारने में ही अपना जनम सार्थक समझते हों तो ऐसों की चिंता करना व्यर्थ ही है.

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  11. आप ही नहीं, जिस किसी ने भी कभी ज्ञान लेने या बाँटने की कोशिश की है, उसके साथ ऐसा ही किया गया है. राम, भारतवर्ष में, निर्विवादित रूप से भगवान है, पूज्य हैं, आराध्य हैं और रहेंगे. अब अगर किसी भक्त को किसी अवतार की जन्म तिथि याद नहीं है तो दूसरे होते कौन हैं उसे हिंदुत्व से खारिज करने वाले. मिथिलेश, तुम १९ वर्ष की आयु में एक बहुत बड़ा काम कर रहे हो. धैर्य खोने, दूसरों की अज्ञानता से विचलित होने की आवश्यकता नहीं. इन लोगों में यदि ज्ञान होता, तर्क होता और सबसे बढ़कर, एहसास होता तो पहले डा. भटनागर और इस तरह के जो अन्य शोध हुए हैं, लिखित रूप में उनकी प्रमाणिकता मांगता और तर्क, ज्ञान के आधार पीटी अपने पक्ष को मजबूत साबित करता. लेकिन इन लोगों को १९ साल का लड़का मिल गया निशाने के तौर पर और अपनी विद्वता बघारने लगे.
    मैं ने फ़िलहाल अब तक तुम्हारा वो लेख पढा नहीं है. पढ़ने के बाद एक बार फिर सम्पर्क करूंगा. तुमने जो जवाब दिया वो अपने आप में भरपूर है,'राम के आदर्शों का पालन होना चाहिए, जन्म तिथि के ज्ञान से कोई हिन्दू नहीं हो जाता.'

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  12. दुबे साहब, थोडा सा लीक से हटकर लिख रहा हूँ ! आपने अकसर अपने बड़े बुजुर्गो को कहते सूना होगा कि अधर्मी ज्यादा हो गए इसलिए पाप बढ़ गए ! क्या कभी आपने भी सोचा कि ये अधर्मी कौन होता है ? अधर्मी वह होता है जो अपने धर्म का पालन नहीं करता, अधर्मी वह होता है, जो अपने धर्म की बुराई करता है , अधर्मी वह होता है जो दूसरे द्बारा उसके धर्म की बुराई करने पर चुपचाप बैठा रहता है ! अब एक इमानदार सवाल सभी से क्या कभी आपने किसी मुसलमान, इसाई या सिख को अपने धर्म की बुराई करते देखा है, या दुसरे द्वारा उनके धर्म की बुराई करते देख चुप-चाप बैठे देखा है ? शायद नहीं ! और एक ये हिन्दू धर्म के अधर्मी लोग है जो क्षद्म धर्मनिरपेक्षता का आवरण ओढे अपने ही धर्म की जड़े खोदते रहते है ! और यही आज हमरे धर्म के पतन का कारण बन रहे है ! इन अधर्मियों से मेरा एक सीधा सा सवाल है कि अगर ये किसी भी धर्म को नहीं मानते तो फिर स्कूल में अपने बच्चे के दाखिले के समय फार्म पर अपना धर्म हिन्दू क्यों लिखते है ?

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  13. जन्म विवाद को छोड़कर उनके बतायें गये मार्गो पर चलने कि कोशिश करें। भगवान राम कल थे, आज हैं, और आगे भी रहेंगे। उनके नाम पर और जन्म को लेकर विवाद करने की जरुरत नहीं है।
    सौ की सीधी बस यही एक बात है..................

    बढ़िया लेख के लिए बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त
    जयपुर
    www.cmgupta.blogspot.com

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  14. जितना हम उनके जन्म को लेकर विवाद करते है वह सब सही नही है। हमे उनके बताये मार्गो पर चलने की कोशिश करनी चाहिए।

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