Saturday, November 7, 2009

हिन्दू मरने के बाद गद्दार बनते हैं और मुस्लिम देशभक्त

"हिन्दू मरने के बाद गद्दार बनते हैं और मुस्लिम देशभक्त " आप लोग सोच रहे होंगे कि मै ये क्या बके जा रहा हूँ। सब्र करिये कुछ देर बाद सारी बात साफ हो जायेगी। मेरा ये लेख लिखने का कोई प्लान नहीं था और नहीं ऐसा लेख लिखने की इच्छा ही थी लेकिन बेअक्लो की वजह से ये मुझे लिखना पड़ रहा है। मैने आज तक जितने भी लेख धर्म से जुडे़ हुए लिखे है अगर आप ने ध्यान दिया होगा तो मैंने हमेशा दोनो पक्षो को रखा और जो सही है उसे ही बताने की कोशिश की। और ऐसा भी नहीं की धर्म पर लिखे गये मेरे लेखो को बस हिन्दुओं ने ही पसन्द किया, बहुत से मुस्लिम बन्धुओं ने जिसने बातो को समझा, मेरे पक्ष में रहे। वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होने बिना मतलब और बिना तर्क के मेरा विरोध किया और काफी बुरा भला भी कहा। बहुत लोग सोच रहे होंगे की मुझे विवादस्पद लेख लिखनें मे अच्छा लगता है, तो उनकी सोच सरासर गलत है । लेकिन आप ही बताईये क्या चुप रहना भी ठीक होगा ? बहुत लोगो का मानना है कि अगर आपको आपके लेख के उपर कोई भला बुरा कहता है तो आप उसका जवाब अपनी टिप्पणी से दे सकते है। लेकिन क्या जिसे आप जवाब दे रहे है वह दूबारा आपके ब्लोग पर आयेगा इसमें जरा सशंय होगा।
अब बात बहुत हो चुकी, अब आता हूँ मुद्दे पर। जैसा की आप लोगो को मालुम है कि अभी कुछ दिनों पहले ही मैंने एक लिखा था " माँ को इज्जत देनें में अगर शर्म आती है तो कहीं डुब मरो" इस लेख को ज्यादातर लोगो ने पसन्द किया। पसन्द करने का कारण था, वह यह की मैने इसमे कुछ विवादस्पद नहीं लिखा था और जो कुछ भी लिखा था वह तर्क के साथ लिखा था, इसलिए ज्यादा विरोध नहीं हुआ। इन सबके बिच एक विरोध भरी टिप्पणी आयी, टिप्पणी भी ऐसी जो की पढ़ने मात्र से बताती हो कि टिप्पणी देने वाला किस तरह के संस्कार से पूर्ण है। जिसे ये भी नहीं पता कि बात करने का लहजा क्या होता है। वैसे ऐसे तुम तड़ाक बात करने वालो को जवाब देना मै उचित नहीं समझता लेकिन चुप रहना भी मुश्किल था मेरे लिए इसलिए महाशय को जवाब दे रहा हूँ। टिप्पणी करने वाले का नाम " आसिफ " है, मैंने इनका नाम पहली बार देखा ब्लोग जगत में, खैर छोड़िये अब जरा ये देखते है कि इनका कहना क्या था "@Mithilesh dubey
"""तुम साबित क्या करना चाहते हो? यही कि जिसने वन्दे मातरम गा लिया वह देशभक्त हो गया और जिसने गाने से मना कर दिया वह देशद्राही? गौर कर मेरी बात पर तुम्हारे लिए सिर्फ वन्देमातरम गाना ही देशभक्ति है तो हम मुस्लिमों के लिए मरने के बाद अपने ही वतन की मिट्टी में मिलना वतन की माटी से सच्चे प्रेम की निशानी है। हम मुस्लिम उसी वतन की जमीन की मिट्टी में मिलते है जिस वतन की मिट्टी में पैदा होते हैं। ना हम दफन होने मक्का जाते और ना मदीना। और तुम लोग? शव को जलाने के बाद उसकी राख तक ले जाते हो और बहा देते हो उस गंगा में जो देश की सीमाओं को पारकर दूर किसी देश में उस राख को ले जाती है। क्या यही है तुम्हारा अपनी जननी के प्रति प्रेम? वतन की माटी में मिलने में तुम्हें शर्म महसूस होती है? तुम्हारी नजर में वन्दे मातरम सिर्फ बोल देना ही देशभक्ति है तो मेरी नजर में अपने देश की माटी में मिलना सच्ची देशभक्ति है। सोचो कौनसी देशभक्ति ज्यादा अहमियत रखती है? जिस तरह तुम हमसे कहते हो कि हम वन्दे मातरम बोलकर देशभक्त बनें, मैं तुम्हें कहता हूं कि सिर्फ एक गीत गाने से ही देशभक्त होते तो दुनियाभर की खूबियों के मालिक ये गायकार होते जो सैंकडों गाने अच्छे-अच्छे अर्थ वाले गा चुके हैं। सही मायनों में देशभक्त बनो और अपने वतन की माटी से सच्ची मोहब्बत की मिसाल पेश करो जैसी हम लोग करते हैं। अपना तन उसी देश की माटी को समर्पित करो जहां का खा पीकर बड़े हुए हो। अपनी माटी से दगा ना करो ''''''''' इन्होंने पहली ही लाईन में कहा कि " तुम साबित क्या करना चाहते हो जिसने वन्दे मातरम नहीं गाया वह देश का गद्दार है" हाँ तो मेरा कहना अब भी है जो ना गायें वन्दे मातरम वह देश का गद्दार हैऔर आप ही बताईये गद्दार क्यों ना कहा जाये उसे। अरे जरा अपनी आँखे और दिमाग खोलो ध्यान से सूनों, जिस देश में रहते हो जहाँ की खाते हो जहाँ की पहनते हो, जिस देश नें तुम्हे सर ढकने के लिए छत और सोने के लिए जमीन दी , उसको समर्पित दो शब्द कहने की बारी आयी तो ये कहके इंकार करना कि ये धर्म विरोधी है। तो एक बार फिर मैं कहता हूँ ऐसे लोगो को डुब मरना चाहिए वहाँ जहाँ सुखा पड़ा हो, चूल्लु भर पानी भी ज्यादा है इनके लिए। मैं ये नहीं कहता कि ये बस मुस्लिम पर लागू हो, बल्कि हर उस शख्स के लिए जो भारत माता को इज्जत देने से इंकार करता हो। ये बात ठिक है कि आपके धर्म में मुर्ति पूजन नहीं माना जाता तो आप पूजा ना करिए, उसके लिए आपसे कोई जोर जबरजस्ती नहीं कर रहा है, लेकिन ये कहना की ये धर्म विरोधी है तनिक भी ठिक ना होगा। बात साफ है हो सकता बहुत दिनों से बहुत से लोग इस गान का विरोध कर रहे हों, लेकिन प्रत्यक्ष रुप से अब हो रहा है। ये भी ठीक है कि वन्दे मातरम कहने मात्र से कोई देशभक्त नहीं बन जाता , आप देश में रहकर देश के लिए कुछ भी भला मत करिये, लेकिन जैसे ही आप देश के विरोध में कुछ करेंगे तो आपको देशद्रोही तो कहा ही जायेगा। अगर देश के लिए कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम उसका विरोध मत करिये।

अब जरा इनका दूसरा व्यक्तव्य देखते है, इन महाशय का कहना है हम लोग मरने के बाद देशभक्ति करते है। सुनकर हसना जरुर आ रहा होगा आप लोगो को और आये क्यों नहीं भला मरने के बाद कोई देश भक्ति कैसे कर सकता है। तो जरा देखिये इसके बारे में इनका क्या कहना, इनका कहना है कि हम मुस्लिम मरने के बाद देश के मिट्टी में दफन हो जाते है और तुम को लोगो जलाकर गंगा में विसर्जित कर दिया जाता है और तुम लोग न पता किस देश में पहुच जाते हो तो बताओं देश भक्त कौन हुआ ? भाई क्या बात है गजब के देशभक्त हो। अगर आप के जवाबो को देखा जाये तो इस मामले में पारसि सबसे बड़े देशभक्त होगे, क्योंकी उनके यहाँ तो ये प्रचलन है कि मरने के बाद लाशो को खुले स्थान में छोड़कर लाशों को गिद्ध और कौओ से खिलाया जाता है, और ये पंक्षि इसी देश मे रहते है और देश कि सेवा करते रहते है, अब पंक्षी कितने काम के होते है ये सब को पता है। अब इनके लहजे में अगर इनको जवाब दिया जाये तो, हिन्दू मरने के बाद जब विसर्जित होते है, इसका कारण है। हम जब तक जीते है देश की सेवा करते हैं और मरने के बाद देश छोड़ देते है, वहीं तुम्हारे यहाँ तुमको दफना दिया जाता है और मरने के बाद भी देश पर बोझ बने रहते हो।हम मरने के बाद गंगा में बहा दिये जाते है, और तुम्हारे यहाँ दफनाया जाता है। दफनाने के बाद उस जगह पर कब्जा कर लेते हो, वहीं अगर दफनाये न जाते तो वह जमीन खेती के काम आती और देश सुखी बनता, अब बताओ कौन हुआ देश भक्त और कौन है गद्दार। ।हो सकता कि इस जवाब का बहुत से लोग विरोध करें, लेकिन कृपया ध्यान दें मेरा जवाब आसिफ जैसे सोच रखने वालो के लिए है, और लोग इसे अन्यथा ना लें।
बात यहा किसी एक धर्म या जाती की नहीं है, हर वो आदमी जो अपने देश का राष्ट्र गीत गानें में शर्म महशुस करता हो उसे देश में रहने का कोई हक ही नहीं है।यहाँ एक और बात जो ध्यान देने वाली है वह यह कि जिस तरह की टिप्पणी आसिफ जी नें दी है, उससे उनका कुछ नहीं जायेगा जायेगा तो उनके कौम का। उन्हे कौन जानता है, सब जानते है तो उनके नाम के परिचायक को, जबकी सभी जानते है कि ऐसे भी मुसलमान भारत में हैं जो गर्व से वन्देमातरम कहते है। इन्होने जाने अंजाने में साफ तौर पर कह दिया कि मुसलमान जीते जी देशभक्त नहीं बनेंगे। बड़े दुःख की बात है यहाँ बात हो रही थी राष्ट्र गीत की, पर उसे सांप्रदायीक रुप देने की कोशिश जारी है। और अन्त में यही कहना कि जो जीते जी कुछ नहीं कर सकता वह मरने के बाद क्या करेगा, खाक।

29 comments:

  1. भाई आ गया हु समझ कम है कुछ कह नही पाऊगा ..
    pre-sorry

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  2. कुतर्कियों को कुतर्क से ही समझाया जा सकता है. वैसे ये समझेंगे फिर भी नहीं लेकिन पैर में चुभते कांटे की अनदेखी आखिर कब तक की जा सकती है.

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  3. आपने बिल्कुल सठिक कहा है और बड़े ही सुंदर रूप से प्रस्तुत किया है! आपका हर एक पोस्ट इतना अच्छा है कि तारीफ़ के लिए अल्फाज़ कम पर जाते हैं ! आपकी लेखनी को सलाम!

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  4. मित्र ! भाषा का संतुलन न तो आरिफ मियां में है और न ही

    आपमे | तर्क सहृदयता के साथ रखने की मांग करते हैं |

    पूर्वाग्रह को पूर्वाग्रह के साथ नहीं हटाया जा सकता | आपका

    आग्रह इस बात पर ज्यादा ही रहा है-'' अन्त में यही कहना कि जो

    जीते जी कुछ नहीं कर सकता वह मरने के बाद क्या करेगा, खाक'' |

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  5. वो उसकी अभिव्यक्ति उसको जो कहना वो कहने का हक है। बात और..अगर ऐसे बहस करने बैठेंगे तो नतीजे कुछ भी नहीं आएंगे दोस्त। वंदे मातरम एक देश भक्त गा सकता है, कोई और नहीं। उसको गाने के लिए भगत सिंह जैसा जिगरा चाहिए। राम राम सब जगत करता फिरे पर राम न पाए कोई। देश को खाने वाले नेता...इस गीत को गाकर कोई बड़ा तीर तो नहीं मा रहे बल्कि उसकी आढ़ लेकर देश को लूट रहे हैं।

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  6. VANDE MAATRAM ............

    VANDE MAATRAM.............

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  7. वन्‍देमातरम् का विरोध तुच्‍छ मानसिकता को दर्शाता है, बन्‍देमातर का विरोध स्‍वामेवsपि संगठित राष्‍ट्र का विरोध है, इसमें कुछ मुसलमान ही विरोध कर रहे है अभी हाल मे ही Allahabad University के मुस्लिम छात्रो ने बन्‍देमातरम् गा कर एक अच्‍छा संदेश दिया।

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  8. सही कहा/किया आपने,आपसे सहमत हूं।

    वंदे मातरम,वंदे मातरम।

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  9. सिर्फ इतना जबाब दीजिये उनको दुबे जी कि हम तो अब साबित करने की कोशिश कर रहे है तुम्हारे पूर्वज तो १९४७ में ही कर चुके !

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  10. त्रिपाठी जी की बात से सहमत हूँ। अगर आरिफ मियां की भाषा से आपकी देशभक्ति की भावना को ठेस पहुँचा तो आप भी कौन सी अच्छी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। ब्लागिंग के सार्वजनिक मंच पर आपका भी देशभक्ति के बोझ तले दबकर किसी सम्प्रदाय विशेष को निशाना बनाना तर्कसंगत नहीं....यह तो आपकी छोटी सोच का और मानसिकता का उदाहरण है। और अगर इस बात पर मुझे देशद्रोही की पदवी देना चाहते हैं तो मुझे मन्जूर है। जिस देश में आप जैसे लोग हों जिन्हें मानवता और सदभाव से ज़्यादा देशप्रेम और धर्म की घंटी बजाने में ज़्यादा मज़ा आता है...उस देश का देशभक्त बनने से ज़्यादा मैं देशद्रोही बनना पसन्द करूँगा। सामने वाले पर उँगली उठाने से पहले ध्यान दीजिये कि बाकी उँगलियां आपकी ही तरफ है। भई धर्म आदि से थोड़ा ऊपर उठिये। संकीर्ण सोच भी बदलने का ज़रूरत है आपको।

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  11. अगर आप वन्दे मातरम की वक़ालत करते हैं और साथ ही पूर्व जन्म में भी अकीदा रखते है तो यह पूर्ण रूप से परस्पर विरोधी विचारधारा होगी और यह संभव नहीं कि दोनों एक साथ लागू हो सकेंगे. कैसे ? आईये मैं बताता हूँ कि कैसे राष्ट्रवाद एक बुनियाद-रहित विचारधारा है, यदि आप पूर्वजन्म में विश्वाश रखते है तो यह संभव है कि आपका जन्म दोबारा मनुष्य के रूप में हो सकता है और हो सकता है कि आप भारत के अलावा दुसरे मुल्क में पैदा हो सकते हैं. मिसाल के तौर पे आप अगर आपके पिता जी या दादा जी दोबारा जन्म लेते हैं और अबकी बार वह अफगानिस्तान या पकिस्तान या चाइना आदि में कहीं जन्म लेते हैं तो क्या वह भारत के खिलाफ़ लडेंगे तो नहीं? क्या वह भारत से नफ़रत तो नहीं करेंगे?? ऐसा तो नहीं कि वे इस जन्म में तालिबान से मिलकर अपने प्यारे हिन्दोस्तान के खिलाफ़ आतंकी घटनाओं में तो लिप्त नहीं रहेंगे???

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  12. @अमृत पाल जी नमस्कार

    अभी-अभी जैसे मेल खोला तो देखा आपकी टिप्पणी सामने थी। टिप्पणी पढ़ने के बाद काफी आहत हुआ। पता नहीं क्या सोचकर आपने ऐसी टिप्पणी कर दी मेरे ब्लोग पर, ये भी नहीं पता कि आपने पूरा लेखा भी पढ़ा था या नहीं। आप ने कहा की मैं भी आसिफ मिया से कम नहीं हूँ, आप ने शायद मेरे पुरे लेख को पढ़ा होगा तो मैंन अपने लेख में कहा है कि मैं आसिफ के लहजे मे बात कर रहा हूँ, और इस बात को मैंने स्विकार भी किया है , तो आपको ये कहने की क्या जरुरत आन पडीं। और याहँ मेरा मुद्दा वन्दे मातरम नहीं है बल्कि ये था कि क्या कोई मरने के बाद भी देशभक्ति कर सकता है, जिसकी वकालत आसिफ ने की है। और जाते-जाते ये भी जानना चाहूँगा कि आप ने मानवता और सदभावना के लिए कौन से तीर मार लिए है, अगर समय हो तो बाताईयेगा जरुर। और हाँ मैने यहाँ किसी धर्म का विरोध नहीं किया है। कृपया लेख पूरा पढ़ने के बाद ही टिप्पणी दें।

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  13. वन्दे मातरम
    वन्दे मातरम
    वन्दे मातरम
    .
    .
    @स्वच्छ........

    अगर मेरे बाप -दादा अफगानिस्तान या पाकिस्तान में पुनर्जन्म पाते हैं तो मैं चाहूँगा कि वे अपनी जन्मभूमि (अफगानिस्तान या पाकिस्तान) के प्रति वफादार रहे, उससे प्रेम करें और उसके लिए जान लड़ा दें फिर चाहे ऐसा हिन्दुस्तान के खिलाफ ही क्यों न करना पड़े. जो भारतीय विदेशों में रहते हैं और वहां की नागरिकता ले चुकें हैं वे भले ही अपनी जन्मभूमि भारत के प्रति प्रेम रखें लेकिन उनकी निष्ठा अपने वर्तमान देश के प्रति ही होनी चाहिए. जो ऐसा नहीं करता उसे "थाली में छेद करने वाला" कहा जाता है. यह बात आपको भी अच्छी तरह जानने-समझने की जरूरत है.

    तालिबानी या पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी देश के आतंकवादी जो कुछ कर रहे हैं क्या वह देशप्रेम और राष्ट्रवाद की भावना से अभिभूत होकर कर रहे हैं??

    जय हिंद
    जय हिंद
    जय हिंद

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  14. भाई सलाम अ लैकुम,
    हम तो अभी नए है यहाँ ब्लॉग पर,लेकिन भाई ये देख कर बड़ा दुःख हुवा की हम लोग आज छोटी छोटी बातो पर किस तरह से लड़ रहे है/
    लेकिन मेरे भाई आप नाराज़ मत होना ,हिंदुस्तान का हर मुस्लिम ऐसा नहीं है जैसा आप सोच रहे है/
    भाई हमें भी अपने देश से उतना ही प्यार है जितना आप सब को है/
    आज हमलोग को चाहिए की हम लोग मिल कर अपने देश के तार्राकी के लिए काम करे ,न की आपस में उलझ के अपने देश को पीछे धकेले/
    भाई कोई हिन्दू हो या मुस्लमान सब से मेरी यही विनत्ति है/
    हिंदुस्तान में बिना हिन्दू के कभी ईद नहीं मन सकती ,और बिना मुस्लमान के हमारे हिन्दू भाई कभी दिवाली नहीं मनासकते है/
    हमतो बस इतना ही जानते है/
    अगर हमारी बात से किसी को दुःख पंहुचा हो तो हम माफ़ी चाहते है/

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  15. भाई रिंकू जी नमस्कार।

    आप से पूरी तरह से सहमत हूँ। लेकिन दुःख की बात यह है कि सब की सोच आप जैसी नहीं होती। बहुत अच्छा लगा आपके विचार जानकर। शायद आपने पूरा लेख नहीं पढ़ा, मैंने जो कुछ भी कहा है इस लेख में वह सिर्फ आसिफ जैसे सोच रखने वालो के लिए है।

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  16. भाई साहब मैंने मानवता और सदभाव के लिये कोई तीर नहीं मारा....लेकिन कभी बेवजह किसी भी धर्म या सम्प्रदाय पर अँगुली भी नहीं उठायी। हाँ एक काम ज़रूर करता हूँ.....जो भी ग़लत हो उसका बिना डरे विरोध करता हूँ। मुझे लगा कि आपने ग़लत बोला तो मैंने आपसे कह दिया और आपको लगा कि मैंने ग़लत बोला तो आपने मुझे बोल दिया। आप ही से मिलते-जुलते कुछ शख्स मुझे एक बार रोडवेज़ की बस में सफ़र करते वक़्त मिले थे....उस घटना से सम्बन्धित मैंने एक लेख भी लिखा था। http://amrithindiblog.blogspot.com/2009/08/blog-post_19.html इसे पढियेगा वक़्त मिलने पर। आपको ये ज़वाब मिल जायेगा कि मैं सदभाव के बारे में क्या राय रखता हूँ। शुक्रिया।

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  17. वन्दे मातरम
    वन्दे मातरम
    वन्दे मातरम
    बात सही है लेकिन लोग समझ नहीं पाए लगता है...

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  18. दफनाने के बाद उस जगह पर कब्जा कर लेते हो, वहीं अगर दफनाये न जाते तो वह जमीन खेती के काम आती और देश सुखी बनता, अब बताओ कौन हुआ देश भक्त और कौन है गद्दार.......

    वाह .....मिथिलेश जी तर्क तो बहुत बढिया किया आपने ....दाद कबूल करें .....पर ये वन्दे मातरम् बहस का मुद्दा क्यों बन गया ....?
    आपने एक तर्क रखा वन्दे मातरम् का ....तो इसे गाने में विरोध नहीं होना चाहिए ...भारत में रहने वाला हर मज़हब का व्यक्ति पहले भारतवासी है , हिन्दुस्तानी है तो इस गीत का सम्मान करना सभी का फ़र्ज़ बनता है .....!!

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  19. " vandemataram "

    " ye ...meta log aur moalavi kayada aur fatava nikalker desh ko barbad kar rahe hai ...VANDEMATARAM kahte aazadi pane wale log aaj ..VANDEMATARAM kahne ko sayad sharm mahshoosh kar rahe hai ...to sirf ye moalvi aur neta logo ke vahiyat fatve aur kanoon ko leker ."
    " tum musalman ho ..tum hindu ho ..magar ye mat bhulo ki tum ek HINDUSTANI ho ..aur hindustan ke liye aazadi ki ladai ladnewale tamam satyagrahi ki jubaan per yahi nara tha VANDEMATARAM us waqt na the aise maili murad wale moalvi aur na the aise gatiya neta ..."
    " tha to sirf DESH PREM tha ...her ek desh premi ki jubaan per yahi tha VANDEMATARAM ..aur aaj bhi rahena chahiye ...kyu ki ye moalvi aur neta log apane fayde ke liye hum hindu ...muslim ko ladana jante hai ..ye mat bhulo aap sab "

    " rahi baat desh bhakti ki to mai yahi kahunga ki vo her aadmi jo BHARAT ki bhumi me raheta hai .use garv se kahena hi chahiye ki " VANDEMATARAM ....VANDEMATARAM "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  20. @Harkirat Haqeer/Mithilesh dubey
    जमीन तो वहां भी रुकती है जहाँ शमशान होते हैं
    दफ़नाने से जमीन उरवरक होती है
    लेकिन जलाने से-------
    किसी एक्सपर्ट से पूछो ज्यादा अच्छी तरह समझायेगा

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  21. मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ की आप मुझे पढ़े और देखें
    कितनी सच है मेरे बारे में फैलाई गई गलतफहमियां

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  22. मुझे आपका यह लेख पसंद आया इसमें बताई गयी बातों से मैं सहमत हूँ क्यूंकि जैसा सवाल वैसा जवाब और संस्कृत की एक उक्ति है शठे शाठ्यम समाचरेत

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  23. वन्दे मातरम
    वन्दे मातरम
    वन्दे मातरम
    .
    .
    @स्वच्छ........

    अगर मेरे बाप -दादा अफगानिस्तान या पाकिस्तान में पुनर्जन्म पाते हैं तो मैं चाहूँगा कि वे अपनी जन्मभूमि (अफगानिस्तान या पाकिस्तान) के प्रति वफादार रहे, उससे प्रेम करें और उसके लिए जान लड़ा दें फिर चाहे ऐसा हिन्दुस्तान के खिलाफ ही क्यों न करना पड़े. जो भारतीय विदेशों में रहते हैं और वहां की नागरिकता ले चुकें हैं वे भले ही अपनी जन्मभूमि भारत के प्रति प्रेम रखें लेकिन उनकी निष्ठा अपने वर्तमान देश के प्रति ही होनी चाहिए. जो ऐसा नहीं करता उसे "थाली में छेद करने वाला" कहा जाता है. यह बात आपको भी अच्छी तरह जानने-समझने की जरूरत है.

    तालिबानी या पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी देश के आतंकवादी जो कुछ कर रहे हैं क्या वह देशप्रेम और राष्ट्रवाद की भावना से अभिभूत होकर कर रहे हैं??

    जय हिंद
    जय हिंद
    जय हिंद KOI JAMEEN KISI KI MAN NAHIN HOTI AWR JO LOG JAMEEN KO MAN BOLTE HAIN UNKI ASLI MAYEN VRINDAWAN ME SAD RAHI HAIN

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  24. वन्दे मातरम वन्दे मातरम वन्दे मातरम
    दुनिया का सबसे बड़ा ढोंग
    कोई जमीन किस के मां नहीं होती अवर जो लोग जमीन को मां बोलते हैं उनकी असली माएं वृन्दावन में सड़ रही हैं
    अगर मेरे बाप -दादा अफगानिस्तान या पाकिस्तान में पुनर्जन्म पाते हैं तो मैं चाहूँगा कि वे अपनी जन्मभूमि (अफगानिस्तान या पाकिस्तान) के प्रति वफादार रहे, उससे प्रेम करें और उसके लिए जान लड़ा दें फिर चाहे ऐसा हिन्दुस्तान के खिलाफ ही क्यों न करना पड़े. जो भारतीय विदेशों में रहते हैं और वहां की नागरिकता ले चुकें हैं वे भले ही अपनी जन्मभूमि भारत के प्रति प्रेम रखें लेकिन उनकी निष्ठा अपने वर्तमान देश के प्रति ही होनी चाहिए. जो ऐसा नहीं करता उसे "थाली में छेद करने वाला" कहा जाता है. यह बात आपको भी अच्छी तरह जानने-समझने की जरूरत है.

    तालिबानी या पाकिस्तान या दुनिया के किसी भी देश के आतंकवादी जो कुछ कर रहे हैं क्या वह देशप्रेम और राष्ट्रवाद की भावना से अभिभूत होकर कर रहे हैं??
    कोई जमीन किस के मां नहीं होती अवर जो लोग जमीन को मां बोलते हैं उनकी असली माएं वृन्दावन में सड़ रही हैं

    जय हिंद
    जय हिंद
    जय हिंद

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