Saturday, January 9, 2010

सांसे जो कम पड़ जायें तो ले लेना मेरी-----------(मिथिलेश दुबे)


इंम्तहान तेरे प्यार का अब होगा ,
यार तेरा जब तुझसे जुदा होगा,
बस बातें ही रह जायेगी यादों का पुलिन्दा बनकर,
इनके ही सहारे जीवन का सफर अब होगा ।।

जमाने से मिलकर तो चलना ही होगा ,
राहें है मुश्किल मगर मंजिल पर पहुँचना होगा,
सांसे जो कम पड़ जायें तो ले लेना मेरी,
पर जो वादा किया है तुमने उसे पूरा करना ही होगा ।।

अब वक्त का तकाजा ये होगा ,
प्यार मेरा अब तेरा होगा ,
हम पार कर जायेंगे सरहदें सारी,
उस जहां में न कोई प्यार का इंम्तहान होगा।।

13 comments:

  1. दिल से निकले जज्बात। पसंद आए।

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  2. बहुत ही अच्छी कविता दी आपने.........

    बाँच कर सुख मिला........

    जमाने से मिलकर तो चलना ही होगा ,
    राहें है मुश्किल मगर मंजिल पर पहुँचना होगा,

    वाह ! वाह !

    बहुत खूब !

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  3. पूरे जज़्बात से लिखी गई..... बहुत उम्दा कविता....

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  4. बहुत बेहतरीन भाव!!

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  5. मिथिलेश, यह कविता भी आपने पूरे मन से डूबकर लिखी है, पर अपनी सांसे देने की बात करो, अभी बहुत कुछ करना है आपको.

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  6. dhaar aa gayi kavita wali kalam me bhi Mithilesh.. :)

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  7. जमाने से मिल कर चलना ही होगा राहें हैं मुशकिल मगर मंजिल पर पहुँचना ही होगा वाह बहुत अच्छे बस यही सोच बनाये रखना मगर अपनी साँसे किसी को दो ये मुझे मंजूर नही। हा हा हा बहुत अच्छी रचना है खुश रहो आशीर्वाद्

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  8. Waah! kya baat hai...bahut sundar rachana
    Badhai
    http://kavyamanjusha.blogspot.com/

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  9. राहें है मुश्किल मगर मंजिल पर पहुँचना होगा,

    बहुत सुन्दर ।

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  10. वादा नही टूटना चाहिए .... साँसों की कमी आ जाए तो ले लेना .. गहरी बात कह दी मिथिलेश जी .........

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