Thursday, May 13, 2010

समीर लाल जी की तुलना लुच्चो से , अब तो हद हो गयी --------मिथिलेश दुबे

जय हो हिन्दी ब्लोगिंग की , एक बार फिर विवाद चल पड़ा है कि कौन है हिन्दी ब्लोगिंग में सर्वश्रेष्ठ ? कमबख्त ये भी कोई सवाल है पुछने को,खैर तब पर भी कुछ अविचारी लोग इस मसले पर लड़ पड़ते हैं , जबकि ब्लोगिंग के हर बच्चे को मालुम है कि कौन है सर्वश्रेष्ठ । हिन्दी ब्लोगिंग में अगर कोई है जिसे सर्वश्रेष्ठ कहा जा सकता है , जिसे हिन्दी का सिपाही कहा जा सकता है , जिसके लिए कहा जा सकता है कि वह निश्वार्थ रुप से हिन्दी की सेवा कर रहा है वह नाम सामिर लाल जी का , इनके आस पास तो कोई दिखता ही नहीं जिससे इनकी तुलना की जा सके । इनकी तुलना तो किसी से की ही नहीं जा सकती , अगर इनके समकक्ष कोई दिखता भी तो वह समीर लाल जी ही है , कोई और नहीं । अब कोई इनकी किसी लुच्चे लफंगे ब्लोगर से करे भी तो कुछ किया नहीं किया जा सकता । इधर कुछ दिनों से इनकी चर्चा फिर से हो रही है , अक्सर ये अपनी रचनाओं के कारण ही चर्चीत रहते हैं परन्तु अबकी कुछ और ही पक रहा है , अबकी इनकी चर्चा इनकी सर्वश्रेष्ठता को लेकर की जा रही है । कुछ बुद्धिजीवियों का मानना है कि ये ऐसा नहीं लिखते जिससे इन्हे सर्वश्रेष्ठ कहा जा सके और इनको लुच्चो लफंगो के समकक्ष रख रहे हैं , जबकि सबको मालुम है समीर लाल जी क्या लिखते है । अब इनकी तुलना किसी तुच्छ ब्लोगर से कि जाए तो तुच्छ शब्द की बेईज्जती ही होगी । आपको लोगों को क्या लगता है कि इनके समकक्ष कोई है , देखने का नजरिया हर तरफ से होना चाहिए नाकि बस लिखाई पर ही निर्भर रहें । मुझे उम्मीद है कि जो मुझे लगता है वह आपको भी लगता होगा ।

37 comments:

  1. बेहद खेदजनक विवाद है , जो लोग उठा रहे हैं उन्हें ही दोषी ठहराया जाना चाहिए ! क्या इसके अलावा लिखने को और कुछ नहीं बचा है !

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  2. विवाद न हो यही प्रार्थना करता हूँ

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  3. मामले की हमें जानकारी नहीं आप ठीक ही कह रहे होंगे

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  4. ओह! भावना पर भाषा हावी :-(

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  5. JI BILKUL!jo aapko lagta hai whi hame bhi lagta hai!isme koi do raay nahi......

    kunwar ji,

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  6. भाई मिथलेश आपकी भावनाएं सही है। दु्ष्ट लोग विवाद उठाकर फंस गए हैं। अब उनके चमचे हर ब्लाग पर ज्ञापन लेकर घूम रहे हैं। तुम्हारे ब्लाग पर ज्ञापन सौंपने वाले आएंगे। या आ चुके होंगे। वैसे जो निर्विवाद ब्लागर है उसने इस मसले पर कुछ न कुछ जरूर लिखा है, या फिर यह जरूर कहा है कि अब छोड़ो भी। कुछ समझौता करवाने लोग भी (मसलन ब्रोकर) सक्रिय है। आज सुबह एक नया (क्षमा करें पुराना) चम्मच पैदा हो गया है वह भी राजनीति नहीं करने की अपील चस्पा करते हुए घूम रहा है। पहले-पहल तो अपील देखकर लगा कि कही जनगणना करने वाले किसी कर्मचारी ने तो अपील नहीं टांगी लेकिन बाद में पता चला कि पट्ठा भी बिल से तब बाहर आया है जब ज्ञानी भैय्या के चमचे ने बयान जारी कर दिया था। गिरोहबंदी करके लिखने-पढ़ने वालों को तो मैं तबीयत से सोंटता रहा हूं, और हां इसके लिए मुझे फर्जी आईडी या नाम का सहारा लेना भी नहीं पड़ता। चार-पांच लोग हैं मेरी निगाह में जो गिरोह के मुखिया के कहने पर सुपारी लेकर काम करते हैं। ऐसे लोगों की पहचान हो चुकी है। बस देखते चलो। वैसे ऊपर एक सज्जन ने तुम्हे सलाह दी है। उस सज्जन के बारे में आज ही किसी महानुभाव ने लिखा है कि वह समझौता हो जाए इसके लिए जी-तोड़ प्रयास करता रहा है। दलाल किस्म के लोगों को अपने ब्लाग पर आने भी मत दिया करो और गलती से कोई आज जाए तो उसका स्वागत-सत्कार करने से चूकना भी मत।

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  7. क्या हिंदी ब्लोगिंग में मुद्दों का अकाल पड़ गया है जो लोग ऐसी ऐसी बातें लिखने लगे हैं ।
    इन पर समय क्यों जाया किया जाये ।

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  8. प्रिय ्मिथिलेश ,
    मुझे तुम्हारा तेवर जितना अच्छा लगता है तुम्हारी भाषा और तुम्हारें श्बदों का चयन उतना ही बुरा । मेरी समझ में ये नहीं आता कि आम तौर पर पोस्ट लिखते समय जो शब्द और प्रवाह , जो शैली तुम्हारी होती है वो अक्सर ऐसी पोस्टों में गायब दिखती है । मैं नहीं कहता कि अपने मन की मत कहो, खुल कर कहो , मगर भाषा की मर्यादा हर हाल में बनी रहनी चाहिए । चाहे मामला कितना ही व्यक्तिगत हो ।या सार्वजनिक ...........

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  9. naam hoga to kya badnaam na honge....aisa kuchh khayaal aa raha he apki post padh kar.

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  10. प्रिय मिथिलेश जी भाषा शैली के मुद्दे पर श्री अजय कुमार झा जैसी फीलिंग्स हमारी भी है !

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  11. जाकी रही भावना जैसी ।

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  12. उत्तम प्रस्तुति।
    झा जी से सहमत। संयमित भाषा में भी कह सकते थे।
    टिप्पणियों में बहुत सी बातों से सहमत
    १. हद खेदजनक विवाद
    २. क्या हिंदी ब्लोगिंग में मुद्दों का अकाल पड़ गया है

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  13. मिथिलेश भाई, आप के सभी लेखो का मै कायल हुं, लेकिन आज थोडा दिल दुखा, काश ऎसे शव्द मत लिखो जिस से किसी को बिना बात दुख पहुचे, हमे कोई हक नही की एक को सही बताने के लिये दुसरे को गलत बताये, ओर अच्छा है इन बातो को ज्यादा तुल ना दे, ओर सारी बात समझने की कोशिश करे कि कोन क्या कहना चाहता है, ओर क्यो? कही हम भी तो कोई वेसी ही गलती तो नही कर रहे प्यार मै, अन्जाने मै??

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  14. जाकी रही भावना जैसी

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  15. रोज रोज यही सब पढ पढकर अब तो ब्लागिंग से मोहभंग होने लगा है....
    कौन गलत कौन सही...भला इसका फैसला कौन कर सकता है....संस्कृ्ति, संस्कारों की महिमा बखान करने वाले इन्सान की ओर से इस प्रकार की संस्कारहीनता देखने को मिले तो वाकई बहुत ताज्जुब की बात है...एक लेखक, ब्लागर के तौर पर नहीं तो कम से कम आयु की वरिष्ठता का सम्मान तो किया जाना चाहिए ही....भई हमारे संस्कार तो यही कहते हैं...ओर यदि हम इतने से भी चूक गए तो फिर काहे के संस्कार और कैसी संस्कृ्ति.....
    यदि हमारा कहा बुरा लगे तो आप टिप्पणी मिटाने के हकदार हैं...

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  16. बोटी, मटन, कुत्ता, ब्रा,पान की पीक, सांकल,थू-थू और भी बहुत कुछ लिखता रहता हूं... लोग तो इस भाषा को भी खतरनाक मानते हैं।
    मिथलेश एक चीज का ध्यान रखो भाषा से बड़ी भावना है। तुमने यह पोस्ट अच्छी भावना से लिखी है। अच्छी भावना यही है कि सच के साथ खड़े रहो। वैसे यदि कुछ बड़े और अनुभवी लोग तुम्हे बता रहे हैं तो उनकी बात का बुरा न मानते हुए उसे सुधारने में कोई बुराई नहीं है। पर इस सुधार के चक्कर में सुबह-सुबह उठकर बाबा रामदेव की तरह खंजड़ी मत बजाने लगना और आस्था चैनल में नाचने वाले लोगों की तरह नाचने मत लगना। बाकी सलाह देने वाले लोग आए या नहीं।

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  17. श्री सतीश सक्सेना जी के परामर्श को मेरा भी मन जाये..

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  18. मुद्दा कुछ भी हो भाषा की मर्यादा कभी नहीं छोड़नी चाहिये.

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  19. राजकुमार सोनी जी की बात से सहमत हूँ!
    पोस्ट लगाने से पहले अंजाम सोच लेना चाहिए!
    हमसे भी अनजाने में भूल हो जाती हैं
    मगर भूल समझ में आ जाये तो
    उसे स्वीकार करने में
    कोई हिचक नही होनी चाहिए!

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  20. ब्लॉग की दुनिया में ऐसे विवाद तो पैदा ही नहीं होने चाहिए ........पर अफ़सोस

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  21. पाबला जी ने तो चिट्ठाचर्चा डॉट कॉम से अपना हिसाब बराबर कर लिया है आप भी ऐसा ही कुछ कर लो

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  22. सुनिए, समीर लाल, द साउंड ऑफ साइलेंस...

    जय हिंद...

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  23. had ho gayi hai ab to bloggers ki..........hum sab padhe likhe sabhya insaan hain to phir aisi ochhi mansikta kisliye.........kya naam hone mein hi sab kuch hai?bina naam huye kya hamari pahchan nahi hai? in sabse upar uthiye aur insaan ban kar insaan ka samrthan kijiye.ye kahne ki jaroorat hi nahi hoti ki kaun bada aur kaun chota .......apne aap sabko bina kahe dikh jata hai........sooraj niklega to roshni apne aap hogi hi use diya dikhane ki jaroorat nahi padti.

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  24. मिथलेश जी,
    इस पोस्ट में तुम्हारा समीर भाई के प्रति अनुराग झलक रहा है।
    और जायज भी है क्योंकि वे हमेशा नये ब्लागर का उत्साह बढाते हैं
    सक्रीय रुप से, इसलिए सबके प्रिय हैं। ठेस लगने पर तो भाषा बदल ही जाती है,उसमें तुम्हारी कोई गलती नही है, लेकिन वर्तनी का दोष है उसमें सुधार करोगे तो अच्छा रहेगा।
    मै राजकुमार सोनी जी और आदरणीय डॉक्टर रुपचंद शास्त्री जी से सहमत हुँ।

    इधर हमारे गिरीश भाई जीने ब्लागिंग से अलविदा कह दिया है।

    बहुत ही खराब हालात हैं ब्लाग जगत के, यही होता रहा तो कौन ब्लागिंग में मगज मारी करता रहेगा।

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  25. खेदजनक भाषा

    प्रणाम

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  26. जाकी रही भावना जैसी ।

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  27. ये कोई तय नहीं कर सकता कि कौन सर्वश्रेष्ठ है ..न हि आप न हि आपके ब्लाग पर कमेंट करने वाले हम...

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  28. ज्ञानदतक नपुंसकों को क्या मालूम कि उनक ेचहेते पिछ्ले कितने दिनों से उड़नतश्तरी पर आक्रमण जारी रखे हुए थे?बात यही थी कि उड़नतश्तरई से हिन्दी सेवा की अपील होती थी और मानसिक हलचल पर अंग्रेजी के बिगडाऊ शब्द लिखे जाते थे जो गंगा किनारे वाले छोरे को अपने हीरे लगते थे।इसके अलावा किसी महिला ब्लोगर द्वारा उडनतश्तरी को 'सो क्यूट' कहा जाना इतना नागवार गुजरा कि खुन्नस उतर ही नहीं रही।कोई भी मर्द का बच्चा जाकर पिछले तीन महीने की पोस्ट और इधर उधर की गई कमेट देख ले।फिर तरप्फदारी करे गंगा किनारे जा करगर नहीं हिम्मत है तीन महीने की खबर लेने की तो जा कर जननी की गोद में आराम करे।

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  29. प्रिय अनुज मिथिलेश,
    तेवर को सलाम.
    भाषा पर घोर आपत्ति.
    हर दिल अजीज समीर आपको अति प्रिय है, बढिया बात है, मुझे भी प्रिय है.
    एक ब्लोगर ब्लोग, टीप और अन्य ऐसे ही साधनो से प्रिय या अप्रिय हो लगता है और किस नज़रिये की आप बात कर रहे है.

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  30. ज्ञान जी का आकलन उनका अपना आकलन है और यह उनका हक़ है !

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  31. @ Arvind Mishra

    हिन्दी में लेखन कर हिन्दी की सेवा की अपील जारी करन ाभी एक हक होता है जरा उन्हें समझा दीजिये

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  32. बस बहुत हो चुका...अब इस विवाद का शमन होना चाहिए।
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    मौत से जूझते एक ब्लॉगर को जरुरत है आपके शुभकामनाओं की ---> http://diwakarmani.blogspot.com/2010/05/blog-post_14.html

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  33. झा जी, अली जी, डॉ. दराल जी , एम. वर्मा जी और अरविंद जी से सहमत. ज्ञान जी ने जो भी लिखा वह उनका अपना आकलन है. इस पर इतना बवेला क्यों मच रहा है.

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  34. शैली का ध्यान रखना जरूरी है।अपनी बात कहने का सभी को हक है पर शब्दों पर जरा.....।इस ब्लॉग जगत में सबका अपना स्थान है समीर जी जहाँ हैं वहीं हैं किसी एक व्यक्ति विशेष के कहने से कुछ नहीं बदलता ।

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  35. शांत, गदा धारी भीम, शांत!

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