Friday, October 2, 2009

ब्लोगवाणी के विरोधियो के नाम खुला पत्र

कई दिंनो से देख रहा हूँ कि ब्लोगवाणी पर लगातार आरोप लग रहें है। क्या सबकुछ बैठ कर देखना सही होगा। ब्लोगवाणी जो कर रहा है हिन्दी प्रमियो के लिए वह एक वरदान स्वरुप है।

ब्लोगवाणी हमें एक ऐसा प्लेटफार्म प्रदान करता है जहाँ से हम अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचा सकते हैं,। हम जो भी लिखते हैं कहानी हो या कविता लोगो तक पहुचाने का काम करती है ब्लोगवाणी। लेकिन शायद कुछ लोगो को ये बात पसन्द नहीं है (वैसे ये लोग हैं कौन ये सब को मालुम हैं लेकिन विवाद ना हो इसलिए मैं नाम सार्वजनिक नही कर रहा हूँ) और ऐसे लोग लगातार ब्लोगवाणी के विरुद्ध कुछ न कुछ लिख रहें है और ब्लोगवाणी की खांमिया ढुढ़ने मे लगे है शायद इन्हे कुछ और काम नहीं है या तो इनके पास लिखने के लिए कुछ होता नहीं है।

जहाँ तक मेरा विचार ऐसे लोगो के प्रति तो ये लोग बस ये सब बता कर कुछ नाम चाहते है भले ये नाम गाली स्वरुप ही क्यों ना मिले। ब्लोगवाणी के विरोधी कहते है कि ब्लोगवाणी में कुछ खामिया है जिसे ब्लोगावाणी को दुर करना चाहिए। ठिक है मैं भी मान लेता हूँ कुछ गलतिया हो सकती है लेकिन उसमे जगजाहीर करने वाली क्या बात है। हम भारतीयो की शायद ये बहुत पुरानी आदत है कि अगर कोई निस्वार्थ काम कर रहा है तो उसे बदनाम करने के लिए बहाने ढुढ़ने लगते है। ब्लोगवाणी जो कर रहा है देखा जाये तो सब के बस की बात नहीं है, लेकिन तब पर भी क्या किसी ने आभार व्यक्त किया ब्लोगवाणी का अपने रचना के माध्यम से नहीं ना। तो विरोध किसलिए भाई। जो खामिया है वह हमें आसानी से दिख जाती है लेकिन जो ब्लोगवाणी कर रहा है जो उसकी खुबिया है वह कोई नहीं देखता। अगर ब्लगवाणी मे कुछ खराबी है , हो सकती है ऐसा क्या होगा जिसमे खामियां ना हो। अब मेरा सवाल उन लोगो से है जो की ब्लोगवाणी का विरोध करते है। वे कहते है की मैंने ब्लोगवाणी को बहुत से मेल भेजे लेकिन अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई । सवाल यहाँ ये है कि ब्लोगावाणी को एक ही काम है क्या? वह जो कह रहा है वह कम है क्या। आप चले है विरोध करने कभी किसी सामूहिक ब्लोग का संचालन कर के दिखिये कितना दम है सब समझ आ जायेगी। ब्लोगवाणी न तो आपका गुलाम है और नही आप या हम उसे पैसे पहुचाते है। तब पर भी ब्लोगावाणी इतना कुछ कर रहा है हमारे लिए। अगर आपको ब्लोगवाणी में इतनी ही खामिया नजर आती है तो कोई ऐसा एग्रीगेटर आप ही बनाईये तब आपको मालुम चलेगा की क्या होता है एग्रीगेटर का संचालन करना।

ब्लोगावाणी का जितने लोग विरोध कर रहें है इनका मकस्द बस यही है कि किसी तरह से ब्लोगावाणी को परेशान किया जाये ताकी नेक काम करने वाला आदमी अपने मार्ग से बिचलीत हो जाये। इसलिए ब्लोगवाणी से मेरा विनम्र निवेदन है कि वे विचलीत ना हों। विरोध करने वाले लोग बस विरोध ही कर सकते है और कुछ नहीं। इसलिए आप अपना काम करते रहें।

30 comments:

  1. ब्लोग्वानी के विरोधियों की मंशा कुछ और भी है .... खुले तौर पे कहना नहीं चाहता ... पर जो भनक मिला है उसी के आधार पे कह रहा हूँ .......

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  2. Blog Vani ki ham sabko aawshyakta hai.
    Blog Vani ki team se nivedaan hai ki bas aap date rahiye.

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  3. बिल्कुल सही कहा आपने. ब्लॉगवाणी को ऐसी बातों से विचलित नहीं होना चाहिये.

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  4. मंशा और उद्देश्य चाहे जो भी हो और जिनके भी हो ..इतना तय है कि अब ये उतना आसान नहीं है..और न ही अब ब्लोगवाणी कभी बंद होगी..रही बात वास्तविकता की तो वो तो जग जाहिर है ही ...

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  5. एक खुला पत्र
    मिथिलेश भाई
    ब्‍लॉगवाणी समर्थक
    यानी हमारे नाम
    भी लिख दो।

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  6. कहते हैं कि जब विरोध शुरू हो तो समझिये कि आप अच्छा काम रहे हैं.ब्लोगवाणी को यह सब इसी मानस से लेना चाहिये.

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  7. मेरा तो मानना है कि ये भी भारतीय गणतंत्र के अंतर्गत आता है सब को सब कुछ कहने की छूट है और ये इनका मौलिक अधिकार है नहीं तो ये लोग एमेनेस्टी इंटरनेशनल को ले आयेंगे कि हमें हमारे अधिकार दिलाओ।

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  8. सब अपना-अपना काम करें। कौन क्‍या कर रहा है यह सब जानते हैं। दूसरों को नासमझ समझने वाले से बडा नासमझ और कोई नहीं।

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  9. आपके कथन से पूर्णत: सहमत्!!!!!!

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  10. अरे पंडितजी,
    अब तो साँप जा चुका है। लकीर पीटने से फ़ायदा...?

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  11. ब्लोगवाणी के खिलाफ़ लिखने वालों को सोचना चाहिए कि उन्होंने ब्लोगवाणी को क्या दिया और ब्लोगवाणी ने उनको क्या नहीं दिया. दर-असल मुहं से (चिट्ठा से) कुछ भी कह देना बहुत आसान है. ब्लोगवाणी एक कंपनी है न कि सामुदायिक संस्था. उस पर किसी का ज़ोर नहीं. आप अपना चिट्ठा ब्लोगवाणी से जोड़ कर उस पर एहसान नहीं कर रहे बल्कि ब्लोगवाणी अपनी सेवाओं (बल्कि मुफ़्त सेवाओं) को प्रदान कर आप पर एहसान कर रही है.

    हमारी अन्जुमन (विश्व का प्रथम एवम् एकमात्र हिंदी इस्लामी सामुदायिक चिट्ठा)
    hamarianjuman.blogspot.com

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  12. आपकी बातो से सहमत हूँ। मूरख ज्ञान वाले सरदार जी के सभी ब्लागो का बहिष्कार करे तो अपने आप उनके होश ठिकाने आ जायेंगे। वैसे आपको बता दे कि महाश्य एक एग्रीगेटर लांच करने वाले थे पर इतने सारे लोगो के ब्लागवाणी के प्क्ष मे खडे होने से उनकी उम्मीदो पर पानी फिर गया।

    अभी उन्होने एक पोस्ट लिखी है "जब मुझे पाहचाना गया" अब हिन्दी ब्लागजगत को भी इन्हे पहचान लेने की जरुरत है।


    गेट वेल सून मि. पाबला

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  13. " RASHTRA BHASHA hindi ke prati acchi bhawana vyakt ki hai aapne ...ye padhker bahut hi accha laga sir ,BLOGVANI ko hum sab chahte hai ....dukh hota hai jab koi blogvani ke bareme ulti siddhi baat karta hai ...."

    " aapne ye khula patr likhker bahut hi accha jawab blogvani ke VIRODHIYON ko diya hai ....is ke liye aapka aabhari hu ."

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    http://hindimasti4u.blogspot.com

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  14. इग्नोर करिए सबसे अच्छा तरीका यही है

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  15. सही कहा आपने....ब्लोगवाणी बंद नहीं होनी चाहिए ....!!

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  16. There Comes a new blog Aggregator, with every possible wise techniques " BLOGPRAHARI, kaindly visit this page for more info
    http://blogprahari.com

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  17. भई हम तो ब्लॉगवाणी के कट्टर स‌मर्थक हैं। आपने जो भी लिखा उसस‌े पूरी तरह स‌हमति है।

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  18. .
    .
    .
    दुबे जी,
    आइये अब आगे बड़ें, कितना ही प्रयत्न कर लें हिन्दी ब्लॉग जगत इस मुद्दे पर एक राय नहीं हो सकता...ब्लॉगवाणी के समर्थक और विरोधी उलझते ही रहेंगे...क्या फायदा इस कवायद का...अत: विराम देना चाहिये इस बहस को...आइये मिलकर तलाशें कुछ नये मुद्दे...ताकि बहस हमेशा चलती रहे...

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  19. लोगों को अपने कर्म पथ पर डटे रहना चाहिए !!

    पर ब्लोगवाणी से कट्टरतम लगाव के बावजूद ब्लोगवाणी का विचलित होना हमें भी आश्चर्यचकित कर गया ??
    आखिर कुछ विरोधों के बावजूद ब्लोगवाणी को दो दिन बाद ही यह क्यों समझ आया की उसके चाहने वालों की संख्या विरोधियों से अधिक है??

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  20. बिल्कुल सही कहा आपने.

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  21. ये हवा के झोंके क्या रोकेंगे उनको,
    जो आए दिन तूफानों को मात देते हैं

    बिल्कुल सही कहा आपने. ब्लॉगवाणी को ऐसी बातों से विचलित नहीं होना चाहिये.

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  22. सचमुच सही सामजिक काम करने वालों को कितना कुछ सुनना सहना नहीं पड़ता !

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  23. बिल्कुल सही व खरा कहा आपने। सहमत हूँ

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  24. भाई वाह क्या कहा आपने, खरा लेकिन एक दम सत्य।

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  25. आश्चर्य कि तुम्हारी ये रचना पढने से कैसे रह गयी। तुम्हारी बात से शत प्रति शत सहमत हँ। बधाई

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