Sunday, December 13, 2009

तुम ही कहो मैं क्या करूँ ? ये मेरे दिलनसीं

एक अहसास ,


एक विश्वास,


टूट रहा है,


साथ तुम्हारा छूट रहा है।


एक भरोसा ,


एक उम्मीद ,


जो दी थी तुमने,


वो तो धूमिल हो चली।


करूँ मैं क्या ?


ये मेरे दिलनसीं।



"रोशन दिये बुझने को है",


मंजिल से रास्ते छूटने को है,


हौसला अब टूटने को है,


सांसे अब थमने को है,


जिंदगी हमसे रूठने को है"


तुम ही कहो मैं क्या करूँ ?


ये मेरे दिलनसीं।।

15 comments:

  1. bahut achhi kavita

    lekin housla banaaye rakho mitra !

    itnee jaldi udaas nahin hote.....

    ReplyDelete
  2. आजकल विश्वास का क्या है.... यह तो टूटते ही रहते हैं..... सच्चाई के साथ कोई भी काम किया जाए.... तो न तो साथ छूटता है न ही भरोसा... तुम कुछ मत करो.... कुछ लोग ट्रेन और बस कि तरह होते हैं .... एक जाती है.... दूसरी आती है...... मस्त रहो.... हे हे हे हे.... चलो यह तो मज़ाक कि बात हो गई.....

    कविता बहुत अच्छी है.... खूबसूरत शब्दों के साथ.... भावपूर्ण रचना....

    ReplyDelete
  3. बढ़िया रचना . उम्मीद पे दुनिया कायम है भाई .

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर भाव हैं मिथिलेश जी ..
    क्या बात है ..लिखते रहें

    ReplyDelete
  5. वाह!
    सुंदर रचना.

    ReplyDelete
  6. Harivanshrai ji ki yeh rachana padhiye shayad dhairya mele:)

    http://3.bp.blogspot.com/_T1nv9WK2jPs/SvIwi8i747I/AAAAAAAACKQ/Mgzfyg1kHm4/s1600-h/KosisKarnay.bmp

    ReplyDelete
  7. एक बार खुद से पूछ लो.......शायद साँसों को अलग मकसद मिल जाये

    ReplyDelete
  8. bahut achchi kavita hai...behtareen bhav.

    ReplyDelete
  9. ोहूओओओओओओओ ये क्या हो गया? अरे उतनी उदास सी कवुता काहे को लिखने लगे? अभी तो शुरुयात है जीवन की। अभी नयी नयी नौकरी का आनन्द उठओ बेटा। ये रूठना मनाना तो चलता ही रहेगा। वैसे कवुता बहुत अच्छी है। आशीर्वाद्

    ReplyDelete
  10. लगता है,किसी उदास शाम को रची गयी है ये रचना....उम्मीद है, सुबह की किरण अपने साथ नयी उमंग नयी आशाएं लाई होगी...वैसे बहुत ही ख़ूबसूरत कविता

    ReplyDelete
  11. बहुत सुंदर भाव हैं मिथिलेश जी ..
    क्या बात है ..लिखते रहें

    ReplyDelete
  12. हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    Sanjay kumar
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

    ReplyDelete
  13. बहुत खूब मिथिलेश भाई।

    ReplyDelete
  14. मिथिलेश भाई बहुत तक़लीफ में हो लगता है...वैसा इसका भी एक अलग ही मज़ा है...
    चलिए दुआ करते है कि जल्द ही आप खुशी वाली कविता लिख पाएँ...
    शुभकामनाएँ...

    ReplyDelete
  15. hausala ab tutane ko hai .jindagi ab hamse ruthane ko hai.bahut khub kahi aapne .very touchy.Thanks

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।