Sunday, February 28, 2010

ये कैसा खुशियों का त्योहार है माँ----------------मिथिलेश दुबे

माँ आज तेरी याद बहुत आ रही है...
हाँ पता है कि कोई त्योहार है आज....
लेकिन माँ मुझे कोई नहीं कह रहा........
कि तुम अच्छे और नयें कपड़े पहन........
ही निकलना घर से,
माँ तू तो जानती है ना कि........
ज्यादा भिगने से मेरी तबियत खराब हो जाया करती...........
लेकिन माँ देख ना मुझे कोई मना नहीं कर रहा........
माँ सब कहते है कि त्योहार खुशियां लेकर आता है.........
लेकिन ये कैसा त्योहार........
माँ जहाँ तू ही नहीं,
मेरी तो हर खुशी तुझसे ही है माँ........
अभी फोन पर तुझसे ही बात किया.......
कह रही हो कि गुझियाँ बनाकर खा लेना......
कैसे खाँ लूंगा माँ,
कैसे लाऊंगा वो हाथ.......
जो अब तक हर बार ही खिलाया करते थे.......
कैसे लाऊंगा वो प्यार......
जो मुझसे तू करती थी....
जब भी मैं मेरे तेरे पास होता था,
तुझे याद है माँ जब..........
पिछली बार मै घर से आते हुए रोया था......
तब तो तू भी मेरे साथ रोयी थी........
लेकिन देख ना आज.........
ये कैसा खुशियों का त्योहार है........
जहाँ मैं रो भी रहा हूँ तो इस बन्द कमरे में.........
लेकिन तू नहीं है माँ.........
माँ आज तेरी याद बहुत आ रही है

48 comments:

  1. sach tyohar me ghar se dur apano ki yaad kese rulajati hai khub jaanti hun ....!!bhavmayi abhivyakti.
    Auntiji se gujiya banane wale do haath mangwane ka idea hai bhai emotional ho jaaengi mataji bahu dhundhengi jaldi hi ladale ka dhyan rakhane wali ;) bura na mano holi hai...!!

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  2. kyon rulate ho yaar.. varh-varh ke din..
    इस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
    ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
    लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
    कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
    के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
    ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
    इस बार.. ऐसा रंग लगाना...
    (और आज पहली बार ब्लॉग पर बुला रहा हूँ.. शायद आपकी भी टांग खींची हो मैंने होली में..)

    होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...

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  3. बहुत भावनापूर्ण!!
    होली पर ढेरों शुभकामनाएँ!!!

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  4. होली में घर से..माँ से दूर रहकर कोई कैसे खुश रह सकता है. मगर ये आपने क्या किया! माँ ने पढ़ लिया तो और भी दुखी होंगी..यह तो अच्छी बात नहीं.

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  5. Oh !! It's alright my friend.Don't let "homesickness" take a toll on your nerves.
    Anyway,I can feel the pang of separation from your mother.Do feel the pain.I will not stop you from shedding few tears.After having done that ,open the door and become the part of any group of children-the bachha prty- playing colours.Be the part of their celebration.And if you feel like eating ghujiya pack your bag and land at my home.I will serve you ghujiya :-))
    Anyway, U made me remember the song written by Prasoon Joshi.

    Yours sincerely,
    Arvind K.Pandey

    http://indowaves.instablogs.com/

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  6. तो बिटवा को माँ की याद आ रही है। अरे अच्छे बच्चे तौहार के दिन नही रोते। माँ को इस से भी दुख होगा चलो आँखें पोंछो और सब को रंग लगाओ--- होली की हार्दिक शुभकामनायें आशीर्वाद

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  7. क्या भाई रुलांने का मन है , भाई बात तो सच है जब तक घर पर ना हो तब कोई भी त्योहार अच्छा नहीं लगता । आपको भी होली की बहुत-बहुत बधाई ।

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  8. बहुत भावपूर्ण रचना....घर से दूर रहने वाले बच्चों को त्योहारों पर तो घर की याद सताती ही है...आपने बखूबी अपनी भावनाएं पिरो दी हैं इस रचना में....बहुत खूब

    होली की शुभकामनायें

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  9. mithilesh beta
    are rote kyun ho ------yahan tumhein kitni sari maaon ka pyar mil raha hai .......achche bachche sirf rangon se khela karte hain aur jam kar holi manate hain .......maa kabhi bhi dil se door thode hoti hai...........holi ki hardik shubhkamnayein.

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  10. होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाये और ढेरो बधाई ...

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  11. अरे भाई डूब जाओ रंगों में, भूल जाओ दु:ख. होली मुबारक.

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  12. Dukhi mat ho...is bar dosto k sath sahi...
    khush raho....

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  13. त्‍यौहारो मे घर की याद बहुत सताती है, बहुत बेकार लगता है घर से दूरी

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  14. मिथि बाबू, माँ की महिमा अपरमपार है
    आपकी कविता से हमें भी एक माँ पर लिखी कविता याद आ गय़ी
    मेरी माँ.....
    मेरी प्रेरणा....मेरी आधारशिला....मेरी तपस्या
    मेरी जननी....मेरी माँ

    मेरी माँ...
    मेरी सोच...मेरी कहानी....मेरी विचारशक्ति....
    मेरी जननी....मेरी माँ

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  15. अरे जिन की मां ही नही उन से पूछो भाई, बहुत भावुक कविता लिखी, लेकिन दुनिया के संग चलना पडता है, ओर अपने कर्तब्या भी निभाने पडते है, चलो अब उदासी को छोडो, तुम्हारे संग संग मां भी उदासी छोड देगी, वो कही भी हो उसे सब पता चल जाता है, ओर होली खेलो

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  16. होली की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई !!

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  17. होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  18. आपकी कविता बहुत भावपूर्ण है। होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  19. भावुक करने वाली रचना.
    होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

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  20. आपको और आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

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  21. aapki rachna ne aankhe nam kar di. maa ko pranaam.maa aisi hi hoti hai bhai.

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  22. बहुत भावपूर्ण कविता है ....... दिल को छूती हुई ....
    आपको और समस्त परिवार को होली की शुभ-कामनाएँ .....

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  23. "भावुक कविता है और ये मैं गुझिया खाते-खाते लिख रहा हूँ अपने नहीं तुम्हारे हिस्से की होली की ढेर सारी शुभकामनाएँ भाई......."

    प्रणव सक्सैना
    amitraghat.blogspot.com

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  24. बहुत भावनापूर्ण!!
    होली पर ढेरों शुभकामनाएँ!!!

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  25. हंस तू हर दम,
    खुशियां हो या गम,
    किसी से लड़ना नहीं,
    किसी से डरना नहीं,
    हंस तू हर दम...

    जय हिंद...

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  26. ओह मिथिलेश भाई ...ये क्या यार तुमने तो मुझे दुखी कर दिया ...सच कहा कि पर्व त्यौहार पर मां बहुत याद आती है......
    अजय कुमार झा

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  27. मिथिलेश जी , इतनी भावुकता ....??
    इतना प्यार करने वाले बच्चे ....वो माँ तो नसीबों वाली ही होगी ......!!
    आपको गुझिया बनानी आती है क्या ....माँ ने कहा तो आती ही होगी ...है न .....??

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  28. खुद की सेवा की अब भी न चिंता न परवा करती
    बेटे ने खाना खाया क्या पूछा करती मेरी माँ
    बहुत भावपूर्ण लिखा है...भिगो देनेवाला.
    होली की शुभकामनाएं !

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  29. आपको सपरिवार शुभकामनायें मिथिलेश !

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  30. बहुत भावपूर्ण लिखा है .. सचमुच मां प्‍यार भी उतना ही करती है .. और बच्‍चें के भविष्‍य को देखते हुए उसे अकेला छोड भी देती है .. होली की बहुत शुभकामनाएं !!

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  31. बहुत ही भावनापूर्ण रचना...
    सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!

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  32. रंगों का त्योहार मुबारक हो।
    खुशियों की फुहार मुबारक हो।

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  33. अले...लेले... मत लो बेते...
    माँ ने पाल-पोस कर इसीलिए बड़ा कर दिया था क्या कि बार-बार उदासी की बातें लिखा करो? यह सब पढ़कर तो माँ पक्का रो पड़ेगी। ये आपने क्या कर डाला?

    माँ की याद में खुब रंग खेलें लेकिन थोड़ा बचाकर। वह सुनेगी तो खुश हो जाएगी। :)

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  34. अरे भाई, तो घर चले जाते. तुमने भी रुलाना शुरू कर दिया.
    और वो भी होली के दिन...
    चलो अब आँसू पोछो !!! होली मनाओ. शुभकामनाएँ !!!

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  35. मिथिलेश भाई रुलाकर ही माने आज..

    बहुत ही भावुक हो और हम पाठक भी न बस ऐसा लगा कि जैसे आप अपनी माँ से नहीं हम हमारी माँ से कह रहे हैं

    दुबे जी खुश हो, और झट से अपनी पिचकारी लेकर अपने स्नेहरंग से सबको सारोबार कर दो, होली की शुभकामनाएँ।

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  36. आपको सपरिवार होली की ढेरो बधाईयाँ और शुभकामनाएँ

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  37. yuva mann me bhaari uchhah hai,
    holi ke bahaane ,hamaari nigaah hai.....

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  38. भाई आपने रुला दिया..अत्यंत मार्मिक प्रस्तुति....

    होली की मुबारक बाद...

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  39. bahut sanjidgi se likha hai..

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  40. माँ तूने मोहे बहुत रुलायो। भावनाओं से ओत-प्रोत। अब कुछ कहते नहीं बन रहा।

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  41. मिथलेश भाई
    सव्यसाची की यादें ताज़ा कर दीं आपने

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  42. अच्छे बच्चे न रोते हैं , न दूसरों को रुलाते हैं। फिर तुम तो अब बच्चे नहीं रहे बेटा।
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना।

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  43. Maaf kijiyga kai dino busy hone ke kaaran blog par nahi aa skaa

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  44. बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.

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  45. अगर आज माँ होती, तो खुशी दुगुनी होती। खुशी खुशी न रहकर एक खुशियों का समद्र हो जाती, जैसे एक बूंद समुद्र में गिरकर बूँद न रह जाती है, वो समद्र हो जाती है। मन को झिंझोड़कर रख दिया मित्र।

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