Wednesday, February 23, 2011

लौहांगना ब्लॉगर का राग-विलाप----------मिथिलेश










बधाई
दीजिए मुझे किसी लौहांगना ने गुंडे की उपाधि दी, ताली-ताली । आज मैंने दोस्तों को पार्टी दी और लौहंगना के खूब दृश्य बिहार किए । लेकिन सच मानिए दृश्य बिहार करते वक्त न पता क्यों मन भी अकुलित हो रहा है । हाँ आप स्थिति तो समझ ही सकते है मन अकुलाना क्यों होता है । मेरा वहां जाना और दृश्य बिहार करना ऐसे ही थोड़ी न था, बुद्धिजीवियों का जमावड़ा देख मैं भी पहुंचा और अब अंजाम मेरे सामने है । मोहतरमा ने मुझे गुंडा कहा और उपाधि से नवाजा । कितना आसान है ये उपाधि पाना आप भी चाहते हों तो कमेंट करिए, पर हाँ विपक्ष में करना तभी जल्दी उपाधि से नवाजे जायेंगे । गुंडा सुनकर पहले तो हैरानी हुई मैंने सोचा किसी के साथ जबरदस्ती यौनाचार तो नहीं कर दिया । खैर इसे यही छोड़ते हैं और मुद्दे पर दोबारा से आते हैं । मुझपर गुंडई का आरोप लगा है । आरोप लगाने वाला कोई और नहीं ब्लागजगत की एकमात्र स्वयम्भू आयरन लेडी हैं । वे जो दुसरों को भद्रता का पाठ पढा़ रही है, खूद एक झूठी और धूर्त महिला है जिसका उदाहरण आप दिए गये स्नैप शॉट में देख सकते है किस तरह से उस पोस्ट में संशोधन करके उस लाईन को हटा दिया गया है जिसके परिपेक्ष में मैंने वह कमेंट किया था । लेकिन मैडम भूल गयी कि उसी लाईन को लेकर शिव शंकर जी ने भी कमेट किया और अपना सवाल पूछा था जिसे मोहतरमा हटाना भूल गयी , जो आप स्नैप शॉट मे देख सकते हैं । उस लाईंन में महिलाओं को ये हिदायत दे रहीं थी कि महिलाओं को पुरुषों से कोई अपेक्षा नहीं करनी चाहिए । और मेरा कमेंट मात्र यही था कि आप खूद इसपर कितना अमल करती हैं । इस महिला की धूर्तता सामने आ चुकी है ।

आप ब्लोग स्वामी है आपकी स्वइच्छा पर निर्भर करता है कि आप कमेंट प्रकाशित करें या ना करें , लेकिन उस कमेंट को अभद्रता और गाली संज्ञान से जोडना कितना सही है ??? जबकि वह कमेंट आपके सामने है । इनका कहना कि वह कमेंट उस पोस्ट विषय के सापेक्ष नहीं था जबकि मेरा सवाल पोस्ट से जुड़े लाईन से ही था । और वह कमेंट उनके नीजी लाईफ से जुड़ा कैसे हो सकता है जबकि मैं उनके ब्लॉग पर पहली बार गया था शायद । मुझे भद्रता सिखाया जा रहा है मैडम के द्वारा । भाई वाह बहुत खूब अब वारांगनाए भी हमें तहजीब सिखाएंगी । वे हमें सिखा रही हैं जो खूद नीच शब्दो का प्रयोग करती आई हैं देवाताओं यानी पुरुषों के खिलाफ । जिसका एक छोटा सा उदाहरण आप गए स्नैप शॉट मे देख सकते हैं । जिसका खूद का चेहरा न पता कितनी ही बार नग्न हो चुका है वह ढकने की सलाह दे रहा है, बहुत खूब । मै तो इतना परेशान हो गया हूँ कल से कि भद्र और अभद्र में अन्तर ही भूल गया हूँ , समझ नहीं आ रहा कि भद्र और अभद्र की संज्ञा किसे दूँ । ब्लॉग जगत का बुद्धिजीवि लोग भी वहां पहुंचे और अपने विचार से अभद्रता को गलत ठहराया जो कि ठिक भी है । लेकिन किसी ने यह नहीं पुछा कि जिस कमेंट के प्रकाशित ना होने पर ये कमेंट किया गया वह कमेंट कहां गया ?? अब मैं उन ब्लॉग जनों से इस धूर्तता को लेकर उनकी राय जानना चाहूँगा ?? क्या वो कमेंट इतना अभद्र था जितना मोहतरमा ने अपने मुंह से बका है ?? जिसे स्नैप शाट मे देख सकते हैं ।

13 comments:

  1. भईया पूत के पांव तो पालने में वाली कहावत तो सुनी थी मगर ई लौह लेडी वाली गले के नीचे उतर नहीं रही हैं. ई कैसी लेडी हैं जो भाई को भाई और पति को पति नहीं मानती और तो और बाप को भी सीधे तौर पे गाली दे रही हैं.

    अरे भाई हमने तो ईस से येही पूछा था कि मोहतरमा दिल्ली और बम्बई कि गलियों में औरतो ने कब नग्न हो करके प्रदर्शन किया मगर पता नहीं भाई. हम तो ठहरे गंवार , बहुत से बे...... बुद्धजीवियों ने खुल कर बिना पूरा लेख पढ़े तारीफ कर दी उसकी , आखिर सारे के सारे ठहरे जो आसिक मिजाज.

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  2. और तो और भईया अब हम तो आसिक मिजाज़ हैं नहीं जो अपनी घर वाली को छोड़ कर के दुसरे पर नज़र डाले तो उ तो नाराज़ तो होगी न हमसे.

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  3. आपका सन्देश मिला था , अच्छा किया कि मुझे दी गयी गाली सचित्र आपने दिखाई , जीवन की सीख देने वाले कुछ जख्म हमेशा हरे रहने चाहिए !

    दिव्या की मानसिक स्थिति ठीक कम है , उन पर दया आती है , एक सेल्फ-क्लेम्ड डोक्टर के रूप में वे एक 'मरीज' दिव्या हैं . यह और दुखद है पर उनको धरती पर न रहने देने में उनके टट्टुओं का ख़ास योगदान है ! उनकी दिमागी स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए इतना काफी होगा कि जिसे ( यानी मुझे ) ४ जनवरी २०११ को गु-गलीज चाटने वाला कुत्ता कहा फिर उसी को २१ जनवरी २०११ हिन्दी ब्लागरी में लाने का पूरा श्रेय भी दिया :
    http://zealzen.blogspot.com/2011/01/blog-post_21.html

    मुझे लगा कि उन्हें ईश ने सजा दे दी शायद पर यह सब उनकी प्रायोजित गांधीगिरी ही रही क्योंकि आज भी जहां-तहां वे मुझे गरियाने/अपमानित के मौकों की टोह में रहती हैं , जिसके लैटेस्ट प्रमाण भी हैं ! इतना नीच मैंने किसी को नहीं देखा ! उनके द्वारा दी गयी गालियों का - और उनके दोहरे चरित्र का - जिक्र करूंगा तो प्रसंग ही लंबा होगा , क्या फायदा !

    इसलिए क्या भद्र/अभद्र है , इसके कहने का उन्हें कोई नैतिक अधिकार भी नहीं , इसलिए उनकी कही किसी बात को लोड मत दीजिये , आप युवा हैं , आने वाला समय आपका है उनका नहीं , चिंतन को आयाम दीजिये . कोई सुन्दर फील्ड चुनिए और सार्थक/उपयोगी लिख डालिए जिससे वर्षों बाद भी देखूं तो कहूँ कि जब एक पथ-भ्रष्टिका अपने टट्टुओं के साथ टिप्पणियों की हजारी संख्या गिन/गिना रही थी तब कोई चुपचाप सार्थक ब्लागिंग कर रहा था ! कुछ ऐसा ही करो , वही 'लॉन्ग लिव' होगा !

    आपकी इस बात से सहमत हूँ कि दुखद है वहाँ गए तथाकथित बड़े ब्लागरों द्वारा मूल बात को जाने बगैर आपको गलत करार देना ! पर ऐसे मौके ही तो बताते हैं कि वे कितने बड़े हैं यह भी देखने लायक है , विषम-लिंगी खिंचाव में धृतराष्ट्र बनना उनकी प्रिय मजबूरी है , क्या करोगे भाई , 'कामहिं जग बौराया' , और उधर अपनी महिला की पहचान को दिव्या ने खूब भंजाया भी है ! इसी तरह चौंकाऊ पोस्टों की कमाही खा रही हैं वह !

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  4. shant batsa shant.......aisi chichaledar se koi firk thore na parta hai......ab aap to anubhavi
    hue.....samudayik dayitwa bhi hai.....apni rachnatmakta par dhyan den.....................

    sadar.

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  5. maine kayi blogger ke post aur tippanio ko padh, to paya ki lekhani aur karani me fark aa raha hai......waise sarthak post ki hamesh ijjat honi chahiye...lekin....jo ho raha hai...wah dukhadayi hai. sabhi blogger kisi ke niji jindagi me n jaye.manmutav ko chod..hame apasi maitritv ki oor badhana chahiye...with healthy and sarthak work

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  6. जो आपका कमेंट डिलीट करे, उसके द्वार न जाने में ही समझदारी है।

    ---------
    काले साए, आत्‍माएं, टोने-टोटके, काला जादू।

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  7. मिथिलेश जी ,
    हमारे कई सुनहले नियमों में नारी ,ब्राह्मण ,गाय को अबध्य माना गया है:)
    इसलिए आप भी इस प्रकरण को भूलकर आगे बढ़ें ,उत्तिष्ठ जागृत ....अपना लक्ष्य प्राप्त करें ...
    अगर आप मेरे सच्चे फालोवर हैं तो जीवन में नारी को क्षमा करना सीखिए ,नारी हेटर भले हो जाईये ..नारी बीटर कदापि नहीं ...
    यह पौरुषेय कर्म नहीं है -पुरुष को शोभा नहीं देता ...
    नारी तो सब कुछ कर सकती है -माया की प्रतिकृति है वह ...नटी ,चंचला सबकुछ .....
    अपनी अत्त्मा को क्लेशित मत करिए -हाँ लोगों को पहचान लीजिये बस !

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  8. प्रिय मिथिलेश जी ,
    अपनी ऊर्जा का सदुपयोग कीजिये ! किसी सार्थक और सुन्दर से विषय पर अगली पोस्ट लिख डालिए ! आपसे बेहतर की उम्मीद रहती है !

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  9. किसी दूसरे के लिये आप हमे क्यों अपनी रचनाओ से वंचित कर रही हैं .अपनी ऊर्जा का सदुपयोग कीजिये ! किसी सार्थक और सुन्दर से विषय पर अगली पोस्ट लिख डालिए !

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  10. मैं दोनों लेखों पर आई टिप्पणियां पढ़कर जानने की कोशिश कर रहा हूं कि एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग पक्षों पर कैसे रियेक्ट करता है.. वैसे यह जल्दबाजी है क्योंकि अभी टिप्पणी पूरी संख्या में आपके इस लेख पर नहीं आई हैं..

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  11. मिथिलेश, इस प्रकरण का अभी ही पता चला है।
    सलाह देने में कोई पैसा नहीं लगता, तो हम भी दे देते हैं:) ऊपर दी गई सलाहें मानकर, आगे बढ़ो - पुराना परिचय भी है तुमसे, और तुमसे उम्मीदें भी हैं।
    वैसे एक और मजे की बात है, शुरूआती दौर में ही जिनसे मेरा परिचय हुआ यथा अमरेन्द्र, विचारशून्य वाले दीप पाण्डेय, मिथिलेश, दीपक मशाल, सोमेश सक्सेना तथा और भी एक दो परिचित सभी अभद्र, अशालीन, गुंडा आदि उपाधियों से नवाजे जा चुके
    हैं। सोच रहा हूँ मेरा नंबर कब आयेगा? :))
    सुखद भविष्य की शुभकामनायें।

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  12. मिथिलेश, इस प्रकरण का अभी ही पता चला है।
    सलाह देने में कोई पैसा नहीं लगता, तो हम भी दे देते हैं:) ऊपर दी गई सलाहें मानकर, आगे बढ़ो - पुराना परिचय भी है तुमसे, और तुमसे उम्मीदें भी हैं।
    वैसे एक और मजे की बात है, शुरूआती दौर में ही जिनसे मेरा परिचय हुआ यथा अमरेन्द्र, विचारशून्य वाले दीप पाण्डेय, मिथिलेश, दीपक मशाल, सोमेश सक्सेना तथा और भी एक दो परिचित सभी अभद्र, अशालीन, गुंडा आदि उपाधियों से नवाजे जा चुके
    हैं। सोच रहा हूँ मेरा नंबर कब आयेगा? :))
    सुखद भविष्य की शुभकामनायें।

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  13. यहाँ आकर नए ज्ञान की प्राप्ति हुयी
    धन्य हुआ

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