Sunday, January 24, 2010

लिखता हूँ मैं कूड़ा करकट फिर भी, टिप्पणियां काश मिलती खूब सारी----(मिथिलेश दुबे)

बहुत दिंनो से देख रहा हूँ कि टिप्पणी को लेकर ब्लोगजगत में काफी उधम मचा हुआ है, कोई ब्लोगिंग ही छोड़ कर जा रहा,, कारण बस टिप्पणी ना मिलना । कभी-कभी लगता है कि टिप्पणी हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या टिप्पणी मात्र से ही कविता या अन्य विधा का मूल्यांकन हो सकता है, ये शायद बड़ा सवाल हो, बात सही कि टिप्पणी मिलने से उत्साह वर्धन जरुर होता है, लेकिन ध्यान ये भी दिया जाना चाहिए कि टिप्पणी है कैसी, यहाँ है कैसी का मतलब यह है कि वह आपको टिप्पणी मिलीं क्यो, आपके रचना के ऊपर या आग्रह के ऊपर । ज्यादातर लोगो का कहना होता है कि रचना अच्छी हो तो टिप्पणी ज्यादा मिलनी चाहिए, बात फिर आकर रुकती है कि क्या टिप्पणी करने वाला हमारी रचना का मूल्यांकन करने लायक है ? बहुत लोगो की शिकायत होती है कि मैं अच्छा लिखता हूँ फिर भी टिप्पणी नहीं मिलती , क्योंकि मेरा नेटवर्क कमजोर है, बात किसी हद तक मानी जा सकती है, लेकिन किसी को पढने या टिप्पणी के लिए बाध्य तो नहीं किया जा सकता, लेकिन नेटवर्किंग को दर किनार भी नहीं किया जा सकता। मैं तो कहता हूँ कि टिप्पणी कि चिंता छोडीये, आपको एक टिप्पणी ही मिले, लेकिन वह पढने वाले कें अन्तर्मन से हो , और वह टिप्पणी आपको आपके रचना के ऊपर मिले तो संमझिए की वह सौ टिप्पणी के बराबर है, बस फोरमेलटी पूरी करने वाली टिप्पणी से कुछ नहीं होने वाला है । बस ज्यादा नहीं बस यही कहना है कि लीखिए अपने संतुष्टि के लिए, बाकी सब पढने वाले के उपर छोड दिजीए । और अन्त में हाजीर है टिप्पणी से ही जुडी एक कविता,शायद और कुछ समझ आ जाये

टिप्पणियां काश मिलती खूब सारी,

कविता चाहे अच्छी न हो हमारी,

करता गुजारिश सभी ब्लागरों से,

टिपियाने की अब है आपकी बारी,




पढ़ता न कोई आग्रह करने पर,

लिखता हूँ मैं कूड़ा करकट,

कहते हैं वो सब,

फिर भी मैंने ना हिम्मत हारी,

कृपया टिपियाइये अब है आपकी बारी,




मूल्य का मूल्याकंन करो,

जो लिखा चाहो तो न पढ़ो,

दिया हुआ लिंक है,

उस पर क्लिक करो,

समय कम है , मालूम है,

फिर भी भाई कुछ ही टिपियाते चलो, ,




आपका भी नाम होगा,

मेरा भी काम होगा,

आपका भी ब्लाग देखूँगा,

हो सकेगा तो कुछ टिपिया दूँगा,





इसलिए करता हूँ मेल,

चर्चा करूँगा तो होगा विवाद,

होगी बेवजह बदनामी,

गुपचुप तरीके से की तैयारी,

चलिये कीजिए टिप्पणी,

मैं भी पडूं सब पर भारी,

आयी है आपकी बारी,

काश टिप्पणी मिले खूब सारी।।

38 comments:

  1. पहली टिप्पणी मेरी ओर से। बहुत खूब!

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  2. काश टिप्पणी मिले खूब सारी....
    बहुत खूब..

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  3. आपने टिपण्णी को लेकर बखूबी लिखा है! अच्छी लगी रचना! ये बात तो सच है कि लिखने के बाद अगर टिपण्णी मिले तो फिर लिखने का उत्साह दुगना हो जाता है!

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  4. सब पढने वाले के उपर छोड दिजीए

    -एक टिप्पणी पूरा पढ़कर. :)

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  5. सुंदर कविता के साथ..... सार्थक लेख....

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  6. चलिये हम भी गले मिल ही लेते हैं।
    स्नेह. शांति, सुख, सदा ही करते वहां निवास
    निष्ठा जिस घर मां बने, पिता बने विश्वास।

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  7. अपना तो एक उसूल है कि टिप्पणी जो दे उसका भला..जो न दे उसका भला....

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  8. सही कहा. टिप्पणी मिले या न मिले हमें लिखते रहना चाहिये. फिर भी टिप्प्णी मिलने पर खुशी तो होती ही है.

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  9. मिथिलेश भाई , वाह क्या खूब नब्ज पकडी है . लो हमारी तरफ़ से भी एक ठो झेलो
    अजय कुमार झा

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  10. अच्छी रचना के उपर टिप्पणी मिलती है यह सच हो ना हो पर यह कदापि नही माना जा सकता कि टिप्पणी ही अच्छी रचना का मूल्यांकन करती हैं यही ब्लॉगजगत में ऐसे कई महान शक्स है जिनकी रचनाओं का कोई तोड़ नही और उन्हे टिप्पणियों की कोई चिंता भी नही रहती है....बढ़िया प्रसंग भाई..धन्यवाद

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  11. ब्लॉगवुड तुम स्टार ब्लॉगर हो...
    स्टार को भीड़ खींच में वक्त नहीं लगता
    तुम स्टार हो

    बस यूँ बरकरार हो

    कभी खबर मत भेजना
    छोड़ रहा हूँ,

    लभिनय
    अभिनेता करे अभिनय
    तो लेख करे लभिनय
    लगे रहो

    डटे रहो

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  12. तुलसी इस संसार मे पांच प्रश्न है सार ..... 1. क्या टिप्पणी मात्र से ही कविता या अन्य विधा का मूल्यांकन हो सकता है ? 2. क्या टिप्पणी करने वाला हमारी रचना का मूल्यांकन करने लायक है ? 3. टिप्पणी आपकी रचना के ऊपर या आग्रह के ऊपर है ? 4. क्या आपका नेटवर्क कमजोर है ? 5. क्या नेटवर्किंग को दर किनार किया जा सकता है?
    यदि अपनी लेखनी से प्यार है तो इस नेटवर्किंग को दर किनार करना ही पडेगा क्योकि इस नेटवर्किंग स्नेह के कारण अच्छे ज्ञानी शब्दशिल्पी और भाषाविदों की टिप्पणिया रचना के ऊपर नही होगी आग्रह के ऊपर होगी.

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  13. Tippanikhoron ki zam ke li(mauz) Mithilesh... :)
    Kulwant ne badhiya kaha...
    Jai Hind... Jai Bundelkhand...

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  14. are kaahe nahi milegi tipanni...zaroor milegi...
    ye dekho ham bhi tipiyaayiye rahe hain...
    pata nahi uuu din kab aayega jab ham bhi mahfooz miyaan ka record todenge...haan nahi to !! :):)
    kavita bahut badhiyan likhe ho...

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  15. " bahut hi mast rachana aur behad khubasurat post ."


    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  16. अच्छा लिख...ब्लॉग पे डाल...

    श्री श्री श्री अनिल पुसदकर जी के इस ब्रह्मवाक्य का हमेशा स्मरण करे और बाकी हर चीज़ की चिंता छोड़ दीजिए...

    जय हिंद...

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  17. पोस्ट में दम होना चाहिए, टिप्पणियाँ खिंची चली आंएगी |

    धन्यवाद

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  18. बहुत खूब लिखे हो . शुभकामनाएं !!

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  19. अरे वाह...बड़ी बड़ी बातें कह डालीं आज तो...पर सच कहा...
    सुन्दर कविता लिखी है.

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  20. "...आपको एक टिप्पणी ही मिले, लेकिन वह पढने वाले कें अन्तर्मन से हो , और वह टिप्पणी आपको आपके रचना के ऊपर मिले तो संमझिए की वह सौ टिप्पणी के बराबर है, बस फोरमेलटी पूरी करने वाली टिप्पणी से कुछ नहीं होने वाला है । बस ज्यादा नहीं बस यही कहना है कि लीखिए अपने संतुष्टि के लिए, बाकी सब पढने वाले के उपर छोड दिजीए ।..."

    और क्या. सही बात है. खड़ी बात है.

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  21. दुबे जी आप जैसे अच्छा लिखना वालों को टिपण्णी की क्या ज़रुरत,फ़िर भी एक टिपण्णी मेरी ओर से भी।बहुत बढिया लिखा आपने।

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  22. दुबे जी आप जैसे अच्छा लिखना वालों को टिपण्णी की क्या ज़रुरत,फ़िर भी एक टिपण्णी मेरी ओर से भी।बहुत बढिया लिखा आपने।

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  23. बहुत उम्दा लिखा मिथिलेश जी , मेरी पूरी सहमती !

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  24. वाह बहुत खूब :) खूब मिले आपको टिप्पणियाँ यही दुआ करेंगे ..शुक्रिया

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  25. मिथिलेश जी ......... अपना कर्म किए जाना चाहिए ....... बाकी जैसी जिसकी मर्ज़ी .........

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  26. टिप्पणियों की इस दौड में 29वीं टिप्पणी मेरी ओर से.....लो हो जाओ आप भी खुश....टिप्पणी पाकर..

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  27. लो बेता हम भी अपनी बारी देने आ गये। कविता अच्छी लगी। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  28. आपको और आपके परिवार को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

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  29. सही है आजकल टिपण्णी लेने के लिए जा. जा कर टिप्पणिया दो तो १० में से ४-५ वापिस आती हैं !! हा..हा..

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  30. ब्लोगिंग ने व्यंग्य के लिए नया विषय दिया..यह क्या कम है?...सुन्दर कटाक्ष ..बधाई.

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  31. प्रिय मिथिलेश, तुलसीदास जी ने लिख है कि 'मुखिया मुख सो चाहिए खान-पान को एक, पाले पोसे सकल अंग तुलसी सहित विवेक' ये तुम्हें भी पता होगा...
    लेकिन अगर मुखिया मुख कि तरह ना हो तो जो अंग अविकसित रह गया है उसको भी और अंगों के बराबर आने के लिए स्वयं कुछ प्रयास करना पड़ता है.. क्योंकि यदि वो पीछे रह जाता है तो अवशेषी अंग बन जाता है और अवशेषी अंग का शरीर में कोई उपयोग नहीं होता... मेरा उद्देश्यसिर्फ़ एक अविकसित और ऐसे खण्ड की ओर सरकार का ध्यान दिलाना है जो हर दृष्टि में संपन्न है लेकिन उसके संसाधनों का उपयोग सिर्फ वोट बैंक के झगड़े की वजह से नहीं किया जा रहा है... उसको पुनः स्वस्थ करके देश के हित में लगाया जा सकता है... कभी महाराज छत्रसाल का राज्य रहा ये क्षेत्र आज सूखा होने पर भी सूखाग्रस्त ना घोषित होते हुए और मुआवजा ना मिलने के कारण किसानों की, आत्महत्या, समाजवादी पार्टी के छुटभैया नेताओं कि गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार के लिए जाना जाने लगा है... क्या इसको पुनः आगे बढ़ाने के लिए ध्यान अपनी तरफ खींचना गलत है.. कहते भी हैं कि जब तक बच्चा रोये ना तो माँ भी दूध नहीं पिलाती..
    वैसे भी आगे तो हमेशा जय हिंद ही रहेगा भाई... मामला
    क्षेत्रवाद का नहीं बल्कि पिछड़े खण्ड को जोकि गड्ढे में है उसे गड्ढे से बाहर लाने का है... याद हो तो गाँधी जी कि दांडी यात्रा में एक कोढ़ का रोगी था जो बहुत धीमे चलने कि वजह से पीछे रह गया था तो सबसे तेज़ चलने वाले गाँधी जी स्वयं उसको आगे लेन के लिए पीछे तक गए थे..
    उम्मीद है तुम बुरा नहीं मानोगे.. और मैं तो हर उस खण्ड के उत्थान के लिए कहता हूँ जो पिछड़ा हो... लेकिन हाँ जो इसको आगे लाना चाहते हैं उनके व्यक्तिगत स्वार्थों पर खुद लात मारना चाहूँगा..
    जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

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  32. बेहद सुन्दर आलेख आभार
    regards

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  33. भाई मिथलेश बिलकुल सही कहा आप ने तिपद्दी की संख्या पर नहीं तिपद्दी की महत्ता पर ध्यान देना कहिये
    Rrgards
    •▬●๋•pŕávểểń کhừklá●๋•▬•
    9971969084
    9211144086

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  34. Yahan to tippniyon ka ambaar rach gaya hai! Kya kahne!

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  35. बहुत सुंदर लेख लिखा, अजी छोडो इस टिपण्णियो के झगडे तो, ओर मजे से लिखॊ. धन्यवाद

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