आज मैं कुछ नहीं कहूँगा आज मैं आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ जिसे सुनने के बाद आप भी शायद सोचने पर मजबुर हो जायें । हमारा देश विकास के पथ पर अग्रसर है, विकास हर क्षेत्र में हो रहा इससे कदापि इनकार नहीं किया जा सकता । देश आधनिकता की वय इस तरह पिस रहा है कि यह अपने खूद के अस्तित्व को भी मिटाने पर तुला है । अब हमारें देश में आधुनिकता के नाम पर वह सब किया जा रहा है जो कभी अमान्य था । अब लड़के लड़किया शादी से पहले सेक्स कर सकते हैं , बिना शादी के भी साथ रह सकते हैं वह भी मान्यता प्राप्त । इसी तरह बढ़ते आधुनिकता के आड़ में पल रहे बुरी चिन्तन का ही परिणाम है ये सच्ची घटना ।
बात अभी हाल के दिंनो की है , मुझे घर से आये हुए एक दो दिंन हुए थे , शाम का वक्त था कि अचानक से लाईट चली गयी , कुछ देर तक इन्तजार करता रहता जब लाईट नहीं आई तो घर से बाहर निकला और सोचा की थोड़ा पार्क में ही विचरण करा जाये जाके पार्क में बैठा रहा ,कुछ देर बाद टहलने लगा कुछ देर विचरण के लेने के बाद फिर से कहीं बैठने का मन हुआ , नजर पड़ी तो देखा मैं जहाँ बैठा था वहाँ कोई और बैठ चुका था । नजर घुमाने के बाद एक जगह खाली स्थान दिखा वहाँ जाकर बैठ गया । अभी कुछ देर ही बिते थे कि वहाँ एक सुन्दर महिला का आगमन हुआ , वह मेरे सामने वाली ब्रेचं पर आकर बैठ गयीं जो कि मुझसे कुछ ही दूरी पर स्थित था । मैंने देखा की उन मैडम के बैठने के कुछ देर बाद ही वहाँ उनके पास दो बच्चे आये , एक लड़का था और एक लड़की थी , एक के हाथ में बल्ला था दूसरे के हाथ में बोल थी , तभी मैडम का फोन बजा और वह फोन पर व्यस्त हो गयीं । मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैडम को गर्मी लग रही थी या नहीं , क्योंकि उनका पहनावा ही कुछ ऐसा था , उन्होनें आधा बाहीं नुमा कुर्ती जो कि किसी झिल्ली के समान लग रहा था उसे ऊपर पहन रखा था , और निचे जिंस ।
मैडम फोन पर व्यस्त थी , उनकीं बातें खत्म हुई , मैं भी पता नहीं क्यों बैठा था , मुझे जरा भी इसका अंदेशा नहीं था कि आज यहाँ वह होगा जिससे मैं दहल ही जाऊंगा । दोंनो बच्चे आपस में खेल रहे थे , मुझे बस इस बात की आशंका ही थी कि वे दोंनो बच्चे इनके ही है । दोंनो बच्चे खेल ही रहे थे कि अचानक उनमें झगड़ा शुरु हो गया , लड़की बड़ी थी , उसने लड़के को एक थप्पण मार दिया , लड़का भागते हुए आया और बोला मम्मी काजल ने मुझे मारा , मम्मी कुछ देर तक खामोश रहीं , मैं ये नजारा देख रहा था ,मम्मी और मेरी भी खामोशी तब भंग हुई जब मम्मी नें उस बच्चे को एक तेज तमाचा जड़ा और कहा कि " तुम्हे कितनी बार मना किया है कि घर के बाहर मुझे मम्मी मत बुलाया करो समझ नहीं आती तुम्हे अब चलो घर " मेरी आंखे खुली की खुली ही रह गयी और बिल्कुल हैरान हो गया । फिर मैंने सोचा कि शायद इसे ही विकास की संज्ञा दी जा रही बड़े शहरो में ।
अब आप क्या सोचते हैं जरुर बतायें ।