Thursday, December 2, 2010

दैहिक प्यास या बलात्कार---------मिथिलेश दुबे

,आधुनिकता की आंधी अपने पूरे उफान पर है , अब यह वहाँ पहुँच चुकी है जहाँ से पिछे की ओर रुख करना बेमानी होगी, और नामुमकिन भी है । आधुनिकता की आड़ में वह सब समय से पहले किया जा रहा जिसे समय से पू्र्व करना कभी हमारे समाज में अपराध माना जाता था, अब वह सब बीक रहा है जो कभी अमूल्य हुआ करता था । अब बाजारो में कौमार्य की बीक्री भी शुरु हो गयी है, दुःखद लेकिन सत्य । अब शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाना आम बात हो गयी और अब तो इसको कानुनी मान्यता भी मिल गयी , शायद बदलते समाज और समय की यही माँग है , इस फैसले से हमारा प्रभूत्व वर्ग बहुत खुश हुआ । पहले कहा जाता था लड़का , लड़की जब जवान हो जायें तो उनकी शादी कर देनी चाहिए , कारण....... ताकि सामाज के साथ-साथ खुद की उनकी शारीरिक जरुरतों की पूर्ती हो सके , लेकिन ये बातें अब तो पुरातन सी लगती हैं ,अब तो लगता है कि ये आदमखोर के जमाने की बात होगी । वर्तमान समय में ना तो समाज की चिंता है और ना ही वर्जनाओं के बिखरने का , जब सारी जरुरतें कम से कम शारीरिक, बिना शादी के ही पूरी हो रही है तो शादी जैसे बंधन में बंधना लोगो को नागवार सा लगने लगा । जिसकी पवित्रता की बातें होती थी उसे अब खुलेआम बे आबरु किया जा रहा है बिना किसी लज्जा और शर्म के ।
पर एक बात जो हमेशा से कही जा रही कि जहाँ अति होता है वहाँ विनाश भी जल्द शुरु हो जाता है , जिसका आरंभ धीमा ही सही परन्तु शुरु हो चुका है । वाकया है मुंबई का , जहाँ एक प्राइवेट एयरलाइंस मे काम करने वाली एक युवती ने अपने सहकर्मी युवक पर बलात्कार का आरोप लगाया है , पुलिस के मुताबिक वरुण नामक युवक उस युवती को शादी का झांसा देकर उसका पिछले दो सालों से बलात्कार कर रहा है , अभी तक जितने भी बलात्कार की घटना हुई है उनमे मुझे ये घटना सबसे हास्यास्पद लगी ,और मजे के बात यह है कि दोनों पिछले कई सालो से एक साथ एक ही फ्लैट मे साथ-साथ रहते थे ,आखिर हो भी क्यों ना जहाँ तक मैं बलात्कार के बारे में जान पाया हूँ वह क्षणीक और जबरन किया जाता है , अब लगातार दो साल बलात्कार करना , अजीब लग रहा है सूनने में, मुझे तो लगता है कि बलात्कार करवाने के केस करना चाहिए उस युवक को । अब आप लोग भी जरा सोचिए कि इतना लंबा बलात्कार हो सकता है क्या ??
दो साल लगातार हवस की आंधी मे बहकर हम विस्तर होने के बाद बलात्कार का आरोप लगाना किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता । शादी युवक ने क्यों नहीं की किस कारण जानलेना भी जरुरी बनता है । जब इतनी ही चिंता थी अपनी इज्जत की तो पहले क्यों नहीं सोचा ? गलती लड़के की भी है परन्तु उसने तो किसी पर बलात्कार का आरोप नहीं लगाया । इस पूरे प्रकरण नें इस बात की गवाही दी है कि लिव इन रिलेशनशिप
किसी भी तरह से जायज नहीं है हमारे समाज के लिए । ऐसे रिश्तो का कोई मानक नहीं होता बल्कि ऐसे रिश्ते दो आत्मओं के मिलन जैसे पवित्र रिश्ते को दागदार करते हैं, ऐसे रिश्तो से मात्र दैहिक शोषण में वृद्धी होगी । , जिसका उदाहरण हम ऊपर देख ही चुके हैं । इसे आधुनिकता की अंधता ही कहा जा सकता है कि रजामंदी से बने बने शारीरिक संबन्ध को बलात्कार जैसे घृणीत कार्य की संज्ञा दी जा रही है । परिवर्तन प्रकृति का नियम है परन्तु ये परिवर्तन नैतिकता के उत्थान की ओर हो ना कि पतन ओर हो ।

दो महिने बाद ब्लोगिंग मे फिर से वापसी हो रही , उम्मिद करता हूँ कि सबकुछ ठिक-ठाक चलेगा । इस मेरे अनुपस्थिति में जिन लोगों ने मुझे याद किया उनका शुक्रगुजार हूं । कोशिश करुंगा कि जहाँ से छोड‌ गया ब्लोगिंग उसके वहीं से शुरुआत करूंगा , खैर एक पुराना लेख पढिये जिसे मैं समय पर पोस्ट नहीं कर पाया ।


17 comments:

  1. वेलकम बैक :पुराना नहीं अब नए की गुजारिश है ....

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  2. तुम वापस आ गये तुम्हारा स्वागत है।

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  3. पुनः स्वागत है। जिसने 2 साल जो भी किया, क्या अन्तर पड़ता है कि अब उसे क्या नाम दिया जाता है।

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  4. मिथलेश जी, अभी इत्ता ही कह सकते हैं स्वागत है ....

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  5. दूसरे किस्से के बारे में आपकी बात सही है. लेकिन ९९.९९ प्रतिशत बलात्कार स्त्री के ऊपर जुल्म होता है, उसकी आत्मा तक रौंद दी जाती है. बाद में उसे फिर जलालत झेलना होती है, थाने-अदालत-समाज में.

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  6. इस आशा के साथ की अब नियमित रहोगे , स्वागत है मिथिलेश !

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  7. यह तो थ्री इडियट्स का बलात्कार लग रहा है :)

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  8. .

    स्त्री के शारीर का नहीं, उसके विश्वास का बलात्कार किया गया है दो वर्ष तक।

    .

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  9. ये तो कोई बलात्कार नहीं हुआ. कि दो साल साथ रहे और फिर अलग हो रहें हो तो बलात्कार का नाम दे दिया.

    एक पति और एक पत्नी , जिनकी शादी हुए मात्र दो साल हुए और वो अब तलाक ले रहे हैं तो क्या पत्नी आरोप लगा सकती हैं कि उसके पति ने लगातार दो साल तक बलत्कार किया किया हैं.

    में इसमें दोष लड़के और लड़की दोनों का ही दूंगा , और सबसे ज्यादा लड़की को , कि आखिर बिना शादी किये उसने लड़के को अपना सब कुछ क्यों दे दिया.

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  10. स्वागत है मिथिलेश भाई एक बार फिर...

    ZEAL जी ने बहुत सही बात कही है....कोई लड़की हो या लड़का,जब किसी पर भी विश्वाश कर लेता है तो जिस पर वो विश्वाश करता है,उसके लिए उसका सब कुछ प्रस्तुत होता है!विश्वाश की डोर में बंधे हुए जन एक दुसरे के लाभ में स्वयं की अधिकतम क्षति को भी न्यून ही मानते है और असल में लगता भी ऐसा ही है!हाँ;ऐसा हो सकता है कि गलत पर विश्वाश कर बैठे...फिर वही होता है जैसा आपने बताया है.....

    लेकिन मै आपकी इस बात से सहमत हूँ कि ये रिश्ता दैहिक शोषण को पोषण ही प्रदान करेगा.....

    आज भी आप पहले कि तरह ही उत्तेजक,जोशीला और तथ्यपरक लिख रहे हो भाई....

    सब ठीक ही रहेगा...

    शुभकामनाये स्वीकार करें..

    कुंवर जी,

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  11. Tarkeshwar Giri की बात भी विचारणीय है।

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  12. पहले कहा जाता था लड़का , लड़की जब जवान हो जायें तो उनकी शादी कर देनी चाहिए , कारण....... ताकि सामाज के साथ-साथ खुद की उनकी शारीरिक जरुरतों की पूर्ती हो सके ,

    यही हल है

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  13. दिव्या ने सही कहा उस लड़की के विश्वास का बलात्कार हुआ है. लेकिन इस मैं ग़लती दोनों की है..यदि शादी करना ही उस लड़की की इच्छा थी तो शादी के पहले शारीरिक सम्बन्ध क्यों बनाई और यदि बनाये तो दोनों बराबर के मुजरिम हैं. बलात्कार जैसी कोई यहाँ समझ नहीं आती.

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  14. स्वागत है मिथिलेश भाई एक बार फिर...

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  15. प्रिय मिथिलेश जी ,
    इस मसले में अनुभवहीनता आड़े आती है वर्ना खालिस सच ही टिपियाकर जाते ! अब कहना ये है कि बात दोतरफा हो सकती है ! यानि कि दोनों पक्ष दूध के धुले होंगे ऐसा मानना मुश्किल है !
    बाकी आप हमारी टिप्पणी पर विश्वास करने से पहले अनुभवी बन्दों की टीप पर ध्यान दीजियेगा ! हमारा क्या है हमें तो शक करने की आदत पडी हुई है ! जब तक डिटेल जानकारी ना हो मुकम्मल राय कायम नहीं करते !

    आप ब्लागिंग में लौट आये खुशामदीद :)

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  16. दूबे जी,
    स्वागत है.
    मैं तो चुप ही रहूँगा.
    आशीष
    ---
    नौकरी इज़ नौकरी!

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  17. आपने एक गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान दिलाया है ..दिव्या जी ने सही कहा है ...आपका स्वागत है
    चलते चलते पर कभी नजर आयें तो बेहतर होगा ...

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