Thursday, November 19, 2009

फिर होगी अगले बरस मुलाकात


उनकी एक झलक पाने की ख़ातिर


हम नैन बिछाए रहते हैं,


न जाने कब वो आ जाएं


इस कारण एक आँख राह में


और दूजा काम में टिकाए रखते हैं,


इंतज़ार ख़त्म हुआ


उनका दीदार हुआ,


सोचा था जब वो मिलेंगे हमसे


दिल की बात बयाँ करेंगे,


अपने सारे जज़बात उनको बता देंगे,


हाय ये क्या गजब हुआ


जो सोचा था उसका विपरीत हुआ,


वो आए..थोड़ा सा मुस्कुराए


और कह दी उन्होने ऐसी बात


जिससे दिल को हुआ आघात,


कहा उस ज़ालिम ने


मेरा हमदम है कोई और,


मेरी मंज़िल है कोई और


बस कहने आयी थी दिल की बात


फिर होगी अगले बरस मुलाकात ।।

25 comments:

  1. Kaise koi itni aasani se tumhare pyar ko thukra sakta hai Mithilesh.. dekho pata karo koi aur wajah rahi hogi.. yoon hi koi bewafa nahin hota... khoobsoorat kavita.. chatka bonus me...
    Jai Hind...

    ReplyDelete
  2. अरे बेटा क्या यही बात सुननए इतनी दूर भागे गये थे? मैं तो कोई खुशखबरी सुनने की आशा लगाये बैठी थी। अब अगले बरस मत जाना वहाँ। मेरे बेटे के लिये और बहुत हैं बहुत बहुत आशीर्वाद कविता अच्छी है चलो जान आफत से निकली मैं भी इस बात पर चटका लगा देती हूँ

    ReplyDelete
  3. मेरा हमदम है कोई और,


    मेरी मंज़िल है कोई और


    बस कहने आयी थी दिल की बात


    फिर होगी अगले बरस मुलाकात ॥

    बस यही कहने को....HAPPY NEW YEAR TO YOU :)

    ReplyDelete
  4. bahut zaalim thi.....

    Topi pahnaa ke chal di....

    ReplyDelete
  5. ...फिर आ के क्या करेगी अगले बरस वो..

    ReplyDelete
  6. बहुत खूबसूरत कविता है , बहुत बहुत बधाई !!!

    ReplyDelete
  7. jo itni aasaani se kuch kah jayen,unke liye agla pal bhi nahi hota, baras to door ki baat hai

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने ! दिल को छू गई आपकी ये शानदार रचना! उसे आपके प्यार को इस तरह से ठुकराना नहीं चाहिए था! पर आप हमेशा खुश रहिएगा ये सोचकर की चलो उसने आकर सच्चाई तो कह दिया फिर अगले साल इंतज़ार करने का क्या फायदा जब वो आपको न ही मिले! शायद उससे भी कई गुना बेहतर हमदम आपको मिल जाए क्या पता!

    ReplyDelete
  9. paal me jalim bangayi? paar agle baras aane ka vaada kyo kiya jaa raha hai?
    badhiya lagi aapki kavita.

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर रचना है भाई दिल की लगी कर कर गई दिल्लगी !!!

    ReplyDelete
  11. ओह...ये तो जुल्मी संग आँख लड़ी...वाली बात हो गयी...छोडिये उसे आगे बढिए...छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए....ये गाना गाईये और फिर इधर उधर नज़र डालिए...कहते हैं की जब कोई एक दरवाज़ा बंद होता है तो इश्वर दस दूसरे खोल देता है...

    नीरज

    ReplyDelete
  12. बहुत सुंदर कविता..... साधुवाद..

    ReplyDelete
  13. होता है भाई ऐसा ज़िन्दगी मे ..इसमे नया क्या है अगले बरस फिर देखेंगे तब तक...

    ReplyDelete
  14. उम्मीद है वो अगला बरस ज़रुर आए...
    ख़ूबसूरत रचना

    ReplyDelete
  15. ऐसे ही बेवफाओं से दुनिया भरी पड़ी है | इन बेवफाओं से समहल के रहिये मिथिलेश भाई |

    ReplyDelete
  16. वक्त-वक्त की बात है
    मुर्गी मारे लात है
    -यूँ ही लिखते रहो...
    हार्दिक शुभकामना..

    ReplyDelete
  17. प्रिय मिथिलेश,

    निर्मला जी ने बिल्कुल सही कहा और श्री नीरज जी की सलाह भी मानियेगा, "तू नही और सही, और नही और सही....."

    लेकिन भाव भरी रचना अपने साथ बहाये ले जाती है।

    मुकेश कुमार तिवारी

    ReplyDelete
  18. बहुत सुंदर ..दिल को सीधे छूने वाली

    उनकी एक झलक पाने की ख़ातिर


    हम नैन बिछाए रहते हैं,


    न जाने कब वो आ जाएं...बहुत सुंदर ..दिल को सीधे छूने वाली

    ReplyDelete
  19. बहुत खूबसूरत कविता है , बहुत बहुत बधाई !!!

    ReplyDelete
  20. भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
    सुंदर रचना....

    SANJAY KUMAR
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  21. बस कहने आयी थी दिल की बात
    फिर होगी अगले बरस मुलाकात ।।
    Achha laga dard-e-dil ki dastan. Bus yahi dua hai agle barsh dil par yaisa kuch na gujre...

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।