Tuesday, March 2, 2010

आ चले कहीं दूर इन सब रिश्तो से अलग---------------मिथिलेश दुबे


...आ चले कही दूर....इन सब रिश्तो से अलग....
...एक नया रिश्ता बनाये...दूरियां गुम हो जाये...सारे बंधन तोड़ हम एक हो जाये

.....आ सनम चल मेरे संग....इन सब मौसमो से अलग
....एक नया मौसम लाये....मोहब्बत की बारिस में बस भीगते जाये....रास्तो पर संग फिसलते जाये

....आ मेरे हमदम मिल मुझ में....इन सब रंगों से अलग...
....एक नया रंग आसमा पर फैलाये....रंग जिससे इन्द्रदनुष की रंगत बदल जाये

.....आ मेरी हसरतो की तस्वीर....इन सब तस्वीरों से अलग...
....एक नयी तस्वीर मोहब्बत की बनाये....हर दास्ताँ मोहब्बत की वहां मिल जाये

....आ मेरे गीतों की मल्लिका.....इन सब गीतों से अलग....
....एक नया गीत हम गुनगुनाये....संसार का कतरा कतरा जिसमे खो जाये

....आ मेरी मुहब्बत की सुबह....इन सब सुबहो से अलग...
....एक नयी सुबह में हम जग जाये...एक दुसरे के जीने की वजह बन जाये

....आ मेरे इश्क की शाम....इन सब शामो से अलग...
....एक नयी सतरंगी शाम बन जाये ....जहाँ से सूरज भी डूबने के लिए इतराए

....आ मेरे दिल की धड़कन....इन सब धडकनों से अलग....
...एक नयी धड़कन बन दिलो में धड़क जाये....सारे जहां को मोहब्बत करना सिखलाये...

....आ मेरे रब मेरे खुदा ....इन सब दुआओं से अलग....
...एक नयी दुआ बन जाये.....जिसकी महक से खुदा भी नशे में आ जाये...

36 comments:

  1. बड़े रूमानी हो रहे हैं मिथिलेश जी क्या बात है ? ऐसा फिजाओं में क्या कुछ नया है आज ?
    वे तो कोई परदेशन सी लगे है -भूल गए क्या ? परदेशियों से न .....

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  2. Waah! Waah! Waah!
    Behad dilkash bhavanae aur khubsurat andaze bayan ...bahut bahut badhai is pyar me dubi pyari abhivyakti par!!

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  3. पुरा फ़ागुन का असर है-फ़गुनिया गए हो,
    मौसम ही कुछ ऐसा है-खुब असर कर रहा है।

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  4. बहुत सुंदर लगी आप की यह रचना,लगता है भांग का कुछ असर अभी है

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  5. शायद भांग का असर नहीं , उम्र का असर है।
    लेकिन है सुन्दर रचना।

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  6. ye kalam ka rang pehli baar dekha...acchha laga..mithi mithi gazel ki tareh. badhayi.

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  7. वाह, बहुत खूब. बड़ी रूमानियत भरी कविता लिखी है. लगता है कि फागुनी हवा लग गयी है.

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  8. poem kafi acchi likh lete ho........wah.........

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  9. ....आ मेरे दिल की धड़कन....इन सब धडकनों से अलग....
    ...एक नयी धड़कन बन दिलो में धड़क जाये....सारे जहां को मोहब्बत करना सिखलाये...

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  10. सोने से पहले अगर सोचते हैं तो अच्‍छा सोचते हैं।

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  11. प्रेमरस में भीगी रचना...माधुर्य बरसा रही है....बहुत खूब

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  12. ...एक नयी दुआ बन जाये.....जिसकी महक से खुदा भी नशे में आ जाये...इसे कहते है एक्स्ट्रीम.......

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  13. बहुत ही सुन्दर सी कविता.....
    आभार्!

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  14. "जिसकी महक से खुदा भी नशे मे आ जाये"
    बेहद रुमानी कृतित्व। शुभ कामनाएं

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  15. भाई ई हम सब को पढ़वा ही रहें है या किसी को भेज भी चुके है...जिसके लिए भी लिखे हो ये तो पता नही पर बहुत सुंदर रचना...बेहतरीन अभिव्यक्ति..

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  16. वाह भाई मिथलेश...यह रंग भी बढ़िया रहा!

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  17. वाह क्या बात है। फाल्गुन के रंग नज़र आ रहे हैं आज तो। कविता पढ कर मै तो बाजे वाले को साई दे आयी हूँ और बाकी के प्रबन्ध भी शुरू कर दिये हैं। पंडित वत्स जी से तारीख पख्खी करवा लेती हूँ ।
    आ मेरे रब मेरे खुदा ....इन सब दुआओं से अलग....
    ...एक नयी दुआ बन जाये.....जिसकी महक से खुदा भी नशे में आ जाये...
    अरे यहाँ तो मैं नशे मे आ कर बेटे की शादी का सपना देख रही हूँ। बहुत बहुत अच्छी लगी रचना। बधाई और आशीर्वाद्

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  18. क्या बात है मिथिलेश बाबू! इस कदर रंग चढा है क्या रूमानियत का या फ़िर होली है!बहुत बढिया!

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  19. ...आ चले कही दूर....इन सब रिश्तो से अलग....
    ...एक नया रिश्ता बनाये...दूरियां गुम हो जाये...सारे बंधन तोड़ हम एक हो जाये.
    क्या बात है मिथिलेश .बहुत बढिया!बधाई और आशीर्वाद्

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  20. बहुत सुंदर लगी आप की यह रचना,लगता है भांग का कुछ असर अभी है

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  21. बहुत ही दिलकश भावनाओं के साथ..... लाजवाब व सुंदर रचना....

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  22. बहुत अच्छी रचना है ......शुभकामनाएँ !!

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  23. बहुत सुन्दर रचना । बधाई हो ।

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  24. यार दुबे........
    मैंने पहले भी कहा था की इस उम्र पर इतना प्रयोगधर्मी हो गए हो.....आगे क्या करोगे. भविष्य देख रहा हूँ कुछ अनोखा करोगे जरूर. अच्छी रचना के लिया आपको बधाई.....

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  25. मिथलेश भाई बधाई हो,बहुत सुंदर रचना है

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  26. oh ho ho holi ka asar sar chadd kar bol raha hai lagta hai :) bahut sunder abhivyakti hai.

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  27. हमें ऐसे ही बेवकूफ बनाते रहोंगे कि निमंत्रण-पत्र भी भेजोगे? खाली सब्‍जबाग दिखा रहे हो कि मैंने कोई पसन्‍द कर ली है। यह हुई न उम्र वाली कविता। हमें भी तो लगना चाहिए कि कोई युवा भी हमारे साथ है। बधाई।

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  28. ab is nazm ke liye kya kahun.........sari kayanat sama gayi hai...........vaise us jalwa-e-noor ka naam kya hai ye jaroor bata dena..........bas usi ke naam ki kami rah gayi baki to har rang maujood hai.

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  29. acchhi rachna......iss tarah se man ki bhavnaon ko vyakt karne ka gur kisi-kisi me hi hota hai....padhkar acchha laga...

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  30. Accha to ii halat hui hai...are us din to tum theek thaak the ...aisa kab ho gaya mera butru..
    are bahut sundar likha hai...likhte raho..
    haan nahi to..!

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  31. MITHILESH BHAI....HUM TO COMMENTS PADH PADH KAR HI SAHEED HO GAYE....BHAUT MAJA BHI AA RAHA HEI....BAHUT BADHIYA LAGA.....AB KAA KAHE.....KYUN BADHIYA LAGA.....KOI SAMAJH NAHI SAKTA YAHAN PAR...KI KYUN BADHIYA LAGA......

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  32. बहुत बढ़िया दुबेजी, क्या बात है, आज तो वाकई रुमानियत में हैं और बिल्कुल डुबो दिये हो, क्या बात है...

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  33. चल मेरे साथ ही चल, ए मेरी जाने ग़ज़ल
    इन समाजों के बनाए हुवे बंधन से निकल ..... चल ..

    आपको पढ़ कर ये ग़ज़ल याद आ गयी ... हुसैन बंधुओं की ..

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