Wednesday, July 28, 2010

आ चले कहीं दूर इन सब रिश्तो से अलग---------------मिथिलेश दुबे


...आ चले कही दूर....इन सब रिश्तो से अलग....
...एक नया रिश्ता बनाये...दूरियां गुम हो जाये...सारे बंधन तोड़ हम एक हो जाये

.....आ सनम चल मेरे संग....इन सब मौसमो से अलग
....एक नया मौसम लाये....मोहब्बत की बारिस में बस भीगते जाये....रास्तो पर संग फिसलते जाये

....आ मेरे हमदम मिल मुझ में....इन सब रंगों से अलग...
....एक नया रंग आसमा पर फैलाये....रंग जिससे इन्द्रदनुष की रंगत बदल जाये

.....आ मेरी हसरतो की तस्वीर....इन सब तस्वीरों से अलग...
....एक नयी तस्वीर मोहब्बत की बनाये....हर दास्ताँ मोहब्बत की वहां मिल जाये

....आ मेरे गीतों की मल्लिका.....इन सब गीतों से अलग....
....एक नया गीत हम गुनगुनाये....संसार का कतरा कतरा जिसमे खो जाये

....आ मेरी मुहब्बत की सुबह....इन सब सुबहो से अलग...
....एक नयी सुबह में हम जग जाये...एक दुसरे के जीने की वजह बन जाये

....आ मेरे इश्क की शाम....इन सब शामो से अलग...
....एक नयी सतरंगी शाम बन जाये ....जहाँ से सूरज भी डूबने के लिए इतराए

....आ मेरे दिल की धड़कन....इन सब धडकनों से अलग....
...एक नयी धड़कन बन दिलो में धड़क जाये....सारे जहां को मोहब्बत करना सिखलाये...

....आ मेरे रब मेरे खुदा ....इन सब दुआओं से अलग....
...एक नयी दुआ बन जाये.....जिसकी महक से खुदा भी नशे में आ जाये...

15 comments:

  1. यह रचना हमें नवचेतना प्रदान करती है और नकारात्मक सोच से दूर सकारात्मक सोच के क़रीब ले जाती है।

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  2. अच्छी रचना है...प्रेम में पगी.

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  3. आज पहली बार आपकी इस तरह की रचना पढ़ रही हूँ ।प्रेम के एहसास से भरी ये रचना बहुत सुन्दर लगी .....................

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  4. श्री मनोज कुमार जी से सहमत. यह गीत नकारात्मक न होकर सकारात्मक है और एक नई उर्जा का संचार करता है. सुन्दर गीत के लिए आपको बधाई.

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  5. वाह वाह मिथिलेश आज तो कमाल कर दिया………………आज तो मोहब्बत के फूल खिला ही दिये।

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  6. भाव से भरी हुई रचना !!

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  7. oho oho oho oho oho oho oho oho oho !!!!

    great !!!!!

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  8. मिथिलेश भाई, क्या ये आपकी फोटो है? अगर हाँ, तो ये नहीं पूछूगा कि दूसरा कौन है, पर इतना जरूर बताना कि ये कहाँ की है?
    …………..
    पाँच मुँह वाला नाग?
    साइंस ब्लॉगिंग पर 5 दिवसीय कार्यशाला।

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  9. waah mithilesh ji..well done :)

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  10. वाह !! मिथलेश जी ,
    बहुत खूब, लाजवाब !!

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  11. फिर एक नयी सुबह फिर नयी शुरुआत !

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  12. यह अंदाज़ अच्छा है ...शुभकामनायें मिथिलेश !

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  13. प्रेम के एहसास से भरी लाजवाब रचना |

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  14. यह अंदाज़ अच्छा है ...शुभकामनायें मिथिलेश !

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