Saturday, July 31, 2010

नारी उत्थान का नंगा सच नारीवाद का ढकोसला --------मिथिलेश दुबे

जहाँ देखिये नारीवाद का राग अलापते आपको बहुत सी महिलाएं , बहुत से संस्थाए मिल जाएँगी । लेकिन इनका वास्तविक चेहरा क्या है ये कम लोगों को ही ज्ञात होगा । होगा भी कैसे प्रगतिवाद का अँधा चस्मा जो लगा है । फिर भी ये खुद को फेमिनिस्ट कहने वाली महिलाएं वैसे बील में ही रहती हैं लेकिन समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए किसी मुद्दे पर भूकप की तरह अचानक से सामने भी आ जाती हैं तब जाके पता चलता की फला-फला लोग हैं जो की फलाने नामक नारी विकास के लिए तथा उनके उठान के लिए कार्य कर रहीं हैं । जहाँ तक नारीवाद को समझ पाया वह यह की नारीवाद राजनैतिक आंदोलन का एक सामाजिक है जो स्त्रियों के अनुभवों से जनित है। हलाकि मूल रूप से यह सामाजिक संबंधो से अनुप्रेरित है लेकिन कई स्त्रीवादी विद्वान का मुख्य जोर लैंगिक असमानता, और औरतों के अधिकार इत्यादि पर ज्यादा बल देते हैं। नारीवादी सिद्धांतो का उद्देश्य लैंगिक असमानता की प्रकृति एवं कारणों को समझना तथा इसके फलस्वरूप पैदा होने वाले लैंगिक भेदभाव की राजनीति और शक्ति संतुलन के सिद्धांतो पर इसके असर की व्याख्या करना है। स्त्री विमर्श संबंधी राजनैतिक प्रचारों का जोर प्रजनन संबंधी अधिकार घरेलू हिंसा , मातृत्व अवकाश, समान वेतन संबंधी अधिकार , स्त्रीवादी विमर्श संबंधी आदर्श का मूल कथ्य यही रहता है कि कानूनी अधिकारों का आधार लिंग" न बने '''''''''''''''''''''''''''''''''''' '
बात तो सही है और मई इनका पक्ष धर हूँ लेकिन जब मूल रवैया इन सिंधान्तो पर ही हो तो । आज हमारे यहाँ जब भी नारीवाद के बात होती है नारी के अधिकार की बात होती है तो इनके नाम पर इन्हें वह आजादी जो हमारे संस्कृति का मानक ही बदल दे। मै नारी अधिकार के पक्ष में हूँ , उन्हें वह सब कुछ मिलना चाहिए जो की पुरुषो को मिलता है लेकिन वह भारतीय संस्कृति के अनुरूप हों तो ज्यादा कारगर होगा सब के लिए , उस आजादी , उस अधिकार की बात हम क्यूँ करें जो हमारे खुद के वजूद को ही दाव पर लगा दें । नारीवाद (फेमिनिस्ट) का भूत पश्चिम से चलकर भारत आया , अब यहाँ भी इसका प्रचार प्रसार जोरों से हो रहा है, हो भी क्यूँ नहीं भारत विकासशील देश जो है । इस नारीवाद ने वहां क्या किया इसके कुछ उदहारण और कुछ आकडे दे रहा हूँ ..............ये आकडे अमेरिका और इंग्लैंड के है जहाँ नारी को सबसे ज्यादा विकासशील मन जाता है .....
--हर में से अमेरिकन स्त्री अपनी जिन्दगी में बलात्कार की शिकार होती है.
--१७. मिलियन अमेरिकन औरते पूर्ण या आंशिक बलात्कार की शिकार है .
-१५ % बलात्कार की शिकार १२ साल से कम उम्र की लड़किया है .
--लगभग % अमेरिकन पुरुषों ने हर ३३ में ने अपनी जिन्दगी में कभी कभी पूर्ण या आंशिक बलात्कार किया है ...एक चाइल्ड प्रोटेक्शन संस्था की १९९५ की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में १२६००० बच्चे बलात्कार के शिकार है जिनमे से 75 % लड़किया है और लगभग ३० % शिकार बच्चे से की उम्र के बीच के है
ये आकडे कम नहीं है अगर हम इन की अन्य विपत्तियों से तुलना करते है तो स्तिथि की भयानकता स्पष्ट हो जाती है जरा देखे.......
हत्या -दिसम्बर २००५ की रिपोर्ट के आधार पर अकेले अमेरिका में ११८१ एकल औरतो की हत्या हुई जिसका औसत लगभग तीन औरते प्रति दिन का पड़ता है यहाँ गौर करने वाली बात ये है की ये हत्याए पति या रिश्ते दार के द्बारा नहीं की गयी बल्कि ये हत्याए महिलाओं के अन्तरंग साथियो (भारतीय प्रगतिवादी महिलाओं के अनुसार अन्तरंग सम्बन्ध बनाना महिलायों की आत्म निर्भरता और स्वंत्रता से जुड़ा सवाल है और इसके लिए उन्हें स्वेच्छा होनी चाहिए) के द्बारा की गयी अब अंत रंग साथियो ने क्यूँ किया???????
घरेलू हिंसा-----National Center for Injury Prevention and Control, के
अनुसार अमेरिका में . मिलियन औरते प्रति वर्ष घेरलू हिंसा और अनेच्छिक सम्भोग का शिकार होती है, और इनमे से कम से कम २० % को अस्पताल जाना पड़ता है ...
कारण - जो भी हो लेकिन है तो भयावह ही , इसका मतलब साफ है की उनका पुरुष विरोधी रवैया उनको एस हालत में पहुंचाता है, ये हमारे न हो इसके लिए हमे उनके क़दमों के निशा पर खुद को चलने से रोकना होगा वरना स्थिति क्या होगी आपक देख ही सकते हैं .....
सम्भोगिक हिंसा -----National Crime Victimization Survey,
के अनुसार 232,960 औरते अकेले अमेरिका में २००६ के अन्दर बलात्कार या सम्भोगिक हिसा का शिकार हुई , अगर दैनिक स्तर देखा जाए तो ६०० औरते प्रति दिन आता है,इसमें छेड़छाड़ और गाली देने जैसे कृत्य को सम्मिलित नहीं किया गया है वे आकडे इसमें सम्मिलित नहीं है जो प्रताडित औरतो की निजी सोच ( क्यूँ की कुछ औरते सोचती है की मामला इतना गंभीर नहीं है या अपराधी का कुछ नहीं हो सकता)और पुलिस नकारापन और सबूतों अनुपलब्धता के के कारण दर्ज नहीं हो सके पश्चमी प्रगतिवादी आन्दोलन से क्या हासिल हुआ केवल विच्च का नाम जिस पर पश्चिमी औरते गर्व करती है ,,
m tough, I’m ambitious, and I know exactly what I want. If that makes me a bitch, okay. - Madonna Ciccone

मीडिया से ताल्लुक रखने वाली संध्या जैन कहती हैआज जो कानून बन रहे हैं वो विदेशी कानूनों की अंधी नकल भर हैं। उनमें विवेक का नितांत अभाव है। उन्होंने कहा कि अगर हमारे बेटे-बेटियां लिव इन रिलेशनशिप के तहत रहेंगे तो क्या हम खुश रहेंगे। क्या उनके इस फैसले से हमारी आत्मा को दुख नहीं होगा। अगर दुख होगा तो हमें ऐसे कानून का विरोध करना चाहिए और नहीं तो फिर तो कोई बात ही नहीं।"

गांधी विद्या संस्थान की निदेशक कुसुमलता केडिया जी के अनुसार भारतीय स्त्री किसी ने बिगाड़ी तो वो थे दो तामसिक प्रवाह- इस्लाम और ईसाइयत का भारत में आगमन। केवल भारत में ही नहीं ये दोनों शक्तियां जहां भी रोकने वहां की संस्कृति की इन्होंने जमकर तोड़-फोड़ की। ईसाई विचारधारा के अनुसार स्त्री ईंख के समान है का चाहें तो चबाएं या रस निकाल धकोश्ला पीकर धकोश्ला दें। दूसरी ध्ह्कोश्ला द्ध्कोस्लाहा स्त्री को पूर्णत ढंक देने की वकालत करता है लेकिन वह यह नहीं सोचता कि इससे स्त्री का सांस लेना दूभर जाएगा।ईसाई धर्म ने स्त्रियों पर जमकर अत्याचार किया।

जो स्त्री अधिक बोलती थी उसे मर्द रस्सी में बांधकर नदी में बार-बार डूबोते थे। यही उसकी सजा थी। लेकिन हमारे देश में इन दोनों के आगमन से पूर्व स्त्रियों की हमेशा सम्मानजनक स्थिति रही। विघटन तो इनके संसर्ग से हुआ। भारत के संदर्भ में नारी मुक्ति यही है कि भारतीय स्त्री फिर उसी पुरातन स्त्री का स्मरण कर अपने उस रूप को प्राप्त करे। कि पश्चिम की स्त्रियों का नकल करे।

समाज सेविका निर्मला शर्मा के अनुसार " भारत के गांवों में रहने वाली स्त्री तो मुक्त होने की इच्छा व्यक्त नहीं करती। एक मजदूरन भी ऐसी सोच नहीं रखती। मुक्ति वो स्त्रियां चाहती हैं जो कम कपड़ों में टेलीविजन के विज्ञापनों में नजर आती हैं ताकि वो कपड़ों का बोझ और हल्का कर सकें। नारी मुक्ति के बारे में वो औरतें सोचती हैं जिनकी जुबान पर हमेशा रहता हैये दिल मांगे मोर



तथ्य और आकडे साभार.....9University of North Carolina, 7National Institute of Justice (pages 6-7), 8Family Violence Prevention Fund,10National Coalition of Anti-Violence Programs (NCAVP), 11http://www.bhartiyapaksha.com/?p=1634

१-Bureau of Justice Statistics,

2Deptartment of Justice,

3Centers for Disease Control and Prevention (CDC),

4National Coalition Against Domestic Violence (NCADV),

5Bureau of Justice Statistics (table 2, page 15),

6US Census Bureau (page 12),





29 comments:

  1. बहुत ही खोजपरक पोस्ट प्रस्तुत की है!
    --
    मित्र दिवस पर शुभकामनाएँ स्वीकार करें!

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  2. beta ab to tum bach nahi paoge aa rahin hongi ledy don heheheheh

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  3. ab to tujhe comment bhi nahi milega, ab dekho tumane Mahfooj ka raj khol diya to tymhari ada didi bhi chali gayi,

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  4. ab dukhi aadami apanaa ronaa kahee to tovegaa naa...lekin baalgopal koee naee sunegaa....baat sachchiee hai magar maannegaa kon...

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  5. are abhi tak Rachna nahi aayi, kya hua use............

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  6. अब नारीवाद को ठीक से समझने की कोशिश कर रहा हूँ -

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  7. आज की दुनिया का कटु शाश्वत वास्तविक सत्य ..

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  8. मित्र दिवस पर शुभकामनाएँ

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  9. khoj parak rachna......achchha laga padh kar!!

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  10. क्या आपने हिंदी ब्लॉग संकलन के नए अवतार हमारीवाणी पर अपना ब्लॉग पंजीकृत करा लिया है?
    इसके लिए आपको यहाँ चटका (click) लगा कर अपनी ID बनानी पड़ेगी, उसके उपरान्त प्रष्ट में सबसे ऊपर, बाएँ ओर लिखे विकल्प "लोगिन" पर चटका लगा कर अपनी ID और कूटशब्द (Password) भरना है. लोगिन होने के उपरान्त "मेरी प्रोफाइल" नमक कालम में अथवा प्रष्ट के एकदम नीचे दिए गए लिंक "मेरी प्रोफाइल" पर चटका (click) लगा कर अपने ब्लॉग का पता भरना है.
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  11. खोजपरक लेखन. बधाई.

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  12. बहुत सुन्दर लिखा है आपने ! उम्दा प्रस्तुती!
    मित्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ!

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  13. man sab chhodiye kal gaya tha sunday ghar ke sadasyon ke sath sham ko ghmne

    wahan ameer ghar ki ladkiyan nange-adhnange kapdon swachnd wicharan kar rahee thin

    usi park ke pass lohiya park par pichhle hafte ladki nangawastha aur sambhograt p[akadi gayee thi...

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  14. aur haan mithilesh aapko ISLAM men nari ke adhikaar namak mera lekh bhi padhne kii salaah deta hoon...

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  15. bhiya wah kya likha hai aapne, bolti band han

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  16. Grow up bhai(हाँ तुम्हे छोटे भाई जैसा ही मानता हूँ).. नारीवादी को अमेरिकी सभ्यता से जोड़ना इस लेख कि महत्ता को बिलकुल कम कर दिया है..
    वैसे भारत का सही आंकड़ा(पुलिसिया नहीं) क्या कहता है?

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  17. आपकी पोस्ट पढी.. बडे ज्ञानी पुरुष मालूम पडते है आप।
    बस कुछेक सवाल थे जैसे भारतीय महिलाओ पर हुये ऎसे सर्वे क्या कहते है?
    - ग्रामीण क्षेत्रो मे सवेरे सवेरे शौच जानी वाली कितनी महिलाओ के साथ पूर्ण या आंशिक बलात्कार होते है? उनको तो पश्चिम सभ्यता का ’प’ भी नही पता।
    - उसके अलावा हमारे भारतीय संस्कृति को ओढ़ कर रखने वाली महिलाओं के साथ उनके घर में ही कितने पूर्ण या आंशिक बलात्कार होते हैं? उन्होंने तो भारतीय संस्कृति को ओढ़ रखा है, पश्चिम सभ्यता की तरफ़ उनका भी कोई रुझान नही।
    - रोज ऑफिस आने जाने वाली वो महिलाएं जो पश्चिमी सभ्यता का प तो जानती हैं लेकिन तब भी आप जैसे दार्शनिक लोगों को ध्यान में रखकर भारतीय संस्कृति को रोज़ ट्रेन/बस में आते जाते जीती हैं| आपके द्वारा बताये गये पहनावो को पहनती है। उनमें से कितनों के साथ पूर्ण या आंशिक बलात्कार होता है?

    बिना इन आंकड़ो के तो आपकी बात अधूरी रहेगी|
    और ये आंकड़े आप जुटाएंगे कहाँ से? इसके लिए तो आपको आँखें खोलनी पड़ेंगी|
    अब आप कहेंगे की आपकी आँखें तो पहले से ही खुली हुई हैं तो इसके लिए मेरे पास सच में कुछ भी कहने को नहीं है...

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  18. @ पंकज और पी.डी. , मैं इस पोस्ट पर टिप्पणी नहीं करने वाली थी. पर तुम लोगों की टिप्पणी देखकर कुछ साहस कर पायी हूँ.
    सलीम ख़ान said...
    man sab chhodiye kal gaya tha sunday ghar ke sadasyon ke sath sham ko ghmne

    wahan ameer ghar ki ladkiyan nange-adhnange kapdon swachnd wicharan kar rahee thin

    usi park ke pass lohiya park par pichhle hafte ladki nangawastha aur sambhograt p[akadi gayee thi...

    मैं इस टिप्पणी के कारण ही वहाँ कुछ नहीं लिख रही थी. इसकी सबसे नीचे वाली पंक्ति पर गौर करें , क्या कभी ऐसा हो सकता है कि एक लड़की अकेली इस अवस्था में पकड़ी जाए, लड़का नहीं रहा होगा क्या? पर सलीम भाई को सिर्फ लड़की दिखी. सलीम भाई की मैं नहीं जानती, लेकिन यहाँ डी.यू. में लड़के-लड़कियाँ हाफ पैंट पहनकर घूमते हैं, तो लड़कियाँ मुझे छोटी-छोटी प्यारी सी बच्चियां लगती हैं और लड़के भी. अगर आपकी नज़रें साफ़ हैं, तो आपको सभी में सात्विकता नज़र आनी चाहिए. दुर्गा पूजा में माँ दुर्गा की नग्न मूर्तियां कैसे बनाते हैं मूर्तिकार, क्योंकि उन्हें उसमें माँ नज़र आती है.
    और एक बात नारीवाद की सबसे अधिक भर्त्सना वो करता है जिसे इसकी क ख ग घ भी नहीं आती.

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  19. Agree with PD, Pankaj and Mukti!
    Need I say any more?!

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  20. मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  21. Mukti ji........

    और एक बात नारीवाद की सबसे अधिक भर्त्सना वो करता है जिसे इसकी क ख ग घ भी नहीं आती.

    वैसे अगर सच बताऊँ तो मुझे एस तरह के घटिया वाद को समझना भी नहीं चाहिए , और न ही मेरा मन होता है की मई इसको समझूँ , और हाँ अब तक जो समझा उससे ही सब कुछ समझ आ गया , वास्तव में जिन्हें कुछ कम नहीं होता न वही नारी उत्थान की बात करते है , और हाँ ऐसा कहने वाले लोग खुद कुछ नहीं करते लेकिन हाँ करने की बात जरूर करते हैं , और इसे बहाने रोजी रोटी भी चलती है इनकी , नहीं जितना ये बात करती है न अगर नारीवादी महिलाएं उतना करती तो स्थिति बहुत अच्छी होती , और जो स्थिति आज है वह समय के अनुरूप है, इनमे इनका इनका योगदान कुछ नहीं है. ये हमेशा दुहाई देती है नारी उत्थान की लेकिन ऐसा क्यूँ करती हैं जब पूछा जाता हैं तो इनका जवाब होता क्यूंकि मैंने ये सब झेला, क्या बात है अपने वक्तिगत मामलों के निपटारे, बदले के लिए ये नारीवादी महिलांए दूसरी महिलाओं को बहकाती हैं हैं और अपने निजी स्वार्थ के लिए इनका प्रयोग करती हैं..................

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  22. भारतीय स्त्री के सन्दर्भ में अमेरिका और इंग्लैंड के आंकड़े?? ये कैसी तुलना है?
    " लेकिन इनका वास्तविक चेहरा क्या है ये कम लोगों को ही ज्ञात होगा । होगा भी कैसे प्रगतिवाद का अँधा चस्मा जो लगा है । " - प्रगतिवाद का चश्मा? इसपे कुछ प्रकाश डालेंगे?

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  23. मेरे ख्याल से अब इस मुद्दे की इतिश्री यहीं कर देनी चाहिए.. खुद मिथिलेश ने माना है कि उसे इस विषय कि समझ नहीं है और वह समझना भी नहीं चाहता..

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  24. मेरे ख्याल से अब इस मुद्दे की इतिश्री यहीं कर देनी चाहिए.. खुद मिथिलेश ने माना है कि उसे इस विषय कि समझ नहीं है और वह समझना भी नहीं चाहता..
    PD what a sum up hats off

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  25. Mithilesh,
    You don't get it at all. Do you?

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  26. भारतीय समाज में नारी कि पूजा कैसे कि जाती है और उनको कैसे सम्मान दिया जाता है ये बात तो हमारी संस्कृति में सबसे प्रसिद्ध नारी चरित्रों के हाल से लगया जा सकता है | चाहे सीता कि अग्नि परीक्षा लेना और उसके बाद भी उनका त्याग कर देना हो या द्रौपती को संम्पति मान कर जुए में हारना फिर भरी सभा में उनका चिर हरन करना हो या विद्योतमा से शास्त्रार्थ में हराने के बाद कुछ विद्वानों द्वारा खुन्नस में उनका विवाह धोखे से कालिदास जैसे मुर्ख से करवाना हो इनको देख कर नहीं लगता कि कभी भी यहाँ पर नारी को ज्यादा महत्व और सम्मान दिया गया हो शायद इसका कारण भी इनका पश्चिमी सभ्यता में रंगना हो | पर सीता द्रौपती और विद्योतमा तीनो में ही स्वाभिमान कि कोई कमी नहीं थी | दुबारा त्यागे जाने के बाद सीता वापस राम के कहने पर भी उनके साथ नहीं जाती है और धरती में समां जाती है द्रौपती उसी सभा में अपने अपमान का बदला लेने कि कसम खाती है और बाद में उसे पुरा भी करती है या करवाती है और विद्योत्मा पति के मुर्ख होने कि बात जान कर उसे अपने घर से लात मार कर निकाल देती है | तो आज कि नारी इन चरित्रों से उस स्वाभिमान को सीख गई है जो पहले कि नारी नहीं सीख पाई थी हमें इसके लिए किसी पश्चिमी सभ्यता कि ओर देखने कि जरुरत नहीं है | और बहुत कुछ है कहने के लिए पर आप ने पहले ही कह दिया कि हमें तो कुछ समझाना ही नहीं है तो फिर हम क्या कहे |

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