Thursday, September 3, 2015

हमारे तुम्हारे बीच

हमारे तुम्हारे बीच
एक नदी बहा करती थी
शीतल, शांत और पावन
जलधारा समेटे,
फिर अचानक
लहरों का आवेग बढ़ने लगा,
पानी छिटक कर
किनारे बहने लगा,
जहाँ नागफनी के साथ
कुछ ऐसे पौधे उग आये हैं
जो हमे कभी पसंद ही नहीं थे,
नागफ़नी को कई बार
उखाड़ फेंकने की कोशिश की
लेकिन सफल नहीं हो पाया
उसका क्षेत्रफ़ल बढ़ता ही जा रहा है,
और अब तो
नदी के पास की समतल जमीं पर
कुछ अवैध निर्माण भी होने लगे हैं।।
@@मिथिलेश