Saturday, May 8, 2010

मुझे माँ मत बोलो,,, क्या कहें इसे नारी विकास या नारीत्व पतन???-----मिथिलेश दुबे

आज मैं कुछ नहीं कहूँगा आज मैं आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसे सुनने के बाद आप भी शायद सोचने पर मजबुर हो जायें । हमारा देश विकास के पथ पर अग्रसर है, विकास हर क्षेत्र में हो रहा इससे कदापि इनकार नहीं किया जा सकता । देश आधनिकता की वय इस तरह पिस रहा है कि यह अपने खूद के अस्तित्व को भी मिटाने पर तुला है । अब हमारें देश में आधुनिकता के नाम पर वह सब किया जा रहा है जो कभी अमान्य था । अब लड़के लड़किया शादी से पहले सेक्स कर सकते हैं , बिना शादी के भी साथ रह सकते हैं वह भी मान्यता प्राप्त । इसी तरह बढ़ते आधुनिकता के आड़ में पल रहे बुरी चिन्तन का ही परिणाम है ये सच्ची घटना ।


बात अभी हाल के दिंनो की है , मुझे घर से आये हुए एक दो दिंन हुए थे , शाम का वक्त था कि अचानक से लाईट चली गयी , कुछ देर तक इन्तजार करता रहता जब लाईट नहीं आई तो घर से बाहर निकला और सोचा की थोड़ा पार्क में ही विचरण करा जाये जाके पार्क में बैठा रहा ,कुछ देर बाद टहलने लगा कुछ देर विचरण के लेने के बाद फिर से कहीं बैठने का मन हुआ , नजर पड़ी तो देखा मैं जहाँ बैठा था वहाँ कोई और बैठ चुका था । नजर घुमाने के बाद एक जगह खाली स्थान दिखा वहाँ जाकर बैठ गया । अभी कुछ देर ही बिते थे कि वहाँ एक सुन्दर महिला का आगमन हुआ , वह मेरे सामने वाली ब्रेचं पर आकर बैठ गयीं जो कि मुझसे कुछ ही दूरी पर स्थित था । मैंने देखा की उन मैडम के बैठने के कुछ देर बाद ही वहाँ उनके पास दो बच्चे आये , एक लड़का था और एक लड़की थी , एक के हाथ में बल्ला था दूसरे के हाथ में बोल थी , तभी मैडम का फोन बजा और वह फोन पर व्यस्त हो गयीं । मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैडम को गर्मी लग रही थी या नहीं , क्योंकि उनका पहनावा ही कुछ ऐसा था , उन्होनें आधा बाहीं नुमा कुर्ती जो कि किसी झिल्ली के समान लग रहा था उसे ऊपर पहन रखा था , और निचे जिंस ।


मैडम फोन पर व्यस्त थी , उनकीं बातें खत्म हुई , मैं भी पता नहीं क्यों बैठा था , मुझे जरा भी इसका अंदेशा नहीं था कि आज यहाँ वह होगा जिससे मैं दहल ही जाऊंगा । दोंनो बच्चे आपस में खेल रहे थे , मुझे बस इस बात की आशंका ही थी कि वे दोंनो बच्चे इनके ही है । दोंनो बच्चे खेल ही रहे थे कि अचानक उनमें झगड़ा शुरु हो गया , लड़की बड़ी थी , उसने लड़के को एक थप्पण मार दिया , लड़का भागते हुए आया और बोला मम्मी काजल ने मुझे मारा , मम्मी कुछ देर तक खामोश रहीं , मैं ये नजारा देख रहा था ,मम्मी और मेरी भी खामोशी तब भंग हुई जब मम्मी नें उस बच्चे को एक तेज तमाचा जड़ा और कहा कि " तुम्हे कितनी बार मना किया है कि घर के बाहर मुझे मम्मी मत बुलाया करो समझ नहीं आती तुम्हे अब चलो घर " मेरी आंखे खुली की खुली ही रह गयी और बिल्कुल हैरान हो गया । फिर मैंने सोचा कि शायद इसे ही विकास की संज्ञा दी जा रही बड़े शहरो में ।

अब आप क्या सोचते हैं जरुर बतायें ।

48 comments:

  1. "विचारणीय पोस्ट । सोचने को मजबूर करती खासतौर पर महिलाओं को "

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  2. maan gaye guru ... kya post hai
    sahi kaha hai 1000% sahi kaha hai


    maine bhee ek post banaai hai , sunday ko hi post kartaa hoon to kal aap dekh payenge

    aapko avshya pasand ayegee

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  3. पेज थ्री की महिलाएं ऐसी ही होती हैं ।
    फिर भी ये बात आम नहीं, अपवाद ही है।
    लेकिन बेशक ऐसा सुनने में धक्का तो लगा ही होगा।

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  4. "तुम्हे कितनी बार मना किया है कि घर के बाहर मुझे मम्मी मत बुलाया करो समझ नहीं आती तुम्हे अब चलो घर"

    मिथिलेश तुस्सी ग्रेट हो... बिना शर्त पूरा समर्थन बहार से भी अन्दर से भी !!!

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  5. I don't believe it.... agar aise log honge bhi to karodon me 1 inka samman karo aur nikal lo kyonki ye log kuchh bhi karlen inki sankhya samaz me badhne nahin wali.

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  6. लिव इन रिलेशनशिप का कारनामा

    अत्याधुनिक नारी का चित्रण

    अच्छी पोस्ट

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  7. baat beshak chintniya hai magar deepak ji ki bhi baat sahi hai .......aadhunikata ki chakachaundh ne kuch logon ka dimag kharab kar diya hai magar sabka nahi aur na hi hoga.han is avsar par ye post dalkar achcha kiya kam se kam log kuch sochne par to majboor honge hi.

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  8. " तुम्हे कितनी बार मना किया है कि घर के बाहर मुझे मम्मी मत बुलाया करो समझ नहीं आती तुम्हे अब चलो घर "

    लगता है नैहरू के स्वपन पूर्ण हो रहे हैं भारत को इंडिया बनाने के

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  9. समय बदल रहा है....
    आजकल अधिकाँश घरों की ये कहानी है....

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  10. Vandana jee kii baat padhne yogy

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  11. वाह भाई आप ने आईंना दिखा दिया है, यह सब आम नही लेकिन होने वाला है... यह आज की उस अत्याधुनिक नारी का रुप है जो सब बंधन तोड देना चाहती है, ओर लिव इन रिलेशनशिप मै ही विश्वास रखती है

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  12. क्या मिथिलेश ,
    भाई कल मातृ दिवस है ऐसा सब कह रहे हैं हालांकि भारत में इसकी शुरूआत अभी हाल ही फ़िलहाल में हुई है शायद , मगर फ़िर भी है तो सही , तो ऐसे में कम से कम कोई बढिया जी अच्छी सी सकारात्मक सी ..मातृ शक्ति को याद करती हुई पोस्ट लिखते तो मजा और ज्यादा आता । बांकी दीपक ने जो कहा वो तो सच है ही ।

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  13. सौतेली मा थी भाई, परेशान न होइय़े ! :)

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  14. इसमें इतना आश्चर्यचकित होने की बात नहीं हैं!!! अब वो औरत ममता का अपमान कर रही हैं क्यूंकि उसकी सोच का दायरा सीमित हैं!! वो उसमे "अभी तो मैं जवान हूँ" वाली फीलिंग हैं!!! समय के साथ उसे खुद समझ आ जायेगा कि वो क्या गलती कर रही हैं, किसी को समझाने की जरुरत नहीं पड़ेगी

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  15. मिथिलेश भाई आपकी नजर में "आधुनिक औरत" की क्या परिभाषा हैं??? मुझे उत्तर का इंतजार रहेगा!!!

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  16. ये एक अपवाद है .. और उम्मीद है कि हमेशा एक अपवाद ही रहेगा !

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  17. मैं क्या कहूँ ...मैं तो क्षुब्ध हूँ ....

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  18. @यशवन्त भाई

    भईया मैं तो ना ही विकास का विरोधी हूँ और ना ही आधुनिकता का परन्तु आधुनिकता का मतलब नग्नता या अपनी संस्कृति के स्तर को नीचा करना कतई नहीं होना चाहिए खासकर भारतीय महिलाओं को । भारतीय नारी अपनी लज्जा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शर्म उसका प्रिय गहना है, तभी तो विवेकानंद को कहना पड़ा कि भारतीय नारी का नारीत्व बहुत आर्कषक है। जयशंकर प्रसाद जैसे कवि नारी,तुम केवल श्रृद्धा हो कहकर चुप हो जाते है। जब आधुनिक नारी को अपने परंपरागत मूल्यों से हटते हुए देखता हूं तो स्टील का कथन याद आ जाता है कि संसार में एक नारी को जो करना है वह पुत्री बहन,पत्नी और माता के पावन कत्र्तव्यों के अंतर्गत आ जाता है। फिर भी पता नहीं क्यों आधुनिकता के चक्कर मे पड़ी नारी पश्चिमी देशों के बनाए हुए अंधे रास्ते पर चलकर ग्लैमर की दुनिया में खोना चाहती है। और यही वह कदम है जो पंरपरागत मूल्यों पर चलने वाली कल की नारी और आज की स्वच्छंद नारी में अंतर स्पष्ट करता है। भारतीय नारी भारतीय संस्कृति के परंपरागत मूल्यों को त्यागकर विदेशी नारी की नकल कर रही है। आज बनावट पैसे की चकाचौंध विज्ञापन की दुनिया व फिल्मी माध्यमों से प्रभावित नारी ने अपने सारे परंपरागत मूल्यों को धोकर अश्रृद्धा का रूप धारण कर लिया है। आज भी नारी को कविवर जयशंकर प्रसाद की एक बात याद रखनी होग कि नारी तुम केवल श्रृद्धा हो। आज नारी स्वयं अपनी भूल से अनेक समस्याओं से घिर गयी है ।

    आधुनिकता हो परन्तु अपने मूल्यों और परंपरा का हास करके नहीं ।

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  19. पता नहीं क्यों इसे अपवाद या करोड़ों में एक कहा जा रहा!

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  20. मिथिलेश,
    अगर वो अपने मम्मी को नहीं कहलाना पंसद कर रही है तो बिल्कुल ठीक कह रही है...क्योंकि उसे मां कहना मां शब्द का भी अपमान होगा...लिव इन रिलेशनशिप वाली मजबूरी है या कुछ और, बच्चों से ऐसा व्यवहार किसी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता, किसी भी समाज में...अब ये सोचो, जब ये बच्चे बढ़े होंगे तो किसी को प्यार दे पाएंगे...

    जय हिंद...

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  21. आखिर आधुनिक होने की कुछ तो कीमत चुकानी ही होगी...

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  22. आधुनिकता की अन्धी दौड़ ने उन्हें दिग्भ्रमित कर रखा है जो आधुनिकता का अर्थ भी नहीं जानते; जो आधुनिकता को संकुचित अर्थों में देख पाते हैं.

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  23. वाह री नारी तेरी अजब कहानी
    न आँचल, न दूध, न आंख में पानी
    अगर ऐसा हुआ है...तो १२ दिसंबर २०१२ को दुनिया का अंत हो ही जाना चाहिए....क्योंकि अब वो दिन आ ही गया है....
    डूब मरने को भी अब पानी नहीं है....
    अच्छी रिपोर्ट...

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  24. This comment has been removed by the author.

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  25. महिला-अधिकारवादियों को बात चुबेगी तो सही पर, क्या आज औरत खुद ही विकास के भरम में पतन की और नहीं जा रही है क्या ?
    पुरुष तो बिचारा सदा से ही बदनाम है, अहंकारी,दम्भी, प्रभुत्व-वादी और ना जाने क्या क्या तमगे सुशोभित है भापडे के माथे पे.लेकिन फिर भी उसके जो काम है उन्हें निष्ठा से निभाता है संस्कारी फ़र्ज़ भी जैसे पिता होने का,पति होने का और असंस्कारी फ़र्ज़ जो समाज में उसके माथे पे लगे है. कभी नारी की नक़ल नहीं करता.
    लेकिन नारी को खुद को ही नहीं पता की उसे जाना किधर है, महिला-पुरुष बराबरी के नाम पे नारी क्या खुद ही पुरुष को श्रेष्ठ नहीं घोषित कर रही है उसकी हर बात की नक़ल को ही असली आजादी मानकर . क्योंकि अनुसरण तो उसीका किया जाता है जिसको हम ऊँचा माने . अब नारी खुद ही नारीत्व को हीन माने तो पुरुष बिचारे का क्या दोष की अपने पुरुषत्व के मद में नारी को हीन समझे .क्योंकि नारी ही तो खुद इस बात का बढावा खुद दे रही है.
    और अब तो सवा सत्यानाश दिखाई दे रहा है, माँ कहलाने में भी उसका आधुनिकत्व आहत हो रहा है . भगवान मालिक है !!!!!!!!

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  27. मैं दीपक जी की बात से सहमत हूँ. ऐसी औरतें करोड़ों में एक होती हैं.
    और... मुझे आश्चर्य होता है कि सैकड़ों आधुनिक औरतें, जो जी जान से घर-बाहर की ज़िम्मेदारी निभाकर हलकान हुयी जा रही हैं, वो आपलोगों को नहीं दिखतीं और एक औरत ऐसी ज़रूर दिख जाती हैं.
    आखिर अपवादों के बल पर औरतों को आँकना कब बन्द करेंगे आपलोग ?
    ... मिथिलेश भाई, आपने मेरे ऑर्कुट प्रोफ़ाइल को देखा है, मेरी कई सहेलियाँ अब आपकी फ़्रैंडलिस्ट में भी हैं. आपकी जानकारी के लिये बता दूँ कि लगभग सारी लड़कियाँ हॉस्ट्ल में रहकर पढ़ी हैं और अत्याधुनिक की श्रेणी में आयेंगी, एक मुझे और एक-दो को छोड़कर सभी शादीशुदा हैं और उनमें से जो माँ बन चुकी हैं, वो बड़े गर्व और अभिमान के साथ अपने बच्चों के साथ फोटो खिंचाती हैं... उनकी हर हरकत, हर अदा के तस्वीर अपने दोस्तों से शेयर करती हैं...
    पर, आपको वो नहीं दिखतीं, वही दिखती है, जो आप देखना चाहते हैं.

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  28. achi post hai age -a ge yhi sab hoga
    lekin adhunikta ke naam par andha desh
    n to kuch bolega sab kuch sahn karta
    rahegaa or ese hi ye karwa badhta rahega

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  29. aap ki post vyakti vishaesh sae sambandhit haen naa ki samaj mae naari kae badaeltey rup sae

    aese log har peedhi mae hotey haen meri maan 70 varshiyaa haen aur unki ek mitr apnae 4 saal kae baetey ko maa kehnae sae roktee thee

    yae baat 54 saal purani haen

    vishay bahut haen aur bhi aadhunik naari kae naam par naari ki bhartsna kab tak karegae aap

    bore nahin hotey

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  30. दूबे जी
    अपवाद सब जगह होते हैं कभी स्त्री अपनी मर्यादा खो देती है तो कभी पुरूष अपनी दायित्व ।

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  31. मिथिलेश जी ,
    असंभव .....वो औरत उनकी माँ हो ही नहीं सकती ....हो सकता है उनके पिता का यह दूसरा विवाह हो .....कोख से जन्में बच्चे को कोई औरत ऐसा कह ही नहीं सकती ......!!

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  32. समय सच में बदल रहा है .... आधुनिकता हावी है ... टी वी का असर समाज पर हो रहा है .. नया युग है ... माँ की परिभाषा भी बदल रही है ....

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  33. भगवान करे ऐसी औरतें हमारे समाज में अपवाद के रूप में ही रहें। इनकी संख्या बढ़ेगी तो समाज टूटेगा। आपने यह पोस्ट लिखकर अच्छा किया। साधुवाद।

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  34. हरकीरत जी आपकी टिप्पणी अगर यहां मिल जाये तो
    http://albelakhari.blogspot.com/2010/04/blog-post_06.html

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  35. अच्छी पोस्ट.
    इस तरह की माएँ पहले भी होती थी और आज भी है इसकी वजह आधुनिकता को भी कह सकते हैं. परन्तु इस अपवाद को छोड़कर माँ तो माँ ही होती है, त्याग और बलिदान की मूरत.

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  36. कई बार ऐसा होता है कि आप जो देखना चाहते हैं आपको वही दिखाई देता है. क्यों? क्योंकि आपको एक पोस्ट लिखने का मौका मिलेगा. अपने दिल पर हाथ रखकर खुद से पूछियेगा. क्या यह घटना सही है? क्या ऐसी कोई घटना हुई है?

    जो जवाब आएगा उससे खुद को संतुष्ट करने की कोशिश कीजियेगा.

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  37. ... नामुमकिन सा लगता है ... पर अपवाद कहीं भी हो सकते हैं !!

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  38. " tv ka parabhav hamare sanskaroan per havi hota ja raha hai "

    " vicharniy post "

    ----- eksacchai { AAWAZ }

    http://eksacchai.blogspot.com

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  39. वो सिर्फ एक अपवाद है ....

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  40. बहुत बढ़िया पोस्ट .l

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  41. ये सिर्फ एक अपवाद ही हो सकता है और ये भी हो सकता है कि वाकई वो सौतेली माँ हो. जो माँ होती है, वह जो पीड़ा गर्भावस्था में झेलती है , शिशुउसकी जान होता है. जिस दिन नारी इतनी आधुनिक हो जायेगी वह माँ बनेगी ही क्यों? और ये सृष्टि समाप्त हो जायेगी. इस लिए किसी एक घटना से सम्पूर्ण जाति का अनुमान गलत है. जब शोध करते हैं और परिणामों का आकलन होता है तो उसके लिए भी प्रतिनिधित्व का एक अनुपात से ही अध्ययन किया जाता है. ऐसी घटना अपवाद हीकही जायेगी.

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  42. sawal yah hai ki jo kuchh samane dikh raha hai use jhuthlaya bhi to nahi ja sakta hai.par aadhunikata ki daud me aksar mahilayen apne ko maa ki padvi se gourvanvit nahi samjhti balki is raj ko chhupaane ki koshishkarti hai ki vo ek ma bhi hai.apneuupari dikhave ke li insaan itna niiiche kyu gir jata hai.
    poonam

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  43. जमाना बहुत तेजी से आगे जा रहा है।

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  44. heart shattering story
    it had better , u had not posted such post which tarnishes image of mother. that lady deserves a tight slap.
    she is a stain on women

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  45. आज की तथाकथिक सभ्यता पर करार तमाचा है आपकी ये पोस्ट...कोई माँ ऐसी भी हो सकती है...विश्वाश नहीं होता...
    नीरज

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  46. अविश्वसनीय, शास्त्र की उक्ति याद आ रही है - कुपुत्रो जायेत माता कुमाता न भवति।

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आपकी राय हमारे लिये महत्तवपूर्ण है । अपनी बात को बेबाकी से कहें ।