Friday, February 26, 2010

अगर आप कलाकार हैं तो अपनी माँ बहन की नंगी तस्विर बनाओं और दिखाओं अपने कला का जौहर---------मिथिलेश दुबे

ये तो सबको मालुम ही होगा कि कांग्रेस ऐसे कोई मौका नहीं चूकती जिससे हिन्दूओं को हतोउत्साहित किया जा सके , लेकिन शायद वह यह भूल जाती हैं कि हिन्दू कमजोर नहीं कि वह किसी डरें , उन्हे अपनी रक्षा करनी अच्छी तरह से आती है । भारत की वार्तमान स्थिति पर अगर ध्यान दिया जाये तो पता चलेगा कि यहाँ अभी हाल फिल सारे षड़यन्त्र हिन्दुओं के खिलाफ रचे जा रहे हैं । इसका सबसे ताजा तरीन घटना है मकबूल फिदा हुसैन को कांग्रेस सरकार भारत लाना चाहती है, भारत सरकार कह रही है कि आपको भारत में उचित सुरक्षा दी जायेगी । फिदा हूसैन से कौन वाकिफ नहीं होगा, हाँ ये वहीं है जिन्होने भारत माता , सिता माता , माँ पर्वती को नंगी तस्विरों में प्रदर्शित किया । कुछ लोग इनका समर्थन ये कहकर करते है कि ये कलाकार हैं, बढ़िया है अगर आप कलाकार हैं तो अपनी माँ बहन की नंगी तस्विर बनाओं और दिखाओं अपने कला का जौहर सबको, ये कैसा कला का प्रदर्शन है जिसमे अपना धर्म दिखता है पूजा के लिए और दूसरो का दिखता है कला के लिए । जिस तरह से उन्हे कांग्रेस बूला रही है ये बात फिर साबीत हो गयी है कि कांग्रेस है ही हिन्दू विरोधी ।

लेकिन कांग्रेस में ऐसे देशभक्त हिन्दू कार्यकर्ताओं की बहुत बढ़ी संख्या है, जो असंगठित हैं व एक दूसरेमें विश्वाश की कमी की वजह से, इन देशद्रोहियों की जुंडली के देशविरोधी-हिन्दुविरोधी षड़यन्त्रों का मुंहतोड़ जबाब देने में अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं इसलिए खामोश हैं। उन्हें अपनी चुपी तोड़ते हुए एक दूसरे पर विश्वास करते हुए संगठित होकर इस देशद्रोहियों की जुंडली को बेनकाब कर अपदस्थ करना होगा और देशभक्त लोगों को कांग्रेस के शीर्ष पदों पर बिठाकर कांग्रेस के देशविरोधी-हिन्दु विरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक कदमों को रोककर देशभक्ति की राह पर चलाना होगा । नहीं तो हिन्दुस्तान की जनता ये मानने पर मजबूर हो जाएगी कि हरेक कांग्रेसी देश विरोधी-हिन्दू विरोधी जिहादी आतंकवाद व धर्मांतरण समर्थक है और देश मे आए दिन बम्ब विस्फोटों में मारे जाने वाले निर्दोष हिन्दुओं, सैनिकों, अर्धसैनिक बलों व पुलिस के जवानों के कत्ल के लिए जिम्मेवारहै।

परिणाम स्वरूप ये सब मिलकर कांग्रेसियों के खून के प्यासे हो सकते हैं क्योंकि अब कांग्रेस के पाप का घड़ा भर चुका है ।भगवान राम-जो करोड़ों हिन्दूस्थानियों के आस्था विश्वाश और श्रद्धा के केन्द्र हैं-के अस्तित्व को नकारना व सनातन में विश्वाश करने वाले शांतिप्रिय हिन्दुओं व सैनिकों को आतंकवादी कहकर जेलों में डालकर बदनाम करना-इस पाप के घड़े में समाने वाले अपराधनहीं हैं।वैसे भी कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी अंग्रेज ए ओ हयूम(जो ब्यापार के बहाने भारत आकर धोखा देकर देश को गुलाम बनानेबाली ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकारी था) ने 1885 में विदेशियों के राज को भारत में लम्बे समय तक बनाए रखने के लिएअंग्रेजी शासकों के सहयोग से की थी । तब इसका मूल उदेश्य था क्रांतिकारियों की आवाज को जनसाधारण तक पहुंचने से रोकनाऔर ये भ्रम फैलाना कि जनता का प्रतिनिधत्व कांग्रेस करती है न कि क्रांतिकारी।इसकी स्थापना का कारण बना 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम जिससे अंग्रेजों के अन्दर दहशत फैल गई । आओ ! जरा नमन करें, शहीद मंगलपांडे, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ,शहीद तांत्य टोपे, शहीद नाना साहिब जैसे अनगिनत शहीदों को जो राष्ट्र की खातिर बलिदान हुए। कांग्रेस की स्थापना केकुछसमयतकअंग्रेजीशासकों को किसी अंदोलन का सामना नहीं करना पड़ा लेकिन धीरे- धीरे क्रांतिकारियों ने कांग्रेस को अपना मंच बनालिया । शहीद भगत सिंह , शहीद राजगुरू, शहीद सुखदेव, शहीद चन्दरशेखर आजाद, शहीद बाल गंगाधर तिलक , शहीद लाला लाजपतराय, शहीद विपन चन्द्र पाल जैसे असंख्य क्रांतिकारी कांग्रेस से जुड़े और देश के लिए बलिदान हुए । देश का धर्म के आधार पर विभाजन स्वीकार कर लिया । अंग्रेजों को लिख कर दे दिया कि नेताजी सुभाष चन्द्रवोस जैसा घोरराष्ट्रवादी क्राँतिकारीजबभी हिन्दुस्थान आएगा तो उसे उन दुष्ट- डकैत साम्राज्यबादियों के हवाले कर दिया जाएगा, जिन्होंने 300वर्ष तक इस देश का लहू पानीकी तरह बहाया व देश छोड़ते वक्त अपने लिए काम करने वाले को कुर्सी पर बिठाया । इधर लोगोंको यह कहकर बरगलाना शुरू कर दिया कि देश आजाद करवा दिया ।

आज तक लोगों को यह नहीं बताया कि अगर पाकिस्तान की ओर से हस्ताक्षर सैकुलर पुराने काँग्रेसी मुहम्मदअली जिन्ना ने किए थे तो भारत की ओर से सैकुलर काँग्रेसी ज्वाहरलाल नेहरू ने किए थे या किसी और ने ? हिन्दुओं का कत्लेआम शुरू था इधर मोहन दास जी व नेहरू जी हिन्दुओं को यह कहकर बरगलाने में लगे हुए थे कि वो हमारेभाई हैं जो हिन्दुओं का कत्लेआम कर रहे हैं , हिन्दुओं की माँ बहनों की इज्जत पर हमला कर रहे हैं इसलिए आप कायर और नपुंसक बनकर हमारी तरह तमाशादेखो, जिस तरह क्रांतिकारी देश के लिए शहीद होते रहे देश छोड़ते रहे और हम अपने अंग्रेज भाईयों से सबन्ध अच्छे बनाए रखने के लिए तमाशबीन बनें देखते रहें। पर मोहन दास जी व नेहरू जी के नेतृत्व में कांग्रेस का एक ग्रुप क्रांतिकारियों को कभी गले न लगा पाया । वरना क्या वजह थी कि नेताजी सुभाषचन्द्र वोस (जिन्होने 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में पट्टाभीसीतारमैइया जी को हराया जिनकासमर्थन मोहन दास जीकर रहे थे)को कांग्रेस छोड कर आजाद हिन्द सेना बनानी पड़ी । शहीद भक्तसिंह जैसे प्रखर राष्ट्रवादी देशभक्त के बचाव में यह ग्रुप खुलकर सामने नहीं आया उल्टा उनको गुमराह क्राँतिकारी कहकर उनके देश की खातिर किए गए बलिदान को अपमानित करने का दुःसाहस किया । काश ! उन्होंने बकिंम चन्द्र चटर्जी जी द्वारा लिखित उपन्यास आनंदमठ पढ़ा होता(सैकुलर गिरोह में सामिल हिन्दुओं को ये उपन्यास जरूर पढ़नाचाहिए) तो शायद वो ये गलती न करते और भारत के सर्बमान्य नेता होते और आज हिन्दू इस तरह न मारे जाते। हम इस बात को यहां स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम निजी तौर पर मोहन दास जी की आर्थिक सोच व उनकीसादगी के कट्टर समर्थक हैं जिसमें उन्होंने स्वदेशी की खुलकर बकालत की । पर क्या नेहरू जी को यह सोच पसन्द थी ?नहीं न । कुर्सी की दौड़ में ईसाईयत की शिक्षा प्राप्त नेहरू जी मांउटबैटन की यारी व कुर्सी की दौड़ में इनसानित और देशभक्ति छोड़कर वो सब कर बैठे जो देशद्रोही गद्दार जिहादियों और सम्राज्यबादी ईसाईयों के हित में व हिन्दुस्थान और हिन्दुओं के विरोधमें था । कई बार मन यह सोचने पर मजबूर होता है कि मोहन दास जी के नाम जितनी भी बदनामियां हैं उन सबके सूत्र धार नेहरू जी थे । जिन हालात में मोहन दास जी के शरीर को खत्म किया गया उसके सूत्रधार भी कहीं न कहीं नेहरू जी ही थेक्योंकि नेहरू जी प्रधानमन्त्री थे, गांधी जी सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी थी और उनके खत्म होने का सबसे ज्यादा फायदा नेहरू परिवार ने ही उठाया। जिसके मोहन दास जीकटर विरोधी थे क्योंकि उन्होंने तो देश विभाजन के बाद ही कांग्रेस को समाप्त करनेका आग्रह किया था जिसके नेहरू जी विरूद्ध थे अब जरा सोचो मोहन दास जी को किसने खत्म करवाया ? वे कितने दूरदर्शी थे इसका पता आज आए दिन देश के विभिन्न हिन्दू बहुल क्षेत्रों में होने वाले बम्बविस्फोटों व मुस्लिम बहुलक्षेत्रों में होने वाले दंगों से पता चलता है। कांग्रेस भरसक प्रयास करती है कि कोई जिहादी आतंकी न मारा जाए । और इसका उदाहरण हमारे सामने है, आखिर गुरु अफजल को अभी तक जिन्दा रखने का क्या मतलब है जबकि सबको मालुम है कि उसे फासी की सजा हुयी है, इसका जवाब कौन देगा । आखिर कसाब को जिन्दा क्यो रखा गया है, जबकी सबको पता है कि मुंबई मे कत्लेआम उसी ने किया था।

इतने हिन्दुओं का खून पी लेने के बाद भी इस कांग्रेस की प्यास न बुझी हो इसलिए इस ने यह सुनिश्चित किया कि भारत के हिन्दुओं वाले हिस्से को हिन्दूराष्ट्र न बनने दिया जाए । इस कांग्रेस द्वरा यह भी सुनिश्चित किया गया कि भविष्य में हिन्दू सुखचैन से न जी सकें और कांग्रेस का वोट बैंक भी चलता रहे । जब 1948 में पाकिस्तानी सेना ने कबाइली जिहादियों के वेशमें भारत पर हमला किया तब भी नेहरू जी की भूमिका भारत विरोधी ही रही। यह वही नेहरू जी हैं जो पटेल जी के लाख समझाने के बावजूद, इस हमले का मुकाबला कर जिहादी आक्रांताओं को मार भगाने के बजाए संयुक्तराष्ट्र में ले गए । यह वही नेहरू जी हैं जिन्होंने संयुक्तराष्ट्र की बैठक में पटेल जी के रोकने के बाबजूद, पाकिस्तान द्वारा कब्जे में लिए गए जम्मू-कश्मीर के हिस्से को बार-बार आजाद कश्मीर कहा जिसका खामियाजा भारत आज तक भुक्त रहा है। अब आप ही बताइए कि आज जम्मू-कश्मीरमें जा रहे निर्दोष हिन्दुओं व शहीद हो रहे सैनिकों के कत्ल के लिए कांग्रेस व नेहरू जी को जिम्मेवार क्यों न ठहराया जाए ? यह वही नेहरू जी हैं जिन्होंने हिन्दुविरोधीयों को खुश करने के लिए कहा था ‘ मैं दुर्घटनावश हिन्दू हूँ ’।

आपको यह जान कर हैरानी होगी कि पचास के दशक में आयुद्ध कारखानों में नेहरू जी का जोर हथियारों की जगह सौंदर्य-प्रसाधन बनवाने पर ज्यादा था । जिसके विरूद्ध तत्कालीन राष्ट्रपति डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी ने नेहरू जी को पत्र लिखकर चेताया भी था । पर नेहरू जी तो कबूतर की तरह आँखें बन्द किए हुए कहते फिर रहेथे,हमारे ऊपर कोई हमला नहीं कर सकता । वे कितने दूरदर्शी थे इसका पता 1962में ही लग गया,जब हथियारों की कमी के कारण हमारे बहादुर सैनिकों को शहीद होना पड़ा और भारत युद्ध हार गया। हमारी मातृभूमिके एक बड़े हिस्से पर चीन ने कब्जा कर लिया।आओ उन शहीदों को हर पल प्रणाम करने का प्रण करें । काश नेहरू जी को पता होता कि शान्ति बनाए रखने का एकमात्र उपाय है युद्ध के लिए तैयार रहना। मन्दिरों पर किए जा रहे हमलों, हिन्दुबहुल क्षेत्रों में बम्ब विस्फोट करके चलाए जा रहे हिन्दू मिटाओ अभियान के लिए कांग्रेस को जिम्मेवार क्यों न माना जाए ? पाकिस्तान व बांगलादेश में जो हिन्दू रह गए थे वो आज गिने-चुने रह गए हैं बाकी यातो इस्लाम अपनाने पर बाध्य कर दिय गए,भगा दिए गये या जिहादियों द्वारा जन्नत पाने के लिए हलाल कर दिए गये व किएजा रहे हैं लेकिन भारत में जिहादी आतंकवादियों को शरण, सहायता वसहयोग देकर हिन्दुओं का कत्ल करवा रहे हैं। क्यों कि पाकिस्तान व बांगलादेश की तरह भारत में भी शासन हिन्दुविरोधी जिहाद समर्थकोंने किया और हिन्दुविरोधी कानून बनाकर हिन्दुओं को अपूर्णीय क्षति पहुँचाई ।आज भारत में ही जिहादी आतंकवाद जारी है देश के विभिन्न हिस्सों में जिहादियों द्वारा हिन्दुबहुल क्षेत्रों,मन्दिरों ,सेना ब पुलिस की गाड़ियों व कैंपों में बम्बविस्फोट कर हजारों हिन्दू मारे जा चुके हैं। इन जिहादियों द्वारा इतने निर्दोश हिन्दुओं का कत्ल कर देने के बावजूद जिहाद समर्थक सैकुलर हिन्दुविरोधी देशद्रोही गिरोह का जिहादियों को समर्थन आज भी जारी है ।

44 comments:

  1. जानकारियों से भरे तथ्यपूर्ण लेख के लिए आभार!

    ReplyDelete
  2. सही है...सार्थक विश्लेषात्मक आलेख.

    ReplyDelete
  3. आपकी बहुत सी बातों से मेरी सहमति मिथिलेश मगर ये क्षद्म धर्म निर्पेक्षियों को समाज में आये तब न ....
    और हाँ मेरी दिल्ली की गुपचुप यात्रा के पहले पार्ट में आप छाये हुए हैं

    ReplyDelete
  4. बहुत सही भाई कुछ कड़वाहट भी, कुछ जानकारी भी और कुछ अपने संस्कृति समाज और राजनित के नीतियों में होने वाले अनर्गल बदलाव पर प्रहार...सार्थक लेखन...

    ReplyDelete
  5. फिदा 'कलाकार' नहीं, 'नाटककार' है।

    ReplyDelete
  6. मिथिलेश जी ......इस बेबाक लेख के लिए बंधाई .....काफी जानकारियां भी हुईं ...और राजनीति क्या कहना भाई ...कुर्सी बचाने के लिए अपनी इज्ज़त भी नीलाम करने को तैयार रहेते है .

    ReplyDelete
  7. आज तो आप पूरी रौ में हैं मिथिलेश भाई.

    ReplyDelete
  8. यहाँ कुछ बातों से सहमत हूँ । तस्वीर वाली बात बहुत दुख दायी है कल ही किसी पोस्त पर देखी थी। मगर नेता कोई भी हो सब एक जैसे हैं। शुभकामनायें

    ReplyDelete
  9. फिदा को कलाकार कहना कला का अपना है, फिदा हुसैन वेश्यालय का दलाल है।

    ReplyDelete
  10. अगर आप कलाकार हैं तो अपनी माँ बहन की नंगी तस्विर बनाओं और दिखाओं अपने कला का जौहर सबको,


    मिथिलेश आप का विरोध हुसैन कि कला से हैं ना कि उनकी माँ बहिन से । कब तक मानसिक रूप से हम सब किसी कि माँ बहिन बीवी को उसकी "जागीर " मानते रहेगे । नारी का अपना क्या कोई स्थान नहीं हैं इस समाज मे क्या वो केवल किसी कि पतनी माँ बहिन ही हैं । सदियों से लोग जब किसी से नाराज होते हैं तो उसके आसपास के स्त्री संबंधो को गाली देते हैं क्यूँ ?? अगर हुसैन अपनी माँ बहिन कि नंगी तस्वीर बनाते हैं तो क्या उनका गुनाह कम होजाता हैं क्युकी उनकी माँ बहिन से हमारा कोई अपना नाता नहीं हैं ? क्या आप उन तस्वीरो को स्राहातेय क्युकी वो किसी मुस्लिम महिला कि हैं । जो गलती हुसैन ने कि उसकी भर्त्सना मे आप जो कर रहे हैं { और हमारा समाज जो सदियों से करता आ रहा हैं } वो भी कम नहीं हैं ।
    ये माँ बहिन बेटी कि गाली देना कब बंद होगा मिथिलेश , क्या इसको बंद करने के प्रति कोई सजगता आप जैसे युवा ला सकते हैं ? या आप भी उसी लीक उसी परिपाटी पर चलना चाहते हैं जिस पर पहले ना जाने कितने चल चुके हैं

    ReplyDelete
  11. यहाँ मैं रचना जी की टिप्पणी से पूरी तरह सहमत हूँ.... उनकी टिप्पणी को मेरी टिप्पणी माना जाए....

    ReplyDelete
  12. मुझे आश्चर्य है|किसी को भी नग्न चित्रित करना बुरी बात है, पर राजा रवि वर्मा ने मत्स्य गंधा {http://www.cyberkerala.com/rajaravivarma/rrvhtm38.htm} को नग्न चित्रित किया था| हाल ही में कांशी विश्व विद्यालय की एक महिला प्रोफ़ेसर ने कामायनी पर चित्र माला बनाई और मनु और श्रद्धा {http://mohallalive.com/2009/10/31/painting-of-uttama-dixit-on-jaishankar-prasad-kamayani/} के नग्न चित्र बनाये उन्हें किसी ने क्यों नही कुछ कहा ?

    महिलाओं की नग्नता मायने नही रखती अगर वह धर्म से सम्बंधित न हो ...एक दोगालापन यह भी है.

    ReplyDelete
  13. एक बार फिर सार्थक, तथ्यपूर्ण और विचारणीय आलेख. आपने हमें अपनी लेखन क्षमता का दीवाना बना दिया है.

    ReplyDelete
  14. @@@@आदरणींय रचना जी और महफूज अली जी

    आपने बिल्कुल सही कहा कि मेरा विरोध हुसैन के कलाकारी से है ना की उनकी माँ और बहन से , और मैंने ये कहीं भी कहा ही नहीं अपने लेख के दौरान, मैंने ऐसा जो कुछ भी लिखा वह इसलिए कि इस पर कुछ लोगो का मत और साथ हुसैन का खूद का मत है कि मैं कलाकार हूं , मेरे चित्र को कलाकार की तरह देखा जायें , तो बात उठनी वाजिब है ना कि अगर आप कलाकार हैं हि तो अपनी माँ बहन को भी इसी तरह से चित्रीत किजीए तो पता चले कि आप कितना निश्पक्ष कलाकार हैं । और मैंने जो कुछ भी लिखा है वह हिन्दुओं के साथ हो रहे अपमान के लिए लिखा है ना कि नारी को अपमानीत करने के लिए । और रही बात नारी अपमान कि तो कृपया आप मुझसे वह सब मत कहने पर मजबुर करिए जो मैं नहीं चाहता , अगर आपको नारी की इतनी चिंता है (यहां आपकी चिंता को आज के टिप्पणी के माध्यम से देख रहा हूँ) तो जरा उनको रोकिए जो खुलेआम हमारे और आपके सामने लगभल नग्न अवस्था में करिब हर फिल्मो में ही दिखा जाती है न्रित्य करते हुए , तब आपको नारी अपमान नहीं लगता जब उनकी पोस्टरे दिवारो में चिपकाई जाती हैं और लोग देखकर न जांने क्या-क्या कहते है, शायद ये आपको बताने की जरुरत नहीं है , ।

    ReplyDelete
  15. नारी का अपना स्थान है और गरिमा है शायद इसी लिये कलाकार उसमें अपनी कला तलाशते हैं। लेकिन फिदा हुसैन जैसे ठरकी के लिये नारी वही है जो उसकी पेंटिंग है और जिस ओर मिथिलेश इशारा कर रहे हैं। नग्न तस्वीर जिस उद्देश्य से हुसैन नें बनायी है वह हिन्दु महिला के लिये भी अपमान जन्य है और अगर मुस्लिम महिला की बनाता तो भी अपमान जन्य ही होती लेकिन उस की कला "सॉफ्ट टारगेट" पर बेस्ड है। दोगलापन यह है कि धर्म विशेष की महिलायें ही इस ठरकी को नग्न देखना भाता है और उसमें कला नजर आती है।

    ReplyDelete
  16. जहाँ तक मैं समझा हूँ मिथिलेश यह कहना चाहते है कि क्या आप अपनी माँ की ऐसी तस्वीर बना सकते हो? अगर नहीं तो दुसरों की आस्था से खिलवाड़ क्यों?

    कॉग्रेस सहित तमाम सेक्युलर हुसैन को लेकर मरे जा रहे है, रूशदी पर चुप क्यों है? तस्लिमा को तो देश से निकाल ही दिया है. कहाँ गई धर्मनिरपेक्षता?

    ReplyDelete
  17. मिथिलेश, यहाँ मेरा आपके पोस्ट के शीर्षक से ही विरोध है. इसीलिये मैंने ये लेख पूरा नहीं पढ़ा. आप ये बताइये कि मकबूल फ़िदा हुसैन की माँ-बहन क्या आपकी माँ-बहन नहीं हैं? मैंने आपसे पहले भी कहा है कि अगर आप नारी को पूज्य मानते हैं, तो आपको प्रत्येक नारी को सम्मान देना होगा.
    मैं इस संदर्भ में रचना और महफ़ूज़ दोनों की बात से सहमत हूँ.

    ReplyDelete
  18. रचना ने भी सही कहा है कि माँ और बहन सिर्फ माँ और बहन होती है, vah तेरी या मेरी भी हो तब भी वह आदर और स्नेह का प्रतीक है.
    मिथलेश इतिहास की पुनरावृत्ति कुछ सोचने पर मजबूर कर रही है. ये अब धर्म और जाति के आधार पर बन गए गुटों को नकारने की जरूरत है. ये युवा और प्रबुद्ध लोगों की सोच है और इसमें जब एक एक करके शामिल होंगे तो हुजूम बन जाएगा.
    इस नयी सोच के लिए हम सब प्रयास करें.

    ReplyDelete
  19. मिथिलेश भाई, कहाँ बीच में ही ब्लॉगिंग छोड़ने वगैरह की बात करने लगे थे… ऐसे ही आग उगलो… तुम्हारे जैसे हजारों युवाओं की जरूरत है… बेहतरीन लिखा…

    ReplyDelete
  20. mujhe ek baat samajh nhi aati ki hum kyun aaj bhi desh ko dharm aur jati ke naam par baant rahe hain .......itna sab kuch sah liya magar jo beej bad chuke hain shayad wo bahut gahre hain jo jitn anikaalne ki koshish karo utne hi gahre dab jate hain .........aapki post ne kafi logon ki aankhein kholi hongi phir bhi yahi kahungi ki jahan nari ki pooja hoti hai wahin devtaon ka vaas hota hai ........ye sab ab kitaabi soch hi rah gayi hai is par amal kahan hota hai.

    ReplyDelete
  21. मिथिलेश भाई आपने जो असंगठित कांग्रेसियों को एकजुट होने की बात कही है उस से पता चल रहा है के आपकी व्याकुलता समस्या को पहचानने तक ही सिमित नहीं रहना चाहती,उसका समाधान भी खोजना चाहती है!

    नारी के लिए जो कुछ "नारियो" की टिप्पणी आई है, जो ये कह रही है कि उनका भी एक अलग अस्तित्व है वो बताये कि बिना भाई के बहन का,बिना पति के पत्नी का और बिना बाप के बेटी का क्या अस्तित्व है!मै बस ये कहना चाह रहा हूँ के नारी और नर पूरक है एक दुसरे के!सबसे सम्माननीय है एक-दुसरे के लिए,किसी भी रूप में!ना नारी अकेली श्रेष्ठ हो सकती और ना ही नर अकेला!

    मुक्ति जी ने शायद संजय जी कि टिप्पणी नहीं पढ़ी,पढनी चाहिए!

    रचना जी की बात भी सही है कि गालिया गलत है और बहुत गलत है!इस विषय पर कुछ करने कि आवश्यकता है जरुर!

    मिथिलेश भाई को शुभकामनाए बढ़िया लेखन के लिए....

    सभी को होली कि बधाई भी साथ ही.........

    कुंवर जी,

    ReplyDelete
  22. माँ-बहन सबकी होती हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए,
    लेकिन यह बात क्या एम एफ़ हुसैन को नही पता?

    मिथलेश तुम्हारा गुस्सा जायज है।

    ReplyDelete
  23. कालिदास ने कुमारंसभवम में पार्वती को जिस तरह से श्रृंगारिक वर्णन किया है उसके बाद कालिदास को जला देने का प्रस्ताव कैसा रहेगा ? खजुराहो को डायनामाइट लगा के उड़ा दो। कोणार्क को जला दो।
    जिस निगाह से तुम अश्लीलता को देखते हो उसी निगाह से शिव(के)लिंग के साथ जो शेष आकृति जुड़ी होती है, उससे भी चरम अश्लील कुछ है तो बताओ?

    ReplyDelete
  24. http://mohallalive.com/2010/02/26/awesh-writeup-on-mf-husain-citizenship/

    ReplyDelete
  25. बहुत खूब दुबे जी , बहुत ही करारा प्रहार किया है आपने , मुझे समझ नहीं आता कि हुसैन जिंदा कैसे है अभी तक ।

    ReplyDelete
  26. जहां तक मां का सवाल है मैं रचना से शब्द-शब्द से सहमत हूं।
    लेकिन पेन्टर साहब को जो कृत्य है निंदनीय है सभी को उसकी निंदा करनी चाहिए
    किसी धर्म के खिलाफ किसी को भी बोलना-लिखना नहीं चाहिए ।

    ReplyDelete
  27. lalit sharma ji ki tippani se sahmat...use hi meri tippani bhi maan lia jaye.

    ReplyDelete
  28. ये गुस्सा एकदिन आग बन जाएगी और इसमें हुसैन जैसे लोग और इन कुत्तों को पालनेवाले कुत्तैल, ओट की राजनीति करनेवाले नेता (भारत के गद्दार) जलकर खाक हो जाएँगे........

    ReplyDelete
  29. मिथिलेश जी ,
    आप की लेखनी की आग से सत्य के अंगारे निकलते रहते है

    ReplyDelete
  30. Sahi tathyo ke sath ek sarthak aalekh ....Aapko bahut bahut dhanywad!

    ReplyDelete
  31. मिथिलेश जी ,
    बहुत सुंदर लेख लिखा आप ने आप के भाव भी अच्छॆ है, ओर अपने दिल के भाव दिखाने के लिये आप ने कुछ गलत नही लिखा, ओर ना ही नारी का अपमान किया है, दिल जलता है जब यह सब हम देखते है.
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  32. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  33. upar waale comment box mein aadha ki comment aaya tha isliye delete karna pada...

    मिथिलेश बहुत सार्थक आलेख..
    लोग हर बात में स्त्री-पुरुष पर क्यूँ ले आते हैं...बेवजह की नग्नता स्त्री की हो या पुरुष की...भोंडी ही लगती है....
    अगर माँ बच्चे को दूध पिला रही है तो शायद...उसे नग्न नहीं माना जाएगा...
    यहाँ हम जिस नग्नता की बात कर रहे हैं वो बेवजह की नग्नता है और निःसंदेह धार्मिक भावनाओं पर प्रहार करने के उद्देश्य से हुई है ...
    कला अभिव्यक्ति का माध्यम ज़रूर है लेकिन कलाकार को दोहरा मापदंड नहीं लेकर चलना चाहिए....अगर कलाकार की कूची नग्न सरस्वती बना सकती है तो फिर नग्न फातिमा क्यूँ नहीं....??
    ऐसा भी नहीं है कि नग्नता हमेशा बुरी ही होती है...कभी यह वात्सल्य का प्रतीक होती है कभी गरीबी की और कभी कला की ...
    कलाकार के लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है की उसने कौन सा विषयवस्तु चुना है ?? मात्र अपने अहम् की तुष्टि या अपनी भड़ास निकालने के लिए कला के नाम पर भावनाओं को छत-विछत करना सही नहीं है...
    कलाकार बहुत जिम्मेदार व्यक्ति होता है...उसकी कला समाज का दर्पण होता है...लोगों की मान्यताओं का आईना होता है...यह काम हर कलाक्कर को बहुत जिम्मेवारी के साथ निभाना चाहिए...फिर वो पेंटिंग हो या लेखन...
    नारी को हर बार अलग निकाल कर खड़ा करना ऐसा ही है जैसे कपडे से आड़े या पड़े किसी एक धागे के समूह को निकाल देना...याद रखिये समाज एक कपडे की तरह है और इसकी बुनाई के लिए आड़े धागे भी उतने ही ज़रूरी हैं जितने पड़े धागे...####################
    जहाँ तक नारी को गाली देने का प्रश्न उठता है ...तो मैं उसे इस तरह लेती हूँ...नारी को हमेशा ही घर का स्वाभिमान और सम्मान माना गया है..जब भी नारी को गाली दी जाती है तो यह एक symbol की तरह व्योव्हारित होता है...जिसका उपयोग करके किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश की जाती है...और कोई भी पुरुष ख़ुद के अपमान से उतना नहीं तिलमिलाता जितना की उसके माँ-बहन या पत्नी-बेटी के अपमान से तिलमिलाता है...यह उनका प्रेम ही तो है...
    बहुत अच्छा लिखा है तुमने मिथिलेश...
    ..दीदी

    ReplyDelete
  34. @Anonymous ji...

    manu aur shraddha ko aap adam aur eve ki jagah par rakh sakte hain...unki tasveer jab bhi koi banayega...nagn hi banayega...jis tarh ki adam aur eve ki...ye to aap aam ki tulna apple se kar rahe hain...isliye ise to aap rehne hi dijiye..

    ReplyDelete
  35. Anonymous said...

    कालिदास ने कुमारंसभवम में पार्वती को जिस तरह से श्रृंगारिक वर्णन किया है उसके बाद कालिदास को जला देने का प्रस्ताव कैसा रहेगा ? खजुराहो को डायनामाइट लगा के उड़ा दो। कोणार्क को जला दो। जिस निगाह से तुम अश्लीलता को देखते हो उसी निगाह से शिव(के)लिंग के साथ जो शेष आकृति जुड़ी होती है, उससे भी चरम अश्लील कुछ है तो बताओ?



    खजुराहो और कोणार्क की मूर्तियों की तुलना आप हुसैन की पेंटिंग्स से नहीं कर सकते...
    सबसे बड़ी बात ...ये मूर्तियाँ देवी-देवताओं की नहीं हैं...
    दूसरी बात ये मूर्तियाँ ...कुछ मुद्राओं को अवश्य दिखाती हैं लेकिन उनको दिखाने का अवचित्य ...उनकी पवित्रता को बरकरार रखते हुए ...श्रृष्टि को आगे ले जाना है...
    मैंने पहले भी अपने कमेन्ट में कहा है ...कलाकार के लिए बहुत आवश्यक की वह सही विषय वस्तु का चुनाव करे...नग्नता से कोई परहेज नहीं कर रहा है यहाँ... परहेज है आप किसे नग्न दिखा रहे हैं...और क्या यह दिखाना इतना ज़रूरी है...???
    मसलन भारत माँ, सरस्वती, पार्वती, दुर्गा,
    सिर्फ़ नग्नता ही क्यूँ..? गाँधी जी की गर्दन उड़ाने का मकसद क्या है...क्यूँ नहीं हिटलर की गर्दन...??
    इन सारी तस्वीरों से हुसैन के विकृत मानसिकता का ही अंदेशा होता है...और कुछ नहीं...
    आप शिव लिंग की ही बात क्यूँ करते हैं...बाइबल का ओल्ड टेस्टामेंट पढ़िए...आपको सिवाय सेक्स के और कुछ भी नहीं मिलेगा....सभी धर्म इस विषय को छूते हैं..आप दुनिया का कोई भी धर्म उठा कर देख लीजिये...और हो भी क्यूँ नहीं श्रृष्टि देवी-देवताओं से नहीं इंसानों से चलती है....
    लेकिन फिर भी एक अनुशासन और अभिव्यक्ति की सीमा का निर्धारण आवश्यक है...

    ReplyDelete
  36. संजय जी की बात बिल्कुल सही है...

    बाकी का काम अदा जी ने पूरा कर दिया है..एनायमत को भी सही जवाब दिया है.....अदा जी की टिप्पणी को को मेरा पूरा समर्थन है....इसके आंगे कुछ कहना बेमानी है..और अगर कोई अब भी बात का मतलब न समझे तो सिरे से मूर्ख ही कहा जाएगा......इसे दो गज जमीन मुझे नहीं लगता कि अपने वतन में मिलने वाली है....

    ReplyDelete
  37. धार्मिक भावनायों को ठेस नहीं पन्हुचानी चाहिए , ऐसा कार्य अक्सर ओछे लोग , कम समय में मूर्खों के मध्य सस्ती लोकप्रियता प्राप्त करने के लिए करते हैं ! फिर वह कोई क्यों न हो निंदनीय है मिथिलेश !

    ReplyDelete
  38. Badahi sashakt aalekh hai!
    Holi mubarak ho!

    ReplyDelete
  39. होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।।

    ReplyDelete
  40. अदा जी की पहली टिप्पणी के अंतिम पैराग्राफ में लाख टके की बात है.
    तमाम 'तथाकथित' नारीवादियों को इसे जरूर पढ़ना चाहिए.

    अदा जी से एक आग्रह है की यदि संभव हो 'क्षद्म नारीवाद' के ऊपर वो एक लेख लिखें तो इस विषय से जुडी बहुत सी भ्रांतियों से पर्दा हटेगा साथ ही 'वास्तविक नारीवाद' को समझने में भी मदद मिलेगी.

    ReplyDelete
  41. मिथिलेश जी की बातों से सहमत हूँ हुसैन को नग्न चित्र बनाने के लिये हिन्दू देवी-देवता ही क्यों मिलते हैं वे अपने धर्म के आराध्यों के नग्न चित्र बनाकर अपनी कला क्यों नहीं दिखाते? यदि वे ऐसा करें तो हम देखना चाहेंगे कि ये कथित बुद्धिजीवी तब भी उनका साथ देते हैं क्या?

    और हाँ हुसैन झूठे हैं कि कतर में उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी मिल गई है जरा कतरवासियों के आराध्यों के नग्न चित्र बनाकर देखें कि वहाँ उन्हें कितनी अभिव्यक्ति की आजादी मिलती है।

    ये लेख अवश्य पढें - मुगालते में न रहें मकबूल फिदा हुसैन!

    ReplyDelete
  42. mera naam mahesh jha hai aur main brahmin parivar se hu main apna parichay nahi dena cahta par naam ke sath apni mansikta batana cahta hu . aaj bahour sari mata aur bahne nari shakti ki baat karti hai par nari shakti kaisi ho 1) maa aur pitaji ko pooche bina aazadi 2)mahila kooch bhi kare usme kisi ki dakhal andazi nahi 3)mahila aarashan cahe uske percentage ladko se kum ho aur ability kum ho 4)mahila ko police,army aur airforce mai laina taki jitna saririk mehnat purush kare us se kum ya koi terror bum uda de to mahila police kya karegi kya jitne takat se purush kam kar sakte hai kya utna hi kam mahila kar sakti hai 5) mahila aur purush ko barabar paise kyo jabki ek purush kisi bhi mahila ke 3 guna jayda kam karte hai 5) pachimi fashion apnana aur befikra hokar ghumna cahe unke sath kuch bhi bura ho jaye ................. kisi ek ne kaha hum kab tak jati, dharam ke naam par ladenge mera uttar hai jab tak aap apni jati aur dharam ko certificate main likhna nahi chodte hai6) jab aarashan lena ho to mahila hu ya koi sc caste hu par jab caste aur religon ki baat chale to use bura bhala kehna galat hai agar aap khud mahila aarashan aur caste aarashan na le tum hum mane ki aap main manvta hai ya aarashan ke paise mile to jaroorat mand ko de kitne hi aise brahmin hai jo 75-85 % lakar bhi admission nahi milta .......... MITHILESJ JI MAIN AAPKA ABHARI AUR PRASANSAK HU AAP LIKHE .......... JAI HIND JAI BHARAT

    ReplyDelete
  43. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  44. किसी को भी किसी की भावनाएं आहत करने का अधिकार नहीं है।

    ReplyDelete

आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।