Sunday, October 11, 2009

जलेबी के बाद सभी ब्लोगरो को समोसे खाने का न्योता





कल मैंने कड़वाहट मिटाने के बहाने आप लोगो को जलेबी खाने के लिए आमंत्रित किया और सभी लोगो ने आमंत्रण स्वीकार भी किया और खुब जमकर फ्री वाली जलाबी उड़ाई। जहाँ कुछ लोगो को जलेबी का स्वाद पंसद आया तो वहीं कुछ लोगो ने उसके रंग को पंसद किया। कुछ लोगो नें जलेबी के इतिहास की तरह उसे भी पेचिदा बताया। अब भाई मूहँ तो मिठा हो गया तो इसके साथ कुछ चटकारे भी होने चाहिए क्यों जनाब क्या ख्याल है। तो मैंने सोचा वैसे चटकारे के लिए तो बहुत कुछ उपलब्ध है लेकिन जो मजा समोसे में है वो और किसी में कहाँ सही कहाँ ना। जलेबी को लेकर कुछ लोग काफी रुष्ट भी थे उनका कहना था की हम तो डायबटिज के रोगी है तो हम कैसे खायें और आपने जलेबियां दिखा के मूहँ में पानी भरवा दिया मन तो खुब हुआ खाने को लेकिन श्रीमती जी के डर से एक भी ना खा पायें। तो मैंने सोचा भाई ये तो वास्तव में इनंके साथ गलत हुआ तभी दिमाग में ख्याल आया मिठा नहीं लेकिन नमकीन तो हो सकता है ना। इसलिए आज आप लोगो के लिए गरमा-गरम समोसे । अब समोसे खाने से पहले उसके बारे में कुछ जान लें तो और अच्छा रहेगा।
समोसा दक्षिण एशिया का एक लोकप्रिय व्यंजन है। इस लज़ीज़ त्रिभुजाकार व्यंजन को आटा या मैदा के साथ आलूके साथ बनाया जाता है और चटनी के साथ परोसा जाता है। ऐसा माना जाता है कि समोसे की उत्पत्ति उत्तरी भारत में हुई ऑर फिर यह धीरे-धीरे पूरे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश सहित आस-पास के क्षेत्रों में भी काफी लोकप्रिय हुआ। यह भी माना जाता है कि समोसा मध्यपूर्व से भारत आया और धीरे-धीरे भारत के रंग में रंग गया। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि दसवीं शताब्दी में मध्य एशिया में समोसा एक व्यंजन के रूप में सामने आया था। 13-14वीं शताब्दी में व्यापारियों के माध्यम से समोसा भारत पहुँचा। महान कवि अमीर खुसरो (1253-1325) ने एक जगह जिक्र किया है कि दिल्ली सल्तनत में उस दौरान स्टड मीट वाला घी में डीप फ्राई समोसा शाही परिवार के सदस्यों व अमीरों का प्रिय व्यंजन था। १४ वीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आये इब्नबतूता ने मो0 बिन तुगलक के दरबार का वृतांत देते हुए लिखा कि दरबार में भोजन के दौरान मसालेदार मीट, मूगंफली और बादाम स्टफ करके तैयार किया गया लजीज समोसा परोसा गया, जिसे लोगों ने बड़े चाव से खाया। यही नहीं 16वीं शताब्दी के मुगलकालीन दस्तावेज आईने अकबरी में भी समोसे का जिक्र बकायदा मिलता है। समोसे का यह सफर बड़ा निराला रहा है। समोसे की उम्र भले ही बढ़ती गई पर पिछले एक हजार साल में उसकी तिकोनी आकृति में जरा भी परिवर्तन नहीं हुआ। आज समोसा भले ही शाकाहारी-मांसाहारी दोनों रूप में उपलब्ध है पर आलू के समोसों का कोई सानी नहीं है और यही सबसे ज्यादा पसंद भी किया जाता है। इसके बाद पनीर एवं मेवे वाले समोसे पसंद किये जाते हैं। अब तो मीठे समोसे भी बाजार में उपलब्ध हैं। समोसे का असली मजा तो उसे डीप फ्राई करने में है, पर पाश्चात्य देशों में जहाँ लोग कम तला-भुना पसंद करते हैं, वहां लोग इसे बेक करके खाना पसंद करते हैं। भारत विभिन्नताओं का देश है, सो हर प्रांत में समोसे के साथ वहाँ की खूबियाँ भी जुड़ती जाती हैं। उ0प्र0 व बिहार में आलू के समोसे खूब चलते हैं तो गोवा में मांसाहारी समोसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। पंजाबी समोसा खूब चटपटा होता है तो चाइनीज क्यूजीन पसंद करने वालों के लिए नूडल्स स्टड समोसे भी उपलब्ध हैं। बच्चों और बूढ़ों दोनों में समोसे के प्रति दीवानगी को भुनाने के लिए तमाम बहुराष्ट्रीय कम्पनियां इसे फ्रोजेन फूड के रूप में भी बाजार में प्रस्तुत कर रही हैं। उम्मीद है कि आपलोगो को जलेबी की तरह समोसा भी खुब पसंद आयेगा।

20 comments:

  1. यह तो संडे स्पेशल हो गया !!!

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  2. समोसा भी खा लिया. अब पान ले आओ..चाय के बाद. :)

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  3. aअरे बेटा कहीं कोई रेस्तराँ खोलने का इरादा तो नहीं सभी को चारा डाल रहे हो? वैसे समोसे बहुत स्वाद हैं । मगर रात को नहीं शाम की चाय के साथ मंगवाया करो। कल क्या खिला रहे हो? अगर साथ मे बनाने का तरीका भी बताओ तो और भी बडिया है शुभकामनायें और धन्यवाद भी।

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  4. aअरे बेटा कहीं कोई रेस्तराँ खोलने का इरादा तो नहीं सभी को चारा डाल रहे हो? वैसे समोसे बहुत स्वाद हैं । मगर रात को नहीं शाम की चाय के साथ मंगवाया करो। कल क्या खिला रहे हो? अगर साथ मे बनाने का तरीका भी बताओ तो और भी बडिया है शुभकामनायें और धन्यवाद भी।

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  5. भाइ वाह , गजब की जान्कारी दिया है आपने .
    मुझे तो ये लगता है कि न्योता देते देते बाढ ला दोगे असलियत्त मे कुछ भी नही मिला
    समीर जी पान मै आपको पेश कर रहा हु ,
    बनारसी , कैसा लगा :)

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  6. " sunday housfull bahut hi acchi jankari ke saath muh me pani aagaya bahut hi khub "

    dhanywad

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

    http://hindimasti4u.blogspot.com

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  7. मिथिलेश जी, मामला जलेबी तक तो ठीक था..ओर मिठास के लिए वो जरूरी भी था लेकिन आज आपने कुछ गडबड कर दी...आज आप लोगों को समोसे खिला रहे हो..अब अगर इनमें मिर्ची कुछ ज्यादा हुई ओर किसी का मुँह जल गया तो वो कही गालियाँ न बकने लगे.....यदि ऎसा हुआ तो इस बार होने वाले " ब्लागदंगें " के जिम्मेवार आप होंगें :)

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  8. अजी अभी पान मत खिलाना हमारे यहां पान त्जब खिलाते है तो इस का मतलब अब खिसको... अरे अभी चाय, बीयर, पेग शेग... फ़िर दोपहर का खाना.... फ़िर दोपहर की चाय

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  9. समोसे पर इतनी जानकारी भरा लेख .. कमाल कर दिया आपने .. मीठे के बाद नमकीन की जरूरत तो होती ही है।

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  10. समोसे के साथ बिनचीनी चाय

    और सिर्फ मीठी ही नहीं
    हरी चटनी भी आय

    इन चटनियों और चाय का भी

    इतिहास बतलाया जाये
    तो
    भरपूर मजा आये।

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  11. हमें तो समोसा बहुत पसंद आया ।बधाई !!

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  12. खाना-खजाना पर पी एच डी कर ली है क्‍या? एक रहस्‍य की बात बताती हूँ, समोसा ज्‍यादातर महिलाओं को पसन्‍द आता है और कचोरी पुरुषों को। आप चाहे तो परीक्षण कर लेना इस स्‍त्री लिंग और पुर्लिंग के भेद का। समोसे को चाहे जैसे बना लो, लेकिन जो आलू वाले में मजा है, वो किसी और में नहीं।

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  13. भैया दुबे जी एक्कौ बचा भी है ?

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  14. इस महगांई में कुछ भी खिलाओ भाई हम तो खाने को तैयार है ।

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  15. अरे वाह समोसे! मेरा सबसे मनपसंद खाना! देखकर मुँह में पानी आ गया! बहुत बढ़िया पोस्ट!

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  16. सही में संडे स्पेशल । समोसे की तो बात ही क्या, आपने तो उसकी पूरी कुंडली ही बांच दी ।

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  17. समोसे देख के मुहं मर पानी आ गया।

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