Saturday, October 10, 2009

सभी ब्लोगरो को आमंत्रण आयें और जलेबीयां खाये


आज शाम को बाजार गया था कुछ सामान लानें तभी देखा कि जलेबीयां बन रही थी तो देखते ही मूहं में पानी भर आया। तब का भाई हम भी गये दूकान पर और न मोल किया न भाव बस छक गये खाने में और खाया खूब मजे से। तभी खाते-खाते अचानक आप लोगो का ख्याल आया तो सोचा आप लोगो के लिए भी पैक करवा लेता हूँ और लीजिए हाजिर है शुरु करिए। वैसे भी आजकल ब्लोग जगत में सबका मूहं कड़वा हो गया है, जहाँ देखो वहाँ कड़वाहट ही कड़वाहट फैला है। सब एक दूसरे के उपर आरोप पे आरोप लगाये जा रहें हैं। कोई इनके धर्म की बुराई कर है तो कोई उनके। तब दिमाग में एक ख्याल आया कि क्यों ना सभी को एक जगह पर बुलाया जाये। अब भाई इतने लोग आयेंगे तो कुछ खिलाना भी पड़ेगा क्यों सही कहा की नहीं। अब बड़े-बड़े लोग आयेंगे तो मूहं बाँध के तो बैठेंगे नहीं तो मैंने कहा आप लोगो के लिए जलेबीयां ले चलता हूँ। इससे दो काम हो जायेगा एक तो आप लोगो का मूहँ भी मिठा हो जायेगा और मेरे पैसे भी बच जायेंगे। क्यों रहा ना मस्त आईडिया। तो फिर मैंने सोचा कि क्यों ना आप लोगो को जेलेबी के इतिहास के बारे में भी बताया जाये। ये भी तो जाना जाये की ये आया कहाँ से इसका नाम जलेबी कैसे पड़ा। तो अभी खाने से पहले आईये थोड़ा इसके बारे में जान लेते है।

जलेबी उत्तर भारत" style="text-decoration: none; background-image: none;">भारत, पाकिस्तान" style="text-decoration: none; background-image: none;">पाकिस्तान व मध्यपूर्व का एक लोकप्रिय व्यंजन है। इसका आकार पेंचदार होता है और स्वाद करारा मीठा। इस मिठाई की धूम भारतीय उपमहाद्वीप" class="mw-redirect" style="text-decoration: none; background-image: none;">भारतीय उपमहाद्वीप से शुरू होकर पश्चिमी देश स्पेन" style="text-decoration: none; background-image: none;">स्पेन तक जाती है। इस बीच भारत, बांग्लादेश" style="text-decoration: none; background-image: none;">बांग्लादेश, पाकिस्तान, ईरान" style="text-decoration: none; background-image: none;">ईरान के साथ तमाम अरब मुल्कों में भी यह खूब जानी-पहचानी है। आमतौर पर तो जलेबी सादी ही बनाई व पसंद की जाती है, पर पनीर" style="text-decoration: none; background-image: none;">पनीर या खोया जलेबी को भी लोग बडे चाव से खाते हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि जलेबी मूल रूप से अरबी भाषा" style="text-decoration: none; background-image: none;">अरबी शब्द है और इस मिठाई का असली नाम है जलाबिया। यूं जलेबी को विशुद्ध भारतीय मिठाई मानने वाले भी हैं। शरदचंद्र पेंढारकर (बनजारे बहुरूपिये शब्द) में जलेबी का प्राचीन भारतीय नाम कुंडलिका बताते हैं। वे रघुनाथकृत ‘भोज कुतूहल’ नामक ग्रंथ का हवाला भी देते हैं जिसमें इस व्यंजन के बनाने की विधि का उल्लेख है। भारतीय मूल पर जोर देने वाले इसे ‘जल-वल्लिका’ कहते हैं । रस से परिपूर्ण होने की वजह से इसे यह नाम मिला और फिर इसका रूप जलेबी हो गया। फारसी और अरबी में इसकी शक्ल बदल कर हो गई जलाबिया। उत्तर पश्चिमी भारत और पाकिस्तान में जहां इसे जलेबी कहा जाता है वहीं महाराष्ट्र में इसे जिलबी कहा जाता है और बंगाल में इसका उच्चारण जिलपी करते हैं। जाहिर है बांग्लादेश में भी यही नाम चलता होगा।

हाँ तो रहा ना मजेदार खाने और पढ़ने में आशा है कि आप लोगो को खुब पसन्द आया होगा। ठीक है तो आप लोग खाईये जमकर हम चलते है। और खाने के बाद ऐसे ही मत चले जाईयेगा कम से कम ये जरुर बताइयेगा कैसा रहा स्वाद।

34 comments:

  1. mujhe to jalebi bahut meetha laga,yun bhi kadwahat se pare hi rahti hun

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  2. मिथिलेश भाई,

    स्कर्ट धर्म के बाद जलेबी... अच्छा ख्याल है...

    लेकिन हमें तो भाई डॉयबिटीज़ का डर रहता है...

    जय हिंद...

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  3. दूबे जी निर्गुनिया ही गाये -जलेबिया कहाँ गयी ?

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  4. दुबे भाई ये क्या किया आपने , अभी अभी आफिस से आया और आपने ब्लॉग पर जलेबी छाप कर हमें ललचाया
    अब बीबी जिद पकड ली है कि कपडे मत निकालो , पहले जाओ जलेबी लेकर आओ
    अब तुम्ही बताओ ये कैसी दुश्मनी है भाई :)

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  5. अरे जब तक हम आये सब जलेबिया तो खत्म हो चुकी थी, जब आप ने सब को बुलाया तो कम से कम जलेबिया तो ज्यादा लाते, हम तो लार टपकाते आप का लेख पढते रहे, अब जल्दी से हमे दो, तीन किलो जलेबियां डाक से भेज दे, हम खा कर बतायेगे केसी थी, अरे ज्यादा महंगी मत ले सादी जो आप ने खाई बिलकुल वेसी ही.
    राम राम जी की

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  6. जलेबी खा ही लेते हैं. :)

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  7. यार ये कागजी जलेबियाँ खा कर तो बड़ा आनन्द मिला.........

    मज़े की बात ये है कि जलेबियाँ सुगर फ्री थी.........

    मधुमेह वाले भी खा सकते हैं,,,,,,,,,,,,,,हा हा हा

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  8. लगता है, मुझे तो देर हो गई :-(
    जलेबियाँ तो खतम हो चुकीं
    खैर अगली बार सही

    बी एस पाबला

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  9. @ अलबेला जी

    लगता है हमें फंसा रहे हैं
    जलेबियां मीठी खाकर
    शुगरफ्री
    बतला रहे हैं
    फ्री की जलेबियों में तो
    मैदे, घी के संगम सहित
    शुगर भी तो फ्री आएगी
    इसलिए शुगर फ्री कहलाई जाएगी
    आपको आनंद आया
    तो जलेबियां आनंद फ्री भी हुईं
    परंतु हम मधुमेहियों ने अगर खा लीं
    तो हम भी फ्री हो जायेंगे
    चाहे जीवन फ्री ही सही
    और फ्री में जीवन जाये
    तो वो भी तो भायेगा ही
    फ्री का माल फ्री ही करेगा
    हमने लालच करना छोड़ दिया है
    आप तो हमें जलेबियों की जगह
    कल समोसे ही खिलवा दें
    पर जिन्‍होंने जलेबियां खाई हैं आज
    उनके लिए भी समोसे मंगवा लें।

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  10. hamaare chator pan kee khabar apako kaise mili
    ki aap bhee
    vaah khoob sareelee post hai ji

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  11. dekhiye kahin aap zindagi se free na ho jayain jalebiyan apko mehangi na pad jayain sahab yaise apki kavita to khud mihtas se bhari hoti hai.

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  12. बाद में पहुंचने वाले सिर्फ़ जलेबी के जीवन परिचय से काम चलायें

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  13. @ जहान
    मीठी कवितायें तो मैं भी पढ़ना चाहता हूं। मुझे भी ऐसी कवितायें अवश्‍य पढ़वायें। मेरे ई मेल पर कुछ मीठी मीठी कवितायें भिजवायें avinashvachaspati@gmail.com

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  14. भाई मुंह में पानी आ गया है....

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  15. आपकी जलेबी में मिठास थोडी अधिक हो गई:)

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  16. आपकी जलेबी मिठास का अहसास दे गयी !!

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  17. jalebi ki mithas sach ki kadwahat ko nahi mita sakati, phirbhi mithai ke liye dhanyawad. Deepavali ki shubhkamanaye.

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  18. भाई दुवे जी,

    दुसरो और अपनों को जलेबियां खिलाकर दुर कर रहे हो, जलेबियां इतनी मिठी थी कि, पुछो मत । जलेबियां के साथ उसमे थोडा नमकीन भी चाहिए क्योकि मीठा खाने के साथ-साथ थोडी कडवाहट की जरुरत होती है । जिन्दगी में थोडा मीठा और कडवाहट .................

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  19. वाह वाह जलेबी? तब तो जरूर आना पडेगा। मगर ये मत समझना कि मुफ्त मे पडी हैं जनाब किराया खरच करके आयेंगे। मगर उस किराये के आगे तुम्हारे प्यार का क्या महत्व है बेटा जलेबी लाये और हम न खायें कैसे हो सकता है । वैसे इसे रस्परी भी कहते हैं । बहुत मीठी और मेरी मन पसंद मिठाई है। धन्यवाद और आशीर्वाद। जलेबी पुराण बहुत अच्छा लगा

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  20. वाह वाह पंडितजी, ये जलेबियाँ भी आपके अंदाज़ की तरह मीठी थीं। मज़ा आ गया खाकर। काश ये मिठास हर वाणी में घुल जाए।

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  21. कडवे मुँह मे जलेबियाँ भी कडवी हो जायेंगी. वैसे जलेबियाँ है मिठास भरी

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  22. मावे और खोये की तरह तेल भी मिलावटी आ रहा है ज्यादा न खाए !

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  23. मुझे तो आने में देर हो गई। बची भी है मेरे लिए या खत्म हो गई?

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  24. आपकी भेजी जलेबियाँ ईमेल से प्राप्त हुईं. आभार.

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  25. जलेबी खिलाईये हां चीनी का ख्याल करके कई रोगी शामिल है .......................

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  26. आपकी जलेबियों ने मुंह मीठा करा दिया।

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  27. 'Jalabiya'/जलाबिया।-Arab desh mein Mahilaon ke ek vishesh khubsurat paridhan ko kahte hain.Jo maxi ki tarah hota hai.

    aap ne kahaa-कुछ लोगों का मानना है कि जलेबी मूल रूप से अरबी शब्द है और इस मिठाई का असली नाम है जलाबिया।
    pahali baar sun rahi hun..jaankari ke liye abhaar.

    yahan to jalebi sirf indian /pakistani shop mein milti hain-arab sweets shop mein nahin dekhi.

    Shukriya Jalebiyon ke liye.

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  28. JALEBI KA ITIHAAS BHI JALEBI KI TARAH TEDA MEDA PAR MEETHA HAI ....

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  29. जलेबी के बारे में भी इतने पेच होंगे पता नहीं था। आपके पोस्‍ट की जलेबी है बड़ी लाजवाब। दीवाली पर यहीं से मिठाई खिलायी जाएगी। पैसे की पूरी बचत। वाह।

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  30. बहुत ही अच्छी जानकारी दी जलेबी की...
    मुह में पानी आ गया...

    sandeep > dard-a-dard.blogspot.com

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  31. इतनी जानकारी दी है तो यह भी पता करके बता दें कि 100 ग्राम जलेबियों में कितनी कैलोरी होंगी ? तभी डिसीजन ले पायेंगे :)

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  32. ऑस्ट्रेलिया में तो जलेबी नहीं मिलती इसलिए आपके द्वारा पोस्ट किए हुए जलेबी देखकर ही पेट भरना पड़ेगा ! साल भर से ऊपर हो गया जलेबी खाए हुए! बहुत अच्छा लगा आपका ये दिलचस्प पोस्ट!

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  33. अरे भाई जलेबियां वाह-वाह क्या कहने। भाई ये सब तो मैं ही खा जाउगां दुसरे ब्लोगर के लिए और मंगवा लेना।

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  34. भाई वाह मजा आ गया।

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