Thursday, November 26, 2009

अनजाने रिश्ते का एहसास

अनजाने रिश्ते का एहसास,

बयां करना मुश्किल था ।

दिल की बात को ,

लबों से कहना मुश्किल था ।।


वक्त के साथ चलते रहे हम ,

बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।

खामोशियां फिसलती रही देर तक,

यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।


सब्र तो होता है कुछ पल का ,

जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

वो दूर रहती तो सहते हम ,

पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।।


अनजाने रिश्ते का एहसास ,
बयां करना मुश्किल था ।।

19 comments:

  1. क्या बात है ग़ज़ल !!!
    हम्म हम्म्म....
    बहुत बढ़िया लिखा जा रहा है आज कल सबकुछ ....हम पूछते हैं बात क्या है मिथिलेश बउवा ??
    बहुत ही सुन्दर लिखे हो...कविता...
    अहसास से लबरेज़... !

    ReplyDelete
  2. अनजाने रिश्ते का एहसास,
    बयां करना मुश्किल था ।

    गहरे भाव समेटे हैं इस गजल में

    ReplyDelete
  3. mithlesh ji padkar hi ehsas ho gaya ki bohot dil se likhi ha ye kavita aapne....
    सब्र तो होता है कुछ पल का ,

    जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

    वो दूर रहती तो सहते हम ,

    पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।।
    in panktiyo ne dil ko chu liya...
    bohot khoob....

    ReplyDelete
  4. आज आपकी इस रचना ने दिल को छू लिया। बहुत अच्छी दुबे जी। सच में।

    सब्र तो होता है कुछ पल का ,
    जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

    वाह क्या बात कही है आपने। बहुत खूब।

    ReplyDelete
  5. वक्त के साथ चलते रहे हम ,
    बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।
    खामोशियां फिसलती रही देर तक,
    यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।
    बहुत ही गहरे भाव के साथ आपने भावपूर्ण रचना लिखा है! दिल को छू गई आपकी हर एक पंक्तियाँ! लाजवाब रचना लिखा है आपने!

    ReplyDelete
  6. सब्र तो होता है कुछ पल का ,
    जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।
    प्रैक्टिकल बात है। शाबास

    ReplyDelete
  7. बहुत शानदार गीत...आनन्द आ गया!!

    ReplyDelete
  8. बहुत ही सहज रचना, जिसमें गहरे गहन भाव हैं.....बहुत ही अच्छी लगी

    ReplyDelete
  9. vakai bahut hi accha likha hai...vaise intezar ka maza alag hota hai...kabhi life mai ye bhi ho to accha hai...

    ReplyDelete
  10. वक्त के साथ चलते रहे हम ,


    बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।


    खामोशियां फिसलती रही देर तक,


    यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।

    बहुत बढ़िया भावपूर्ण रचना बधाई

    ReplyDelete
  11. क्या कह दूं, तेरे शान में ऐ मेरे दोस्त..
    कहीं कमतर ना हो जाये, लिखना मुश्किल है..!

    बेहतरीन..!!!

    ReplyDelete
  12. Dil ki baat ko badi hi khubsurti se abhivyakt kiya hai aapne.

    ReplyDelete
  13. bilkul theek kahte ho bahut mushkil hota hai.

    bahut umda likha hai.

    ReplyDelete
  14. अनजाने रिश्ते का एहसास ,
    बयां करना मुश्किल था ।
    अब क्या कहूँ हमे टिप्पणी करना मुश्किल हो गया है । बहुत बडिया भावनात्मक अभिव्यक्ति है आशीर्वाद्

    ReplyDelete
  15. अनजाने रिश्ते का एहसास ,
    बयां करना मुश्किल था ।।

    aznabi log anjane rishte...asaani se nahi bhoolte...khoobsurat kavita....

    ReplyDelete
  16. वो दूर रहती तो सहते हम ,
    पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ...

    सच है ...पास होते हुए दूर होने का अहसास बहुत तकलीफदेह होता है ...!!

    ReplyDelete
  17. "वक्त के साथ चलते रहे हम ,
    बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।
    खामोशियां फिसलती रही देर तक,
    यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।। "

    मिथलेश, क्या मेरे आस पास ही रहते हो क्या?

    आपकी कविताओं में मेरे हालात भी कुछ ऐसे हैं.
    बेहद भावपूर्ण कविता कही है.

    ReplyDelete
  18. वक्त के साथ चलते रहे हम ,
    बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।
    खामोशियां फिसलती रही देर तक,
    यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।


    बहुत खूब ..यह पंक्तियाँ बहुत पसंद आई .दिल के बहुत करीब थी यह .बेहतरीन शुक्रिया

    ReplyDelete
  19. भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
    सुंदर रचना....

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।