Thursday, January 14, 2010

ढकोसला नंद महाराज को चाहिए मल्लिका से गर्मी , हिन्दी ब्लोगिंग में ये कब से होने लगा , शर्म नहीं आती इनकों

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आपने, शायद ऐसे बाबा और साधू के बारे में आप लोग पहली बार सुन रहें हों कि येमहाराज अपने भक्तो से कह रहें कि बच्चा ठंड बहुत ज्यादा बढ गयी है , कोई मल्लिका जैसी चेली भेजो जो मुझे गर्मी प्रदान कर सके इस ठंड में , सुनकर बडा अजीब लगता है कोई बाबा इस तरह की वाहियात और लज्जाहीन माँगे करता है अपने भक्तो से, वह भी ऐसे जगह जहाँ ये पाप माना जाता हो लेकिन क्या किया जायें इस बाबा के उपर कलियूग पूरी तरह से हाबी है , इसे कुछ आगे पिछे की सूझ ही नहीं रही , नहीं तो ऐसे फालतू की मांगे ही ना करता आपको ज्यादा माथापच्ची करने की जरुरत नहीं है , ये बाबा हमारे ही हिन्दी ब्लोगजगत के हैं , जो कि हिन्दी ब्लोगजगत को दूषित कर रहें है शर्म नहीं आती ऐसे बाबाओ को जो की गर्मी लाने के लिए मल्लिका की माँकर रहा है हैरानी तब और भी आती है जब इनके बारे में टिप्पणीया देखने को मिलती हैं , लोग इनका विरोध करने की बजाय इनका आशिर्वाद ग्रहण करते है , शायद ये बात ऊनकें भक्तो को जरा भी अच्छी ना लगें

ये बाबा आखिर हैं कौन तो ये भी आप लोगो को बता देता हूं , ये बाबा है लगोंटा नंद इनके नाम मात्र से ही बहुत कुछ प्रतीत हो रहा है । इन बाबा का दिमाग जो है ना वह अभी घास चरने चला गया है हिमालय पर्वत पर । इनके ब्लोग पर कल मैंने एक पोस्ट देखा , जिसमे बाबा अपने भक्तो से क्या कह रहें है कूद ही देख लीजिए

लगोंटा नंद-----said
एक मल्लिका टाइप चेली की व्यवस्था हो !!!

सभी ब्लॉगर भक्तों का कल्याण हो ! हमें पता है, तुम सभी ठण्ड को लेकर परेशान हो कीबोर्ड पर उंगलियाँ नहीं चल रही है,पोस्ट छोड़ने में जान निकल रही है,..पर बच्चा लोग तुम तो फिर भी ठीक हो, यहाँ हिमालय पर मात्र एक लंगोट के सहारे हमारी हालत तुमसे भी ज्यादा खराब हो रही है, लैपटॉप को बार-बार गर्म करता हूँ तो शरीर ठंडा हो जाता है, शरीर गर्म करने की मेरे पास कोई व्यवस्था भी नहीं है, एक चेली थी, वो भी ठण्ड तो झेल रही थी पर हमें झेलने को तैयार न हुई और इस बर्फीली चोटी पर हमें मरने को अकेला छोड़ भाग गई! बच्चा लोग कोई सुन्दर सी चेली हमारे लिए भेजने की व्यवस्था हो जाए तो.......!
जल्द ही व्यवस्था करवाओ वरना तुम सब अपने महान लंगोटानंद बाबा से हाथ धो बैठोगे, ठण्ड में हमारी कुल्फी जम रही है, जल्दी भेजो मल्लिका टाइप चेली !"""

अब अगर आप लोगो ने ठिक तरह से पढ लिया होगा तो आपको समझ भी आ गया होगा इनके बारे में । ये सब पढने के बाद मैने क्या कहा इनके ब्लोग पर जरा देखियेगा

Mithilesh dubey said...

वैसे आप जो भी हो , ये बात तो पता चल गयी है कि आप निहायत ही घटिया प्रकार के साधु हो । अरे ये कोई तवायफ खाना नहीं है कि आप यहाँ अपने गर्मी के लिए चेली ढुढ रहे हैं , जब आप इस प्रकार के साधु हैं तो आपको ऐसे जगहो के बारे में पता ही होगा । शर्म आनी चाहिए आपको अपने आप आपको महाराज कहते हुए , आप तो महाराज और साधु के नाम पर कलंक है । अब समझ आया कि आपको क्यों बस लगोंटा ही मिला है , अब ऐसी सोच वाले को और क्या मिल ही सकता । मै तो चाहुंगा की आप वहीं बर्फ में दब जायें , ताकि आप जैसे महाराजो की से ये पृथ्वी छुटकारा पाये ।

से आप लोगो को बता दूँ कि बाबा के चेले भी बहुत हैं , उन्ही मे से एक इनका चेला मुझे कहते है देखिये

jhottanand said...

और बच्चा मिथिलेश...लंगोटनन्द जी के प्रति अकारण इतना इतना क्रोध करना ठीक नहीं...तुम्हारी तो उम्र है ..एक नहीं दस पटा लोगे...लेकिन लंगोटनन्द जी कहाँ जाएँ?....किसके दर के आगे अपना माथा फोड़ें?
जैसे भरे पेट को भूखे की व्यथा का अंदाज़ा नहीं होता...जैसे तृप्त व्यक्ति को प्यासे के दुख का भान ही नहीं होता ..उसी तरह तुम्हें भी लंगोटनन्द जी की वेदना का ज्ञान नहीं है...
अभी कल ही दिल्ली जैसे शहर के रैन बसेरे में ठंड से सात लोगों के मौत हो गई है... और फिर बाबा लंगोटनन्द जी तो हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों पर।

ये बाबा मुझे कहते हैं कि तुम तो अभी जवान हो , तुम जितनी चाहो उतनी लड़कियाँ पटा सकते हो , तो कहता हूँ अरे पाखंडी बाबा जब लडंकिया पटाने का इतना ही शौक है तो बाबा और महाराज काहे को बने फिरते हो , । अब लोग ही बताईये कि हिन्दी ब्लोगिंग कोई ऐसी जगह तो है नहीं कि जहाँ से इन्हे लड़किया प्रदान की जा सके, वह भी मात्र गर्मी प्रदान करने के लिए । पता नहीं इनका मकसद क्या है ब्लोगिंग का , भगवान ही जाने ।

अन्त में सभी वरीष्ठ ब्लोगरो से निवेदन है कि इस प्रकार फलतू और गन्दी ब्लोगिंग का विरोध करें , ताकी जो हिन्दी ब्लोगिंग की प्रतिष्ठा बची है वह बची रही , इनको ज्यादा तवज्जो ना दें नही तो ये अपने जैसे हिन्दी ब्लोगिंग को भी बना देंगे ।

28 comments:

  1. वाह mithilesh ji खिंचाई करदी महाराज की!!! लेकिन मैंने लंगोतानंद की पोस्ट भी देखि वहाँ क्सिसी ने अच्छी टिपण्णी तो नहीं की सभी ने दुत्कारा है !!

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  2. कुछ लोंगो ने ब्लॉग जगत को मजाक का मंच बना दिया है?

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  3. मकर संक्रांति की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ!
    बहुत ही बढियां पोस्ट !

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  4. शायद आप इस "लंगोटानन्द" के पीछे छिपे इन्सान से परिचित नहीं हों. इसलिए सोचा आप लोगों को बताता चलूं कि लंगोटानन्द नाम से ये सारी नौटंकी ब्लागर सुरेश शर्मा "कार्टूनिस्ट" कर रहा है.

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  5. अब जब सब ही कुछ ना कुछ लिख रहे हैं तो लगे रहने दो लंगोटा महाराज को भी। मुझे नहीं लगता कि हमारे या तुम्हारे रोकने से ये लंगोटा महाराज रूकेंगे।

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  6. ये लो......
    Anonymous said...
    शायद आप इस "लंगोटानन्द" के पीछे छिपे इन्सान से परिचित नहीं हों. इसलिए सोचा आप लोगों को बताता चलूं कि लंगोटानन्द नाम से ये सारी नौटंकी ब्लागर सुरेश शर्मा "कार्टूनिस्ट" कर रहा है

    यहाँ तो नया खुलासा हो गया।

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  7. बच्चा मिथिलेश...ये क्या गजब किया तुमने?.. हमने तो बस तुम्हारी तारीफ ही की थी...
    कोई पाप तो नहीं कि तुम हमारे निजी वार्तालाप को यूँ सार्वजनिक मंच पे आम करते फिरो?...
    उफ़!...मैंने तुम्हें क्या समझा और तुम क्या निकले?...
    क्या तुम्हारा दिल..दिल है और हमारा दिल पत्थर?...
    मल्लिका नहीं..तो बिपाशा सही...बिपाशा नहीं तो कैटरीना सही....हम तो हिमालय की कंदराओ से मौज लेने निकले हैं..मौज ले के ही मानेंगे
    बाबाओं में दिल नहीं होता क्या?...

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  8. मनोज मिश्र जी से सहमत।

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  9. अच्छा गुरु झौंटा नन्द आप मेरे सपनों में भांजी मार रहे हो
    नरक बना दी है आपने अपनी ज़िंदगी इसी तरह साथ के दशक में
    आपने हमारे हर हक़ पर डाका डाला था वो तो भला हो मिथलेश बाबू का जो समय रहते आपका पथ
    सभी के सामने उजागर कर दिया

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  10. किसी भाई ने मुझ पर ये आरोप लगाया है की मैं सुरेश शर्मा "कार्टूनिस्ट" ही

    लंगोतानंद बनकर नौटंकी कर रहा हूँ.. तो मैं इस आरोप का पूरी तरह से

    खंडन करता हूँ..ऐसा आरोप मेरी छवि खराब करने के लिए लगाया जा रहा

    है..जिन्होंने ये आरोप लगाया है..उनके पास यदि सबूत है तो सामने लायें

    ..इस तरह से मुझे बदनाम न करें.. ब्लॉग के द्वारा इस तरह की घटिया

    हरकत मैं नहीं कर सकता..मैं नहीं समझ पा रहा हूँ ..क्यों और कौन लोग

    मुझे इस विवाद में घसीट रहे हैं.. मैं आपलोगों के लिए कार्टून बनता हूँ और

    बनता रहूँगा..जहां तक बाबाओं की बात है तो मुझे इस तरह की घटिया और

    सस्ती ब्लोगिंग करने की कोई जरुरत नहीं है !

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  11. मिथिलेश भाई ,जब भी कोई नया ब्लोग देखता हूं तो उत्सुकता से उसकी फ़ौलोवर सूची में जुड जाता हूं , और जब ये ब्लोग शुरू हुआ था तो मुझे लगा कि शायद हास्य व्यंग्य को लक्षित कोई ब्लोग होगा , मगर अब देखा तो अफ़सोस हो रहा है ,सूची से जल्दी ही खुद को निकालता हूं । आपने बात बिल्कुल स्पष्ट करके रख दी
    अजय कुमार झा

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  12. इस तरह की मानसिकता का विरोध करके आपने सजगता का परिचय दिया है.


    मुझे कभी अपराध बोध भी घेरता है कि बाबा आश्रम का कॉन्सेप्ट शायद मैं ही लेकर आया लेकिन उसका उद्देश्य मात्र समाज में व्याप्त बाबाओं के द्वारा आंडबरी विसंगतियों पर व्यंग्य कसना था. कभी भी कोई भौंडा प्रयास या हास्य की आड़ में मर्यादा का उलंघन कतई बर्दाश्त न था.

    आज उस आश्रम को देखते न जाने कितने लोग बाबा बन आ खड़े हुए और जिस तरह के और जिस स्तर के वार्तालाप हो रहे हैं, उससे लगता है कि एक स्वस्थ हास्य और विसंगतियों से लड़ने के व्यंग्य की कसौटी कसना लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं.


    बात मजाक से शुरु होती है और स्तर कहाँ तक गिरा ले जाते हैं कि लज्जा की बजाय उन सोचों पर दया आने लगती है.

    आपका साधुवाद जो आपने इस मसले और विषय को उठाया.

    ऐसे सार्थक और सजग प्रयासों और विरोधों का सदैव स्वागत है, मित्र.

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  13. मिथिलेश ,
    इस बार तुमने अपनी चिंता को सही दिशा प्रदान की है ...बहुत अच्छा लगा ...
    इस तरह के सचमुच के ढोंगी बाबाओं की कमी नहीं है हमारे देश में ... हलके फुल्के मजाक से शुरू हुआ ये ब्लॉग इस स्तर तक पहुंचेगा ...पता नहीं था ...खैर लोकतंत्र में सबको आजादी है ...मगर लोग कैसे भूल जाते हैं कि फूहड़ हुए बिना भी हास परिहास किया जा सकता है ....उम्मीद है इस तरह की मानसिकता पर तुम अपनी कलम चलते रहोगे और लोगो को सोचने और बदलने पर मजबूर करोगे ...साधुवाद

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    .
    प्रिय मिथिलेश,
    ठन्ड करो मित्र, Black Humour भी एक स्थापित विधा है। आपके दिये लिन्क पर गया तो देखा वह पोस्ट हटाई जा चुकी है। बाबा जी अब कह रहे हैं कि... बच्चा ..मिथिलेश ...तुहरा कल्याण हो...
    और हाँ तुम्हारे अपरिपक्व, निर्रथक और पूर्वाग्रह ग्रस्त नारी, गौ व संस्कृति चिंतन से भी कभी कभी मन आहत होता है पर "इन ..... का दिमाग जो है ना वह अभी घास चरने चला गया है हिमालय पर्वत पर" किस्म की टिप्पणी या इतनी आक्रामक जवाबी पोस्ट तो कोई नहीं बनाता।

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  15. यह सब हास्य तक ही सीमित रहे तो ठीक है।
    लेकिन फ़ुहड़ता से बचना चाहिए।
    लेकिन लोगों की मानसिकता यह हो गयी है कि फ़ुहड़ता को ही हास्य समझ बैठे हैं।

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  16. भाई मिथलेशजी! ब्लॉग पर लगातार आ रहेबाबाओं को आता देख हम भी आ पहुंचे, उस समय हमने यही सोचा था की हम भी स्वस्थ मनोरंजन परोसेंगे पर मिल रही कुछ गलत टिप्पणियों के कारण हम भटक गए, और हमने ऐसी गन्दी पोस्ट जारी कर दी,हमें बेहद आत्म ग्लानी हो रही है, हमने उस पोस्ट को हटा लिया है!हम मिथलेशजी को धन्यवाद देते है,जिन्होंने इसपोस्ट का विरोध किया! हम श्री समीर लाल जी से भी माफ़ी मांगते हैं, भविष्य में ऐसी गलती न होगी, मैं उन सभी से माफ़ी मांगता हूँ, जिनकी भावना को ठेस लगी है ! हो सके तो मुझे माफ़ी देकर इस मामले को यही समाप्त करें !

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  17. मिथिलेश....बहुत बहुत बधाई...आज तुम्हारी कलम की सार्थकता साबित हो गयी..और तुम्हारी सजगता ने कामयाबी दिला दी...मैं तो ऐसे शीर्षक वाले पोस्ट से सौ गज दूर रहती हूँ,इसलिए पढ़ा ही नहीं.....पर कितने ही लोगों ने पढ़ा होगा,गुस्सा भी आया होगा...पर चुपचाप आगे बढ़ लिया...तुमने विरोध किया और उन्हें पोस्ट हटाने पर मजबूर कर दिया...शाब्बाश!!..ऐसे ही अपनी नज़रें सतर्क रखो और सार्थक लेखन करते रहो,शुभकामनाएं

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  18. बहुत बहुत बधाई........मिथिलेश ji

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  19. mithleshji,

    ye charcha ka vishay banane ke liye ho ul jalool aur apani maansika vikriti ka pradarshan karte hain kuchh log. aise logon men se eka ko aaina dikhha kar aapne bahut achchha kaam kiya .
    badhai.

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  20. MAJAAK AUR FOOHADTA MEIN FARAK HONA CHAAHIYE .... FIR BLOG MEIN LIKHI BAAT DOOR TAK JAATI HAI .... BHASHA AUR SAANSKRITI KA KHYAAL TO RAKHNA HI CHAAHIYE ....

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  21. बहुत अच्छा काम किया है मिथलेश ! मैने पढ़ी तो नहीं क्योंकि उसका शीर्षक ही अजीब सा था परन्तु दुर्भाग्य देखो ब्लोगवाणी पर top पर दीख रही थी..:) ..आपने ये पोस्ट लिख कर एक अच्छे और जागरूक इंसान होने का परिचय दिया है.

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  22. ांअज बहुत काम की बात कही है मैं भी कल उस ब्लाग पर गयी पढ कर मन क्षोभ से भर उठा। ये पढे लिखे लोग ऐसे बात करते हैं जैसे गंवार लोग करते है। तुम ने सही समय पर सही बात की है ये लानत उन लोगों पर भी है जो ऐसी पोस्ट पर इसी तरह का कमेन्ट देते हैं । बहुत अच्छा किया ये पोस्ट लिख कर धन्यवाद और आशीर्वाद्

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  23. बच्चा मिथलेश! कल्याण हो! हम आपके इस ब्लॉग के माध्यम से कुछ बातें स्पस्ट करना चाहते हैं, ताकि सारे ब्लोगर जान-समझ लें, हम आपके आभारी हैं, क्योंकि, आपने सही समय पर ब्लोगिंग को गलत दिशा में जाने से बचा लिया है साथ ही हमें भी भटकने से बचा लिया है, हम आप सभी को ये बताना चाहते हैं की बाबा लंगोटा नन्द का ब्लॉग किसी एक व्यक्ति का नहीं है,इसमें पूरी टीम शामिल है, इस ब्लॉग की आईडी और पासवर्ड कई लोगो के पास है, ये ब्लॉग कई लोगो की मिली भगत का परिणाम है, हम उन सबका नाम सार्वजनिक नहीं कर सकते, इसे हमारी मजबूरी समझें, बदनामी केवल हमारी ही हुई, लेकिन हम अकेले कसूरवार नहीं हैं, खैर! अब हम इस लंगोटा नन्द ब्लॉग से अपने आपको अलग कर रहे हैं, आगे इस ब्लॉग पर हमारे नाम से कोई पोस्ट लगाईं जायेगी तो उसे हमारी न समझा जाए, हम अपनी गलती पर शर्मिंदा है, और ईश्वर सहित सभी ब्लोगर मित्रों से फिर से माफ़ी मांगते हैं! हम भी पारिवारिक व्यक्ति हैं और समाज के प्रति हमारी भी जिम्मेवारियां बनती हैं, ये सही है, उस पोस्ट को हमने ही लगाया था, शायद ये हमारी जीवन की बड़ी गलती है, लेकिन सुना है, आत्मग्लानि से माफ़ी मिल जाती है, हम तो बार-बार माफ़ी मांग रहे हैं, हम बुरे इंसान नहीं हैं, पर इंसान गलतियों का पुतला है, हमसे गलती हो गई, अब माफ़ी ही इसका समाधान है, हम ब्लॉग पर आपके बीच आते रहेंगे, पर अब एक चरित्रवान बाबा के रूप में ही हमारा जन्म होगा, और सबके बीच भाई चारा ही बांटेंगे, कोई सस्ती बात नहीं करेंगे, ये वदा रहा !

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  24. मिथिलेश जी,बहुत ही अच्छा किया ये पोस्ट लिख कर । आप ने अपना कर्तव्य जो समाज के प्रति है उसे बखुबी निभाया ।धन्यवाद

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  25. चलिए देर आये दुरुस्त आये लंगोटा नंदजी !!!

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  26. चलिए लंगोटानन्द जी आपका अंत:करण निर्मल है तो आप का स्वागत है ! बहुत साहसिक कार्य किया है आपने अपनी गलती स्वीकार कर ! सबमे इतनी हिम्मत नहीं अब आप सचमुच के साधू है ! औरों से भी ऊँचे ! आपने अपने मन का मेल साफ़ कर लिया ! अब भी अगर आपके प्रति किसी के मन में रंज है तो वो गलत है !!!

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