Thursday, September 3, 2015

हमारे तुम्हारे बीच

हमारे तुम्हारे बीच
एक नदी बहा करती थी
शीतल, शांत और पावन
जलधारा समेटे,
फिर अचानक
लहरों का आवेग बढ़ने लगा,
पानी छिटक कर
किनारे बहने लगा,
जहाँ नागफनी के साथ
कुछ ऐसे पौधे उग आये हैं
जो हमे कभी पसंद ही नहीं थे,
नागफ़नी को कई बार
उखाड़ फेंकने की कोशिश की
लेकिन सफल नहीं हो पाया
उसका क्षेत्रफ़ल बढ़ता ही जा रहा है,
और अब तो
नदी के पास की समतल जमीं पर
कुछ अवैध निर्माण भी होने लगे हैं।।
@@मिथिलेश

15 comments:

  1. इन लहरों के आवेग इसलिए शुरुआत में ही थाम लेना अच्छा होता है ... वैसे देर तो कभी भी नहीं होती जब तक सांस है ...

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, मेड इन इंडिया - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. दुबे साहब..

    इन निर्माणों से डरो नही
    होने दो जब तक होते हैं
    देखना यही है कि कब तक
    बादल चुप रहते सोते हैं

    फिर एक दिन यूं गर्जन होगा
    भावों का शिव नर्तन होगा
    बादल सारे फट जाएँगे
    निर्माण सभी हट जाएँगे..

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  5. मेरे ब्लॉग पर आपका हर्दिक स्वागत है.
    www.sonitbopche.blogspot.in

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  6. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (05-09-2015) को "राधाकृष्णन-कृष्ण का, है अद्भुत संयोग" (चर्चा अंक-2089) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी तथा शिक्षक-दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. कबीर ने सच ही कहा है-
    प्रेम गली अति साँकरी ता में दो न समाय. कबिरा प्याला प्रेम का, अंतर लिया लगाय ।

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  8. शानदार रचना की प्रस्‍तुति।

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  9. क्या बात है !.....बेहद खूबसूरत रचना....
    आप को दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@आओ देखें मुहब्बत का सपना(एक प्यार भरा नगमा)

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  10. सुन्दर रचना ......
    मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा है |

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/
    http://kahaniyadilse.blogspot.in/

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  11. आज बहुत लम्बे समय के बाद एक बार फिर से मन बनाया है ब्लॉग की इस दुनिया में वापसी का. आपका स्नेह मिलता रहा है. आगे भी मिलता रहेगा यही कामना है। आपकी बहुत सी रचनाएँ पढ़ना बाकी हैं। जल्द ही पढ़ने का प्रयास करूँगा.
    बहुत आभार
    अखिलेश 'कृष्णवंशी '

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  12. आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है।

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