Thursday, August 12, 2010

छिनाल कह दिया तो हंगामा क्यो है बरपा-----------मिथिलेश दुबे

आजकल जहां देखिए एक ही शब्द गूंज रहा है छिनाल और छिनाल । हां इससे ये फायदा जरुर रहा कि कम से कम बहुत लोगों को इसका मंतव्य स्पष्ट हो गया । मात्र एक शब्द को लेकर इतना हो हल्ला हुआ कि इसी मुद्दे के तले कामनवेल्थ का मुद्दा कहीं पाताल में जा समाया । लेकिन हाँ एक बात जो समझ नहीं आती मुझे कि अक्सर जब कोई बड़ा मुद्दा तुल लेने वाला होता है, तभी अचानक ऊपर से कोई ऐसा मुद्दा आ गिरता है कि दूसरा मुद्दा तो लापता ही हो जाता है । छिनाल शब्द जैसे क्या बोल दिया विभूति नारायण राय जी ने, नारी वादियों के मुहं में संजीवनी की बुंद डाल दी । इससे पहले नारी वादियों को कुछ सूझ तो रहा नहीं था कि अचानक से देखके मौका मार दो चौका वाली घटना हो गई । महिला संगठन ऊठ - जाग गई अरे ये नारी अपमान । हाँ तो फिर पिपीयाना शुरु क्या हुआ कि बंद होने का नाम ही नही ले रहा । हो भी कैसे जब तक मुद्दा जीवित तब तक दूकान में लोगो की आवाजाही तेज रहेगी साथ दूकान में खरीद परोख्त की घटना भी बढ़ जाएगी । यहाँ तक कि कुछ संगठनें तो मन्नतें मांग रही होंगी कि काश महिनें में एकाक ऐसी घटना होती रहती तो दूकान भी चलती रहती , और हम भी मजे मजें और ओ भी मजे, भगवान भला करे उसका । अब जरा देखिए अगर इस शब्द में नारी विरोधाभास होता तो जाहिर सी बात है सभी महिलाओं को होता, । लेकिन नहीं ऐसा नहीं हुआ इस मुद्दे को लेकर महिलाओं के मत भिन्न-भिन्न हैं, कारण इसके पिछे जो हो । राय जी के साथ काम करने वाली एक महिला लेखक ने उनको सही करार दिया और कहा कि ये उनका नीजि मत है । इतना सबकुछ जानने के बाद भी इतना हंगामा क्यों बरपा । राय जी ने माफी भी मांग ली लेकिन इसका ये मतलब निकालना कि वे गलत थे ठिक ना होगा । किसी के विरोधीयों की संख्या ज्यादा होगी तो जाहिर सी बात है कोई भी झूक सकता है जिसका जीता जागता सबूत राय जी हैं । नारी अपमान को लेकर उस मुद्दे को बेवजह इतना उछाला जा रहा जिसका नारी सम्मान और अपमान से दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं । हां हर बार की तरह मीडिया का योगदान इस मुद्दे पर भी हावी दिख रहा ।
एक ऐसे शब्द के लिए तू-तू मैं-मैं हो रहा जिसका हमारे यहाँ खासकर गावों में प्रयोग सामान्य तौर पर न सिर्फ महिलाओं के लिए वरन पुरुष के लिए भी किया जाता रहा है और हो भी रहा है । गांव में अक्सर इस शब्द का प्रयोग भौजाई और मामीं करती हैं, साधारण मजाक के लिए तब इस बात को लेकर कोई अन्यथा नहीं लेता । ,हाँ यहाँ ये जरुर हो सकता है कि जो नारी हाई प्रोफईल नहीं है अथवा जो कम पढी लिखी है उसे अपमान ना समझ आता हो । राय जी के व्यकतव्य को लेकर महिला लेखकों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई और खूब हो हल्ला कर रही है , आखिर क्यों नहीं पता कैसे चलेगा मैं नारी के भले लिए सोचती हूँ , हां चाहे फिर वे महिलाएं खूद को नारी वादी और नारी संरक्षक कहने वाली अपने बहु को जिंदा जला दें तो कोई बात नहीं , लेकिन अगर ऐसा कुकर्म पुरुष कर दे तो उसपर दहेज के लिए मारने का आरोप तो लगेगा ही साथ महिला उत्पीड़न का भी आरोप भी लगाया जायेगा , और अगले दिन महिलावादी संगठन रोड पर दिखाई देंगी पोस्टरों और बैनरों के साथ । राय जी की टिप्पणी पर महिला लेखक मैत्रेयी पुष्पा ने कहा, "हम महिलाओं के सम्मान के लिए बड़ी लंबी लड़ाई लड़कर यहां पहुंचे हैं, लेकिन इस तरह के पुरुष हमें गालियां देते हैं, एक पत्थर मारते हैं और सब पर कीचड़ फैला देते हैं।" । जरा इनकी बातों पर ध्यान दीजिए ये कैसा विकास ये कैसा आत्मविश्वास,और ये कैसी जीत जो मात्र एक पत्थर मारने से टूट जाए, मतलब सब झूठ । भारतीय ज्ञानपीठ की साहित्यिक पत्रिका 'नया ज्ञानोदय' ने 'बेवफाई' विषय के शीर्षक के साथ अपने ख़ास अंक में विभूति राय का साक्षात्कार किया था। इसी के कुछ अंश अखबारों ने छापे।विभूति राय ने कहा, "पिछले कुछ वर्षों में कुछ महिला लेखिकाएं ये मान के चल रही हैं कि स्त्री मुक्ति का मतलब स्त्री के देह की मुक्ति है। हाल में कुछ आत्मकथाएं भी आई हैं जिनमें होड़ लगी है कि कौन सबसे बड़ा इन्फेडेल है। मैं अपने साक्षात्कार में इसे गलत बताना चाहता था।"
अब इसमे ऐसा क्या कहर बरपा दिया राय जी ने जिससे नारी अपमान हो गया । अगर पुरुष ऐसा कहता है तब गलत है और जबकि महिला लेखिकाएं एक बिस्तर पर कितनी बार जैसे शिर्षक के साथ आत्मकथाएं लिखती है तो वो ठिक है, ये कैसा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है समझ के परे है। हाँ उन्हे ज्यादा मिर्ची लगी जिन्होने अपना एजेण्डा नारी विकास के लिए स्त्री देह को बना रखा है । ये एसे लोग है जो स्त्री देह मुक्ति को नारी मुक्ति मानते है, जिनकी नजरों मे अगर नारी को मनमाफिक कपडे पहनने की आजादी दे दी जाए तो नारी पूणतः मुक्त कही जा सकती है स्त्री , बस जी इसी का विरोध किया राय जी ने । क्या हाल हुआ उनका ये सब को पता है । लेकिन हाँ इससे बहुत से लोगों को फायदा भी हुआ जैसे नारी वादी संगठनों का तो हुआ ही साथ ही बहुत से लोग खूद को नारी का शुभचिंतक बनाने में भी लगे हुए हैं । मतलब अंतिम मै जय हो बाबा राय जी की, बीच-बीच में आते राहियेगा, और आमदनी बढवाते रहियेगा ।

41 comments:

  1. baj nahi aaoge tum vivad sapad lekh likhne se

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  2. मिथिलेश भाई,
    इस मुद्दे पर जैसा आपने‍ लिखा है कि भाई लोग भी और बहनें लोग भी अपनी अपनी रोटी सेंकने में लगें हैं। पर मेरा मानना है,एक-विभूति जी ने जो कहा,वह उनकी राय है। वे उसे कह सकते हैं। सहमत होना असहमत होना सबका अधिकार है। लेकिन अपनी बात को जब आप सार्वजनिक मंच से कहते हैं तो आपको एक मर्यादा रखनी पड़ती है। वह उनको रखनी चाहिए थी। और ये तब और आवश्‍यक हो जाता है जब आप‍ किसी महत्‍वपूर्ण सार्वजनिक पद पर बैठे हों। इसलिए माफी गलत बात कहने के लिए नहीं,सही बात को गलत तरीके से कहने के लिए मांगी जानी चाहिए।
    दूसरी बात वि‍भूति जी से ज्‍यादा दोषी कालिया जी हैं। विभूति जी ने जो कहा उसे कालिया ने छापकर और फैलाया। यह संपादकीय आचरण के खिलाफ है। कम से कम ज्ञानपीठ की पत्रिका से तो हम यह अपेक्षा नहीं कर सकते।
    तीसरी बात कितने बिस्‍तरों में कितनी बार किसी भी लेखिका की आत्‍मकथा का शीर्षक नहीं है। विभूति जी ने कहा कि तथाकथित लेखिका की आत्‍मकथा का शीर्षक यह हो सकता था। यह बात भी बहुत अशोभनीय तरीके से कही गई।
    चौथी बात सब नारी संगठनों को एक ही लाठी से हांकना ठीक नहीं है।
    हर मुद्दे पर ध्रुवीकरण होता है, सो इस पर भी हो रहा है। हर मुद्दे पर अतिवादी लोग होते हैं इसमें भी हैं।
    मुझे लगता है इस पर बहुत विमर्श हो चुका है। इसे यहीं छोड़ देना चाहिए।

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  3. महोदय,

    प्रस्तुत आलेख के असली लेखक का नाम दें तुरंत अन्यथा कारवाई के लिए तैयार रहें. आपके हर लेख का उचित सबूत है. चौर्यता उचित नहीं है. इस आलेख के लेखक का नाम तुरंत दें. नहीं तो हम देंगे, मय सबूत के साथ.

    अभिषेक गुप्ता

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  4. महोदय,

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    अभिषेक गुप्ता

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  32. Abhishek gupta

    Abe sale tere maa ki............bho.......agar apni maa ka dudh piya hai aur to samne aa aur bata ki kon se lekh churaya hai maine, agar tu ek baap ka beta hoga to samne jaroor aayega, aur beta tum tyara raho , mujhe pata chal gaya hai ki ye cooment lucknow se aa raha hai, jald hee eske onwer ka bhi pata chal jayega tab sale tujhe bata hun

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  33. abe Abhishek sale gayab khana ho gaya samne aa

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  34. Mithilesh bhai I admire your guts to call a spade a spade.Keep it up.I hope your efforts to expose the misdeeds of feminist do not go in vain.It's quite clear that feminists are weakening the pillars of Indain society,making it imperative that they are given a fiiting respose in languauge they understand.It's high time feminists of all brands are shown the door !!

    Arvind K.Pandey
    http://indowaves.instablogs.com/

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  35. ये मिथिलेश का ही मौलिक लेख है ,वर्तनी की गलतियाँ प्रमाण हैं ! :)
    और हाँ ,अगर वी एन राय के वक्तव्य को ध्यान से देखें तो स्पष्ट यही होता है की वे नारियों के छिनाल होने पर निषेधात्मक हैं न की उन्होंने किसी महिला लेखिका /लेखिकाओं को छिनाल कहा !

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  36. ये मिथिलेश का ही मौलिक लेख है ,

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  37. मेरे ख्याल से राजेश उत्साही नें काफी संतुलित प्रतिक्रिया दी है...किन्तु आपको अपनी बात कहने का पूरा हक़ है ! असहमति के सुर को सम्मान देने में हमारी पूर्ण सहमति है !

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  38. are rey yahan to acchi khasi gehma-gehmi hai..manna padega..dubey ji...kalam ki dhaar tez hoti ja rahi hai :)

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  39. mithilesh ( bhai ), vaise jis andaaz kee gaaliya comment mai aap de rahe hai unke baad bhai kahte ajeb lag rahaa hai. bhaashaa kaa samyam kab seekhoge?

    mujeh nahee lagtaa ki ye lekh kahee se copy kiyaa huaa hai lekin pichhle kuchh lekho se logo kee aisee dhaaranaa ban gayee hai to ise todnaa bhee tumhaare jimmedaare hai.

    jahaa tak sawaal hai chunautee kaa ki koi tumhaare saamane aakar proov kare lucknow mai yaa kahee aur to ise mai tumhaaraa bachapanaa hee samajhtaa hoo. isliye sangyaan nahe letaa. vaise mere pas aapkee 4-5 post kaa snap shot hai jahaa aapne kisee aur ke lekh ko jyo kee tyo apne blog pe diyaa hai. chunki vo meraa likhaa huaa nahee hai isliye mei tumse aisee koi ashaa nahee kartaa ki tum iske liye khed vyakt karo lekin ek urjaavaan lekhak ko salaah dena chahunga ki blog jagat koi akhaadaa nahee hai. aap apnaa kam kariye aur doosro ko unkaa kaam karne deejiye. jab blog pe likhaa hai to tasallee ke saath uske liye jawab deh baniye.

    aapake urhaa banee rahe. shubhkaamanaaye.

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  40. comment moderation lag gayaa hai ye theek kiyaa. naahak aapattijanak tippniyio se bachenge.

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  41. मिथिलेश जी ... आपको पूरा हक़ है अपनी बात कहने का ... और ये आपका ब्लॉग ही ... किसी को अच्छा न लगे तो वो न पढ़े ...

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