Thursday, February 11, 2010

अब मैं ना हिम्मत हारूँगा---------------(मिथिलेश दुबे)

एक बार फिर हाजीर हूँ मैं, साधारण भाषा में इसे पूर्नजन्म भी कह सकते हैं । मेरा ब्लोगिंग को छोड़ने का फैसला गलत था इसका एहसास मुझे प्रतिक्रिया मिलने के बाद हुआ । ब्लोगिंग छोड़ने का फैसला लेना मेरे लिए बहुत मुश्किल था , लेकिन कभी-कभी भावुकता वश कुछ गैर जरुरी फैसले हो जाते हैं जो कि मैंने किया । इन दिंनो लिखना तो पूर्णतया बन्द था , लेकिन पढ़ना यथावत चलता रहा, शायद इसे आप ब्लोगिंग का नशा ही कह सकते है कि दूर रहकर भी पास था । इस दर्मीयान मुझे अपनो का बहुत प्यार मिला जिनका सदा-सदा आभारी रहूंगा , ये अपने को प्यार ही है कि मै दोबारा से वापस आ पाया हूँ । ब्लोगिंग छोड़ने पर मुझसे प्यार करने वालो ने कहा कि ये फैसला तुम्हारा किसी भी विधा से सही नहीं है , साथ डांट भी पड़ी । वहीं कुछ लोग खुश भी हुए होंगे कि चलो एक दुश्मन गया , लेकिन उन्हे पता नहीं कि जहाँ अपनो का प्यार होता है वहाँ बड़े-बड़े घूटनें टेक देंते है । उन सभी का शुक्रगुजार हूँ जिन्होनें मेरा लगातार मेरा साथ दिया और मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा ।

अब आता हूँ वहाँ जहाँ मैं रुका था , बात वहाँ हो रही थी हिन्दी ब्लोगिंग में बढ रहे बेवजह पोस्टो की, इसको लेकर मैंने एक पोस्ट लिखी , पोस्ट क्या लिखा जैसे बवाल हो गया , क्यों हुआ ये तो सबको ही मालुम है । मेरे मात्र मोहतरमा शब्द के प्रयोग को लेकर जो कुछ भी हुआ उससे मन बहुत आहत हुआ , आखीर हो भी क्यों ना , जब कोई अपनी हि पोस्ट में गालियां लिखता है , पोस्ट शिर्षक को ही ऐसे शब्द देता है जो कि गालियां समान ही होती है तो कोई नहीं बोलता , क्यों क्यों की चटुकारीता वालो की संख्या ज्यादा होती है । यहाँ अगर आप बड़े ब्लोगर हैं बहुत दिंनो से लिख रहें है तो कोई आपका कुछ नहीं कर पायेगा आप जाहे जो कुछ भी लिखते रहिए ब्लोगिंग के नाम पर । चाहे वह गालियों भरी शिर्षक हो या ऐसे ही अनुचित शब्दो का प्रयोग हो रचना में , कई बार तो ये होता है भड़काऊं और बेहद घटिया प्रकार का शिर्षक दिया जाता है , और बाद में जब पढने वाले उसका विरोध करते हैं तो उन्हे हटा दिया जाता है , और ये भी कहा जाता है कि ये शिर्षक तो रचना का ही भाग है । लेकिन उसमे परिवर्तन भी कर दिया जाता है , क्यों मैं पुछता हूँ क्यो परिवर्तन , अगर आपको लगता है कि आप सही हो और सही किया तो परिवर्तन क्यों ? और अगर आप अपनी गलती स्वीकांर करते हो तो मतलब भी साफ है ये सबकुछ आपनें जानबुझकर किया । अगर मैं कुछ भी ऐसा करता हूँ तो मैं गलत करता हूँ क्योंकि ये सब करने के लिए शायद बड़ा ब्लोगर बनना पड़ेगा , जिसके लिए शायद समय लगे ।

मेरे एक शब्द मोहतरमा के लिए जो कुछ भी हुआ मैं खूद हैरान था कि मैंने ऐसा क्या कह दिया , सभी ब्लोगरो का कहना था कि तुम्हे ऐसे किसी को कहना नहीं चाहिए , जबकी मैंने किसे कहा ये मुझे खुद ही नहीं पता , कुछ लोगो नें कहा कि तुम्हे बड़े ब्लोगरो के लिए ऐसे शब्दो का प्रयोगा नहीं करना चाहिए , तो सबसे पहले मैं बता दूं कि मैं जिसे भी जानता हूँ उसे उसके लेखन शैली और क्या कैसा लिखात है उससे जानता हूँ , नाकि कौन कितने दिंन से लिख रहा , या किसका बहुत बड़ा ग्रुप है , मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , मैं तो वहीं लिखूंगा जो सच्चाई होगी फिर चाहे वह किसी के लिए भी हो । जिनका नाम मुझे बताया गया और कहा गया कि तुमने इनके लिए मोहतरमा शब्द का प्रयोग किया हैं , जबकि सच्चाई कुछ और ही है , मैं तो उनको जानता ही नहीं, मुझे क्या कोई कैसा क्या लिखता है , लेकिन विश्वास किजीए अगर मैं जानता होता उनके बारे में तो शायद लिख ही नहीं पाता , उनके बारे में पता होता तो ये भी पता होता कि कौन कितना बड़ा ब्लोगर है , लेकिन मेरी नादांनी ही कहिए कि मैं बडे ब्लोगर को जान नहीं पाया ।

इस बीच मैं सबसे ज्यादा परेशान था दोहरे मापदंड से , सच में ये बहुत दुःख देता है । ब्लोगिंग छोड़ने के फैसले के बीच मुझे बहुत से लोगो के दो चेहरे देखने को मिलें, कुछ लोगों के तो मेरे उस पोस्ट पर ही दिख गयी थी , कि कैसे लोग क्या-क्या लिखते हैं और मुझे कहते हैं कि मोहतरमा शब्द मत लिखों । ठिक है जो कुछ भी हुआ इस प्रकरण से बहुत कुछ सिखने को भी मिला अपने बडो़ से , शायद जो होता है वह अच्छे के लिए होता है । शायद आप लोगों को लग रहा हो कि मिथिलेश के तेवर अब बदल गयें होंगे तो ऐसा कुछ नहीं बल्कि मेरे तेवर में अब और भी धार आ गयीं है । जो कुछ भी हुआ मेरे लिए बहुत कष्टदायक रहा , लेकिन अपनो के लगातार प्यारा और न चाहने वालो के मिल रहें लगातार बददुंओं से जल्दी ही सबकुछ ठीक हो गया , और वापसी करनें में सफल हो पाया , एक बार फिर से उनका शुक्रगुंजार हूँ जिन्होनें मेरा साथ लगातार बनाये रखा ।


अब मैं ना हिम्मत हारूँगा
अपनी राह चलता जाऊंगा
घटिया तुच्छी बातो से
अब मैं ना डर जाऊंगा


आत्मविश्वास और साहस बढ़ गया
ब्लोगर जन का साथ मिल गया
कोई अब मुझे रोक नहीं सकता
मिल गया है जब प्यार अपनों का
घूंटनो पर कोई अब टिका नहीं सकता।

41 comments:

  1. चलिए सुबह का भूला शाम को घर वापिस आ तो गया:)
    स्वागत है! ब्लागिंग की नई पारी आरम्भ कीजिए......

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  2. भाई मिथिलेश जी
    वापिसी के निर्णय का स्वागत है .... बहुत अच्छा लगा .

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  3. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  4. स्वागतम !ये उर्दू की डिक्शनरी में मोहतरम शब्द ढूंढते थक गया ..मिल नहीं रहा .
    शुद्ध उच्चारण क्या है ? मुहतरम ,मोहतरम ,मह्तरम -कोई बतायेगा क्या ?

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  5. aa gaya mera chhona-mona..
    bahut khushi hui tumhein dekh kar..

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  6. खुशी है कि आपने निर्णय बदल लिया। आपका स्वागत है। मुद्दों पर तो मतभेद होता रहता है और होता रहेगा किन्तु यह मतभेद व्यक्तिगत नहीं होता और न ही होना चाहिए।
    ब्लॉगर केवल ब्लॉगर होता है, वह केवल अपने अच्छे, बुरे या ठीक ठाक लेखन के कारण जाना जाता है। अधिक समय कहीं भी रहेंगे तो स्वाभाविक है कुछ लोग नाम जानने लगेंगे इसका अर्थ यह नहीं कि सभी किसी दल के सदस्य हों, बहुत से लोग बिल्कुल निर्दलीय होकर लिख रहे हैं और देखा जाए तो सही लेखन निर्दलीय होकर ही किया जा सकता है। किसी दल में होने से मुद्दों पर बेबाक नहीं बोला जा सकता।
    आप मेरी टिप्पणी का जो चाहे अर्थ निकाल सकते हैं। मुझे आपकी वापसी से खुशी हुई सो टिपिया दिया।
    घुघूती बासूती

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  7. आदरणीय घुघूती बासूती जी चरण स्पर्श

    आपको यहाँ देखकर सच कह रहा हूँ बहुत खुशी हुई , आपने जो कुछ भी कहा उससे पूर्णतया सहमत हूँ । मेरा भी यही मानना है कि ब्लोगर को हमेशा उसके लेखन से देखना चाहिए ना कि वह कितना पूराना है या किस ग्रुप में है । वैसे अगर आप बुरा ना मांने तो आपसे इक बात जानना चाहूंगा कि आपने मेरे उस पोस्ट से अपनी टिप्पणी क्यों हटा लिया था। आशा है कि आप इसे अन्यथा नहीं लेंगी ।

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  8. punah dekh achchha laga Mithilesh..
    ab 'beeti ko bisariye aage ki sudhi ley'
    ummeed hai pahle se bhi aur behtar post padhne ko milengeen..
    Jai Hind... jai Bundelkhand...

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  9. उस दिन मैंने दो टिप्पणियाँ व्यक्तिगत की थीं अर्थात अपने को सही ठहराती हुई सी। एक आपकी पोस्ट पर और एक अपनी स्वयं की पोस्ट पर किसी के प्रश्न का उत्तर देती हुई सी। परन्तु करते से ही मुझे अहसास हुआ कि इनको करने का कोई लाभ नहीं। एक बहुत पुरानी टिप्पणी प्रतिटिप्पणी वाली घटना याद आ गई, जिसमें व्यक्तिगत रूप से बहुत कुछ कहा गया था। तब शायद कुछ कष्ट भी हुआ था जो याद आ गया। सो मैंने दोनों टिप्पणियों को मिटा दिया।
    स्वास्थ्य गड़बड़ सा चल रहा है सो नेट पर आना भी नहीं या शायद कम हुआ।
    खैर, जो हुआ सो हुआ। आप अपनी विचारधारा रखने को स्वतंत्र हैं और मैं अपनी। जब वे टकराएँगीं तो विरोध भी होगा। परन्तु उन्हें विचारधाराओं व मुद्दों तक ही सीमित रखें तो बेहतर होगा। बस यह याद रखिए कि लेखन में सब बराबर हैं, उम्र से अन्तर नहीं पड़ेगा। उम्र की देखें तो फिर तो आप जैसे युवा हम जैसे वृद्धों के लेखन का कभी विरोध ही नहीं कर सकेंगे और वह दोनों के लिए हानिकारक होगा। मैं आपका आदर करूँगीं, हो सके तो आप मेरा कीजिएगा। मुझे आप सब युवा मित्रों का हिन्दी में लिखना देखकर खुशी होती है। हो सके तो वर्तनी को सुधारें, पढ़ने में कष्ट होता है।
    शुभकामनाओं सहित,
    घुघूती बासूती

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  10. प्रिय मिथिलेश ,
    तुम्हारा आना होली के लिए एक सुंदर उपहार से कम नहीं मेरे लिए तो , अभी इतना ही धार और तेवर बनाए रखो, और ब्लोग्गिंग सिर्फ़ ब्लोग्गिंग करते रहो

    अजय कुमार झा

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  11. घुघूती बासूती जी

    मैं व्यक्तिगत रुप से कभी नहीं चाहूंगा कि कोई मेरे लेख या टिप्पणी से दुःखी हो , हाँ अगर आपको ऐसा लगा हो तो मैं उसके लिए क्षमा याचना करता हूँ । रही बात आदर की तो ये तो मैं कत्तई नहीं चाहूंगा , मुझे बस आप प्यार दें क्योंकि आप शायद मुझसे बहुत बड़ी हैं , रही बात मेरे करने कि तो मै आदर ना करुं अपने बडो की , ये मैंने सिखा ही नहीं । बस आप यूं ही मार्गदर्शन करती रहें ।

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  12. आपक आना और टिप्पणियों के माध्यम से घुघूती बासूती जी से संवाद बहुत अच्छा लगा। यही तो है जो रिश्तों की डोर को मज़बूत करता है। आपकी ईमानदारी व प्रयासों की जितनी भी तारीफ की जाए कम है।

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  13. मिथिलेश जी,
    आप आए बहार आई। मतभेद तो मियाँ बीबी में भी होते हैं। मैं ने तो देखा है कि एक दूसरे को जिन्दगी भर कोसते हुए भी आपस में प्यार से जिन्दगी गुजार देते हैं।
    आप लिखते रहिए। मतभेद चलते रहेंगे। लेकिन सीखने सिखाने को तैयार रहना चाहिए। यही मूल मंत्र है।

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  14. आपके आगमन पर खुशी हुए..स्वागत है आपका..मिथिलेश भाई..

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  15. सप्‍ताह में आपकी ब्‍लॉग लेखन से एक दिन की और माह में 8 दिन की तथा वर्ष में 2 महीने की अनिवार्य छुट्टी स्‍वीकृत की जाती है। पर इस शर्त के साथ कि आप अपनी टिप्‍पणियां जारी रखोगे। और छुट्टी के समय में अपनी रचनात्‍मकता के लिए ऊर्जा का संचयन करोगे और भरपूर तेवर के साथ अपनी पोस्‍टों में उपस्थित होगे।
    जब भी मिलोगे
    तो पिछला सब
    भुला दोगे
    मन में नहीं रखोगे
    कोई रंज
    रंच मात्र भी नहीं
    न रखने दोगे
    किसी को
    न बनेगा ही
    ऐसा माहौल
    जिस पर
    लाहौल विला कूवत
    (पता नहीं सही लिखा या गलत ?)
    कहने को कीबोर्ड चाहे।

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  16. suswagatam ,mithilesh bhai...chalo sabki maan apna,nirnay badal diya...bahut khushi hui,tumhe phir se yahan dekh...

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  17. बहुत अच्छी बात है मिथिलेश कि आपने पुनः आने का निर्णय लिया. आप एक युवा और ऊर्जावान ब्लॉगर हैं. ऐसे ही लिखते रहिये. मेरे विचार से जिसने भी आप से जो भी कहा, वो इसलिये क्योंकि आपको सभी प्यार करते हैं और आप भी अब समझ गये होंगे कि यहाँ आना अपनी इच्छा से होता है, पर जाना सब की मर्ज़ी से. यहाँ कोई भी किसी भी मुद्दे पर लिख सकता है, और जैसे कि घुघूती बासुती जी ने कहा कि किसी से सहमत या असहमत भी हुआ जा सकता है. इसमें कोई बुरी बात नहीं है. ऐसे ही लिखते रहो. आप जैसे युवाओं की ज़रूरत है ब्लॉगजगत्‌ को भी और देश को भी, जो समाज के लिये सोचते हैं. हाँ, ये सच है कि यहाँ कोई उम्र से छोटा-बड़ा होने से ही छोटा-बड़ा ब्लॉगर नहीं हो जाता, पर अपने से बड़े अधिक अनुभवी होते हैं और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है. ये तो आप भी जानते हैं. और आपसे बहुत आशाएँ हैं.
    निडर होकर लिखिये, यही आपकी ख़ासियत है. शुभकामनाएँ !!

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  18. This comment has been removed by the author.

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  19. भाई मिथिलेश जी, ब्लोग टन्की से आपके उतरने के लियी आपका आभार और हार्दिक स्वागत. आभार इसलिये कि इतने दिन हुए उतर ही नही रहे थे. ये ठीक नही था. आखिर और भी लोगो का टन्की पर चढने का उतना ही हक है और रहेगा. स्वागत इसलिय्र कि बयी ऊर्जा के साथ आये हो तो नये नये सार्थक लेख लिखो ऐसी हमारी कामना है. कामना का अन्त नही है और हम शाबास भी कह देते है तब भी क्योकि कामना अनन्त है.

    घूघरी बासूती जी ने जो खुले दिल से आपका इस वापसी के लिये स्वागत किया है उससे पता चलता है कि बडप्पन क्या होता है. उनका यह सहज द्वभाव है लेकिन उससे हमे भी सीखने को मिलता है.

    कुछ दिनो से मै भी सीनियर ब्लोगर, बडे ब्लोगर, प्रतिश्ठित ब्लोगर जैसे शब्द लगातार सुन रहा हू. इनके शाब्दिक अर्थ को तो समझ रहा हू पर मुझे लगता है कि इसे ढाल नही बनाया जाये. सही को सही और गलत को गलत कहा जाये. हा बोल चाल की भाषा मे ये ध्यान रक्जे कि उमर मे बडो और महिलाओ को सम्बोधन वैसा हो जैसा हम अपने परिवार के बडो और महिलाओ को देते है.

    खूब लिखो और वेहतर लिखो. जल्दबाजी मे वर्तनी की गल्तिया हमसे भी होती है लेकिन खुद की पोस्ट मे उन्हे मौका मिलते ही सुधारते रहो तो पोस्ट अधिक सहज पठनीय हो जाती है

    कभी अलग से बात हुई तो और भी कुछ बात कहने का मन है लेकिन आज वापसी की इस बेला मे तुम्हारा हार्दिक स्वागत है

    हरि शर्मा
    ०९००१८९६०७९
    http://hariprasadsharma.blogspot.com/
    http://sharatkenaareecharitra.blogspot.com/

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  20. बहुत खुशी हुई तुम्हें वापस आया देख कर!

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  21. मिथिलेश जी, ब्‍लागिंग विवाद का मंच नहीं है। हम केवल अपने विचार यहाँ लिखते हैं। जो साहित्‍य क्षेत्र से हैं वे अपनी रचनाएं यहाँ देते हैं। इतना ही है बस। ना तो यहाँ कोई गुट होना चाहिए और ना ही कोई विवाद। टिप्‍पणी करना भी उस विषय पर अपने विचार प्रकट करना मात्र ही है। आप युवा हैं और मैं चाहती हूँ कि आपकी पीढ़ी के विचार आपके माध्‍यम से हमें मिलने चाहिए। हमें लगता है कि हम सब एकतरफा हो जाते हैं। माता-पिता की बात आती है तो केवल अपनी ही बात करते हैं लेकिन बच्‍चे क्‍या सोचते हैं यह हमें नहीं मालूम पड़ता। ऐसे सारे विषयों पर आपकी बेबाक टिप्‍पणी समाज में परिवर्तन लाने में सक्षम होगी।

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  22. घर से भाग जाने वाले बच्चे की जैसे पिटाई होती है वैसे ही तुम्हारी पिटाई करने को जी चाहता है । तुम ने सब को छोड कर जाने की सोची भी कैसे? चलो वापिस आ गये तो माफ किया। बेटा जहां दो बर्तन होंगे खडकेंगे भी तुम क्या समझते हि कि ऐसे विवाद फिर नही होंगे? जरूर होंगे मगर अब भागना नही । अपनी गलती हो तो क्षमा मांगना नही हो तो जम कर लिखना । इस नयी पारी के लिये मेरी बहुत बहुत शुभकामनायें अच्छा लिखने वाले को कभी मैदान नही छोडना चाहिये। अच्छी लगी तुम्हारी ये पँक्तियां
    आत्मविश्वास और साहस बढ़ गया
    ब्लोगर जन का साथ मिल गया
    कोई अब मुझे रोक नहीं सकता
    मिल गया है जब प्यार अपनों का
    घूंटनो पर कोई अब टिका नहीं सकता।
    बहुत खुशी हुयी कि तुम ने सब की बात मान ली वैसे तुम आग्याकारी बेटे हो। बहुत बहुत आशीर्वाद्

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  23. good to see you back and better focused

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  24. हाँ! मिथिलेश..........बिलकुल भी हिम्मत मत हारना.... तुम्हारे बिना अच्छा भी नहीं लगता है......

    मैं वापस आ गया हूँ लखनऊ ....

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  25. दूबे जी ! श्रीकांत जी की इन पंक्तियों
    को जीवन में साधिये ---
    '' चाहता तो बच सकता था
    पर बचता कैसे
    जो बचेगा
    वो कैसे रचेगा ! ''
    ऊर्जावान रहिये .. शुभकामनाएं ...

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  26. स्वागत है .... मिथिलेश जी ............
    आपको महा-शिवरात्रि पर्व की बहुत बहुत बधाई .......

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  27. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है. आपकी पोस्ट के साथ-साथ अन्य ब्लॉग पर आपकी टिप्पणियां भी ढूँढ कर पढ़ता हूँ...अच्छी लगती हैं आपकी बेबाक टिप्पणियाँ ! ...कोई तो है जो दिल से भी लिख रहा है!..दिमाग तो सभी चलाते हैं.

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  28. आप लौट आए? पिटाई की ज़रूरत ही नहीं पड़ी!?

    स्वागत है!

    ब्लागिंग की नई पारी उत्साह के साथ आरम्भ कीजिए

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  29. mithilesh ji main to bahut samay baad yahan aayi..is beech kaun sa vivad hua malum nahi.chaliye chodiye.
    sab ek baar phir aapka welcome kar rahe hai to meri bhi shubhkamnayen.
    likhiye ..hume intazaar hai :)

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  30. aao viram chalo..
    sawagat hai
    suba sham chalo
    koi kuchh bhi kahe
    tum to karte
    acchhe kam calo

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  31. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 13.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

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  32. महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!
    बहुत बढ़िया लगा ! बधाई!

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  33. दुबे जी, अच्छा किया जो लौट आये। विचारों का मतभेद कोई नई बात नहीं है और सभी को अपनी राय रखने का अधिकार है बशर्ते थोपने की कोशिश न की जाये। घुघुती बसूती जी ने सदाशयता का परिचय दिया है और आपने भी सही स्टैड लिया है।
    पाबलाजी आपको जलेबी खिलाने वाले थे और लौटने पर पिटाई न खिलाने की बात कहकर बहका रहे हैं, जलेबी लिये बिना मान गये तो इनकी आदत खराब हो जायेगी, कोई पाबला जी को उनका वायदा याद दिलाओ।

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  34. अरे आप वापस भी आ चुके हैं, हम तो गलती से आपकी पुरानी टंकी चढ़ने वाली पोस्ट पर टिप्पणी कर आये।

    खैर अच्छा हुआ, आपने टंकी चढ़ कर उतरने की परम्परा निभायी। वापस स्वागत है आपका। :-)

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