Tuesday, December 29, 2009

हिन्दी गांनो की तरह होता जा रहा हिन्दी ब्लोगिंग , शर्मा जी बेचारे परेशान

आप लोग भी सोच रहे होंगे कि ये मैं कौन सा नया शिगुफा छोड़ रहा हुँ , तो सच बताऊं ये बिल्कुल सच है कि हमारा हिन्दी ब्लोग जगत कहीं कहीं हिन्दी फिल्मो के गांनो की तरह होता जा रहा है अच्छा छोड़िये अब आप लोगो को बता ही देता हूँ आप लोग हिन्दी गांने तो जरुर सूनते ही होंगे , हाँ मैं भी क्या पूछ रहा हूँ , हिन्दी गांने तो सभीको बहुत पसन्द आते होंगे एक बात जिसपर मेरी नजर पड़ी , शायद आप लोगो नें भी ध्यान दिया होगा लेकिन भुल गयें होंगे , ये एक ऐसी कड़ी है जो अब धीरे-धीरे हिन्दी ब्लोगिंग को भी अपने शिकंजे मे ले रही है अच्छा अब मुद्दे पर ही जाता हूँ , आप लोगो ने अगर देखा होगा तो आजकल के हिन्दी गांनो में आधा से ज्यादा गांना अंग्रेजी मे होता है , वह भी ऐसा कि जो उपर से निकल जाता है मुद्दा उपर से निकलने का नहीं है मुद्दा हैं अंग्रेजी का प्रयोग हिन्दी गांनो में

पहले हम देखते थे कि एकाक ऐसे गाने आते थे जिसमे अंग्रेजी का प्रयोग होता था , परन्तु अब स्थिति पहले जैसे नहीं रह गयी , अब तो आपको हर गांनो में अंग्रेजी की झलक दिख ही जायेगी'''' तो क्या यह मान लिया जाये कि आने वाले समय में बस नाम ही रह जायेगा हिन्दी गाना , होगा सब कुछ अंग्रेजी में हो भी सकता है , क्योंकि जिस तरह से अंग्रेजी शब्दो का इस्तेमाल बढ रह है हिन्दी गांनो में ये दिंन भी ज्यादा दूर नहीं होगा अब पता नहीं हमारे यहाँ के हिन्दी गानो के लेखको को क्या दिखता है ऐसा कि वे अंग्रेजी शब्दो का इस्तेमाल जोरो शोरो से कर रहे है हिन्दी गांनो में , शायद अब इनको वे अर्थ वाले शब्द ही नहीं मिल रहें जो इन्हे प्रयोग में लाने होते है गांनो में , और ये इन्हे अंग्रेजी में आसानी से मिल रहे हैं

अब बात आती है कि हिन्दी ब्लोगिंग से भला इसका कैसा सम्बन्ध , तो ये भी बताये देता हूँ , जिस तरह से हिन्दी गांनो में तड़क भड़क डालने के लिए अंग्रेजी शब्दो का प्रयोग किया जा रहा है उसी तरह अब धीर-धीरे हिन्दी ब्लोगिंग में भी अंग्रेजी का प्रयोग तेजी से हो रहा है , अभी तो यह शैसाअवस्था में है , बढ़ती तरक्की से ये अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में हिन्दी ब्लोगिंग में भी बस नाम ही रह जायेगा हिन्दी ब्लोगिंग , होगा सबकुछ अंग्रेजी में । मुद्दा शायद आपको लगे ले , लेकिन ध्यान देंने पर हमें पता चलेगा कि किस तरह से यहाँ भी हाबी होता जा रहा अंग्रेजी । तो क्या हम यहाँ भी अंग्रेजी को ही ज्यादा तवज्जो दे रहें है । जबकि यहाँ तो ऐसा नहीं होना चाहिए , ज्यादातर लोगो से अग़र आप ये सवाल पूछेगे कि आपने हिन्दी ब्लोगिंग ही क्यो चुना , तो जवाब होगा कि हिन्दी हमारी मातृ भाषा है , इसका अस्तर गिर रहा है , इसे ऊठाने के लिए मै हिन्दी ब्लोगिंग के रहा हूँ , । बढ़िया है , प्रयास हो भी रहा हैं , । लेकिन जब इतना प्यार है ,तो हिन्दी ब्लोगिंग में अग्रेजी को स्थान क्यों दिया जा रहा है ? मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि आप हिन्दी ब्लोगिंग ही करिए , अंग्रेजी में भी करिए , लेकिन वो हिन्दी में ना हो तो अच्छा लगेगा ।

मैं अंग्रेजी का विरोधी नहीं हूँ , लेकिन एक स्थान जिसका मूल उद्देश्य ही यही है " हिन्दी विकास " अब ऐसी जगहो पर
अंग्रेजी का प्रयोग कितना करना सही है , ये आप लोग भँली भाती जानते होंगे । और अंग्रेजी का क्या हाल है ये हम सब जानते ही है , कई बार मैंने देखा है कि ब्लोगरो नें शीर्षक या बहुत से हिन्दी शब्दो को अंग्रेजी में रुपानतरण किया है , तो इनका विरोध किया गया ये लेकर कि आपनें अंग्रेजी गलत लिखी है । मैं कहता हूं कि अगर आपको अंग्रेजी से प्रेम है और अंग्रेजी मे लिखना चाहते हैं तो आप लिखिए परन्तु हिन्दी ब्लोगिंग वह स्थान हो अच्छा नहीं लगता , वह अंग्रेजी ब्लोगो पर भी हो सकता है । अंग्रेजी है ही ऐसा कि बस पुछिये मत , बोलनें में कुछ और , मतलब कुछ और हमेशा परेशान ही करता है ,। हिन्दी सिखने के खातीर हिन्दी ब्लोगिंग शुरु किया , थोडा बहुत सीख भी रहा हूँ , लेकिन यहाँ अंग्रेजी का बढता दायरा देखकर दुःख बहुत हो रहा है।

अब बात करता हूँ शर्मा जी की , वो भी बेचारे अंग्रजी के मारे हैं । ये हमेशा कहते है कि अंग्रेज तो चले गये लेकिन
अंग्रेजी छोड़ गये हमें मारने के लिए , और भईया इसके मतलब तो समझ ही नहीं आते , इक ही शब्द के कई मतलब होते हैं , इसे लेकर शर्मा जी और परेशान रहते हैं । ऐसी ही एक बार एक घटना हो गयी शर्मा जी के साथ , और वे बेचारे बहुत परेशान हुए ।

हुआ ये कि शर्मा जी के एक बचपन के दोस्त हैं , बर्मा जी । शर्मा जी तो गाँव में ही रहते है , इनका गाँव वाराणसी में है , और वहाँ के प्राइमरी स्कूल में हिन्दी पढ़ाते है , और अंग्रेजी भी थोड़ी बहुत जानते है , और बहुत सीखना भी चाहते हैं । बर्मा जी अब इलहाबाद में जाकर बस गये हैं और वहा वकील बन गये है। एक पिछली बार जब वर्मा जी गाँव आयें थे तो उन्होनें शर्मा जी को इलहाबाद आने का न्योता दिया था । तो क्या एक दिंन शर्मा जी नें मुड बनाया और निकल गये इलहाबाद के लिए । वहाँ उनके घर पहुँचे , तो दरवाजा श्रीमती जी नें खोला , फिर नमस्ते वगैरह हुआ । फिर वो बैठ कर चाय पी रहे थे , वर्मा जी घर से बाहर गये थे , श्रीमती जी से पता चला कि शाम तक आयेंगे । अभी शर्मा जी चाय पी ही रहे थे कि वर्मा जी का बेटा कपड़े जुते मस्त सजधज के निकला , श्रीमती जी उस समय किचन में थी , कुछ बना रहीं थी शर्मा जी के लिए । शर्मा जी नें उस लड़के को पहली बार देखा था , वह इलहाबाद ही रहता था , फिर शर्मा जी नें उसका परिचय लिया तो पता चला कि वह वर्मा जी का बेटा है । वह बड़ी जल्दी में था , शर्मा जी
नें उससे पुछा कि बेटा तुम्हारे पापा कब तक आ जायेंगे , तो उसने जवाब दिया कि पापा तो तारिख पर गये है , हो सकता है कि देर हो जाये,। फिर बातचीत आगे बढ़ी , बेटा बहुत जल्दी में था , तो शर्मा जी से रहा नहीं गया उन्होंने पुछ लिया कि बेटा तुम बड़े जल्दी में हो कहीं जा रहे हो क्या ?

तो बेटे ने कहां हाँ अंकल जा ही रहा हूँ , फिर शर्मा जी पुछा कहाँ , तो उसने बोला कि मै डेट पर जा रहा हूँ । तो क्या शर्मा जी थोड़ा सकते में आगये , और पुछा कि बेटा अभी तो तुम्हारी उम्र भी नहीं हुई है , तो तुम कैसे तारीख पर जाने लगे, तो बेटे ने बताया कि मैं अपनी गर्लफ्रेण्ड के साथ डेट पर जा रहा हूँ , मतलब घूंमने, पापा तारीख पर गयें है और मै डेट पर जा रहा हूँ , इतना कहके वह वहां से चला गया ,। अब बेचारे शर्मा जी परेशान कि ये क्या माजरा भाई । उन्होनें सोचा कि जहाँ तक मुझे पता है कि डेट को हिन्दी में तारीख कहते हैं , तो एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ , फिर शर्मा जी कहाँ कि ये अंग्रेजी है हि ऐसी अगडम-बगड़म ।
ये तो कहानी रही शर्मा जी , और भी बहुत से ऐसे शब्द आते है जो कि अंग्रेजी को समझ से परे करता है , । जैसे कोई बड़ा अच्छा नाच रहा है , तो आप अगर उसे ये कहते हैं कि आप बड़े अच्छे डांसर है तब तो ठिक है , और आप डा़सर की हिन्दी से उसे रुबरु करा दिजीये तो देखिये , अभी आप उसे ये कहिए कि आप बड़े अच्छे नचनियाँ है , तो भाव ही बदल जायेंगे , अब भाषा का क्या फयदा ।

और अन्त में सभी ब्लोगरो से यही निवेदन है कि हिन्दी को भी अगडम-बगडम ना बनायें उसे साफ सुथरा ही रहंने दे ।

19 comments:

  1. हिन्दी की ग्राह्यता इसे कमज़ोर नहीं मज़बूत बनाती है.

    ReplyDelete
  2. मज़ेदार रही शर्मा जी की कहानी। हिंदी के प्रति आपके विचारों से सहमति रखता हूं।

    ReplyDelete
  3. भाषा सम्प्रेषणीय हो तो उसके लिए कभी एक-आध शब्द अन्य भाषा का प्रयोग आपत्तिजनक नहीं है पर आधे शब्द अन्य भाषा के घुसेडे जांय तो यह तो भाषा पर अन्याय ही कहा जाएगा।

    ReplyDelete
  4. bhai mithilesh...acchal likha ha aapne...jo sochte ha jo chiz pareshan karti ha vo likhni bhi chahiye par me apse sehmat nahi hu...mene koi HINDI blogging nhi chuni bas blogging chuni ha..meri padayi ka madhyam hmesha hindi hi raha ha to apne vicharo ko hindi..ya yu kaho aaam bolchal ki hindi me likhti hu...meri tarha kafi log honge...hme to koi madhyam chahiye tha apne vichar rakhne ka ab n hme shuddh sahityik hindi aati ha apki trha na hi english me sahio dhng se apne vicharo ko vyakt kar pate ha..par baat ko kehni ha n to usi bhasah me kwehte ha jisme apsi baat cheet karte ha... sabki baat to nhiu karungi par me to blogging hindi k prachar prasar k liye nhi krti ha vicharo ka prachar karna chahti hu vhi krti hu...
    dhanyavad.....likhte rahiye

    ReplyDelete
  5. मजेदार मगर सीखपरक

    ReplyDelete
  6. सौ आने सही बात कही आपने हर भाषा का अपना स्थान होता है हिन्दी का ब्लॉग है तो यही कोशिश हो की हिन्दी का प्रयोग ही किया जाय..

    ReplyDelete
  7. .
    .
    .
    शबनम खान जी से सहमत,

    ब्लॉगिंग का मुख्य उद्देश्य स्वयं को अभिव्यक्त करना है, अधिकांश ब्लॉगर वैसा ही लिखेंगे जैसे वो रोजमर्रा की जिन्दगी में बोलते हैं, अब इसमें भाषा की शुद्धता का आग्रह करना या अपना पांडित्य बघारना हास्यास्पद तो है ही, यह भी बताता है कि अभी भी लोग ब्लॉगिंग को समझ नहीं पाये हैं।

    और हाँ कोई अच्छा नाच रहा है तथा उसे यह कहा जाये "आप अच्छे नर्तक हैं" तो शायद भाव नहीं बदलेंगे।

    आभार!

    ReplyDelete
  8. बहुत ज्यादा उपयोग ठीक नहीं है...


    बाकी थोड़ा बहुत ऑल राईट है. :)

    ---


    यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

    हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

    नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    आपका साधुवाद!!

    नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

    ReplyDelete
  9. बजा फ़रमाया पंडितजी आपने।

    ReplyDelete
  10. बहुत सही आलेख....




    नव वर्ष की शुभकामनाएं....

    ReplyDelete
  11. मिथिलेश जी आपकी बात से सहमत मगर कहीं पर अगर उच्च कोटि का समिश्रण हो तो मेरी ख़याल है कि उसमे बुराई नहीं !

    ReplyDelete
  12. mithilesh ji !!
    aaj ke paripekshay main baat kahne ka pryas kiya gaya hai .
    aapane to til ka taad bana diya .
    ramayan ki baat to main bhi samajhti hoon .
    tulasi baba jo kah gaye hain use koi kaat nahi raha hai
    aaj kya ho raha hai , use jara samajhne ka pryas karen.
    sundar prtikriya ke liye dhanywad.

    ReplyDelete
  13. नमस्कार शबनम खान जी , आप की भावनाओं की कद्र करता हूँ , और आप के कहने के उद्देश्य को भी समझ सकता हूँ पर तिपद्दी में इसके उद्देश्य को नहीं समझ पा रहा हूँ , अगर आप हिंदी की विरोधी है तो खुल कर सकारात्मक रूप से लिखे अधूरे शब्दों से आंतरिक अनुभव की वहाय अभिव्यक्ति के रूप में न लिखे हिंदी हमारी मात्र भाषा है और हमारा उसके उत्थान और संबर्धनमें लगे रहना हमारी उसके प्रति निष्ठा को दिखता है .. ये ठीक वही भावना है जो हम अपनी माँ के प्रति मह्शूश करते(कुछ एक नहीं करते अगर आप उनमे से है तो ठीक है ) है
    और काजल जी भाषा की ग्राहता की बात कर के आप कर्तव्यों की इति श्री नहीं कर सकते अच्छा आँख खोलता हुआ लेख बधाई मिथलेश जी
    सादर
    प्रवीण पथिक

    Rrgards
    •▬●๋•pŕávểểń کhừklá●๋•▬•
    9971969084
    9211144086

    ReplyDelete
  14. बहुत अच्छे तरीके से आपने अपनी बात को रखा है ....... सार्थक प्रयास है .........

    ReplyDelete
  15. सहमत ....हालाँकि थोडा बहुत किसी अन्य भाषा का प्रयोग भी भाषा की तरक्की में सहायक ही होता है. और इसमें कोई बुराई नहीं नजर आती हमें.

    ReplyDelete
  16. हिन्दी के प्रति सहमत हूँ मगर ये तुम्हारे शर्मा जी कहाँ से आ गये? क्या ब्लागर हैं? नये साल की शुभकामनायें। {हैपी नियू यीयर } समझ गये न?

    ReplyDelete
  17. एक अच्छे आलेख के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  18. praveen ji...
    main to hindi ki virodhi bilul bhi nahi hu....dayere ko zada badhayiye tab sochiye...kya mithilesh ji ki baato se aap sehmat ha???dekhiye hindi me ya kisi bhi bhasha me agar aise gun ho jo har samey me khud ko dhal le to us bhasha ko is tarha k prachar prasar ki chinta nhi hogi...
    log khud hi use apnayenge....khushi se na ki majboori ya dabav se...
    Matra Bhasha ha hindi janti hu bohot acche se lkin kya jo south indians ya north east k log hindi nhi jante ya bolte kya vo deshdrohi ha...?
    aap bhi kya bat krte ha praveen ji....
    chaliye khula manch ha ye to mene apni baat rakhi aur aapne apni....

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।