Saturday, October 10, 2009

खामोश रात में तुम्हारी यादें

खामोश रात में तुम्हारी यादें,
हल्की सी आहट के
साथ दस्तक देती हैं,

बंद आखों से देखता हूँ तुमको,
इंतजार करते-करते
परेशां नहीं होता अब,

आदत हो गयी है तुमको देर से आने की,
कितनी बार तो शिकायत की थी तुम से ही,
पर
क्या तुमने किसी बात पर गौर किया ,
नहीं न ,

आखिर मैं क्यों तुमसे इतनी ,
उम्मीद करता हूँ ,
क्यों मैं विश्वास करता हूँ,
तुम पर,

जान पाता कुछ भी नहीं ,
पर तुमसे ही सारी उम्मीदें जुड़ी हैं,
तन्हाई में,
उदासी में ,
जीवन के हस पल में,

खामोश दस्तक के
साथ आती हैं तुम्हारी यादें,
महसूस करता हूँ तुम्हारी खुशबू को,
तुम्हारे एहसास को,

तुम्हारे दिल की धड़कन का बढ़ना,
और तुम्हारे चेहरे की शर्मीली लालिमा को,
महसूसस करता हूँ-

तुम्हारा स्पर्श,
तुम्हारी गर्म सांसे,
उस पर तुम्हारी खामोश और
आगोश में करने वाली मध्धम बयार को।
खामोश रात में बंद पलकों से,
इंतजार करता हूँ तुम्हारी इन यादों को..........

10 comments:

  1. तुम्हारा स्पर्श,
    तुम्हारी गर्म सांसे,
    उस पर तुम्हारी खामोश और
    आगोश में करने वाली मध्धम बयार को।
    खामोश रात में बंद पलकों से,
    इंतजार करता हूँ तुम्हारी इन यादों को..........
    बेहद खुबसूरत और कोमल भाव.....बधाई!

    ReplyDelete
  2. आदत हो गयी है तुमको देर से आने की,
    कितनी बार तो शिकायत की थी तुम से ही,
    पर
    क्या तुमने किसी बात पर गौर किया ,
    नहीं न ,

    आखिर मैं क्यों तुमसे इतनी ,
    उम्मीद करता हूँ ,
    क्यों मैं विश्वास करता हूँ,
    तुम पर,


    सुन्दर लिखे हो भाई .....बधाई हो
    बस एक बात बताओ दिवाली घर पर मनाया तो कविता भी शरू कर दी , :)

    ReplyDelete
  3. आखिर मैं क्यों तुमसे इतनी ,
    उम्मीद करता हूँ ,
    क्यों मैं विश्वास करता हूँ,
    तुम पर,..nazuk si kavita lagi.....

    ReplyDelete
  4. आखिर मैं क्यों तुमसे इतनी ,
    उम्मीद करता हूँ ,
    क्यों मैं विश्वास करता हूँ,
    तुम पर,

    kyun ka koi jawab nahi hai bhai..... aisa ho jata hai.... best yahi hai ki koi ummeed mat karo.........

    जान पाता कुछ भी नहीं ,
    पर तुमसे ही सारी उम्मीदें जुड़ी हैं,
    तन्हाई में,
    उदासी में ,
    जीवन के हस पल में,

    yeh to bahut natural hai.... ummeed to rehti hi hai...

    तुम्हारा स्पर्श,
    तुम्हारी गर्म सांसे,
    उस पर तुम्हारी खामोश और
    आगोश में करने वाली मध्धम बयार को।
    खामोश रात में बंद पलकों से,
    इंतजार करता हूँ तुम्हारी इन यादों को..........

    hmmmmm

    ab to yaadon ka hi sahara hai....

    bahut hi achchi kavita ...... dil ko chhooo lene wali........

    =================

    Kab aaye ghar se.....?

    ReplyDelete
  5. यादों के साथ जीने का मजा ही कुछ और है यार।
    यादों वाली फिल्म का अंत नहीं और

    वो हर पल ताजी होती हैं..तुम्हारी कविता की तरह..तुम्हारे विचारों की तरह

    ReplyDelete
  6. इन खूबसूरत एहसासों में ही है बरबस बिखरा अपना छोटा सा पर प्यारा सा अमूल्य जीवन है ना.....यादें..झिल-मिल यादें....अनगिन बधाई आपको इस रचना के लिए...

    ReplyDelete
  7. इस कविता मे कथ्य तो भरपूर है लेकिन शिल्प पर कुछ और काम करने की आवश्यकता है ।

    ReplyDelete
  8. सुन्दर यादे जो अक्सर दिल चुरा लेती है .

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।