Monday, October 12, 2009

"अविनाश वाचस्पति जी और समीर लाल जी हाजीर है आपके के लिए चाय और चटनी, सभी ब्लोगर आमंत्रित"




हाँ तो भैया हम का बताये आप लोगो को ब्लोगरो ने तो ऐसी की तैसी कर दी है। अब देखिये पहले जलेबी खिलाये तो कुछ लोगो का कहना था कि हम डाबटिज के रोगी है तो हमने उनके लिए समोसे का इन्तजाम किया सोचा ऐसा नहीं करुगा तो उनके साथ ना इंसाफी होगी। अब यही सब कुछ फ्री मे मिल रहा है तो फरमान पर फरमान चालू है। कोई ये तो कहता नहीं दुबे जी आप ने बहुत मेहनत किया और पैसे भी खर्च हुए होंगे अभी हम आपके के लिए पैसे भेजवा देते है। ऐसा तो कोई करेगा नहीं, वही है हमारे यहाँ एक कहावत कहते है जो की भोजपुरी में है "सेती के चन्दन रगण मोरे लल्लन" ।
अब जलेबी और समोसे खाने के बाद लोगो ने और भी फरमाइसे कीं समीर लाल जी का कहना था कि अब पान होना चाहिए तभी राजभटिया जी ने कहा कि पान खिलाने का मतलब अब चलते बनिये, क्योंकि पान तो सब कुछ खिलाने के बाद दिया जाता है। राज भाटिया जी बिल्कुल सही कहा आपने अब समीर जी का मन है तो पान भी खिलायेगें वैसे भी हम बनारस से है जहाँ का पान विश्व प्रशिद्ध है।
इन सब के बीच अविनाश वाचस्पति जी का कहना था कि समोसे के बाद चाय और चटनी के इतिहास के बारे मे भी बतया जाये तो अच्छा रहता । और कुछ लोगो का ये भी कहना था कि बनाने की बिधि भी बतायी जाये तो और भी अच्छा रहता । लेकिन भाई ये अन्तिम होगा, नहीं तो लगता है आप लोग हमे शेप बनाने कर ही छोडे़गे। तो लीजिए चाय और चटनी हाजीर है। आशा है कि आप लोगो को पसन्द आयेगी।चटनी, चाय के साथ कुछ समोसे भी लाया हूँ फिर से, नहीं तो आप लोग कहते कि चटनी को किसके साथ खाऊं। हाँ तो अब इन्तजार किसका लीजिए चटनी समोसे और चाय । लग जाईये एक बार फिर

चाय एक लोकप्रिय पेय है। यह चाय के पौधों की पत्तियों से बनता है।सबसे पहले सन् १८१५ में कुछ अंग्रेज़ यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया जिससे स्थानीय क़बाइली लोग एक पेय बनाकर पीते थे। भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड लॉर्ड बैंटिक ने १८३४ में चाय की परंपरा भारत में शुरू करने और उसका उत्पादन करने की संभावना तलाश करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसके बाद १८३५ में असम में चाय के बाग़ लगाए गए।
कहते हैं कि एक दिन चीन के सम्राट शैन नुंग के सामने रखे गर्म पानी के प्याले में, कुछ सूखी पत्तियाँ आकर गिरीं जिनसे पानी में रंग आया और जब उन्होंने उसकी चुस्की ली तो उन्हें उसका स्वाद बहुत पसंद आया। बस यहीं से शुरू होता है चाय का सफ़र। ये बात ईसा से २७३७ साल पहले की है। सन् ३५० में चाय पीने की परंपरा का पहला उल्लेख मिलता है। सन् १६१० में डच व्यापारी चीन से चाय यूरोप ले गए और धीरे-धीरे ये समूची दुनिया का प्रिय पेय बन गया। चाय से जुडे़ कुछ आकड़े------- वर्ष २००३ तक पूरे विश्व में चाय का उत्पादन ३.१५ मिलियन टन वार्षिक था। प्रमुख उत्पादक देशों में भारत, तथा उसके बाद चीन का स्थान था (अब चीन ने भारत से इस क्षेत्र में बाजी मार ली है), अन्य प्रमुख उत्पादक देशों में श्रीलंका एवं कीनिया इसके बाद महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। चीन ही अभी एकमात्र ऐसा देश है जो लगभग हर तरह की चाय का बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन करता है। जब से जैविक खेती का प्रचलन बढा है जैविक चाय के उत्पादन में भी काफी बढोत्तरी देखी गयी है। २००३ में ३,५०० टन जैविक चाय की खेती की गयी थी। जैविक चाय के उत्पादन का ज्यादातर हिस्से की खरीदारी (लगभग ७५%) फ्रांस, जर्मनी, जापान, अमरीका एवं ब्रिटेन द्वारा की जाती है। और लीजिए

अब हाजीर है चटनी। चटनी का अर्थ होता है दो या उससे अधिक चीजों का मिश्रण। आम बोलचाल में चटनी या खिचड़ी शब्द का इस्तेमाल वैसी चीजों के लिये किया जाता है जिसमें आनुपातिक मात्रा का कोई खास खयाल नहीं रखा जाता। चटनी मूल रूप से भारत का सौस है जो मूल रूप से हरी मिर्च और नमक से बनी होती है और इसके अतिरिक्त इसमें खुली प्रयोग की छूट ली जा सकती है। ज्यादातर चटनियों के बनाने में हरी मिर्च और नमक के अलावा अपने पसंद की किसी भी खास सब्ज़ी को चुना जा सकता है। ज्यादातर सब्ज़ियों की चटनियाँ यूँ तो कच्ची सब्ज़ी को सिल-बट्टे पर पीसकर या ब्लेंडर में ब्लेंड कर के बनायी जा सकती हैं लेकिन किसी किसी फलों की चटनी बनाते समय उन्हें पकाने की जरूरत पड़ सकती है। कुछ लोकप्रिय चटनियों में ये चटनियाँ शामिल हैं:- नारियल की चटनी प्याज की चटनी इमली की चटनी टमाटर की चटनी धनिये की चटनी पुदीने की चटनी आम की चटनी लहसुन की चटनी चटनी बनाते समय जिन मुख्य मसालों का इस्तेमाल किया जाता है उनमें नमक, अदरख सौंफ, हींग, जीरा इत्यादि प्रमुख हैं। अपने मूल स्थान (भारत) तथा पड़ोसी देशों में चटनी को खाने से पहले ताज़ा तैयार किया जाता है जो आसानी से उपलब्ध या मौसमी चीजों से तुरत फुरत तैयार की जाती है। अमरीका और यूरोप के देशों में चटनी को मुख्य रूप से चटनी को फ्रीजो में रखकर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है।

24 comments:

  1. समोसे और मिठाई क्या गिने चुने ही खाते रहे बाकी भाई लोग कहाँ थे ? भैय्या जानकारी तो चटनी के बारे में खूब दी है . वैसे नागपुरी पान मीठी पत्ती अच्छा रहता है

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  2. मेरे भाई
    ये जलेबी और समोसे
    मुझे तो नहीं लगता कि इन दोनों यानि कि अविनाश और समीर लाल को मुफीद रहेंगे। एक को मधुमेह है और एक खुद समोसे का विशाल रूप है
    इधर भिजवा देते तो अच्‍छा था।
    http://chokhat.blogspot.com/

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  3. आनन्द आ गया भाई ऐसी चाय में.

    पवन बाबू को जल जीरा भिजवाईये, पच नहीं पा रहा है हमारा और अविनाश भाई का खाना खाते देखना उनसे..हा हा!!

    अब पान...जरा जर्दा बढ़िया वाला किमाम और लक्षमी टेबलेट के साथ और रहे मघई जोड़ा. चूना तनि अलग से रखवा लें..बाबू!! :)

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  4. मुफ्त के इस आभासी खाने का मजा कुछ और ही रहा .. अब पान की भी फरमाइश हो गयी .. मेजबानी करना इतना आसान भी नहीं होता .. फिर आराम करने के लिए लोग खाट भी मांगेंगे !!

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  5. दुबे जी सब कुछ खिला दिए हो दोस्त तो फिर सोने का भी इंतजाम करिए :)

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  6. ेअरे भाई बनाने की विधी भी बता देते। अब हर रोज़ तो तुम खिलाओगे नहीं अभी एक बार खिला कर ही पैसे का सुनाने लगे हो। जो आने जाने मे हमारा खर्च हुया उसका क्या? चलो हमे सब चीज़ों की विधी बता दो हम खुद ही बना लेंगे। बडिया लगी चटनी और समोसा मगर चाय ठँडी थी ।फिर भी धन्यवाद्

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  7. दीवाली तो हमारी दुबे जी ही मनवा रहे हैं....वरिष्ठ ब्लोगरों की तरफ से भी कुछ होना चाहिए....

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  8. @ प्रखर
    जी
    वरिष्‍ठ तो वैसे भी भ्रष्‍ट हैं

    कहते हैं न
    हम भ्रष्‍टन के भ्रष्‍ट हमारे

    तो आपको वरिष्‍ठ चाहिए या ...


    @ संगीता जी
    इस बार अवश्‍य ही मिथिलेश जी

    खाट खटिया की ही बिछायेंगे

    या खड़ी करेंगे

    जबकि अभी तो उनकी ही खटिया खड़ी दिखती है


    @ मिथिलेश जी

    खटिया हल्‍कों के लिए

    और खाट भारी वालों के लिए

    अब हम पवन जी तरह चंदन तो नहीं फैलायेंगे

    कि वे खाट भी न टूट जाए, के भय से

    धरती पर ही लोट लगाते हैं

    समीर भाई ने ऐसा ही बतलाया है

    अब पता नहीं अपना किस्‍सा सुनाया है


    @ निर्मला जी

    आप दुबे जी को
    ब्‍लैंक चैक के नहीं

    असली नोटों के

    असली चित्र ब्‍लॉग के माध्‍यम से

    भेज दीजिए और बतला दीजिए

    कि अधिक चाहिए हों

    और जब चाहिए हों तो

    फोटोकापियां स्‍वयं करवा लें

    फिर चाहे बैंक में जमा करवायें

    या ब्‍लॉग में ही स्विस खाता खुलवायें


    @ पंकज मिश्रा जी

    हमें नहीं मालूम था

    कि चढ़ते सेंसेक्‍स के बाजार में

    आप शेयर नहीं

    सोना ही मांगोगे

    क्‍यों क्‍या किसी की शादी करवा रहे हो

    जो सोना ही चाह रहे हो

    मिथिलेश जी
    पंकज जी को

    असली सोने की गिन्नियां और ईंटें भिजवायें

    उनके चित्र भी अपने ब्‍लॉग पर
    दीपावली के दिन ही लगायें

    उन्‍हें कहें कि जितना चाहे ढोकर ले जाएं


    @ मिथिलेश जी

    एक चटनी तो यह टिप्‍पणी भी है

    बतलाइये चटखारे ले लेकर पढ़ रहे हैं

    किसी को मिर्ची लग रही है तो
    कई हंस रहे हैं।

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  9. बढिया जानकारी के लिए शुक्रिया

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  10. देखो.. सच कह रहा हूँ.. अच्छा लिख लेते हो पर verification पर भी थोड़ा ध्यान दो तो अच्छा हो... तुमने लिखा है..
    "चटनी का अर्थ होता है दो या उससे अधिक चीजों का मिश्रण।"
    भाई इतनी research तो नहीं की है मैंने चटनी पर... लेकिन इतनी हिंदी आती है कि ये यकीन के साथ कह सकूँ कि चटनी वो होती है जिसे चाट कर खाते हैं...

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  11. देखो.. सच कह रहा हूँ.. अच्छा लिख लेते हो पर verification पर भी थोड़ा ध्यान दो तो अच्छा हो... तुमने लिखा है..
    "चटनी का अर्थ होता है दो या उससे अधिक चीजों का मिश्रण।"
    भाई इतनी research तो नहीं की है मैंने चटनी पर... लेकिन इतनी हिंदी आती है कि ये यकीन के साथ कह सकूँ कि चटनी वो होती है जिसे चाट कर खाते हैं...

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  12. @अविनाश वाचस्पति जी
    इतना तो पक्का हो गया कि अगली बार जब भी ब्लॉगर्स सम्मेलन होगा, मिथिलेश भैया से टू-इन-वन काम लेना है...ब्लॉगर के नाते तो ये शरीक होंगे ही लगे हाथ इन्हें केटरिंग का ठेका और दे दिया जाएगा...जलेबी, समोसा, चाय, चटनी........पान तो खैर सबसे बाद मे आएगा...

    @उड़न तश्तरी
    पवन जी ने जो कहा, उससे आज जाकर मालूम हुआ कि समोसा इतना हरदिलअज़ीज और स्वादिष्ट क्यो होता है...

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  13. बढिया है ..........काफी चट्पट्टा लगा....बधाई!इंतजाम के लिये!

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  14. दुबे जी असली मजा तो आज आया। चाय समोसे आर चटनी वाह-वाह

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  15. हरी मिर्च और नमक की चटनी को मराठी मे ठेसा कहते हैं,दुबेजी मज़ा आ गया आपकी चाय-पार्टी में।

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  16. आईला !!!
    इ का हो रहा है ....पार्टी...!!!
    समीर जी अब समझे हम आपके क्षेत्रफल का कारण ...
    अरे !! कभी जलेबी...कभी समोसा उडाएगा तो क्षेत्रफल तो चौडाई X चौडाई ही होगा ,,,,न .!!!!
    हा हा हा हा ..!!!!!

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  17. य्ह ब्लोग हटाया गया ब्लोगवनी से
    http://mithileshdubey.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html

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  18. अरे नहीं जे वाला हटा
    http://murakhkagyan.blogspot.com/2009/10/blog-post_13.html

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  19. अरे वाह! इतना स्वादिष्ट खाना देखकर तो मुँह में पानी आ गया! भाई मेरे लिए भेज दीजिये गर्मागर्म समोसे !

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  20. CHATNI KI KHOOB CHATNI BANAAI AAPNE ..... POORI JAANKARI NIKAL KAR AA GAYE ........

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  21. " puri jankari ke saath hazir hue hai aap ...is baaar rochak aur swaadist jankari ke liye dhanywad "

    ----- eksacchai { aawaz }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  22. चाय के साथ चटनी, अजी बिस्कुट विस्कुट ही मंगा लेते।
    ----------
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  23. guru tumhara pesh karne ka tareeka bada swadist hai

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  24. हमे तो याद है जब एक बार बनारस मे रथयात्रा चौक के एक पानवाले ने देखते देखते हमे छह पान खिला दिये थे ।

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