एक बार फिर हाजीर हूँ मैं, साधारण भाषा में इसे पूर्नजन्म भी कह सकते हैं । मेरा ब्लोगिंग को छोड़ने का फैसला गलत था इसका एहसास मुझे प्रतिक्रिया मिलने के बाद हुआ । ब्लोगिंग छोड़ने का फैसला लेना मेरे लिए बहुत मुश्किल था , लेकिन कभी-कभी भावुकता वश कुछ गैर जरुरी फैसले हो जाते हैं जो कि मैंने किया । इन दिंनो लिखना तो पूर्णतया बन्द था , लेकिन पढ़ना यथावत चलता रहा, शायद इसे आप ब्लोगिंग का नशा ही कह सकते है कि दूर रहकर भी पास था । इस दर्मीयान मुझे अपनो का बहुत प्यार मिला जिनका सदा-सदा आभारी रहूंगा , ये अपने को प्यार ही है कि मै दोबारा से वापस आ पाया हूँ । ब्लोगिंग छोड़ने पर मुझसे प्यार करने वालो ने कहा कि ये फैसला तुम्हारा किसी भी विधा से सही नहीं है , साथ डांट भी पड़ी । वहीं कुछ लोग खुश भी हुए होंगे कि चलो एक दुश्मन गया , लेकिन उन्हे पता नहीं कि जहाँ अपनो का प्यार होता है वहाँ बड़े-बड़े घूटनें टेक देंते है । उन सभी का शुक्रगुजार हूँ जिन्होनें मेरा लगातार मेरा साथ दिया और मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा ।
अब आता हूँ वहाँ जहाँ मैं रुका था , बात वहाँ हो रही थी हिन्दी ब्लोगिंग में बढ रहे बेवजह पोस्टो की, इसको लेकर मैंने एक पोस्ट लिखी , पोस्ट क्या लिखा जैसे बवाल हो गया , क्यों हुआ ये तो सबको ही मालुम है । मेरे मात्र मोहतरमा शब्द के प्रयोग को लेकर जो कुछ भी हुआ उससे मन बहुत आहत हुआ , आखीर हो भी क्यों ना , जब कोई अपनी हि पोस्ट में गालियां लिखता है , पोस्ट शिर्षक को ही ऐसे शब्द देता है जो कि गालियां समान ही होती है तो कोई नहीं बोलता , क्यों क्यों की चटुकारीता वालो की संख्या ज्यादा होती है । यहाँ अगर आप बड़े ब्लोगर हैं बहुत दिंनो से लिख रहें है तो कोई आपका कुछ नहीं कर पायेगा आप जाहे जो कुछ भी लिखते रहिए ब्लोगिंग के नाम पर । चाहे वह गालियों भरी शिर्षक हो या ऐसे ही अनुचित शब्दो का प्रयोग हो रचना में , कई बार तो ये होता है भड़काऊं और बेहद घटिया प्रकार का शिर्षक दिया जाता है , और बाद में जब पढने वाले उसका विरोध करते हैं तो उन्हे हटा दिया जाता है , और ये भी कहा जाता है कि ये शिर्षक तो रचना का ही भाग है । लेकिन उसमे परिवर्तन भी कर दिया जाता है , क्यों मैं पुछता हूँ क्यो परिवर्तन , अगर आपको लगता है कि आप सही हो और सही किया तो परिवर्तन क्यों ? और अगर आप अपनी गलती स्वीकांर करते हो तो मतलब भी साफ है ये सबकुछ आपनें जानबुझकर किया । अगर मैं कुछ भी ऐसा करता हूँ तो मैं गलत करता हूँ क्योंकि ये सब करने के लिए शायद बड़ा ब्लोगर बनना पड़ेगा , जिसके लिए शायद समय लगे ।
मेरे एक शब्द मोहतरमा के लिए जो कुछ भी हुआ मैं खूद हैरान था कि मैंने ऐसा क्या कह दिया , सभी ब्लोगरो का कहना था कि तुम्हे ऐसे किसी को कहना नहीं चाहिए , जबकी मैंने किसे कहा ये मुझे खुद ही नहीं पता , कुछ लोगो नें कहा कि तुम्हे बड़े ब्लोगरो के लिए ऐसे शब्दो का प्रयोगा नहीं करना चाहिए , तो सबसे पहले मैं बता दूं कि मैं जिसे भी जानता हूँ उसे उसके लेखन शैली और क्या कैसा लिखात है उससे जानता हूँ , नाकि कौन कितने दिंन से लिख रहा , या किसका बहुत बड़ा ग्रुप है , मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला , मैं तो वहीं लिखूंगा जो सच्चाई होगी फिर चाहे वह किसी के लिए भी हो । जिनका नाम मुझे बताया गया और कहा गया कि तुमने इनके लिए मोहतरमा शब्द का प्रयोग किया हैं , जबकि सच्चाई कुछ और ही है , मैं तो उनको जानता ही नहीं, मुझे क्या कोई कैसा क्या लिखता है , लेकिन विश्वास किजीए अगर मैं जानता होता उनके बारे में तो शायद लिख ही नहीं पाता , उनके बारे में पता होता तो ये भी पता होता कि कौन कितना बड़ा ब्लोगर है , लेकिन मेरी नादांनी ही कहिए कि मैं बडे ब्लोगर को जान नहीं पाया ।
इस बीच मैं सबसे ज्यादा परेशान था दोहरे मापदंड से , सच में ये बहुत दुःख देता है । ब्लोगिंग छोड़ने के फैसले के बीच मुझे बहुत से लोगो के दो चेहरे देखने को मिलें, कुछ लोगों के तो मेरे उस पोस्ट पर ही दिख गयी थी , कि कैसे लोग क्या-क्या लिखते हैं और मुझे कहते हैं कि मोहतरमा शब्द मत लिखों । ठिक है जो कुछ भी हुआ इस प्रकरण से बहुत कुछ सिखने को भी मिला अपने बडो़ से , शायद जो होता है वह अच्छे के लिए होता है । शायद आप लोगों को लग रहा हो कि मिथिलेश के तेवर अब बदल गयें होंगे तो ऐसा कुछ नहीं बल्कि मेरे तेवर में अब और भी धार आ गयीं है । जो कुछ भी हुआ मेरे लिए बहुत कष्टदायक रहा , लेकिन अपनो के लगातार प्यारा और न चाहने वालो के मिल रहें लगातार बददुंओं से जल्दी ही सबकुछ ठीक हो गया , और वापसी करनें में सफल हो पाया , एक बार फिर से उनका शुक्रगुंजार हूँ जिन्होनें मेरा साथ लगातार बनाये रखा ।
अब मैं ना हिम्मत हारूँगा
अपनी राह चलता जाऊंगा
घटिया तुच्छी बातो से
अब मैं ना डर जाऊंगा
आत्मविश्वास और साहस बढ़ गया
ब्लोगर जन का साथ मिल गया
कोई अब मुझे रोक नहीं सकता
मिल गया है जब प्यार अपनों का
घूंटनो पर कोई अब टिका नहीं सकता।