Thursday, June 10, 2010

डेल्ही के भोलागर ....अब खूब भोलिए चटका चटका ..कमेन्ट कमेन्ट ..हम चले इलाहबाद ...मिथिलेश दुबे

प्रमेन्द्र भाई की पोस्ट को सभ्य भाषा में लिखा जाना ""ब्‍लागिंग वाले गुंड़ो मै "महाशक्ति" चुनौती स्‍वीकार करता हूँ" आज तक किसी भी प्रकार से कमतर आंकने की जो गलती कर रहें हैं वो सावधान .............? १५ जून को आपके लिए काठ खोला जा रहा है.........और जो चटके और कमेन्ट के भूखे हैं वो रहें तैयार ......उनकी साडी इच्छा पूरी की जाएगी ...........प्रमेन्द्र भाई अभी भी सम्मानित और मर्यादा की बात कर रहे हैं पर नीशू तिवारी का कमेट इसका जवाब है...की जैसे को तैसा .............यहाँ गांधीगिरी की नहीं भगत सिंह जैसी विचार धारा की जरूरत ............राजकुमार सोनी और राजीव तनेजा आपको अच्छा व्यंग लिखना आता हैं न पर मुझे आता ............तो आपलोग अब तैयार रहिये खूब सारे व्यंग लिखे को ............क्यूंकि आपकी रेटिंग को हम सब बढ़ने वाले हैं ...........आपको कूड़ा लिखने का जो सुख मिलता है उसमे अब चार चाँद लगने वाले हैं.................
मैं तो जा रहा हूँ इलाहाबाद जिसको जो उखाड़ना ?>)( हैं आये न ...............ज्यादा नहीं बस कुछ दिन और ...........आओ न अब मिलकर कमेट कमेन्ट और चटका चटका खेलते हैं ......देखते हैं किसकी पोस्ट की औकात जयादा होगी ..........दिल्ली वाले भोलागर अब तो लिखने और पढने के साथ साथ सुनने की भी छमता बाधा लो ..............बहुतु कुछ मिलने वाला है...
mahasakti
अब जो लोग भी "जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन तथा उससे जुडे किसी भी व्‍यक्ति का नाम करते हुये अभद्र पोस्‍ट लिखेगा तो अपनी भद्द करवाने का खुद जिम्‍मेदार होगा", जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन का प्रत्‍येक सदस्‍य अपना विरोध ऐसे वाहियात पोस्‍टो पर साम-दाम-दण्‍ड-भेद के साथ दर्ज करने के लिये स्‍वतंत्र है।

22 comments:

  1. ये जूनियर ब्लोगर एसोसियेशन कब बन गयी भाई ?... और आपलोग ये गाली-गलौज कब बंद करेंगे?

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  2. boss always right ..............what r u ........? sajh gye na .......chal cahlen apne ghar ........junior bloger hum hai na

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  3. बंद नहीं गंद करेंगे, मम्‍मि ने सीखाइ हे, हे हे हे आंटि
    निशु, दूबे एंउ बोस महासक्ति

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  5. प्रमेन्द्र भाई जिन्‍दाबाद ! जूनियर हो या सीनियर, लखनउ हो या छत्‍तीसगढ़. ब्‍लॉगर एसोसियेशन जिन्‍दाबाद ! ! ! जिन्‍दाबाद ! ! ! जिन्‍दाबाद ! ! ! जिन्‍दाबाद ! ! !

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  6. दुबे जी, राजकुमार सोनी जी इस खेल में हैं ऐसा मुझे नहीं लगता.

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  7. इस पोस्ट के लिेए साधुवाद

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  8. अरे!...मिथिलेश भाई...नाराज़ काहे को होते हो यार?...
    आपको तो पता ही है कि मैं अपनी कहानियाँ अपने आस-पास घट रही घटनाओं से प्रेरित हो कर लिखता हूँ...इस बार ब्लोगजगत में चल रही धमाचौकड़ी को ही इसका आधार बना लिया... यकीन मानिए ...मेरा आपसे या किसी भी अन्य से किसी भी प्रकार का कोई व्यक्तिगत वैर नहीं है...मुझे मेरे अपने नज़रिए से जैसा ठीक लगा...वैसा मैंने लिखा...

    आप पहले भी मेरे मित्र थे...अब भी हैं...और आगे भी रहेंगे ...
    और हाँ!...मुझे एक अच्छा व्यंग्य लेखक कहने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार

    विनीत:
    राजीव तनेजा

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  9. विनय ना मानत जलधि ..... जूनियर ब्‍लॉगरों की बिनती कौन सुनेगा प्‍यारे।

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  12. ?
    साम-दाम-दण्‍ड-भेद ...साम-दाम-दण्‍ड-भेद ...साम-दाम-दण्‍ड-भेद .. जी अच्छी तरह याद हो गया, साम-दाम-दँड-भेद !
    विरोध साम-दाम-दँड-भेद के साथ दर्ज़ किया जायेगा ।
    क्या यह ब्लॉगिंग का नया मुफ़्त सॉफ़्टवेयर है.. कहाँ मिलेगा ?
    इसका डाउनफाल कहाँ से करें ? कृपया लिंक देने की कृपा करें ।
    शुभकामनायें !

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  13. अरे!...मिथिलेश भाई...नाराज़ काहे को होते हो यार

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  14. `मैंने यह मामला अली सा से डिस्कस किया -हम युवा और नवयुवा ब्लॉगर असोसिएशन के नाम पर अपनी सहमति देते हैं मगर जूनियर ब्लागर्स पर नामकरण पर कोई भी समझौता नहीं -दो टूक बात !
    रही प्रयाग सम्मलेन की बात तो उसके लिए शुभकामनाएं !
    को कहि सकहि प्रयाग प्रभाऊ कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ
    जहाँ चिंतन मनन संवाद परिवाद की एक अविछिन्न परम्परा ही रही है !

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  15. मुझे तो पूरा मामला समझ ही नहीं आ रहा ...आखिर हुआ क्या है ...??

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  16. वाणी गीत जी से सहमत… लगता है कि कुछ गलतफ़हमी या संवादहीनता बन गई है… ऊर्जावान युवाओं मिथिलेश, नीशू और महाशक्ति… तीनों से मेरा अनुरोध है कि "ठण्डा" करके खायें… :) :)

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  17. सादर वन्दे !
    मिथिलेश जी, महाशक्ति जी, नीशू जी और अन्य नौजवान मित्रों हमें सबसे पहले यह समझने की जरुरत है की इन पागलों (जो थोड़े बहुत लम्पट बुद्धिजीवी अपनीसड़ी हुयी मानसिकता से गन्दगी फैला रहे हैं) की वजह से हमें अपनी उर्जा को व्यर्थ नहीं करना चाहिए, हाँ एक सुर में विरोध होना चाहिए लेकिन अभद्रता के साथ नहीं, यहाँ मेरे कहने का यह कतई मतलब नहीं है की हम इनकी बत्त्मिजियाँ बर्दास्त करेगे लेकिन उग्रता आखिरी रास्ता होना चाहिए| और भी बहुत रास्ते हैं इनको सुधारने के लिए | मै आपसब बंधुओं से यही कहूँगा कि सर्वप्रथम अपनी योग्यता से इनको इनकी औकात बताईये | साथ ही साथ मै हर उस ब्लागर को जो अपने मानसिक दिवालियेपन को अपना हथियार बनाकर हमें उत्तेजित करते हैं उनसे यही कहूँगा कि ....
    बदल देना समाज को फितरत है हमारी
    लड़ जाना शेरों से हिम्मत है हमारी
    जो टूट चुके हैं उनकी बात क्या करना
    हम नौजवान हैं! हर बाजी है हमारी |

    रत्नेश त्रिपाठी

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  18. मुझे कुछ ज़्यादा समझ तो आया नहीं, लेकिन तुम लोगों की भाषा (?) सम्बन्धी गलतियों को देखकर ये ज़रूर समझ में आ गया कि जूनियर असोसिएशन बना के तुम कोई तीर तो मार नहीं लोगे.
    हिन्दी भाषा की ऐसी बेकद्री मैंने किसी ब्लॉग पे नहीं देखी. कहाँ से सीख के आये हो ऐसी हिन्दी - किसी मदरसे में ? तुम्हें शर्म आनी चाहिए, खुद को हिन्दी-भाषी कहते हुए.

    कम से कम शीर्षक में तो इलाहाबाद की स्पेलिंग (विन्यास) ठीक कर लेते मुन्ना.

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  19. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  20. अरे मिथलेश, ये माजरा क्या है। बहुत गुस्से में नजर आ रहे हो और ये भाषा कैसी इस्तेमाल कर रहे हो। दिमाग को ठंडा रखो दोस्त!

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  21. "जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन बना कर कहाँ गायब हो गये????????? गुस्सा अभी ठँडा नही हुया क्या????? कुछ अता पता तो देते। आशीर्वाद।

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  22. oops!...I guess, i am late here...

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