Monday, March 29, 2010

कितना कारगर साबित होगा सेक्स एजुकेशन----------मिथिलेश दुबे

एचआईवी, यौन शोषण आदि से बच्चे कैसे बचें? जागरुकता लाने के प्रयास के तहत संयुक्त राष्ट्र के शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन ने यौन शिक्षा पर नए दिश-निर्देश जारी किए हैं। यौन शिक्षा पर बनाए गए अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश के तहत शिक्षक छात्रों को बताएंगे कि वे कैसे यौन शोषण, अनचाहे गर्भधारण और एचआईवी तथा यौन संचालित संक्रमण से बचें।इससे छात्रों में सेक्स संबंधी किसी तरह की भ्रांति नहीं रहेगी। हाँ जी ये कहना है भारत सरकार का जो की पश्चिम देशो के तर्ज पर भारत मे भी लागु करना चाहती है "यौन शिक्षा" (सेक्स एजुकेशन)।
देश की अधिकांश आबादी गांवों में निवास करती है और जिसका सामाजिक-सांस्कृतिक ताना-बाना कुछ विशेष तरह का होता है। इस कारण जहां खुलेआम सेक्स का नाम भी लेना गुनाह समझा जाता है। ऐसे में भारत में यौन शिक्षा कितना कारगर साबित होगा सोचने वाली बात होगी। अब अगर ऐसे जगहों पर इस शिक्षा की बात होगी तो विवाद तो होना ही है।
यौन शिक्षा के नमूने, खासकर सचित्र किताबों ने तूफान खड़ा कर रखा है। कई राज्यों की सरकारें, सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाएं और राजनीतिक व गैर राजनीतिक संगठन इस पर आपत्ति उठा रही हैं। परंतु दूसरी ओर इसके समर्थकों का मानना है कि इस विषय को प्रतिबंधित न किया जाए। हां, यौन शिक्षा संबंधी सामग्री संतुलित होनी चाहिए। न तो इसमे एकदम खुलापन हो और न ही इसे बिल्कुल खत्म कर दिया जाए। यह कहना कि बच्चों को यौन शिक्षा देने की आवश्यकता नहीं है एकदम बेहूदा तर्क है। सर्वेक्षण से पता चला है कि किशोर उम्र के लड़के कभी-कभी यौन संबंध कायम कर ही लेते हैं। भारत में प्रसूति के कुल मामलों में 15 प्रतिशत किशोर उम्र की लड़कियां शामिल होती हैं।


देश में इस समय 52 लाख लोग एचआईवी से पीडि़त हैं, जिनमे 57 फीसदी मामले ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। एड्स नियंत्रण का दायित्व संभालने वाला राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) कई राज्यों की आपत्ति के चलते स्कूलों में उपलब्ध कराई जाने वाली यौन शिक्षा सामग्री की समीक्षा करने को तैयार है। नाको का मानना है कि सेक्स की शिक्षा के लिए सचित्र किताबे वरिष्‍ठ शिक्षकों के लिए हैं। वह इनसे जानकारी हासिल कर बच्चों को समझाएंगे। उसका मानना है कि इस सामग्री से किशोरो को शरीर और शारीरिक परिवर्तनों के बारे में आधारभूत सूचना मिलती है। यदि बच्चों को यौन शिक्षा नहीं दी जाए तो वे गलत फैसला ले सकते हैं जिससे उनके भविष्य और स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ सकता है। इसके विपरीत स्कूली बच्चों को यौन शिक्षा के विचार के विरोधियों का तर्क है कि इससे लोगों की सांस्कृतिक संवेदना को चोट पहुंचती है। इस सरकारी फैसले के पीछे विदेशी हाथ है। उनका मानना है कि इससे उल्‍टे अनैतिक सेक्स को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी कंपनियों के सूत्र वाक्य 'कुछ भी करो, कंडोम का इस्तेमाल करो' से उनकी मंशा स्पष्ट है। सुरक्षित सेक्स का ज्ञान देकर कोमल व किशोर वय के लड़के-लड़कियों को देह-व्यापार के पेशे में उतारे जाने की आशंका जताई जा रही है। बैकाक और थाईलैड की तरह भारत को भी सेक्स टूरिज्म के बड़े बाजार के रूप में विकसित करने की विदेशी चाल के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। एक संगठन ने तो इसके खिलाफ एक किताब 'रेड एलर्ट' छापी है। कुल मिलाकर स्कूलों में बच्चों को यौन शिक्षा की नहीं बल्कि अच्छी जीवनशैली से अवगत कराने की जरूरत है। दूसरी ओर अब सवाल उठता है कि स्कूली बच्चों के लिए, जिसका कि दिमाग एक कोरे कागज के समान होता है, यौन शिक्षा एक गंभीर विषय है। ऐसे में जल्दबाजी में उठाया गया कोई भी कदम समाज और राष्ट्र के लिए घातक साबित हो सकता है। क्या इसके बदले में किशोरो को एचआईवी एड्स, नशीले पदार्थ की लत आदि के बारे में समुचित जानकारी देकर उनको मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए तैयार करना ज्यादा उचित नहीं होगा?


लेकिन अब भी हमारे यहाँ के प्रगतिवादी लोग इस शिक्षा के पक्ष में हैं न जानें क्यों। उनका कहना है कि इस शिक्षा से सेक्स अपराध रुकेगें तथा बच्चे सेक्स के प्रति जागरुक होगें। जहाँ तक मुझे लगता ऐसे लोग जो भी कहते है वह बेबुनियाद है। पश्चिमी देशों मे लगभग हर जगह यह शिक्षा मान्य है, तो वहाँ क्या होता है, यह किसी से छिपा नहीं है। अगर अकेले ब्रिटेन को ही देखा जाये तो वहाँ की हालत क्या है इस शिक्षा के बावजुद बेहद शर्मसार करने वाली जो की हमारे समाज में बहुत बडा अपराध माना जाता है। वहाँ की लडकियाँ शादि से पहले ही किशोरावस्था मे माँ बन जाती है। कम उम्र में मां बनने वाली लड़कियों के मामले में ब्रिटेन, पश्चिमी यूरोप में सबसे आगे है। संडे टेलिग्राफ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में गर्भपात के बावजूद स्कूल जाने वाली लड़कियों में गर्भधारण की संख्या तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट के हवाले से अखबार ने लिखा है कि हर साल 18 साल से कम उम्र की लगभग 50,000 लड़कियां गर्भवती हो जाती हैं।अगर यौन शिक्षा से ये सब होता है तो क्या इसे हमें मान्यता देनी चाहिए।
इस तरह ब्रिटिश सरकार ने पहली बार यह माना है कि यौन शिक्षा कम उम्र की लड़कियों में गर्भधारण पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। अब बताईये ऐसी शिक्षा की क्या जरुरत है हमारे समाज को। हमारी सरकार हमेशा से पश्चिमी देशो के परिवेश को अपनाना चाहती है लेकिन क्यों। वहाँ के बच्चो को शुरु से ही यौन शिक्षा दि जाती है तो परिणाम क्या है हम सब जानते है।

23 comments:

  1. behad jaakari parak post hai......sawaal hai ki koun iski parwah karata hai ....

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  2. भारत में परिवार संस्‍था ही सारी शिक्षा की केन्‍द्र रही है। जब तक हमारे यहाँ परिवार व्‍यवस्‍था सुदृढ़ थी तब तक समाज अनैतिकता से बचा हुआ था। लेकिन आज परिवार के स्‍थान पर बाजार आ गया है। उपभोक्‍ता तलाश किए जा रहे हैं। भोगवाद को विकसित किया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि विवाह संस्‍था पर आघात हो रहा है। तुम्‍हारी बात से शत प्रतिशत सहमत हूँ। ये कितने भी बाजारवाद को बढ़ाने के लिए प्रयोग कर लें लेकिन उसके परिणाम विध्‍वंसकारी ही होंगे। अन्‍त में हमें पुन: परिवार व्‍यवस्‍था पर ही आना पड़ेगा। अभी जो पाठृयक्रम आया है वह शिक्षा नहीं है अपितु व्‍यभिचार बच्‍चों में भी कैसे विकसित करे उसका प्रयोग है। पुस्‍तकें इतनी शर्मसार करने वाली हैं कि बच्‍चे तो क्‍या टीचर भी उनसे मुँह मोड रहे हैं। अमेरिका में 5 वर्ष की बच्‍ची को भी पूर्ण व्‍यस्‍क महिला माना जाता है क्‍योंकि वह मानसिक रूप से व्‍यस्‍क हो जाती है, ऐसी शिक्षा और ऐसे वातावरण के कारण। लेकिन प्रश्‍न यह है कि क्‍या ऐसी सरकारों के रहते हम ऐसे व्‍यभिचार को बचा पाएंगे?

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  3. परिवार को बचाए रखना .. बच्चों को संस्कारित करना ... साथ साथ सिक्षा देना ... ये सब ज़रूरी हैं इस दिशा में ...

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  4. यौन शिक्षा के विरोध और पक्ष दोनों इस बात पर अड़ जाते हैं ------ यौन शिक्षा दी जाये अथवा नहीं???

    प्रश्न जबकि ये होना चाहिए कि यौन शिक्षा किस तरीके से दी जाये???प्रश्न Methdology पर होना चाहिए. किशोर अवस्था में होने वाले परिवर्तनों के बारे में किशोरों को अवगत करना बहुत जरुरी हैं. अगर आप किशोर के सामने मादक चित्रों भरी किताब रख देंगे तो उसके मन पर उल्टा असर होगा ही. यौन शिक्षा का जोर यौन व्याभिचार से होने वाले घातक परिणामो की जानकारी देने पर होना चाहिए. किशोरी को बताया जाना चाहिए की कम उम्र में गर्भधारण से उनके शरीर को क्या नुकसान हो सकता हैं. संस्कृति के साथ यौन शिक्षा का तालमेल बिठाना जरुरी हैं. किशोर-किशोरी को बताया जाये कि कम उम्र में सेक्स करने के सामाजिक,आर्थिक और शारीरिक दुष्परिणाम क्या हो सकते हैं.किशोर को बताया जाना चाहिए कि एक सही उम्र तक ब्रह्मचर्य का पालन करने के क्या फायदे होते हैं.

    चाहे शहर हो या गाँव, सोच का दायरा तो हमें बढाना ही पड़ेगा. सेक्स के बारे में किशोर-किशोरी से जितना छुपाने की कोशिश होगी, उतना ही नुकसान हमें आगे उठाना पड़ेगा. सुचना क्रांति के इस युग में साधनों की कमी नहीं हैं. जिसको सेक्स के बारे में जानना हैं वो अनेक माध्यमो से जान सकता हैं. पर ध्यान देने की बात ये हैं की वो कहीं गलत बातों को सहीं न समझ ले.

    सेक्स को मनोरंजन के रूप में पेश न करा जाये इस बात पर सरकार और समाज को ध्यान देना होगा.


    यौन शिक्षा को एड्स, नशीले के सामानों के खिलाफ लड़ने वाले औजार के रूप में विकसित किया जाना बहुत जरुरी हैं. बात भारत की हैं , विदेशों की बात छोड़ दी जायें. भारत की संस्कृति और परिस्थतियो के साथ तालमेल बिठाकर यौन शिक्षा का प्रचार किया जाये.

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  5. सेक्स शिक्षा की आवश्यकता इसलिये है क्योंकि पारिवारिक वातावरण (कभी कभी परिवार के न टूटने पर भी) का ह्रास हुआ है. अब या तो इस वातावरण को जीवित किया जाये, और अगर ऐसा हो पाता है सेक्स शिक्षा अप्रासंगिक हो जायेगा. पर इस वातावरण में तो जरूरी ही लगता है.

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  6. पहली बात तो ये है की एच आई वी का हुवा दिखा कर यौन शिक्षा की पैरवी करना ही गलत है!हमारे देश की संस्कृति ऐसी है जिसमे शायद यौन शिक्षा की जरूरत भी ना पड़े,पर क्या करें इस बाजारवाद का जो रोजाना नए नए हथकंडे निकलता है!नित नए दिवस बताने वाला ये बाजारवाद ही इसकी पैरवी कर रहा है!बाकि रही बात रोगों से बचने की तो उसके अन्य बहुत से तरीके है!!हमारे परिवारों में वैसे भी लड़कियों को सब कुछ आवश्यक बातें सभ्य और शालीन तरीकों से सिखाई ही जाती है सदियों से!!

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  7. यौन शिक्षा होनी चाहिए। लेकिन इस के लिए माता-पिता ही शिक्षक बनें। हाँ यह किया जा सकता है कि प्रत्येक माता-पिता को इस बात की के लिए प्रशिक्षण प्रशिक्षण जरूर दिया जाना चाहिए कि वे अपने बच्चों को कैसे शिक्षित करें।

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  8. सेक्स शिक्षा बिलकुल बकवास है, यहां युरोप मै इस सेक्स शिक्षा के बाद बःई बहुत से अपराध होते है १२ सल की बच्ची ओर १४ साल के लदके को मां बाप बनते देखा है, एच आई वी का होवा दिखा कर यौन शिक्षा की पैरवी करना विलकुल गलत है, क्यो ना इस होवे के स्थान पर हम बच्चे को चरित्र निरंमान मै लगाये, एक बच्चई को सही सेक्स शिक्षा उस की मां ओर बडी बहिन, भाभी या दादी नानी ही घर मै खास बाते समझा देती है, ओर लडके को इस उम्र मै कसरत ओर शरीर बनाने की ओर ध्यान दिलाना चाहिये.....
    ओर आप ने यह सही लिखा है कि " बैकाक और थाईलैड की तरह भारत को भी सेक्स टूरिज्म के बड़े बाजार के रूप में विकसित करने की विदेशी चाल के रूप में भी इसे देखा जा रहा है। "
    हम युरोप की गंदी से गंदी चीजे ग्रहण करना ही अपनी शान समझते है, जानवरो को कोन देता है सेक्स शिक्षा???

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  9. सादर वन्दे!
    मित्र ये शिक्षा के पक्ष में नहीं हैं ये सभी बाजारवाद के पक्षधर हैं, पैसे के लिए अपने को बेचने वाले ये दलाल शिक्षा का भला कैसे कर सकते हैं, खुद नीद कि गोली खाकर सोने वाले ये अशांत कथित बुद्धिजीवी पुरे समाज को अपनी तरह बनाने में लगे हुए हैं.
    बहुत ही बढ़िया लेख!
    रत्नेश त्रिपाठी

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  10. यौन शिक्षा को एक मुददा न बनाके .....इसे एक जागरूक करने के लिए जानकारियाँ दी जाये तो ज़्यादा बहेतर होगा .......आज बदलते युग के अनुसार ....और नरसंहार के रूप में फ़ैल रही एड्स जैसी बीमारी के लिए ......यौन शिक्षा ज़रूरी है .

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  11. मिथलेश जी, आपने गंभीर विषय पर अच्छी पोस्ट लिखी है पर एक बात बताइये कि देश में जैसे ही सेक्स एजुकेशन की बात होती है तो स्त्री-पुरुष के शारीरिक संबंधों की ही चर्चा क्यों होती है?
    क्या ये बताना जरूरी नहीं कि सेक्स के साथ क्या जरूरी है क्या नहीं?
    स्त्री पुरुष के शरीर के हिसाब से क्या सही क्या गलत है?
    गाँवों में अप्राकृतिक सेक्स करते लोगों के लिए क्या सही है, ये बताना भी जरूरी है.
    वैसे अच्छे विषय को विस्तार दीजिये, पहले हम भी कुछ इसी तरह सोचते थे, पर जब सेक्स एजुकेशन को आयु वर्ग के हिसाब से बाँट कर देखा तो लगा कि कहाँ और कितनी जरूरत है.
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    जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

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  12. आदरणीय राज भाटिया से सहमत हूँ !

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  13. और मैं राज भाटिया और सतीश सक्‍सेना दोनों से सहमत हूं।

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  14. itni naitikata vale desh me aids ki bhayavahata badhatii ja rahi hai is par vichaar karane ki aavashyakata hai jaha tak sex education ki baat hai aap bachho ke media vaale mobile ke video clip dekhiye to pata chal jaayegaki sex kis vikrit roop me navjavaano ke paas pahunch rahaa hai sawal sahii jaankaari dene ki hainajavaano ko jo bhi adhkachara sex gyan mil raha hai kya vah sahi hai tatha kya itnaa prachaar prasar ke vavjud aids gaon va shahar me fail raha hai isko rokane ka kya vikalp hai is ar vichaar karane ki aavyshyakata hai sex education ke contents par aapatti ho sakati hai lekin uske uddeshya par nahi

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  15. मेरा निजी अनुभव /मत है की यहाँ यौन शिक्षा बड़ों को चाहिए बच्चों किशोरों को नहीं !

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  16. Aमिथलेश बहुत ही सार्थक पोस्ट जहाँ शिक्षा ही नहीं है वहा यौन शिक्षा निरी मुर्खता के सिवा कुछ नहीं सब बाजार बाद की वजह से है
    There is a wide gender disparity in the literacy rate in India: adult (15+ years) literacy rates in 2009 were 76.9% for men and 54.5% for वोमेन
    सादर
    प्रवीण पथिक
    9971969084

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  17. आज के माहौल में सेक्स शिक्षा बेहद जरूरी है...हां शिक्षा देने का तरीका वैज्ञानिक होना चाहिए।

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  18. जिस तरह शिक्षा की शुरुआत बालमन्दिर या मॉंटेसरी से होती है उसी तरह इस शिक्षा की शुरुआत भी एक विशेष उम्र से हो और इसके लिये वैज्ञानिक आधार पर एक निश्चित पाठ्यक्रम बने । वैसे भी विज्ञान , गृहविज्ञान पढ़ने वाले छात्र - छात्रायें इसे अपने पाठ्य्क्रम मे पढ़ते ही हैं बावज़ूद इसके कि वहाँ इसका नाम सेक्स एजुकेशन नही है ।

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  19. the education of youn is a very good. all yung man or pe0ple does not think that what is the problem of youn . they know that youn is a very good thing so i can say all people should that think.

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