Friday, December 10, 2010

रिश्ते बंद है आज चंद कागज के टुकड़ो में---------मिथिलेश दुबे


रिश्ते बंद है आज
चंद कागज के टुकड़ो में,
जिसको सहेज रखा है मैंने
अपनी डायरी में,
कभी-कभी खोलकर
देखता हूँ उनपर लिखे हर्फों को
जिस पर बिखरा है
प्यार का रंग,
वे आज भी उतने ही ताजे है
जितना तुमसे बिछड़ने से पहले,
लोग कहते हैं कि बदलता है सबकुछ
समय के साथ,
पर
ये मेरे दोस्त
जब भी देखता हूँ
गुजरे वक्त को,
पढ़ता हूँ उन शब्दो को
जो लिखे थे तुमने,
गूजंती है तुम्हारी
आवाज कानो में वैसे ही,
सुनता हूँ तुम्हारी हंसी को
ऐसे मे दूर होती है कमी तुम्हारी,
मजबूत होती है
रिश्तो की डोर
इन्ही चंद पन्नो से,
जो सहेजे है मैंने
न जाने कब से।।

22 comments:

  1. इक प्रेमी के दिल की आवाज जब निकलती है ना तो बिन सोचे ही कविता बन जाती है...काव्य गंगा बहने लगती है,जो प्रेम के रिश्ते को और भी पावन कर देती है....बहुत ही मर्मस्पर्शी रचना.......

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  2. -मजबूत होती है
    रिश्तो की डोर...
    और वक्त
    गुजरता जाता है ...
    बदलता है सबकुछ
    समय के साथ...

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  3. रिश्ते बंद है आज

    चंद कागज के टुकड़ो में,

    जिसको सहेज रखा है मैंने

    अपनी डायरी में,

    कभी-कभी खोलकर

    देखता हूँ उनपर लिखे हर्फों को

    जिस पर बिखरा है

    प्यार का रंग,

    वे आज भी उतने ही ताजे है


    ..जो सबसे दूर चला जाता है वही बार बार सबसे पास दिखता है ..... ,... सच में ये प्यार अजीब कशिश है ........ प्यार का रंग कभी सुर्ख कभी झीना ...
    बहुत अच्छी रचना ..बहुत कुछ याद आने लगा .........

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  4. अच्छी कविता ....और कमेन्ट करूँगा तो शायद आपकी समझ न आये ! :) जैसे यह परकीया ही है न ?

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  5. सच कहा रिश्तों की डोर मन से बंधी होती है और मन किसी का मोहताज़ नही होता …………सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  6. यादें.. इस रूप में भी सुन्दर होती हैं.. हैं..

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  7. पन्ने में बन्द रिशते सदा ही कुछ न कुछ बोलते हैं।

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  8. पन्नो मे बन्द रिश्ते तन्हाई मे बहुत साथ देते हैं। इन्हें उम्र भर सहेजे रखना--- मिलने के बाद भी। कवितायें अच्छी लिखने लगे हो। बहुत बहुत आशीर्वाद।--- हाँ पन्नों वाली कब मिल रही है?

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  9. बहुत बढिया लिखा है !!

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  10. truly brilliant..
    keep writing......all the best

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ....भाव पूर्ण रचना

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  12. भावुक करती बहुत सुन्दर रचना
    पढना अच्छा लगा
    आभार



    क्रिएटिव मंच के नए कार्यक्रम 'सी.एम.ऑडियो क्विज़' में आपका स्वागत .
    यह आयोजन कल रविवार, 12 दिसंबर, प्रातः 10 बजे से शुरू हो रहा है .
    आप का सहयोग हमारा उत्साह वर्धन करेगा.
    आभार

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  13. बिल्कुल सही मिथिलेश ...... बहुत सुन्दर लिखा है.......

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  14. उफ़ ये प्यारे ख़त.
    सुन्दर अभिव्यक्ति.

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  15. हर्फों की शक्ल में ही सही वो आपके पास तो है ना ! भावनात्मक दृष्टि से बड़ी अच्छी कविता है ! सुन्दर प्रविष्टि !

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  16. मिथिलेश जी
    सस्नेहाभिवादन !
    आशा है, सपरिवार स्वस्थ-सानन्द हैं ।

    एक श्रेष्ठ विचारक जब प्रेम कविता लिखता है तो उसमें भी एक संदेश समाहित होता है । बहुत ख़ूब !

    पढ़ता हूँ उन शब्दो को
    जो लिखे थे तुमने,
    गूजंती है तुम्हारी
    आवाज कानो में वैसे ही,
    सुनता हूँ तुम्हारी हंसी को
    ऐसे मे दूर होती है कमी तुम्हारी,
    मजबूत होती है
    रिश्तो की डोर
    इन्ही चंद पन्नो से,
    जो सहेजे है मैंने
    न जाने कब से।।


    मिथिलेश जी
    एक गीत अचानक याद आ रहा है
    बेदर्द को ऐ दिल याद न कर
    तड़पे'जा यूं ही, फ़रियाद न कर

    बहरहाल, अच्छी कविता के लिए आभार बधाई !

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  17. बहुत सुन्दर, लाजवाब और मर्मस्पर्शी रचना प्रस्तुत किया है आपने! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है! बधाई!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com

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  18. रिश्ते बंद है आज
    चंद कागज के टुकड़ो में,
    जिसको सहेज रखा है मैंने
    अपनी डायरी में
    अच्छी कविता के लिए आभार

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  19. मिथिलेश भाई, गहरी बातें कहीं हैं। अच्‍छा लगा इन्‍हें पढना।

    ---------
    दिल्‍ली के दिलवाले ब्‍लॉगर।

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  20. saheje rakhiye...har baat, har bisaat, har pahluuu ko, kaheen wakt ki aandhiya yaadon ko udaa na de..............

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