Tuesday, November 17, 2009

अब समय आ गया है हिन्दुविरोधी-देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह के भ्रामक दुष्प्रचार को खत्म करनें का

यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी किसी संप्रदाय विशेष को अपना शत्रु घोषित नहीं किया गया,इन्सान तो इन्सान पेड़ पौधों जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों सब में भगवान के रूप को देखा गया, उनकी पूजा की गई । आज तक एक भी लड़ाई किसी पूजा पद्धति के विरोध या समर्थन में नहीं लड़ी गई । हिन्दू धर्म में किसी क्षेत्र विशेष या संप्रदाय विशेष की बात न कर सारे संसार को परिवार मानकर उसकी भलाई की बात की गई । हिन्दूधर्म के प्रचार प्रसार के लिए आज तक किसी देश या संप्रदाय विशेष पर हमला नहीं किया गया। हिन्दू जीवन पद्धति ही दुनिया में सर्वश्रेष्ठ जीवन पद्धति है। लेकिन जिसने भी मानवता के प्रतीक इस हिन्दू संस्कृति व उसे मानने वाले हिन्दुओं पर हमला किया है । इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे राक्षस को पाप का घड़ा भर जाने पर अपने किए की सजा भुगतनी पड़ी है। हमारे विचार में राक्षसों के इस सैकुलर गिरोह के पापों का घड़ा भी लगभग भर चुका है। साधु-सन्तों का अपमान व भगवान राम के अस्तित्व को नकारना इस बात के पक्के प्रमाण हैं। हमने सुना था कि जब किसी राक्षस का अन्त नजदीक होता है तो उसके द्वारा किए जाने वाले पाप व अत्याचार बढ़ जाते हैं जो हमने पिछले कुछ वर्षों में देख भी लिया ।
अब सिर्फ इस धर्मनिर्पेक्षता रूपी राक्षस का अन्त देखना बाकी है इस राक्षस के खात्में के लिए कर्नल श्रीकांत पुरोहित, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर,सुधाकर चतुर्वेदी जी, राम जी जैसे करोड़ों प्रशिक्षित गण हमले का जबाब देकर इन आतंकवादियों व इनके समर्थक सैकुलरिस्टों का संहार करने के लिए तैयार बैठे हैं बस इंतजार है तो सेनापति के इशारे का जिस दिन ये इशारा मिल गया उसी दिन ये सब राक्षस अपनी सही जगह पर पहुँच जाँयेगे ! हम यहां पर यह सपष्ट कर देना चाहते हैं कि धर्म विहीन प्राणी मानव नहीं दानव होता है। अतः धरमनिर्पेक्षता मानव के लिए अभिशाप है क्योंकि यह मानव को दानव वना देती है। जिसका सीधा सा उदाहरण इस सेकुलर गिरोह द्वारा किए गए क्रियाकलाप हैं। इसी धर्मनिर्पेक्षता की वजह से सेकुलर गिरोह मानव जीवन के शत्रु आतंकवादियों का तो समर्थन करता है पर मर्यादापुर्षोत्तम भगवान श्री राम का विरोध ।

हम बात कर रहे थे हिन्दू धर्म की, बीच में धर्म और अधर्म के बीच होने वाले निर्णायक युद्ध के लिए बन रही भूमिका का स्वतः ही स्मरण हो आया । जो लोग हिन्दुओं को लड़वाने के लिए यह मिथ्या प्रचार करते हैं कि हिन्दू धर्म में प्राचीन समय से छुआछूत है । उनकी जानकारी के लिए हम ये प्रमाण सहित स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि बेशक हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था शुरू से रही है जो कि किसी भी समाज को व्यवस्थित ढ़ंग से चलाने के लिए जरूरी होती है पर छुआछूत 1000 वर्ष के गुलामी के काल की देन है। खासकर मुसलिम के गुलामी काल की। वर्णव्यवस्था की उत्पति के लिए दो विचार स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं------------ एक विचार यह है कि सभी वर्ण शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण भगवान के अंगो से बने । पैर से शूद्र, जंघा से वैश्य, भुजाओं से क्षत्रिय व सिर से ब्राह्मण।

अब आप सोचो कि भगवान का कौन सा अंग अछूत हो सकता है सिर ,पैर, जंघा या भुजांयें । कोई नहीं क्योंकि जिसे हम भगवान मानते हैं उसका हर अंग हमारे लिए भगवान ही है । वैसे भी हम बड़ों व साधु संतों के पैर ही पूजते हैं। अतः किसी भी हिन्दू, वर्ण, जाति को अछूत कहना भगवान को अछूत कहने के समान है और जो यह सब जानते हुए भगवान का अपमान करता है वह नरक का भागीदार बनता है। अतः यह हम सब हिन्दुओं का कर्तव्य बनता है कि हम सब हिन्दुओं तक ये सन्देश पहुँचांए और उसे नरक का भागीदार बनने से रोकें। दूसरा विचार यह है कि मनु जी के चार सन्तानें हुईं । जब बच्चे बड़े होने लगे तो मनु जी के मन में यह विचार आया कि सब कामों पर एक ही ताकतवर बच्चा कब्जा न कर ले इसलिए उन्होंने अपने चारों बच्चों को काम बांट दिए ।सबसे बड़े को सबको शिक्षा का जिसे ब्राह्मण कहा गया। उससे छोटे को सबकी रक्षा का जिसे क्षत्रिय कहा गया। तीसरे को खेतीबाड़ी कर सबके लिए भोजन पैदा करने का जिसे वैश्य कहा गया। चौथे को सबकी सेवा करने का जिसे शूद्र कहा गया ।
अब आप ही फैसला करो कि जब चारों भाईयों का पिता एक, चारों का खून एक, फिर कौन शुद्ध और कौन अशुद्ध ,कौन छूत कौन अछूत ? यह एक परम सत्य है कि संसार में कोई भी काम छोटा या बडा , शुद्ध या अशुद्ध नहीं होता । फिर भी हम सेवा के काम पर चर्चा करते हैं और सेवा में भी उस काम की जिसे साफ-सफाई कहा जाता है जिसमें शौच उठाना भी जोड़ा जा सकता है ।(हालांकि भारत मे शौच घर से दूर खुली जगह पर किया जाता था इसलिए उठाने की प्रथा नहीं थी ये भी गुलामी काल की देन है ) आगे जो बात हम लिखने जा रहे हैं हो सकता है माडर्न लोगों को यह समझ न आए । अब जरा एक हिन्दू घर की ओर ध्यान दो और सोचो कि घर में सेवा का काम कौन करता है आपको ध्यान आया की नहीं ? हाँ बिल्कुल ठीक समझे आप हर घर में साफ-सफाई का काम माँ ही करती है और बच्चे का मल कौन उठाता है ? हाँ बिल्कुल ठीक समझे आप हर घर में माँ ही मल उठाती है । मल ही क्यों गोबर भी उठाती है और रोटी कौन बनाता है वो भी माँ ही बनाती है । उस मल उठाने वाली माँ के हाथों बनाई रोटी को खाता कौन है। हम सभी खाते हैं क्यों खाते हैं वो तो गंदी है-अछूत है ? क्या हुआ बुरा लगा न कि जो हमें जन्म देती है पाल पोस कर बढ़ा करती है भला वो शौच उठाने से गन्दी कैसे हो सकती है ? जिस तरह माँ साफ-सफाई करने से या शौच उठाने से गंदी या अछूत नहीं हो जाती पवित्र ही रहती है। ठीक इसी तरह मैला ढोने से या साफ-सफाई करने से कोई हिन्दू अपवित्र नहीं हो जाता । अगर ये सब कर मां अछूत हो जाती है तो उसके बच्चे भी अछूत ही पैदा होंगे फिर तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र सभी अछूत हैं और जब सभी अछूत हैं तो भी तो सभी भाई हैं भाईयों के बीच छुआछूत कैसी ? कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि कोई हिन्दू न छोटा है न बढ़ा सब हिन्दू एक समान हैं कोई अछूत नहीं इसीलिए कहा गया है कि-

न हिन्दू पतितो भवेत

कोई हिन्दू पतित नहीं होता और जो हिन्दू दूसरे हिन्दू को पतित प्रचारित करता है वो हिन्दुओं का हितैषी नहीं विरोधी है और जो हिन्दुओं का विरोधी है वो हिन्दू कैसा ? हमें उन बेसमझों पर बढ़ा तरस आता है जो गाय हत्या व हिन्दुओं के कत्ल के दोषियों (जो न हमारे देश के न खून के न हमारी सभ्यता और संस्कृति के) को अपना भाई बताते हैं और उन को जिनका देश अपना, संस्कृति अपनी और तो और जिनका खून भी अपना, को अछूत मानकर पाप के भागीदार बनते हैं ।

उनकी जानकारी के लिए हम बता दें कि हिन्दुओं के कातिलों आक्रमणकारी मुसलमानों व ईसाईयों को भाई कहना व अपने खून के भाईयों को अछूत अपने आप में ही इस बात का सबसे बढ़ा प्रमाण है कि ये छुआछूत इन मुसलमानों व ईसाईयों की गुलामी का ही परिणाम है क्योंकि अगर हिन्दूसमाज इस तरह के भेदभाव का समर्थक होता तो सबसे ज्यादा छुआछूत इन कातिलों से होती न कि अपने ही खून के भाईयों से । इस गुलामी के काल में जिस तरह हर वर्ण के कुछ जयचन्द, जैसे सैकुलर स्वार्थी हिन्दुओं ने इन साम्राज्यवादी ,अग्निबेश जैसे हिन्दुओं ने मातृभूमि व हिन्दुओं के विरूद्ध काम करते हुए समाज के अन्दर इन दुष्टों के दबाव या लालच में आकर अनेक भ्राँतियां फैलाई छुआछूत भी उन्हीं में से एक है। पर इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह ने हिन्दुओं को आपस में लड़वाने के लिए इतना जहर फैलाया है कि एक पोस्टर पर बाबा भीमराव अम्बेडकर जी का नाम न छापने पर आज एक हिन्दू दूसरे हिन्दू पर इतना तगड़ा प्रहार करता है कि एक दूसरे के खून के प्यासे सगे भाईयों को देखकर रूह काँप उठती है । ये लोग यह भूल जाते हैं कि बाबा जी सब हिन्दुओं के हैं किसी एक वर्ग के नहीं । ये वही बाबा भीमराव अम्बेडकर जी हैं जिन्होंने अंग्रेज ईसाईयों के हिन्दुओं को दोफाड़ करने के सब षड्यन्त्रों को असफल कर दिया था।

हम जानते हैं कि धर्मांतरण के दलालों द्वारा लगाई गई आग को सिर्फ एक दो प्रमाणों से नहीं बुझाया जा सकता क्योंकि इस हिन्दुविरोधी गिरोह का मकसद सारे हिन्दू समाज को इस आग में झुलसाकर राख कर देना है । यही तो इस देशद्रोही गिरोह की योजना है कि हिन्दुओं के मतभेदों को इतना उछालो कि उनमें एक दूसरे के प्रति वैमनस्य का भाव इतना तीव्र हो कि वो राष्ट्रहित हिन्दूहित में भी एक साथ न आ सकें । यह हम सब हिन्दुओं शूद्र, क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य का आज पहला कर्तव्य होना चाहिए कि गुलामी काल से पहले के हिन्दू एकता के प्रमाणों को संजोकर व वर्तमान में हिन्दूएकता के प्रमाणों को उजागर कर इस हिन्दुविरोधी षड़यन्त्र को असफल करें। जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों द्वारा हिन्दुओं पर थोपे गये इस युद्ध को निर्णायक युद्ध की तरह लड़कर अपनी ऋषियों-मुनियों मानव सभ्यता की भूमि भारत को इन पापियों से मुक्त करवाकर राम राज्य की स्थापना करें । अपने हिन्दूराष्ट्र भारत को विकास के पथ पर आगे बढ़ाकर गरीब से गरीब हिन्दू तक विकास का लाभ पहुँचायें व उसे शांति व निर्भीकता से जीने का अवसर प्रदान करें जो इन असुरों के रहते सम्भव नहीं। वैसे भी किसी ने क्या खूब कहा है- मरना भला है उनका जो अपने लिए जिए। जीते हैं मर कर भी वो जो शहीद हो गए कौंम के लिए।। जिस छुआछूत की बात आज कुछ बेसमझ करते हैं उसके अनुसार ब्राह्मण सबसे शुद्ध , क्षत्रिय थोड़ा कम, वैश्य उससे कम, शूद्र सबसे कम।चलो थोड़ी देर के लिए यह मान लेते हैं कि यह व्यवस्था आदि काल से प्रचलित है। तो क्योंकि क्षत्रिय ब्राह्मण से अशुद्ध है तो फिर ब्राह्मण क्षत्रिय की पूजा नहीं कर सकते हैं पर सच्चाई इसके विपरीत है मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम क्षत्रिय हैं पर सारे ब्राह्मण अन्य वर्णों की तरह ही उन्हें भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं। भगवान श्री कृष्ण ब्राह्मण थे क्या ? जो सारे हिन्दू उनकी पूजा करते हैं। सब हिन्दू उनको भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं। ये सत्य है पर वो ब्राह्मण नहीं वैश्य वर्ण से सबन्ध रखते हैं फिर तो ब्राह्मण और क्षत्रिय उनसे शुद्ध हैं उनकी पूजा कैसे कर करते हैं ? ब्राह्मण और क्षत्रिय उनकी पूजा करते हैं ये सत्य है इसे देखा जा सकता है। अतः इस सारी चर्चा से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि वर्ण व्यवस्था एक सच्चाई है पर ये शुद्ध अशुद्ध वाली अवधारणा गलत है और आदिकाल से प्रचलित नहीं है ये गुलामी काल की देन है।अगर ये आदिकाल से प्रचलित होती तो मर्यादा पुर्षोतम भगवान श्री राम भीलनी को माँ कहकर न पुकारते न ही उनके जूठे बेर खाते । अतः जो भी हिन्दू इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा में विश्वास करता है वो अज्ञानी है बेसमझ है उसे सही ज्ञान देकर हिन्दू-एकता के इस सिद्धान्त को मानने के लिए प्रेरित करना हम सब जागरूक हिन्दुओं का ध्येय होना चाहिए और जो इस ध्येय से सहमत नहीं उसे राष्ट्रवादी होने का दावा नहीं करना चाहिए।

अब जरा वर्तमान में अपने समाज में प्रचलित कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं । इस हिन्दुविरोधी देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक गिरोह के इतने तीव्र दुष्प्रचार व विभाजनकारी षड्यन्त्रों के बावजूद आज भी जब किसी हिन्दू के घर में शादी होती है तो सब वर्ण उसे मिलजुलकर पूरा करते हैं। आज भी ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य, शूद्र में से किसी के भी घर में शादी यज्ञ या अन्य कार्यक्रमों के दौरान भोजन जिस बर्तन में रखा जाता है या जिस बर्तन में भोजन किया जाता है उसे उस हिन्दू भाई द्वारा बनाया जाता है जिसे इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा के अनुसार कुछ शूद्र भी अशुद्ध मानते हैं। यहां तक कि अधिकतर घरों में आज भी रोटियां उसी के बनाए बर्तन में रखी जाती हैं दूल्हे की सबसे बड़ी पहचान मुकुट(सेहरा) तक शूद्र हिन्दू भाई द्वारा ही बान्धा जाता है और तो और बारात में सबसे आगे भी शूद्र ही चलते हैं यहां तक कि किसी बच्चे के दांत उल्टे आने पर शूद्र को ही विधिवत भाई बनाया जाता है । अगर शूद्र को आदिकाल से ही अछूत माना जाता होता वो भी इतना अछूत कि उसकी परछांयी तक पड़ना अशुभ माना जाता होता तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, सब शूद्र के बनाए बर्तन में न खाना खाते ,न शूद्र द्वारा मुकुट बांधा जाता,न बारात में शूद्र को सबसे आगे चलाया जाता और न ही शादियों में हिन्दू समाज का ये मिलाजुला स्बरूप दिखता जो इस शुद्ध-अशुद्ध की अवधारणा को पूरी तरह गलत सिद्ध करता है ,हां वर्तमान में जो हिन्दूएकता के सिद्धांत के विपरीत एक ही वर्ण में या विभिन्न वर्णों के बीच कुछ कुरीतियां दिखती हैं । उन्हें हिन्दूसमाज को यथाशीघ्र बिना कोई वक्त गवाए दूर करना है और हिन्दूएकता के इस सिद्धांत को हर घर हर जन तक पहुँचाना है। दिखाबे के लिए नहीं दिल से- मन से क्योंकि किसी भी हिन्दू को अशुद्ध कहना न केवल हिन्दुत्व की आत्मा के विरूद्ध है बल्कि भगवान का भी अपमान है ।

काम बहुत आसान है अगर दिल से समझा जाए तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य को सुपिरियोरिटी कम्पलैक्स(बड़प्पन) व शूद्र को इनफिरियोरिटी कम्पलैक्स(हीन भावना) का भाव दूर कर अपनी उत्पति को ध्यान में रख कर अपनी असलिएत को पहचाहना होगा याद रखना होगा कि हमारा खून एक है । जिस तरह हमारी मां सेवा का काम कर अछूत नहीं हो सकती ठीक इसी तरह कोई शूद्र भाई भी अछूत नहीं हो सकता। हम सब हिन्दू एक हैं भाई-भाई हैं। एक-दूसरे का अपमान भगवान का अपमान है। अब वक्त आ गया है कि सब हिन्दू इस हिन्दुविरोधी-देशद्रोही जिहाद व धर्मांतरण समर्थक सैकुलर गिरोह के भ्रामक दुष्प्रचार का शिकार होकर इन हिन्दूविरोधियों के हाथों तिल-तिल कर मरने के बजाए एकजुट होकर जंगे मैदान में कूदकर अपने आपको हिन्दूराष्ट्र भारत की रक्षा के लिए समर्पित कर दें । वरना वो दिन दूर नहीं जब हिन्दू अफगानिस्तान, बांगलादेश, पाकिस्तान की तरह वर्तमान हिन्दूराष्ट्र भारत से भी बेदखल कर दिए जांए जैसे कश्मीर घाटी से कर दिए गये और मरने व दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होंगे।

आभार http://samrastamunch.spaces.live.com

36 comments:

  1. bahut hi sunder aalekh......achcha laga ....padh kar...

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  2. " satya aalekh ..jabrdast prahar ...aapne jis bebaki se aur jis prakar se aalekh likha hai vo kabile tarif hai .aapne bahut hi sahi kaha hai hume jagna hi hoga ..varna vo din dur nahi jaise pakistan ,afganistan ki halat ho rahi hai ."

    " aap isi tarah ke aalekh likhte rahiye bahut hi badhiya ..aur jagruk karta aalekh ke liye aapko dhero badhai ."

    ------ eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  3. mahfooz kii tippani par aashchary

    waise widambana dekhiye HINDU shabd hi musalmanon ka diya hua hai....

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  4. अछूत शूद्र shab ka istemal na karte to kaamyab rehte... kher kahin se teepne men aqal to ghaas charne chali jati he...
    wah re ser tune samasya hi khatam kar di,,,,kehna aasana hota he,,,,behlana aur bhi asan,,,,agar in baton par amal kiya hota tere jese net blogger ki samjhane zaroorat hi na padti,,

    kher lage raho,,,tum jeson se hi bhoton ki dukan chalti he.

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    1. हिंदुओं में छुआछूत के बहुत सारे प्रमाण हैं और इस पर बहुत चर्चा भी हुई है लेकिन भारत के मुसलमानों के बीच छुआछूत पर बमुश्किल ही बात की गई है.
      इसकी एक वजह तो यह है कि इस्लाम में जाति नहीं है और यह समानता और समतावाद को बढ़ावा देता है.
      भारत के 14 करोड़ मुसलमानों में से ज़्यादातर स्थानीय हैं जिन्होंने धर्मपरिवर्तन किया है. अधिकतर ने हिंदू उच्च-जातियों के उत्पीड़न से बचने के लिए इस्लाम ग्रहण किया.
      सामाजिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के एक संगठन के प्रतिनिधि एजाज़ अली के अनुसार वर्तमान भारतीय मुसलमान की 75 फ़ीसदी दलित आबादी इन्हीं की है जिन्हें दलित मुसलमान कहा जाता है.

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  5. मोहम्मद उमर कैरानवी तुम्हारे जैसे भौकनें वाले इसी दूकान पर आकर अपनी रोजी रोटी पाते है और अपना पेट भरते है, इस बात को कब समझोगें।

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  6. दिल को बहलाने को
    मिथलेश यह लेख अच्छा है

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  7. वैसे ज़वाब नहीं है तुम्हारा। शोहरत को अच्छा जरिया मिल गया है तुम्हे। टिप्पणी तो पूरा लेख पढकर करूँगा।
    "मोहम्मद उमर कैरानवी तुम्हारे जैसे भौकनें वाले इसी दूकान पर आकर अपनी रोजी रोटी पाते है और अपना पेट भरते है, इस बात को कब समझोगें।"
    और ये कौन सी भाषा है दोस्त। शालीनता का ख्याल रखओ। ज़वाब दो लेकिन जरा तमीज से।
    सब यहाँ विचार रखने आते हैँ । ऐसे कहना तो ग़लत है दुबे जी।

    Nov

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  8. मिथलेश बहुत अच्छा लिखा है...... अगर आकार छोटा रहे तो अच्छा रहता है। विचारोत्तेजक लेख के लिए बधाई ।

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  9. mahfooz kii tippani par aashchary

    waise widambana dekhiye HINDU shabd hi musalmanon ka diya hua hai.... (Saleem khan)

    अरे सलीम भाई, इसमें बुरा मानने की क्या बात है।
    आप उन्हें गरियाएँ और वो आपको। अल्ला मियाँ और भगवान भाई साहब तो बस ऊपर से बैठे बैठे हँस ही रहे होंगे, आई थिंक। आपकी क्या ओपीनियन है ?

    छी छी बहुत शर्म की बात है जो ऊपर वाले पर ब्लॉग जैसे संजीदा माध्यम से थूका जा रहा है। दोनों पक्षों को पाप के अलावा कुछ नहीं पड़ेगा देख लीजिएगा। हद है भाई, हद है सर्वशक्तिमान के प्रति बेअदबी की !!

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    प्रिय मिथलेश दुबे जी,

    वर्ण और जाति व्यवस्था हमारे हिन्दू समाज का रिसता हुआ नासूर है... पर क्या इसका ईलाज इतना आसान है जैसा आपने इस आलेख में लिखा है... क्या आज भी विभिन्न वर्णों और जातियो् के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते कायम हो पा रहे हैं? खून-खराबे की नौबत आ जाती है... अगर ऐसा होता है तो... तर्क में हारने पर ऊँची जात वालों को जातिसूचक गालियां देते हुए तो कभी भी देख सकते हो आप...

    और हाँ, मुस्लिम टिप्पणी कारों को भी कहना चाहूँगा कि भले ही इस्लाम आदमी-आदमी में फर्क न करता हो पर मुसलमानों में भी कुछ ऊँचे और कुछ नीचे माने जाते हैं। कुरैशी, अंसारी, सलमानी, बंजारा, शेख, पठान, सैयद आदि आदि जातियां तो मुस्लिमों में हैं ही जो अपनी ही जाति में रिश्ते बनाते हैं और इलेक्शन में भी जाति के आधार पर ही वोट देते हैं... तो इस्लाम भी कहाँ तोड़ पाया जाति प्रथा को?

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  11. achha laga.......

    bahut hi sadhaa hua aalekh

    badhaai !

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  12. हिन्दू वर्ण व्यवस्था पर बहुत ही बढिया तरीके से लिखा आपने.....लेकिन यदि इसे दो भागों में बाँट कर लिखते तो पढने में थोडी सुविधा रहती ।

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  13. क्या मिला ये सब लिख कर ,लिखने से पहले सोच तो लिया करो बस सस्ती शोहरत के लिए? बेवकूफ़ भी आ गये कॉमेंट करने... यार सोच तो लिया करो लिखने से पहले, किसी डॉक्टर ने बताया लिखने के लिए. शरम तुमको मगर नही आती..

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  14. मिथलेश भाई इस अतिसुन्दर लेख पर आप को शुभकामनाये !!!

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  15. मिथिलेश भाई अच्छा लगा पढ़ कर। विद्वता स्पष्ट झलकती है। मुसलमान भाईयों का विरोध स्वाभाविक है वे आपकी ही क्या किसी भी गैर इस्लामी सोच से कभी सहमत न हो पाएंगे क्योंकि असहमति और अस्वीकार ही इस्लाम है।
    सादर
    मनीषा नारायण

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  16. दुबे जी बतकही से कुछ नहीं होता जरा अपने परिवार की या न हों तो सौ पचास ब्राह्मणों की बेटियों की चमारों के लड़कों से शादी करवा कर उदाहरण पेश कर दीजिये ताकि हम जैसे भंगी आपकी बात पर यकीन कर सकें। दूसरी बात कि आप जानते हैं कि "सेनापति" कौन है? जरा साहस करके उसका भी नाम लिखिये अपने इसी ब्लाग पर तब पता चले कि कितना साहस है किस दम पर लड़ रहे हैं। सियारों की तरह छिप कर लड़ाई सही नहीं है लेकिन अगर यही नीति है तो मैं इसे वीरता नहीं मानता, मेरे न मानने से क्या फर्क पड़ता है जो दो सवाल हैं उनका उत्तर दीजिये तब अगली पोस्ट लिखियेगा।

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  17. Dube jee aapne wakai Hindu kaum ko bachane ka achchha tarika socha hai.... aapke hisab se sabhi hindu ek hai unak rakt ek hai ... mujhe to pata tha ki rkat to group se pata chalat hai kisak ek hai...aapne to aise hi pata kar liya... ye to achchhibat hai ... tab to dalit brhaman sabhi ek hi khoon ke hai... to inke riste bhi aaps men hone chahiye... aap ek abhiyan calao brhamn apni ladkiyo ki shadi dalito ke gharon men kare isse hindu kaume jyada sangthit aur mazboot hongi......

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  18. @प्रवीण शाह ,
    यह भी मत भूलिए कि इस नासूर को तुच्छ स्वार्थो के चलते आज के बदलते शिक्षित समाज में भी सिर्फ तथाकथित सेकुलर नेतावो और इन्ही लोगो ने ज़िंदा रखा है !

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  19. आपके इस लेख के लिये बहुत बहुत बधाई,

    न हिन्दू पतितो भवेत शब्‍द को संघ के पूज्‍य संघचालक श्री गुरूजी ने प्रतिपादित करते हुये विस्‍तृत व्‍याख्या किया गया है। बहुत बहुत बधाई मित्र

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  20. समझदारी भरा आलेख। आशावादी नजरिया। साधुवाद।

    इस आलेख पर अबतक आयी प्रतिक्रिया इसकी मूल आत्मा को ही सही सिद्ध करती है। मुस्लिम भाइयों ने उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया दी है। इन्हें ऐसे समन्वयात्मक नजरिये से उलझन होना स्वाभाविक है। इनके हमले की धार जो कुन्द हो रही है।

    दलित समुदाय के लोगों को इस सदाशय पर सहसा विश्वास होना आसान नहीं है। दीनबन्धु जी की तकलीफ़ सच्ची है। ऐसा नहीं है कि हिन्दू समुदाय में बुराइयाँ नहीं हैं, या एक खास वर्ग के लोगों के साथ कई सदियों से अत्याचार और अन्याय नहीं होता आया है। इससे इन्कार किसे है? यहाँ तो बस यह कहा गया है कि गड़बड़ शुरुआत से नहीं हुई है। बल्कि बीच में कुछ लोगों ने अन्धेरगर्दी मचा दी।

    जो सामर्थ्यवान है वह प्रायः अपनी शक्ति का प्रयोग अपना स्वार्थ सिद्ध करने में करता ही है। जिसे अवसर मिला उसीने अपना उल्लू सीधा किया है। अपने चारो ओर नजर घुमा कर देखिए, यह प्रवृत्ति जाति निरपेक्ष है। अब तो हर बात के उदाहरण मिलेंगे। इसलिए सामाजिक न्याय को विकसित करने वाली व्यवस्था बनाने के साथ ही समाज में पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत भी है। लोकतान्त्रिक अधिकारों को सच्चे अर्थों में लागू करना पड़ेगा। जिनके साथ अन्याय पहले होते रहे हैं उन्हें अवसर मिलने पर उसी कुकृत्य को दुहराते रहने की नीति कोई सुधार या सामाजिक न्याय नहीं करने वाली।

    यह बहुत क्रान्तिकारी बात है। यह सब एक दिन में बटन दबाने से नहीं हो सकता है।

    युगों युगों से ज्ञान में ही शक्ति रही है। (knowledge is power) इस मन्त्र को जिसने जल्दी समझ लिया उसने विकास किया। हिन्दू समाज में इस शक्ति को बढ़ाने की आवश्यकता है। मुस्लिम समुदाय हजार साल पुरानी बातों को पत्थर की लकीर समझकर उसको एक इंच भी आगे ले जाने को तैयार नहीं है, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और सामाजिक विमर्श पर भी उसे उलेमाओं का मुँह ताकने की आदत है। मानव के विकास की कहानी जैसे इस सम्प्रदाय के प्रवर्तन के बाद रुक गयी हो। सारी नयी सोच और संहिताएं उसके बाद गैर जरूरी हो गयी हों। भले ही औरते नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हों, बच्चे अनपढ़ रह जाय और चरमपन्थी तालिबानी मानसिकता की उर्वर भूमि तैयार हो जाय लेकिन ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ का संदेश सिर्फ़ इसलिए बुरा लगेगा क्योंकि इससे हिन्दूवाद की बू आती है।


    अमरनाथ जी को लानत भेंजने वाले वे लोग होंगे जो अपनी कुंठा की कैद से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। माना कि अभी तक अन्धेरा रहा है लेकिन क्या हम इस अन्धेरे को कोसते रहेंगे और प्रकाश के लिए कुछ उपाय का प्रयास करने वाले को लानत भेजेंगे? ऐसा विघ्नसंतोष हमें कुछ भी अर्जित नहीं करने देगा।

    “सेकुलर” नामक शब्द अब हिन्दुओं को गाली देने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इस शब्द को सही परिप्रेक्ष्य में समझा ही नहीं जा रहा है क्योंकि सही अर्थों में किसी भी सम्प्रदाय का अनुगामी सेकुलर हो ही नहीं सकता। एक हिन्दू के अलावा कोई भी दूसरा सेकुलर नहीं हो सकता क्योंकि यही जीवन पद्धति है जो किसी अन्य सम्प्रदाय की भाँति अपने अनुयायियों को किसी कट्टर आचार संहिता में नहीं बाँधती। सबको उदारता पूर्वक अपनी आत्मा और अपनी पसन्द के हिसाब से जीने की छूट देती है। अब आवश्यकता है ‘सेकुलर’ नामक शब्द पर हल्ला बोलने की। क्योंकि यह अपने शाब्दिक अर्थ को खो चुका है और ‘हिन्दू विरोध’ व ‘मुस्लिम समर्थक’ के रूप में ही परिचय देता है।

    अमरनाथ जी के अभियान को समर्थन दिया जाना चाहिए क्योंकि इन्होंने सदाशय से एक हाथ आगे बढ़ाया है।

    “अन्धकार को क्यों धिक्कारें नन्हाँ सा इक दीप जलाएं”

    यहाँ की प्रतिक्रियाएं देखकर मुझे दुष्यन्त कुमार याद आ गये जिन्होंने कहा था-
    “मत कहो आकाश में कुहरा घना है।
    यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है॥”

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  21. बहुत सुंदर लिखा है आपने! बढ़िया आलेख! हमेशा की तरह एक शानदार पोस्ट! इस बेहतरीन आलेख के लिए ढेर सारी बधाइयाँ!

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  22. बहुत ही अच्‍छा लेख, शुभकामनायें ।

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  23. चिंतन और ज्ञान से भरा आलेख. हिन्दु धर्म तो अनेकानेक धर्मों का संगम है, जहाँ अनेकईश्वरवाद से लेकर नास्तिकता तक और घोर आत्मिकता से लेकर घनघोर पदार्थवाद तक सब कुछ समाया है.

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  24. मिथिलेश भाई बेहतरीन लिखा है आपने | इतनी सारी बातों को इतना सुन्दर और सहज रूप से लिखा है की मन्त्र मुग्ध सा हो गया | मैं इस बात से सहमत हूँ : "जिहादियों व धर्मांतरण के दलालों द्वारा हिन्दुओं पर थोपे गये इस युद्ध को निर्णायक युद्ध की तरह लड़कर अपनी ऋषियों-मुनियों मानव सभ्यता की भूमि भारत को इन पापियों से मुक्त करवाकर राम राज्य की स्थापना करें ।"

    छुआ-छूत के विरुद्ध अपनी आवाज़ को और बुलंद करना है ....

    भाई ऐसे ओजपूर्ण आलेख लिखते रहिये .... जय हिंद !

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  25. जानो हम अस्सी महिलाओं ने
    क्यों अपनाया इस्लाम
    और दूर करो अपनी
    इस्लाम के बारे में गलतफहमिया

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  26. बेहतरीन लिखा है आपने. Keep it up.

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  27. दुनियां कहां से कहां जा रही और हम वहीं के वही खड़े है । बहुत रोना आता है । ओह !!!!!!!!

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