Tuesday, November 10, 2009

गाय काटने वालो का क्यों ना सर कलम कर दिया जाये


" गाय " जिसे हमारे धर्म (हिन्दू) में माता का दर्जा प्राप्त है। अब माता क्यों कहा जाता है ये सबको पता है। भारत कि गौरवशाली परंपरा में गाय का स्थान सबसे ऊँचा और अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है। गाय माता की महिमा पर महाभारत में एक कथा आती है। यह कथा रघुकुल के राजा नहुष और महर्षि च्यवन की है, जिसे भीष्म पितामह मे महाराजा युधिष्ठिर को सुनाया था।

महर्षि च्यवन जलकल्प करनें के लिए जल में समाधि लगाये बैठे थे। एक दिंन मछुआरों ने उसी स्थान पर मछलियाँ पकड़ने के लिए जाल फेंका। जाल में मछलियों के साथ महर्षि च्यवन भी समाधि लगाये खिंचे चले आयें, उनको देखकर मछुआरों ने उनसे माफी मांगी। और उन्होने कहा की ये सब गलती से हो गया। तब महर्षि च्यवन ने कहा " यदि ये मछलियाँ जिएँगी तो मै भी जीवन धारण करुँगा अन्यथा नहीं। तब ये बात वहाँ के राजा नहुष के पास पहुची, राजा नहुष वहा अपने मंत्रीमण्डल के साथ तत्काल पहुचे और कहा

" अर्धं राज्यं च मूल्यं नाहार्मि पार्थिव।
सदृशं दीयतां मूल्यमृषिभिः सह चिंत्यताम।।

अनर्घेया महाराजा द्विजा वर्णेषु चित्तमाः ।
गावश्चय पुरुषव्याघ्र गौर्मूल्यं परिकल्प्यतम्।।

हे पार्थिव आपका आधा या संपूर्ण राज्य भी मेरा मूल्य नहीं दे सकता। अतः आप ऋषियो से विचार कर मेरा उचित मूल्य दीजिए। तब राजा नहुष ने ऋषियो से पुछा तब ऋषियों ने राजा बताया कि गौ माता का कोई मूल्य नहीं है अतः आप गौदान करके महर्षि को खुश कर दीजिए। राजा ने ऐसा ही किया और तब महर्षि च्यवन ने कहा

" उत्तिष्ठाम्येष राजेंद्र सम्यक् क्रीतोSस्मि तेSनघ।
गोभिस्तुल्यं न पश्यामि धनं किंचिदिहाच्युत।।

हे राजन अब मैं उठता हूँ। आपने ने मेरा उचित मूल्य देकर मुझे खरीद लिया है। क्योंकि इस संसार मे गाय से बढ़कर कोई और धन नहीं है। भारत में वैदिक काल से ही गाय को माता के समान समझा जाता रहा। गाय कि रक्षा करना, पोषण करना एवं पुजा करना भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा । वेदो मे कहा गया है कि पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों का आधार भी गाय को माना जाता है।
इतना कुछ होने के बावजुद गाय के मांसो का बड़ा व्यापार भारत व उससे बाहर हो रहा है। और हम मजबुर वस अपनी माँ को कटते देख रहे है और कुछ भी नहीं कर पा रहे है। जिस तरह से इनको सरेआम काटा जा रहा ठीक वैसे ही इनको काटने वालो का सर कलम कर दिया जाना चाहिये। ताकी कोई ऐसी घिनौनी हरकत ना कर सके।

भारत मे गायों की सख्या व उनकी खत्म होती नस्ले इस बात का सबुत है कि किस तरह से उनको देश के बाहर भोजन स्वरुप भेजा रहा है। खाद्यान्न उत्पादन आज भी गो वंश पर आधारित है। आजादी तक देश में गो वंश की 80 नस्ल थी जो घटकर 32 रह गई है। यदि गाय को नही बचाया तो संकट आ जाएगा क्योंकि गाय से ग्राम और ग्राम से ही भारत है। १९४७ में एक हजार भारतीयों पर ४३० गोवंश उपलब्ध थे। २००१ में यह आँकड़ा घटकर ११० हो गयी और २०११ में यह आँकड़ा घटकर २० गोवंश प्रति एक हजार व्यक्ति हो जाने का अनुमान है। इससे ये अन्दाजा लगाया जा सकता है कि जिसे हम माँ कहते है उनका क्या हाल है।
गाय पुराने समाज के लिये पशु नहीं था... वह हमारी धरती पर खड़ी जीवित देवशक्ति थी... बल्कि समस्त देवताओं की आभा लिये उन्हीं अव्यक्त सत्ताओं की प्रतिनिधि थी। उस गाय को काटने-मारने के कारण ही यह भारत राष्ट्र इतनी मेधा-प्रतिभा और संसाधनों, श्री-समृद्धि के स्रोतों के बावजूद यदि गरिब तो यह उसी गो-माता का शाप है.हमारा सहस्त्रों वर्षो का चिन्तन, हमारे योगी, तापस, विद्यायें सब लुप्त हो गये... और जो कबाड़ शेष बचा है वही समाज के सब मंचों पर खड़ा होकर राश्ट्र का प्रतिनिधि बन बैठा है। प्रतिभा अपमानित है, जुगाड़ और जातियों के बैल राष्ट्र को विचार के सभी स्तरों पर हांक रहे हैं, गाय को काटने वालों ने भारतीय समाज की आत्मा को ही बीच से काट डाला है गाय के कटने पर हमारा ‘शीश’ कट कर गिर पड़ा है. हम जीवित हिन्दू उस गाय के बिना कबन्ध हैं, इस कबन्ध के लिये ही मारा-मारी में जुटे हैं अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीति का दलिद्दर चेहरा ऐसे ही कबन्ध रूपी समाज में चल सकता था... वरना आज यदि उस गो-माता के सींग का भय होता... तो आपकी गृहलक्ष्मी आपको बताती कि भ्रष्टाचार और दलिद्दर विचारों के साथ आप आंगन में कैसे प्रवेश कर सकते हैं ।

जब कोई हमारी माँ को इस बर्बरता से काट से सकते है तो हम उनका सर क्यो कलम नहीं कर सकते जो हमारी जनंनी को हमसे छिनने की कोशिश कर रहा है। आखिर कब तक हम यूँ ही देखते रहेंगे , कब तक ? कहीं ऐसा ना हो कि बहुत देर हो चुकी हो, अब समय आ गया है उठ खड़े होने का। और इस लड़ाई में सबसे आगे हिन्दुओं को होना चाहिए, क्योंकी ये खिलवाड़ हमारे अस्मत के साथ हो रही है। हमे किसी और का इन्तजार नहीं करना चाहिए। यूरोप में मांस की अत्यधिक मांग होने के कारण, अंग्रेज विचारक चील-कौवों की तरह गाय के चारों ओर मंडराने लगे। गो-धन को समाप्त करने के लिये उन्होंने अंग्रेजी स्कूलों से शिक्षा प्राप्त नीति निर्धारकों, इन फाइल-माफियाओं को फैक्ट्री दर्शन के पाठ पढ़ाये... अनाज की कमी का भय दिखाकर रासायनिक-खाद की फैक्ट्रियां लगीं, दूध की कमी का रोना रोकर दूध के डिब्बे फैक्ट्रियों में तैयार होने लगे, घी, मक्खन सभी कुछ डिब्बा बन्द... ताकि गो-मांस को निर्बाध निर्यात किया जा सके शहरों में रहने वाले मध्यमवर्ग ने इन उत्पादों की चमक के कारण गाय के शरीर से आंखें फेरलीं । वह गोबर, गोमूत्र को भूलता चला गया और देश में गाय सहित हजारों पशुओं को काटने वाले कत्लगाह खुलने पर ऋषियों के पुत्र एक शब्द नहीं बोले. वे इन दूध के डिब्बों से एक चम्मच पाउडर निकाल कर चाय की चुस्कियां भर कर अंग्रेजी अखबार पढ़ते रहे ।
यूरोप से आयातित मांसल सभ्यता के अचार पर चटकारें मारते रहे , और गो-माता हमारे जीवन से अदश्य हो गयी क्योंकि गोबर की जगह यूरिया की बोरियों ने ले ली, बैल की घन्टियों की जगह कृशि जीवन को आक्रान्त करने वाले ट्रैक्टर आ गये तर्क है कि अनाज की कमी पूरी हो गयी ।. यदि हम यूरिया के कारण आत्म निर्भर हैं तो हमारा किसान आत्महत्या क्यों कर रहा है? गेहूँ आयात क्यों किया जा रहा है...? आप के बन्दर मुखी बुद्धिजीवी जब मंहगें होटलों में बैठकर ये जो ‘जैविक-जैविक’ का जप करते रहे हैं, क्या उनके गालों पर झापड़ रसीद की जाय...? यूरोप-अमेरिका कब तक हमें मूर्ख बनायेगा...? हमारी ही गायों को उबाल कर खाने वाले ये दैत्य, हमें ही प्रकृति से जुड़ने की शिक्षायें देते हैं, खेती-जंगल-जल से पवित्र सम्बन्ध रखने वाले भारतीय समाज की ऐसी-तैसी करके भाई लोग पर्यावरण पर उस समाज को शिक्षायें देते हैं। जिनके जीवन में ‘गाय’ की पूछ पकड़े बिना मुक्ति की कामना नहीं, पेड़ जिनके धार्मिक-चिह्न है, नदियाँ जिनकी मां हैं, जहाँ घाटों, नदियों, गायों के व्यक्तियों की तरह नाम हैं, ताकि उनके न रहने पर, समाज में उनकी स्मृति बनी रहे, उस वृद्ध और घाघ समाज को सेमिनारों में पाठ पढाये जा रहे हैं... वो भी हमारे ही खर्चे पर... हद है। गो-माता जब से पशु बनी तभी से हम भारतीयों का समाज भी कबन्ध हो गया है गाय, इस भौतिक जगत और अव्यक्त सत्ता के बीच खड़ा जीवित माध्यम है, उस विराट के समझने का प्रवेषद्वार है जो लोग, जो सभ्यतायें, जो धर्म, गाय को मार-काट कर खा-पका रहे हैं, वे प्रभु और अपने बीच के माध्यम को जड़ बना रहे हैं। वे जीवित धर्म का ध्वंश कर रहे हैं, अब चाहे वे धर्म के नाम पर जितनी बड़ी अट्टालिकायें गुंबद बना लें, वे परमात्मा की कृपा से तब तक वंचित रहेंगें, जब तक वे गाय को अध्यात्मिक दृश्टि से नहीं देखेगें वैसे विटामिन, प्रोटीन और पौश्टिकता से भरे तो कई डिब्बे, और कैप्सूल बाजार में उपलब्ध हैं। यदि ऋषियों ने भौतिक-रासायनिक गुणों के कारण गाय को पूजनीय माना होता, तो हिन्दू आज इन दूध के डिब्बों, कैप्सूलों की भी पूजा कर रहा होता विज्ञान वही नहीं है जो अमेरिका में है, विज्ञान का नब्बे प्रतिशत तो अभी अव्यक्त है, अविश्कृत होना है, हमने अन्तर्यात्रायें कर के उसकी झलक सभ्य संसार को दिखाई थी, असभ्यों ने वो समस्त पोथी-पुस्तक ही जला दिये... गाय बची है... उस माता की पूंछ ही वह आखिरी आशा है जिसे पकड़ कर हम पुनः महाविराट सत्ता का अनावरण कर सकते हैं ।

विदेशो में तो गायो के मांस का व्यापार तो हो ही रहा है, लेकिन बड़े दुःख की बात ये है कि हमारे देश मे भी ये धड़ल्ले से हो रहे है, पीलीभीत जो की उत्तर प्रदेश के अन्तर्गत आता है जो मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। । वहा इस साल केवल दो महिनें मे (मार्च और अप्रैल) में पाँच सौ से ज्यादा गायो की बली दी गयी इस बात की जानकारीं सरकार को भी दी गयी लेकिन सरकार हाथ पे हाथ रखकर हम हिन्दुओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। ब्रिटिश एयरवेज का भारत में बहुत बड़ा व्यापार है ये सबको को मालुम है। इसमें खाने मेन्यू में गाय के मांस को चाव से परोसा जा रहा है, और जब इसका विरोध किया गया तो ब्रटिश एयरवेज वालो ने गाय मांस को इकोनामिक क्लास से हटा दिया, परन्तु फर्स्ट और क्लब वर्ल्ड में गोमांस अब भी परोसे जा रहे है, जो की बड़े दुःख की बात है। ये तो बात रही देश की, अब जरा हम अपने आस पास देखते है जहाँ हमारे माँ को कैसे बेचा जा रहा है। बाजार मे मिलने वाले सौन्दर्य प्रसाधनों में ज्यादातर गाय मांस का प्रयोग किया जाता है। ग्लिसरिन और पेपसिन आप और हम सभी जानते हैं, और इसका प्रयोग सौन्दर्य प्रसाधनो में सबसे ज्यादा किया जाता है। ग्लिसरिन और पेपसिन का ही रुप है जेलेटिन । गाय के मांस और खाल को उबाला जाता है और जो चिकना पदार्थ निकलता है उसे जिलेटिन कहते है, और जिलेटिन के निचले सतह को ग्लिसरिन कहा जाता है। ग्लिसरिन का कारोबार हमारे देश में जोरो से चल रहा है। तो जाहिर सी बात है मांसो के लिए गायो को काटा जाता है। मुसलमानो के यहाँ बकरीद के अवसर पर अब भी गायो की बली दी जाती है। सबसे ज्यादा गायों को पाकिस्तान , अफगानिस्तान और अरब देशो में काटा जाता है। जबकि अरब जहाँ इस्लाम का जन्म हुआ है वहाँ गायों को काटना अनिवार्य है । भारत में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष से रुप से बकरीद के दिनं गायो को काटा जाता है, और प्रशासन कुछ नहीं करती । जबकि पहले मुगल शासक बाबर ने गो ह्त्या पर पाबंदी लगा दी थी और अपने बेटे हुमायूं को भी गाय न काटने की सलाह दी थी।
गावो विश्ववस्य मातरः।

भारतीय चिंतनपद्धति में, चाहे वह किसी भी पंथ या मान्यता से अनुप्राणित हो, गाय को आदिकाल से ही पुज्यनीय माना गया हैं, और उसके बध को को महापाप समझा जाता रहा है। वेदो, शास्त्रों, एव पुराणो के अलावा कुरान, बाइबिल, गुरुग्रन्थं साहिब तथा जैन एंव बौद्ध धर्मग्रन्थों में भी गाय को मारना मनुष्य को मारने जैसा समझा जाता है। कुरान में आया है कि गाय की कुर्बानी इस्लाम धर्म कर खिलाफ है। इस प्रकार देखा जाये तो सभी धर्मों नें गाय की महत्ता को समान रुप से सर्वोपरि माना है। लेकिन इन सबके बावजुद कुछ निकम्मे व कूठिंत सोच वाले लोग है जो की कहते है बिना गाय की बली दिये हुए त्योहार अधुरा रह जाता है। ये वे समय है जब हमे जैसा को तैसा वाला नियम अपनाना पड़ेगा, अन्यथा इसका परिणाम क्या होगा ये हम सब अनुमानित कर सकते है। कहीं ऐसा ना हो कि जिसे हम माता कहके बुलाते है वह बस तस्विर बनकर ही रह जाये आने वाले समयं में। गौ माता की रक्षा भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म के गौरव व आत्म सम्मान की रक्षा का अभिन्न अंग है। यह अजीब विडंबना है कि कि जब तक हमारे परंपरागत ज्ञान को को पश्चिमी दुनिया व अन्य धर्म वाले मान्यता नहीं दते, हम सकुचाये- से रहते हैं और अन्य धर्म के विचारकों द्वारा उसे स्वीकार करते ही मान लेते है। हम जो सो रहे, हमारे आखों मे पट्टी नुमा बेड़िया पड़ी है, उसे अब निकाल फेकना होगा और निर्णय लेना पड़ेगा। गौ माता की रक्षा लिए हमें संकल्प लेना पड़ेगा। हिन्दू धर्म, बल्कि समूची मानव जाति के विकास के लिए गौ माता की रक्षा को परम कर्तव्य बनाना पड़ेगा।

48 comments:

  1. बहुत खूब भाई राष्‍ट्रीय महत्‍व का विषय है, इस विषय पर आज लेख की आवाश्‍यकता है, बहुत बहुत बधाई।

    ऐसे लोगो को सर कलम करना तो बहुत कम सजा होगी।

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  2. सुन्दर विचार!
    काश् भारत में ये सम्भव हो पाता!

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  3. bahut achcha laga yeh jagrook karne wala lekh....gaayon ka vadh ban hona hi chahiye....

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  4. " jagrukta bhara lekh ...aapko is post ke jitani bhi badhai de utni kam hai ..bahut hi badhiya subject aur utana hi gambhir mudda "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  5. सुन्दर और धारदार लेखन |

    तथाकथित सेकुलर या अंग्रेजीदा लोग इसपे हसते हैं, फिर भी मेरा ये विश्वास है की भारत की दुर्दशा का बड़ा कारन गौ माता का अपमान है |

    दिक्कत यही है की कांग्रेस की सरकार गौ ह्त्या रोकना ही नहीं चाहती नहीं तो आजादी के ६० वर्षों तक देश पे शासन करने के बावजूद आज भी गौ हत्या जारी ना रहती |

    कोई हिन्दू यदि गौ माता के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है तो उसे संघी का लेवल दे दिया जाता है और आज आम हिन्दू संघी कहलाने को अपनी तौहीन समझता है .... | लेकिन जो सच्चा हिन्दू है वो इन सब की परवाह किये बिना गौ माता को सम्मान दिलाने के लिए प्रयासरत है |

    हमें भी एक संकल्प लेना पडेगा की अपने स्तर पे जहाँ तक संभव हो ... गौ माता को सम्मान देंगे ...

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  6. भावनाओं के प्रवाह में आपका लेख कुछ संकीर्ण हो चला है |
    गौ भारत की आत्मा अवश्य है लेकिन इसके उत्थान के लिए वृहद् प्रयासों की आवश्यकता है न कि किसी का सर काटने की |

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  7. is viShay par swaatantr veer saavarakar ke vichaar bhee paDhe^

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  8. सहमत,सौ प्रतिशत्।

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  9. अच्छा लिखा,विषय भी सही है.....

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  10. तुम्हारी कलम आज कर जानदार शानदार ऐर धारदार के साथ साथ वार दार भी होती जा रही है। आपने देअश और संस्कृ्ति के संरक्षण के लिये आज के युवकों से यही आशा है बधाई और शुभकामनायें इस ग्यानवर्द्धक आलेख के लिये

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  11. मैं आप सभी को आमंत्रित करता हूँ की आप मुझे पढ़े और देखें
    कितनी सच है मेरे बारे में फैलाई गई गलतफहमियां

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  12. जब तक गाय दुध देती है तभी तक मा मानते है उसके बाद कसाई को हम ही बेच देते है . किस किस की गर्दन पर वार हो

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  13. " अर्धं राज्यं च मूल्यं नाहार्मि पार्थिव।
    सदृशं दीयतां मूल्यमृषिभिः सह चिंत्यताम।।

    अनर्घेया महाराजा द्विजा वर्णेषु चित्तमाः ।
    गावश्चय पुरुषव्याघ्र गौर्मूल्यं परिकल्प्यतम्।।

    " उत्तिष्ठाम्येष राजेंद्र सम्यक् क्रीतोSस्मि तेSनघ।
    गोभिस्तुल्यं न पश्यामि धनं किंचिदिहाच्युत।।

    गावो विश्ववस्य मातरः।

    आपके विचारों पर टिप्पणी ज़रूर दूँगा। लेकिन जिन श्लोकों का प्रयोग आपने किया है...उनके स्त्रोत जानना चाहता हूँ। आशा है कि आप उपलब्ध करायेंगे। आपके पोस्ट पर प्रतिकिया कुछ समय बाद दूँगा।

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  15. @ अमृत पाल सिहं


    " अर्धं राज्यं च मूल्यं नाहार्मि पार्थिव।
    सदृशं दीयतां मूल्यमृषिभिः सह चिंत्यताम।। (महाभारत, अनु० 51/13)



    अनर्घेया महाराजा द्विजा वर्णेषु चित्तमाः ।
    गावश्चय पुरुषव्याघ्र गौर्मूल्यं परिकल्प्यतम्।। (महाभारत, अनु० 51/22)


    " उत्तिष्ठाम्येष राजेंद्र सम्यक् क्रीतोSस्मि तेSनघ।
    गोभिस्तुल्यं न पश्यामि धनं किंचिदिहाच्युत।।(महाभारत, अनु० 51/26)

    उम्मिद है कि आप मेरे जवाबो से संतुष्ट होंगे।

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  16. samajh nahi aa raha aap sab budhdhijivi varg k log...aisi baato par behes karke apna qeemti waqt is tarha kaise barbad kar sakte ha.....
    aise muddo ko uthake aap akhir kya sabit karna chahte ha..maaf kijiye bohot galat rasta chuna ha aapne...is madhyam ka aisa prayog nindniya ha..
    Dubey ji soch ka dayera badayiye aap....nazar uthake dekhiye aap khud kitni musibato se ghire honge...choti badi kitni pareshaniya hame apne aspas dekhne ko mil jati ha...lagta ha aapko insano se zada janvaro se pyar ha..accha ha..aapke roop me unhe koi to apna mila...par kripya karke ye zeher ugalna band kijiye...prasidhdh hone k aur bhi kayi raste ho sakte ha....zara sochiye..........

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  17. aapki aur bhi post padhi mene...Dubey ji..man me aapki ek cchavi ban gayi ha..aap us Raj Thakre se to parichit honge n jisne Marathi Manush ko sare adhikar dilane ka theka le rakha ha..???bas aapki soch b usi taraf ja rahi ha...Dubey ji itna accha soch sakte ha aap..zara acchi disha me sochiye..desh ko aap jaise ZADA SOCHNE WALO ki zarurat ha.......

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  18. @शबनम खान जी आपकी राय के लिए शुक्रिया । टिप्पणी देखते ही ये बात तो समझ में आ गयी की आपने शायद मेरा पूरा लेख पढा नहीं या किसी की बातें मात्र सुनकर आपने ये टिप्पणी कर दी । मैं उसे बचाने की कोशिश कर रहा हूँ जिसे हमारे धर्म में माता का दर्जा दिया गया है, अब आप ये तो समझ ही सकती हैं कि जिसे माँ का दर्जा प्राप्त हो उसका महत्व क्या होता है। और जब उस माता को काटा जाये खाने के लिए तो भला ऐसा कौन होगा जो माता के कटने पर आवाज ना उठाये। और आप इसे गलत कह रहीं है, इससे बात साफ होती है कि आप पुर्वाग्रह से ग्रसित है। और कोई अपने धर्म में जिसे विशेष स्थान प्राप्त है , उसे बचाने के प्रयास को आप गलत रास्ता कह रही है वाह जी क्या बात है। और हाँ आपकी ये राय कि मुझे सोच का दायरा बढाना चाहिए तो इसे आप अपने पास रखिये और अपने उपर लागु करिए, ज्यादा फायदा होगा। और हाँ एक बात और ये जानवर शब्द का प्रयोग करना बन्द करिये।

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  19. आपने सही मुद्दे को लेकर बहुत ही बढ़िया लिखा है! इस ज्ञानवर्धक आलेख के लिए बधाई!

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  20. gohatya band honee chahiye .yah hamari dharmika bhavanao ko ahat karne ke sath hi pashu krurata bhi hai.vicharottejak aalekh .sundar shaili.

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  21. मिथिलेश भाई,
    ये संयोग ही है कि गाय वाला लेख लिखने से पहले मैंने तुम्हारा लेख नहीं पढ़ा...तुम्हारी टिप्पणी के बाद इसे पढ़ा...दोनों की मूल भावना वही है कि हमने गाय को सम्मान देना बंद कर दिया है...शास्त्र सम्मत बड़े अच्छे ढंग
    से तुमने अपनी बात रखी है...मैंने गौर से इसे भी पढ़ा और अपने लेख पर तुम्हारी विस्तृत टिप्पणियों को भी...मैं जिस चर्चा को आगे बढ़ाना चाहता था, जिन मुद्दों को रखना चाहता था, उन्हें तुमने सुंदर भाव देते हुए पहले ही उठा दिया है...साथ ही मेरा काम भी आसान कर दिया...अब बस मैं निष्कर्ष के तौर पर कुछ बिंदु ही अगली पोस्ट पर रखूंगा...
    जय हिंद...

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  22. गौ हत्या ग़लत है। किसी भी जीव की हत्या ग़लत है। लेकिन आप के साथ दिक्कत यह है कि आप मुद्दों को सामप्रदायिक रूप देने का प्रयास करते हैं और सफ़ल भी हो रहे हैं।
    इस पंक्ति में आपका इशारा जिस तरफ़ है वो साफ़ नज़र आ रहा है-

    " जो सभ्यतायें, जो धर्म, गाय को मार-काट कर खा-पका रहे हैं, वे प्रभु और अपने बीच के माध्यम को जड़ बना रहे हैं। वे जीवित धर्म का ध्वंश कर रहे हैं, अब चाहे वे धर्म के नाम पर जितनी बड़ी अट्टालिकायें गुंबद बना लें, वे परमात्मा की कृपा से तब तक वंचित रहेंगें, जब तक वे गाय को अध्यात्मिक दृश्टि से नहीं देखेगें"

    "बड़े दुःख की बात ये है कि हमारे देश मे भी ये धड़ल्ले से हो रहे है, पीलीभीत जो की उत्तर प्रदेश के अन्तर्गत आता है जो मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। । वहा इस साल केवल दो महिनें मे (मार्च और अप्रैल) में पाँच सौ से ज्यादा गायो की बली दी गयी इस बात की जानकारीं सरकार को भी दी गयी लेकिन सरकार हाथ पे हाथ रखकर हम हिन्दुओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। "

    सच में मानना पडेगा कि कल्पनाशीलता तो गज़ब की है आपमें...लेकिन दोस्त इस्तेमाल ग़लत जगह कर रहे हो। और समझ नहीं आता आपके पोस्ट पर प्रतिक्रिया करने वाले लोग भी किस मोह में आपकी तारीफ़ों के पुल बांधनें मे लगे रहते हैं। भई अगर तुम ग़लत लिख रहे तो उसे मानों अन्यथा अपनी ही नज़रों में गिर जाओगे। और एक बात बताईये....जिस देश में इन्सान को इन्सान नहीं समझा जाता वहाँ आप एक जानवर के लिये इन्सानों में ही भेदभाव कर रहे हो। हर तीन मिनट में एक महिला यौन हिंसा की शिकार होती है.... भारत में 50 प्रतिशत इन्सान दो वक़्त के खाने के लिये तरसते हैं....इसकी फ़िक्र कीजिये। अपनी रचनात्मकता को सही जगह इस्तेमाल कीजिये।
    आपके पोस्ट में दिये गये हर तर्क का तार्किक ज़वाब है मेरे पास...अगर ज़रूरत होगी तो पूछ लीजियेगा।
    लेकिन समाज में ज़हर फैलाईये नहीं.....ज़हर ख़त्म कीजिये।

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  23. और हाँ एक बात....प्रकृति ने जिसे जानवर बनाया है उसे जानवर कहने में गुरेज नहीं होना चाहिये। भई अगर आप इन्सान हैं तो कुछ तो ऐसा करिये कि जानवरों से अलग लगें। प्रकृति ने आपको बुद्धि दी है तो आपने ही जानवरों को तुच्छ बना दिया और ख़ुद को सर्वश्रेष्ठ। और अगर ऐसे में गाय को जानवर बोला तो ग़लत क्या है ? भई ह तो वो जानवर ही।

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  24. Amrit ji ki baato se puri tarha sehmat hu...jaise insan ko insan hi kehte ha janvar ko janvar hi kahenge...yaha aap baat ko fir galat smjhenge ye me janti hu..
    dekhiye dubey ji aap likhte bohot khoob ha par sirf yahi baat mujhe lag rahi ha ki aap vishey kuch aise chunte ha jo vivad khada kar sakte ha...aur karte b ha...
    Ek zimmedar nagrik nahi ek zimmedar INSAN hone k nata ye meri vinti ha meri apse ki apne itne acche lekhan ka prayog kisi samajik kalyankari vishey k liye kijiye....
    dekhna chahti hu ki uspar kaise vichar ha apke....

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  25. http://deshnama.blogspot.com/2009/11/blog-post_12.html?showComment=1258049198587#c5591086271876853041
    पर आपसे प्रश्न पूछा है। ज़वाब ज़रूर दीजियेगा।

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  26. प्रिय दुबेजी,
    मै इस मामले शबनम खान से सहमति रखता हुं ।
    मै आपकी लेखनी का प्रशंसक हुं । पर इस पोस्ट मे आपकी सन्कीर्ण्ता ही नजर आइ। कितने ही हिन्दु ऐसे होन्गे जो मांसाहारी होन्गे,और इस मामले मे मेरा पूर्ण विश्वास है कि उनकि सन्ख्या इस देश मे बसे मुस्लिमों से अधिक है।रहि बात अपने वैदिक काल कि तो पुरातन ग्रन्थों क थोड़ा गहन अध्ययन करें ,आपको वहां कई स्थानों पर मांसाहार का उल्लेख मिल जायेगा,एक उदाहरण तो मैं आपको दे दुं,
    "वाल्मिकि रामायण(रामचरित मानस नहीं) में जहां श्री राम वनवास से लौट्कर अयोध्या नगरी आतें है, तो उनके लिये पकाये गये व्यंजनो का पूर्ण विवरण दे रखा है जिसे देखिये"

    अब रही गौ मांस कि बात तो उसे पुरातन समय मे महिर्षि चरक द्वारा मांस चिकित्सा मे प्रयोग के वर्णन आपको कई स्थानों पर मिल जयेन्गे।,
    हां यहां यह बात ज़रूर है कि आयुर्वेद मे गौ मांस को मांसादी मे सबसे निम्नतम, एवम दुग्ध मे उत्तम मान गया है।
    अतः गौ मांस के आहार को निशिद्ध किया गया है।
    परन्तु आपके द्वारा इस प्रकार कि बातें,सामाज मे ज़हर के अतिरिक्त और कोइ सन्देश भी देती है ,एसा मुझे नही लगता है

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  27. aajkal bhaut hi teekhi dhaar hai tumhaare lekhan mein...
    bahut accha lagta hai jab yuva varg apni jimmedariyon ko samajhta hai...
    Jitni jaankaari tumne di hai..mujhe nahi lagta kisi our ke paas hogi..
    bahut umda..
    bas likhte raho..

    Didi...

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  28. मांस की सच्चाई
    हिन्दू धर्म ग्रंथों से भी जान लो

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  29. मिथिलेश जी...आपकी और पाल सिंह जी की बहस पढी

    ये सब पढने के बाद मैं आपसे से एक सवाल करना चाहुंगा....

    आप जब अपनी "गौ माता" (जानवर) से इतना प्रेम करते है तो उनकी सेवा क्यौं नही करते है???

    अपना काम धंधा छोडकर कमज़ोर, अवारा, बीमार, गायों को इलाज क्यौं नही करते हो????

    तब आपका प्रेम कहां जाता है जब यही गाय सडक पर पालीथीन खाकर बीमार हो जाती है और आखिर में मर जाती है???

    अरे सर आस्था वगैरह सब खत्म हो गयी कुछ नही बची है आप क्या समझते है कितने हिन्दु मासांहारी नही है?? मैं आगरा के नाई की मण्डी श्रेत्र में रहता हूं यहां रोज़ 700-800 किलों सिर्फ़ बिरयानी बिकती है वो भी सिर्फ़ बीफ़ की....और दुसरे व्यंजनों की बात अलग है.....

    70% हिन्दु यहां खाना खाते है....सुबह 6 बजे से रात के 2 बजे तक...यहां हिन्दु दुकानदारों से खुद कहते है की गाय का गोश्त इस्तेमाल करों काफ़ी स्वादिष्ट होता है....
    आपने कहा की आप एक कोशिश कर रहे हो इस जीव को बचाने की जिसको आपके धर्म में माता का दर्जा दिया गया है....सिर्फ़ अपने ब्लाग पर लिखकर चार लोगों की तारीफ़ पाकर आप बहुत खुश हो रहे है.....ब्लाग पर लिखकर तारीफ़ बटोरना बहुत आसान काम है और इसके लिये वाकई में काम करना बहुत मुश्किल है...

    आपके ये लेख लिखने से भारत के कौन से इलाके में गौवध बन्द हो गया???

    जो अफ़सर इसकी जांच करते है की कभी आपने उनसे पुछा है की पकडा गया गौ-मांस कहां गया??? जनाब जांच के बाद वो मांस उनके किचिन में पकता है और सारा अमला ब्लैक औ ब्लु लेबेल के साथ उसको खाता है....

    किस ज़माने मे जी रहे हो...अगर इतनी मौहब्बत है तो जाओं इस मौहब्बत को ज़मीन पर उतारों और राह पर गाडियों के नीचे आती और कुडे में मुंह मारती अपनी माता का ख्याल करों..उसको दो वक्त का खाना दो...फ़िर बात करेंगे

    आज के वक्त में चालीस करोड भारतीयों को तो दो वक्त का ठीक से खाना मिल नही रहा है और आपको एक जानवर की इतनी फ़िक्र है...इसी विषय पर के लेख लिखा था चार पांच महीने पहले चाहे तो पढ सकते है

    http://hamarahindustaan.blogspot.com/2009/05/blog-post_05.html

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  30. आज पहली बार वरुंण जैसवाल की टिप्पणी से पुरी तरह सहमत हूं....

    ये लोग जिन्होने आपके लेख पर आपकी तारीफ़ की इन्ही लोगों से अगर आप गौ-माता की मदद करने के लिये इनसे किसी प्रकार की मदद मांगेगे तो यही लोग आपकी तरफ़ पीठ कर देंगे....

    ये काम बहुत बडे स्तर पर हो रहा है....बडे-बडे लोगों की पार्टी में सिर्फ़ गौ-मांस ही पकता है...

    आज का मुस्लमान इसको खाने से परहेज़ करता है क्यौंकि पकने के बाद इसमें एक अजीब सी हीक आती है...जो खाने के बाद भी मुहं में रह जाती है...

    इसके मांस को सबसे ज़्यादा गैर-मुस्लिम खा रहे है...

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  31. SARE LOGO KE MAINE LEKH PADHE KISI NE KAHA KI GAY KI HATYA BAND HO TO KOI IS LIYE PARESHAN HO GAYA KI USE LAGA KI MITHILESH JI USKE RELIGON KE BARE MAIN BOL RAHE HAI MAIN SIRF 21Y KA LADKA AUR SHAYD AAP LOGI SE BHI PAR MAINE KURAN , BAIBAL, GEETA AUR VED PADHA HU PAR PURA NAHI KEHTE HAI ADHOORA GYAN BAHOUT BEKAR HOTA HAI PAR JO SAMAJHNE KI TAKAT RAKHTA HAI WO THODE SE HI KA ARTH POORE MAIN SAMJHTA HAI AGAR KOI KITAB YA RELIGON BOOK SAHI MAIN ACHI HO TO HAR JAGAH KOI BHI PAGE NO PAR ACHA HI LIKHA HOGA AAP LOG BOLENGE YE VISHAY SE BHATAK GAYA MAIN VISHAY PAR AATA HU................. 1)AGAR JANWAR KO JANWAR KEHNA SAHI HAI AUR USKE SATH HUMDARDI NAHI RAKHNA CAHIYE TO MUSLIM KO ATTANKWADI KEHNA BHI UCHIT HAI AUR UNKE SATH BHI HUMDARDI NAHO SIRF IS LIYE NAHI KI WO TERROR HAI BALKJI ISLIYE KI WO PURE DUNIYA PAR SIRF APNA RAJ CAHTE HAI AUR SABHI KO MARNA YE TO GALAT HAI 2) MAIN BIHAR KA HU PAR RAJ THAKREY KI BAAT JO CHALI US PAR YE KEHNA CAHTA HU KI WO TO SIRF APNA AUR APNE MARATHI KA BHALA CAHTE HAI PAR GAY KO BACHANE SE HINDU KO KYA MILEGA KYA HINDU KE POORE GRANTH MAIN ITNA HI LIKHA HAI KI GAY KO BACHAO YA RAMCHANDRA JI AUR KRISHNA JI NE YE KAM KIYA BUT YA SOCH KI BAAT HAI KOI GAY KO APNE KHANE KE LIYE MARTA HAI TO KOI IS LIYE BACHATA HAI KI USKI MAA HAI AUR SOCH KI BAAT HAI 3)AADMI JAISA SANSKAR BACHPAN SE PATA HAI WAISA ANUSARAN KARTA HAI HUM HINDU MAA KO BACHATE AA RAHE HAI AUR BACHAYENGE CAHE USE MARNE WALA HINDU HO YA KOI AUR USE MARNA HI CAHIYE KOI LOG KEHTE HAI YE MUDDA NAHI HAI TO MUDDA KYA HAI GAY KO MARO KHAO AUR JIS DESH MAIN REHTE HO US PE TERROR KARO YE SENTENCE SIRF MUSLIM KE LIYE NAHI SAB KE LIYE HAI KYO KI KUCH HINDU BHI GALAT RAH MAIN PADKAR APNE DESH KE NUKSHAN KAR RAHE HAI JINHE MANSH KHANE YA MASH KHA KAR BAHADURI LAG RAHI HAI TO KYO NA TIGER KA MANSH KHATE HAI BAHOUT VITAMINS BHI MILEGA AUR BAHADURI BHI ....................... JAI HIND............ JAI SHRI RAM ........... GAY MATA KI JAY

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  32. ANURAG JI JAB INSAN MARTA TO KYA NA KARTA AUSHDHI KE LIYE ALAG BAAT HAI PAR JAB APNE SWAD AUR SWARTH KE LIYE ALAG BAAT AAP RAMAYAN PADHE AUR VED BHI KIS KARAN HAI WO DEKHE AAP KO KAHI BHI KHANE KA JIKRA NA AYEGA

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  33. dear onions log ye batao cow, fish eggs agar khane ke lie nhi hai to kis liye hai?

    agar itne hi dard wale ho to child mat paida karo.

    saadi mat karo aur biwi ke saath sleep karo but relation mat banao becoz usmein bhi to takleef hoti hogi unhe aur nhi hoti gar to iska matlab samajh lo lo muslim hai tere ghar ke side mein.

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  34. jahan tak gaye ke kate jane ka sawal hai..main isska jawab de sakta hun..iss poore post mein seedhe seedhe muslims ko nishana banaya gaya hai..Main saaare sawalon ka jawab de sakta hun..Ishwar ne manushya ko maans khane ke liye banaya hai isske kuch proofs hain...

    Proof no.1: saaare shakahari janwaron ke samne ke daant nahin hote kyonki eshwar ne unhe ghans khane ke liye banaya hai issiliye unhe samne ke danto ki zaroorat nahin hoti..

    Proof no.2. saare gosh khane wale janwaron ke do dant nokeele hote hain taki wo gosh sahi se kaat sake aur pakarh sakein. issiliye wo ghans nahin kha sakte aur agar ghans khayein to wo pacha nahin sakte kyon ki ussi eshwar ne unhe ghans pachane ki shakti unke pachan tantra mein nahin di hai aur yahi baat shakahari janwaro par lagu hoti hai wo gosh nahin pacha sakte...

    MAIN PROOF: Human Being yani manav jati dono kha sakti hai..wo gosh bhi pacha sakte hain aur shakahari khana bhi..agar aap apne samne ke do daant dekhein to wo nokeele hote hain mansahari janwaron ki taran. jisse sabit hota hai ki eshwar khud ne khud manush ko gosh khane aur usse pachane ki shakti di hai...

    OPEN CHALLENGE TO ANY NON MUSLIM: Ye mera khula challange hai harr non muslim ke liye main hindu dharam ki kitabon mein ye likha hua dikha sakta hun ki gaye khana sahi hai...agar kisi ko koi shanka hai ya koi bhi question poochna chahta hai proofs ke saath i can give answer ...email me any time
    My email id is
    answeringnonmuslims@gmail.com

    Famous scientist Albert einsten said: Science without religion is lame and Religion without science is blind..

    hai kisi mein damm to email kare apne sawal aur ye mera usse 100% promise hai ki agar wo mere diye answer se satisy na ho to i m ready to accept hindusm.... ye alag baat hai ki evidences ke baad bhi koi fact na maane to aise hi log sociaty mein uneducated and boorish kehlate hain..

    Thank you very much and hope to hear sooon...good day...

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  35. दुबेजी, पहिले आप ये बतानेका कस्ट करे की, आपने जो लेख लिखा है ख्य मकसद था | आपके लिखनेसे ख्य समश्या ख़त्म हो जायगी| क्या आप लोगोंकी राय जानकर अपनी लौकिकता बनाना चाहते हो|
    मैंने खुद स्लौटर हाउस में जाके प्रदुषण के तौर पर सर्वे किया था| सबसे ज्यादा दिल्ही के स्लौटर हाउस में हिन्दू लोग (पंडत) काम करते है | मास को कट्नेका काम और पाकिंग करनेका काम हिन्दू लोग करते है|
    गाय का मास समस्त प्रकार के बाल रोग में पीनस, विस्म्ज्वर, सुखी खासी, पकान, या अग्नि, मास बहुत अधिक क्षेत्र में हितकर है (चरक सहिता सूत्र स्तन अध्याय २७, श्लोक ८२) |
    मनुष्य गाय, बकरी, घोडा आदि को मारकर खाया (मर्केंडेय पुराण ९-१२०) | पाच करोड़ गायें को मारकर द्विज लोगोने मास खाए थे (ब्रह्मविर्त्य पुराण २-६१-९८) | मास खाने का पाप और पुण्य कर्म से कोई वेव्हारिक सम्बन्ध नहीं है| यदि इसका सम्बन्ध होता तो मास खानेवाले मुस्लमान, शिख , इसाई जो मास खाते है, आज नस्ट हो गया होता |
    इंग्लैंड में शाकाहारी गायें के वध से बहाने वाला खून उनके चारे मे मिलाया गया था, तो वे बीमार ग्रस्त हो गई थी| मुह मे फेन निकलने लगा और वह के सरकार को १० लाख बीमार गाय को मरवा देना पड़ा था |
    गायें के प्रति इतनीही हमदर्द जताते हो, तो मै आपको यहाँ बताना चाहूँगा की गायें को गो माता मानते हो गायें के सरीर मे ३३ करोड़ देवी-देवता वास करते है, तो यदि गायें देहात मे और शहर में जब आवारा घुमती है और मल खाती है, उसके बाद भी देवता वास करते है , वाह | क्या अन्धाश्रधा के गुलाम हो | गायें अगर गोमाता है , तो सांड रिस्तेमे बाप लगता है, संकोच नहीं करना चाहिय| वैसा भी हमें कोही फर्क नहीं पड़ता की, सांड को बाप मानों या बाप को सांड मानों |
    P.B.Meshram |

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  36. लोग कहते थे केकिन मै भरोशा नहीं करता था
    की मनुष्य इतना भी पापी हो सकता है
    लेकिन मैंने "गाय" के हत्या YouTube पर देखा तब से मै
    बहोत परेसान सा हो "गया" अब समझ नही आ रहा है
    इन "पापियों" को इनका "सजा" कैसे दिया जाये

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  37. लोग कहते थे केकिन मै भरोशा नहीं करता था
    की मनुष्य इतना भी पापी हो सकता है
    लेकिन मैंने "गाय" के हत्या YouTube पर देखा तब से मै
    बहोत परेसान सा हो "गया" अब समझ नही आ रहा है
    इन "पापियों" को इनका "सजा" कैसे दिया जाये

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  38. nich to nich hi hota hata.jati ki asar nahi jati.dube ji go mata k vroodh PB meshram jo bola gay meri mata to bail mera bap> real universal trouth bail ko bap ka darja god ka darja hai.par jo jivo par dya n kre psoo k liye itna nich siche , pata chalta hai usko apne ma bap se koi rista nhi hai road boy hai

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  39. nich to nich hi hota hata.jati ki asar nahi jati.dube ji go mata k vroodh PB meshram jo bola gay meri mata to bail mera bap> real universal trouth bail ko bap ka darja god ka darja hai.par jo jivo par dya n kre psoo k liye itna nich siche , pata chalta hai usko apne ma bap se koi rista nhi hai road boy hai

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  40. पहले मुगल शासक बाबर ने गो ह्त्या पर पाबंदी लगा दी थी और अपने बेटे हुमायूं को भी गाय न काटने की सलाह दी थी।

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  41. Gir tharparkar Indian cow breeds goshala
    https://www.youtube.com/watch?v=yqMLtY_LQG4
    https://www.youtube.com/watch?v=AclsCffns1c&t=52s
    https://www.youtube.com/watch?v=4uLdC5XtZu0&t=49s
    https://www.youtube.com/watch?v=js6OMZHC6FI&t=1s
    https://www.youtube.com/watch?v=4uLdC5XtZu0
    https://www.youtube.com/watch?v=qBRCB2qAeo4
    https://www.youtube.com/watch?v=QbRf5lguW5k
    https://www.youtube.com/watch?v=3s6Hr_ILzxA&t=85s
    https://www.youtube.com/watch?v=H37r7cLQAPk&t=10s

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  42. This comment has been removed by the author.

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  43. see all these videos Good Indian breed cows / bulls seen abroad
    https://www.youtube.com/watch?v=ChgloZpVwrY
    https://www.youtube.com/watch?v=fMWStGZV10A
    https://www.youtube.com/watch?v=Sx_DBVRaxBs
    https://www.youtube.com/watch?v=rkwiTMCVjGE
    https://www.youtube.com/watch?v=y_2ouZtaWuU
    https://www.youtube.com/watch?v=AM4_JBHHM8k
    https://www.youtube.com/watch?v=rLybWTIj8K4
    https://www.youtube.com/watch?v=aPjEyvnWDmI
    https://www.youtube.com/watch?v=PjWQecC0-d8
    https://www.youtube.com/watch?v=nI-wXvoEKBg
    only indian cows giving A2 milk which is best for human body and jersy,
    HF hybrid cows giving A1 milk which is not good for human body?

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  44. see all these videos Good Indian breed cows / bulls seen abroad
    https://www.youtube.com/watch?v=ChgloZpVwrY
    https://www.youtube.com/watch?v=fMWStGZV10A
    https://www.youtube.com/watch?v=Sx_DBVRaxBs
    https://www.youtube.com/watch?v=rkwiTMCVjGE
    https://www.youtube.com/watch?v=y_2ouZtaWuU
    https://www.youtube.com/watch?v=AM4_JBHHM8k
    https://www.youtube.com/watch?v=rLybWTIj8K4
    https://www.youtube.com/watch?v=aPjEyvnWDmI
    https://www.youtube.com/watch?v=PjWQecC0-d8
    https://www.youtube.com/watch?v=nI-wXvoEKBg
    only indian cows only giving A2 milk which is best for human body and jersy,
    HF hybrid cows giving A1 milk which is not good for human body?

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