Wednesday, October 14, 2009

रिश्ते बंद है आज चंद कागज के टुकड़ो में

रिश्ते बंद है आज

चंद कागज के टुकड़ो में,

जिसको सहेज रखा है मैंने

अपनी डायरी में,

कभी-कभी खोलकर

देखता हूँ उनपर लिखे हर्फों को

जिस पर बिखरा है

प्यार का रंग,

वे आज भी उतने ही ताजे है

जितना तुमसे बिछड़ने से पहले,

लोग कहते हैं कि बदलता है सबकुछ

समय के साथ,

पर

ये मेरे दोस्त

जब भी देखता हूँ

गुजरे वक्त को,

पढ़ता हूँ उन शब्दो को

जो लिखे थे तुमने,

गूजंती है तुम्हारी

आवाज कानो में वैसे ही,

सुनता हूँ तुम्हारी हंसी को

ऐसे मे दूर होती है कमी तुम्हारी,

मजबूत होती है

रिश्तो की डोर

इन्ही चंद पन्नो से,

जो सहेजे है मैंने

न जाने कब से।।

28 comments:

  1. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति . बधाई

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  2. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति . बधाई

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  3. मिथिलेश जी,

    शायद यह डायरी ना हो तो मुहब्बत?

    बहुत अच्छी कविता, दिल से डूब कर लिखी हुई।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  4. रिश्ते बंद है आज
    चंद कागज के टुकड़ो में,
    बिल्‍कुल सही लिखा है .. सुंदर अभिव्‍यक्ति !!

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  5. वाह क्या बात है खिलाने का चाव पूरा हो गया?रे जेब तो नहीं खाली हो गयी?
    अच्छा तो कागज़ संभाल कर रखे है? पढते रहते हो। वाह क्या बात है बहुत सुन्दर सकारात्मक अभिव्यक्ति है बधाई और शुभकामनायें दीपावली की भी तुम्हें और सारे परिवार को मंगलकामनायें आशीर्वाद्

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  6. कहीं, बहुत भीतर छू लिया आपने,,,हर शब्द बरस पड़ते हैं जब कोई पन्ना पुराना खुल जाता है, वाकई...समय के साथ उन्ही शब्दों में बेचैनी और भी बढ़ती जाती है, कुछ और बहुत कुछ कह देने की,......पूरा एक लम्हा कैद होता है उन हर्फों में....

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  7. " behtarin abhivyakti janab ."

    ऐसे मे दूर होती है कमी तुम्हारी,

    मजबूत होती है

    रिश्तो की डोर

    इन्ही चंद पन्नो से,

    जो सहेजे है मैंने

    न जाने कब से।।

    "aaapko is rachana ke liye dil se badhai "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  8. bahut hi achchi kavita

    मजबूत होती है

    रिश्तो की डोर

    yeh bilkul sahi hai........

    bahut sunder abhivyakti..........

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  9. कुछ रिश्ते अटूट होते है, जिनसे दिल जुड़ जाता है फिर वो पास रहे या न रहे कुछ फर्क नहीं पड़ता और कुछ रिश्ते ऐसे भी होते है जिनके साथ रहते भी बहुत दूर होते है. बहुत ही सुन्दर रचना, अभिनन्दन.

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  10. बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति . बधाई

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  11. itne lajij vyanjanon ke baad itni achhi rachna.......kuch bhi adhura nahi raha......

    कुछ दीये खरीदने हैं,
    कामनाओं की वर्तिका जलानी है .....
    स्नेहिल पदचिन्ह बनाने हैं
    लक्ष्मी और गणेश का आह्वान करना है
    उलूक ध्वनि से कण-कण को मुखरित करना है
    दुआओं की आतिशबाजी ,
    मीठे वचन की मिठास से
    अतिथियों का स्वागत करना है
    और कहना है
    जीवन में उजाले - ही-उजाले हों

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  12. अच्छी रचना लिखी है आपने

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  13. अच्छी और सच्ची कविता है. बधाई !

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  14. शानदार कविता.........

    क्या निभाया है.........विषय को ..........वाह !

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  15. वा भई मिथिलेश अभी सिर्फ बधाई ..समीक्षा नही happy divali

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  16. जबरदस्त...बधाई!!

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  17. rishto ko shejti huee taze phoolo jaisee lagi apki kavita....rishte kagaz ke tukdho pe.email me ya phn me band hai..fir bhi hai to sahi....

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  18. आपकी भाव अभिव्यक्ति सीधे दिल से आ रही प्रतीत होती है.

    आपको दीपावली की शुभकामनायें !!

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  19. दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनायें

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  20. वाह शानदार अभिव्यक्ति! आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  21. bahut badiya.........
    happy diwali.....

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  22. मिथिलेश जी बहुत ही पसंद आई आपकी ये कविता ।

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  23. Relations are life.Life is to relate

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  24. bahut sachhi baat bahut gahri rachna
    sab kahte hain badalta hai lekin aawaz waise hi sunayi deti hai

    bahut pasand aayi

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